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पेशाब में नहलाया – मकान-मालिक मेरे ऊपर पेशाब कर रहा था मेरे ऊपर अपना वीर्य टपका रहे थे

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पेशाब में नहलाया – मकान-मालिक मेरे ऊपर पेशाब कर रहा था मेरे ऊपर अपना वीर्य टपका रहे थे : मेरा नाम नेहा है, उम्र 26 साल है। यह कहानी मेरी आपबीती है। मैं एक मॉडल हूँ, मैं दिल्ली से मुंबई चली गई यह सोच कर कि मुंबई में ज्यादा अवसर हैं। जाने से पहले मैंने सोचा था कि मैं अपने आप को वहाँ सेट कर लूँगी लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मुंबई में सेट होना कितना मुश्किल है। आज की भागदौड़ की दुनिया में हर आदमी कमीना है। लेकिन मुझे भी अब इस दुनिया में अपना काम निकालना आ गया है।
मैं अगस्त के महीने में मुंबई पहुची। कुछ दिन तो एक सहेली के घर पर रुक गई। एक दो जगह से कुछ मॉडलिंग का काम भी मिल गया था। एक बात मैं बताना चाहूंगी, मेरे स्तन थोड़े बड़े, मोटे और गोल हैं। मैं कुछ भी पहनती हूँ तो वो मेरी छाती पर कस जाता है। इसी वजह से सड़क पर चलते हुए या कहीं मॉडलिंग करते हुए लोग मुझे घूरते रहते हैं। कभी कभी रात को सोते समय सोचती हूँ कि अगर उन सब मर्दों को मैं उनकी मर्ज़ी का करने दूँ तो वो मेरा क्या हश्र करेंगे ! सबकी आँखों से ही हवस टपकती है !
मैं एक अपार्टमेन्ट किराए पर लेने के लिए गई। प्रोपर्टी एजेंट एक 30-32 साल का आदमी था। उसने फ्लैट दिखाया और मुझे पसंद भी आ गया। वो भी मुझे बार बार घूर रहा था। फ्लैट का किराया उसने 12000 रुपए महीना बताया। मेरे लिए यह ज्यादा था। मैं 8000 ही दे सकती थी। मैंने यह बात उसको बताई, तो उसने बोला- नेहा जी, किराया इतना कम करना मुश्किल है, 12 का 11 हो सकता है, लेकिन 8 हज़ार होना असंभव है।
मैंने उसको थोड़ा आग्रह किया तो उसने बोला कि वो मकान-मालिक से बात करके मुझे बताएगा।
उसी दिन शाम को 6:30 पर उसका फ़ोन आया। उसने बोला कि उसकी बात हुई है और मकानमालिक मुझसे मिलना चाहता है। मकान देने से पहले वो देखना चाहता है कि किरायेदार कैसी है।
उसने कहा- आप कल मेरे ऑफिस में आ जाईये, मकान-मालिक भी यहीं आएंगे, यहीं किराए की भी बात हो जाएगी। उम्मीद है कि 10 हज़ार में बात बन जाए।
मैं अगले दिन एजेंट के ऑफिस गई। मैंने पतली साड़ी पहनी थी। एजेंट के ऑफिस में मकान-मालिक पहले से ही पहुँचा हुआ था। वो एक 40 साल का थोड़ा मोटा मर्द था। उसकी मूछें भी थी। मुझे देखते ही वो मुस्कुराया और उसकी नज़र भी मेरी छाती पर ही पड़ी। हमेशा की तरह मेरा ब्लाऊज़ कसा हुआ था और पतली साड़ी के आर-पार मेरी वक्षरेखा दिख रही थी
मैं बैठ गई और हमारी बात शुरू हुई। बातों बातों में उन दोनों को पता चल गया कि मैं मुंबई में अकेली हूँ और मॉडल हूँ।
दोनों आपस में एक दूसरे को देख के मुस्कुरा रहे थे। मकान-मालिक ने कहा- अकेले तो हम सभी हैं। आपको मुंबई में घबराने की कोई बात नहीं है। कभी कोई ज़रुरत पड़े तो मुझे बताइएगा। आप बहुत खूबसूरत हैं और अच्छे घर से हैं इसलिए मैं आपको यह घर 10000 में दे रहा हूँ। नहीं तो इस एरिया का रेट 12 के ऊपर ही है।
मैं समझ गई कि उसके दिमाग पर भी हवस सवार है, नहीं तो वो मुझ पर एहसान क्यों करता ! मैंने भी इस मौके का फायदा उठाना चाहा, मैंने बोला- मुझे तो यह घर 8000 में चाहिए। शर्मा जी, अब तो मैं आपके फ्लैट में रहूंगी, हमारी बात होती ही रहेगी। यह तो लम्बी जान-पहचान है, आप मुझे यह घर 8000 में दे दीजिये।
उसने बोला- अरे नहीं, 8 तो बहुत कम हैं। इसमें तो मेरा कोई फायदा नहीं, उल्टा नुक्सान ही है।
इतने में एजेंट बोल पड़ा- अरे शर्मा जी, नेहा मैडम मॉडल हैं, इनसे जान पहचान बढ़ेगी तो फायदा ही फायदा है, नुकसान कैसा?
