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सगी माँ की चुदाई Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ

सगी माँ की चुदाई Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ

सगी माँ की चुदाई Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ

सगी माँ की चुदाई Hindi Sex Stories | नई हिन्दी सेक्स कहानियाँ : दोस्तों आज मै अपनी सगी माँ की चुदाई की कहानी लेकर  आपके पास हाजिर हो रहा हु , यह एक मेरे जीवन की सच्ची कहानी है आप को बहुत पसंद आएगी | मेंरा नाम संदीप है और मैं एक शादीशुदा लड़का हु मेरी शादी को एक साल पूरा हो चुका है। मेरी बीवी एक समजदार लड़की है। उसका नाम सपना है । सुहाग रात से ले कर आज तक हमने रोज दो या तिन बार चुदाई की है अब हम एक दूसरे के चुदाई के आदि हो चुके है । अब हम एक दूसरे के बगैर रह नहीं सकते।

मेरा शुरू से ही एक प्रॉब्लम रहा है की मेरा लण्ड आम लड़को से बहुत ही बड़ा है। सब दोस्त मुझे चिड़ाते थे की तेरी बीवी का क्या होगा  ईतना बड़ा लण्ड कैसे सह पायेगी बेचारी पर मैं खुशनसीब हु की मुझे इतना बड़ा घोड़े जैसा लण्ड अपने चूत में समा लेने वाली अपनी बीवी मिल गई स्वाति दिनों में उसे बहुत ही तक्लीब सहनी पड़ी लेकिन धीरे धीरे 15 दिनों में हम लोग सामान्य सेक्स करने में कामयाब हो गए अब बात निकल ही गई है तो मै अपने लण्ड का साइज़ भी आप को बता दू दोस्तों मेरे लण्ड का साइज़ है 9" लंबा और ३"जाडा बिलकुल घोड़े जैसा सारे दोस्त मुझे घोड़ा ही बोलते थे ये बात सपना भी जान चुकी थी अब वो भी कभी कभी मजाक में अकेला देख घोडा बोल देती थी । हर रोज सपना लण्ड को बहुत सारा तेल लगाकर धीरे धीरे अंदर समाती गई।

अबहम एकदम सामान्य तरीके से सेक्स लाइफ एन्जॉय करते है । एक दिन मेरे सुसुरजी सपना को लेने मेरे घर आये और सपना प्रेग्नेंट होने के कारण बेड रेस्ट के लिए उनके घर ले जाने की जिद करने लगे आखीर सपना को 7 वा महीना चल रहा था इसलिए हम जिद ना कर सके मै बिलकुल अकेला हो गया मै अबतक शादी के बाद चोदने का आदी हो चुका था इसके पहले मैंने सपना के अलावा किसी और को छुवा तक नहीं था। धिरे धीरे दिन पे दिन बढते गए 15 दिन हो गए मुझे सपना की बहुत याद सताने लगी मगर क्या करू सपना तो प्रेग्नेंट है अगर ससुराल जाता और कुछ कम जादा हो जाता तो क्या करता इस ख़याल से ही मै डर जाता और ससुराल जाने का ख़याल छोड़ देता सपना के जाने के बाद घर में मै और मेरी माँ दोनों ही रहा गए थे बहुत बड़ा घर है हमारा इसलिए सपना की कमी महसूस होने लगी थी मेरी माँ एक धार्मिक किस्म की खानदानी औरत है पिताजी के गुजरने के बाद वो खुद को अकेले महसूस करती थी उनकी उम्र 45 साल की थी वो गोरी सुन्दर और आकर्षक थी और साथ में सुस्वभावि थी हमारे घर का खुद का गेराज और वर्कशॉप है जिसे मई खुद संभालता हु इसलिए दिन का टाइम पास हो जाता था। पर रात काटना मुश्किल हो जाता ।