मकान-मालिक जोर से हस पड़ा और फिर मेरे वक्ष को घूरने लगा। मुझे अब वहाँ अजीब लग रहा था, दोनों मर्दों की आँखों से हवस टपक रही थी। एजेंट का ऑफिस बिलकुल बंद और वातानुकूलित था और उसके अन्दर मैं इन दोनों के साथ फंस सी गई थी।
मकान-मालिक ने अपना एक हाथ मेरे घुटनों के पास रख के हल्का सा दबाया और बोला- अब आप ही बताइए नेहा जी, मेरा क्या फायदा होगा?
इस से पहले कि मैं कुछ बोलती, एजेंट ने उठ कर चिटकनी लगा दी और मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। फिर मुझे बोला- नेहा जी, यह घर आपको 8 क्या, 7000 में मिल सकता है अगर आप चाहें तो ….
मैंने बोला- क्या मतलब?
एजेंट ने मेरे पीछे खड़े खड़े अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पर रख दिए और बोला- बस हमारे साथ ठोस सहयोग करिए..!
इधर मकान मालिक ने भी अपने हाथ मेरे घुटनों से सरका के ऊपर मेरी जाँघों पर रख दिए थे
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। मेरे मन में इन दोनों के लिए बहुत घृणा आई। फिर अचानक लगा कि थोड़ी देर की ही बात है, कहाँ 12000 का फ्लैट, कहाँ 7000/- मैं इसी सोच में थी, अभी कुछ बोल नहीं पाई थी।
एजेंट ने धीरे से मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिया दिया- ओह सॉरी, नेहा जी !
और पीछे खड़ा होकर मेरे वक्ष का नज़ारा लेने लगा। मकान-मालिक मेरी जाँघों को हल्के-हल्के दबा रहा था। दो मर्द मुझे एक साथ छू रहे थे, मैं तो अन्दर से काँप रही थी।
अचानक ही एजेंट ने मेरे दोनों बाहें पकड़ी और मकान-मालिक ने मेरे दोनों पैर और मुझे कुर्सी से उठा लिया। मैं हवा में थी और इन दोनों ने मुझे उठाया हुआ था। फिर उन्होंने मुझे सोफे पर पटक दिया। सोफा बहुत बड़ा था, काले रंग का चमड़े का सोफा।
मकान-मालिक फिर बोला- नेहा जी, बस सहयोग करो, मजे भी आपके, घर भी आपका।
उसने मेरे दोनों स्तन पकड़ लिए और उनको मसलने लगा।
मैं चीख उठी ..।
उसका हाथ बहुत तगड़ा था।
एजेंट ने मेरी साड़ी उतारनी शुरू की और दो ही पल में मेरी साड़ी ज़मीन पर पड़ी थी। फिर दोनों ने मुझे उठ कर खड़ी होने के लिए कहा। मैं उठ गई। वो दोनों सोफे पर बैठ गए, मुझे बोला कि मैं अपना ब्लाऊज़ और पेटिकोट उतारूं
मुझे बहुत शर्म आ रही थी।
दोनों ने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा हुआ था और उसको मसल रहे थे। मुझे समझ आ गया कि अब यहाँ से भागने का कोई तरीका नहीं है। मैं उनकी बात मानती जाऊं तो ही मेरा कम से कम नुक्सान है।
मैंने अपने ब्लाऊज़ के हूक खोले और उसको उतार के नीचे फेंक दिया। दोनों की आँखे फटी रह गई। मेरे स्तन बहुत ही गोरे और मोटे हैं और मैं जानती हूँ कि ये किसी को भी पागल बना सकते हैं। फिर मैंने अपने पेटिकोट का नाड़ा खोला और वो नीचे ज़मीन पर गिर गया। मैं उन दोनों हब्शी मर्दों के सामने अब सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी। मेरा गोरा जिस्म देख कर दोनों पागल हो चुके थे। दोनों ने पैन्ट की जिप खोल के अपना लंड बाहर निकाल लिया था और उससे सहला रहे थे।
फिर मकान-मालिक बोला- नेहा जी, अब और नहीं रुका जा रहा, ज़रा जन्नत के नज़ारे करवाओ, ये सब भी उतार फेंको।
मैंने अपनी ब्रा खोल दी। ब्रा के खुलते ही मेरे स्तन उछल कर सामने आ गए। बड़े-बड़े गोरे सुडौल स्तन देख कर दोनों के मुँह में पानी आ गया।