बुरे गंधे ख़याल आ जाते एक दो लड़कियो के पीछे चक्कर लगाने शुरू कर दिए पर कुछ हात नहीं लगा  हर रोज माँ के हात का खाना खा के अपने कमरे में जा क्र अपना लण्ड हात लेकर मुठ मार लेता इसके अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं था इसी बिच मेरा एक दोस्त दो दी के लिए मेरे घर आ गया जो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ता था मेरी ही उम्र का बिलकुल हम दोनों भाई भाई लगते थे मेरी हाइट 6 फुट और उसकी भी वेट भी अंदाजे 80 किलो बिलकुल एक सामान दीखते थे हम दोनों उसके आने के बाद माँ ने उसके देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी
बिच में एक घटना घडी हमारे घर में जिसे मई कभी नहीं भूल पाया मेरा दोस्त जिसका नाम विनोद है वो नाहाने गया था पर साथ में टॉवेल ले जाना भूल गया था उसने मुझे आवाज लगाईं पर उस वक्त मई फोन पे बात कर रहा था तो मैंने माँ को इशारा कर के टॉवेल ले जाने को कहा और मै फोन पर बाते करता रहा थोड़ी देर बाद माँ वापस आई तो मैं माँ को देखता ही रह गया माँ का चेहरापुरा लाल हो गया था और वो अपने रूम ने चली गई  विनोद नाहा कर वापस आ गया और मुज़पर चिल्लाने लगा अबे गधे मैंने टॉवेल लेकर तुजे बुलाया था ना तो तू क्यों नहीं आया माँ को क्यों भेजा ?

मैं यार फोन में बिज़ी था क्या करू अबे गधे माँ ने मुझे पूरा देख लिया है अब मैं क्या करू अब मै तेरे घर नहीं रुख सकता मै बोला जाने देना यार जो हो गया सो हो गया तू तो दोस्त है मेरा उसे उस दिन रोख लिया और दूसरे दिन वो भी चला गया मैं फिर बोर होने लगा खाना खाने के बाद मै अपने रूम में सो रहा था मुझे बाथरूम जाना पडा मै कभी बिच में पेशाब को नहीं उठता पर आज मैं उठ गया
आते समय माँ के रूम में ज़ाककर देखा तो देखता ही रह गया माँ दीवार को सैट के खड़ी थी और विनोद के नाम से अपने शरीर पर हात फेर रही थी मै जान गया की माँ के अंदर आग लगी हुई है बस अब इसी बात का फायदा उठाने की मैंने ठान ली मेरे अंदर पहले से ही आग मौजूत थी पर वो माँ के खातिर नहीं थी मैंने माँ को कभी इस नजर से नहीं देखा था और माँ ने मुझे देखते ही देखते मुज़मे आग भड़कती गई
मैंने ट्राय करने की सोची की इस खेल में मैं कहा पहुच पाता हूँ।

चुपचाप रूम में आ गया मोबाईल का सिम बदल डाला और पर्सनल नंबर का सिम इंसर्ट किया जो माँ के पास सेव नहीं था एक मेसेज टाइप किया  मैं "हेलो कैसी को माजी आप" माँ का बहुत देर तक जबाब नहीं आया बहुत देर बाद जबाब आया "कोण हो आप और मेरा नंबर आप के पास कैसा आया.. ?
मै "मैं विनोद हु माँ जी मैंने जाते समय ये नंबर सचिन से ले लिया था क्या है न की नहाते वक्त आपने मेरे लिए टॉवेल लाकर दिया उसका धन्यवाद पर आप ने मुझे पूरी तरह से नंगा देख लिया उसके लिए माफ़ी चाहता हूँ"
माँ "कोई बात नहीं बेटा विनोद मैं अब भूल चुकी हु"
मैं "पर मै इस बात को नहीं भूल सकता क्यों की आप के जाने के बाद मैंने अपना पानी आप के नाम से निकाला था"
माँ "तू तो बड़ा चालु निकला विनोद"
मै- नहीं माँ जी आप हो ही इतनी खुपसुरत बिलकुल गुड़िया सी दिखती हो
माँ -- जाने दो न अब विनोद तू मेरे बेटे सामान हो
मैं -- हा वो तो है पर बेटा तो नहीं नहीं हु ना
तुम्हारे लिए मैं एक मर्द समान और तुम एक जवान औरत
माँ -- नहीं विनोद ऐसा नहीं कहेते सचिन को पता चल गया तो वो तुम्हारे बारे में क्या सोचेगा
मैं --अरे उसे कैसा पता चलेगा वो तो एक बार अपनी रूम में चला गया बाद में सबेरे के सिवा उठता भी नहीं है
माँ--तो क्या मतलाब है तुम्हारा
मै -- तुम्हारा घर बहुत बड़ा है मै पूरा देख चुका हु ऊपर की मंजिल की आखरी खोली जिसमे कोई आता जाता नहीं है और बाहर से आने का रास्ता भी बहार से ही है क्यों ना हम उस खोली में सचिन के सोने के बाद एक रात के लिए हमबिस्तर हो जाए ?
माँ- क्या मतलब है तेरा तू होश में तो है ना विनोद ?
मै -- मै तो होश में ही हु मई कल रात 11 बजे ऊपर मंजिल पर पहुच जाऊंगा बस तुम वो रूम का दरवाजा खोल के रख द