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महिलाओं द्वारा स्तनपान कराने से बच्चे को होने वाले लाभ

 

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महिलाओं द्वारा स्तनपान कराने से बच्चे को होने वाले लाभ :

  • शिशु मां के दूध को अन्य दूध पीने की तुलना में आसानी से पचा लेता है।
  • बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए मां के दूध में सभी गुण उपलब्ध होते है।
  • स्तनपान कराने से बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी (जैसे कोई रोग या पेट का खराब होना आदि) नहीं होती है। इसकी तुलना में बोतल या डिब्बे का दूध बच्चे को पिलाने से बच्चे रोग से पीड़ित हो सकते है तथा उन्हें दस्त भी लग सकते है।
  • मां अपने बच्चे को दूध कभी भी और किसी भी समय पिला सकती है जबकि बोतल का दूध देने से पहले दूध को पकाना, बोतल को साफ करना आदि कार्यो को करना पड़ता है।
  • स्तनपान कराने से जो हार्मोन्स उत्पन्न होते है उससे मां की बच्चेदानी सिकुड़ जाती है तथा वह जल्दी ही अपने पूर्व रूप में आ जाती है।
  • जब तक महिलाएं स्तनपान कराती है तो वह जल्द गर्भधारण नहीं करती है।

बच्चे को स्तनपान कराते समय महिलाओं द्वारा बरती जाने वाली प्रमुख सावधानियां

  • महिलाओं को हमेशा बच्चे को बैठकर स्तनपान कराना चाहिए। जिससे बच्चे का सिर ऊपर तथा पैर नीचे की ओर होना चाहिए। मां को अपने बच्चे को स्तनपान कराते समय अच्छी तरह पकड़कर रखना चाहिए।
  • स्तनपान कराते समय बच्चे को स्तन से इतनी दूरी पर रखें कि बच्चे को दूध पीने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो तथा न ही बच्चे को स्तन के इतना समीप रखें कि बच्चे की नाक स्तन से दब जाए जिसके कारण सांस लेने में बच्चे को तकलीफ न हो।
  • महिलाओं के स्तनों का निप्पल मुलायम होना चाहिए जिससे बच्चे को दूध पीने में अधिक ताकत न लगानी पड़े। स्तनों के निप्पल को मुलायम करने के लिए निप्पल को गुनगुने पानी से धोना चाहिए या निप्पलों में वैसलीन लगाना चाहिए। बच्चे को दूध पिलाने से पहले महिलाओं को स्तनों में लगा हुआ वैसलीन अच्छी तरह से पानी से धो देना चाहिए।
  • यदि किसी महिला के स्तनों का निप्पल छोटा है तो उसे मालिश करनी चाहिए तथा उसे अंगुली और अंगूठे से बाहर निकालने की कोशिश करनी चाहिए तकि बच्चा आसानी से दूध पी सके।
  • महिलाओं को शांतिपूर्वक मस्तिष्क में कोई विचार लाए बिना बच्चे को पूरा दूध पिलाना चाहिए।
  • महिलाओं को तीन बार स्तनपान अपने एक ही स्तन से कराना चाहिए क्योंकि पहली बार मां का दूध बच्चा पूरी तरह से नहीं पी पाता है। स्तनपान कराते समय मां के मस्तिष्क में संवेदना उत्पन्न होती है। इस कारण स्तनों में दूध आने और निकलने में समय लगता है।
  • स्तनपान करते समय बच्चा दूध के साथ हवा भी अपने पेट में ले जाता है। बच्चे के पेट के अंदर हवा जाने से पेट की डकार (पेट की गैस) बन जाती है। इसलिए बच्चे के पेट की डकार (पेट की गैस) निकालने के लिए उसे छाती से लगाकर उसकी पीठ थपथपानी चाहिए। इससे पेट की हवा निकल जाएगी। इसके बाद बच्चे को पुनः दूध पिलाना चाहिए।
  • महिलाओं को स्तनपान कराने के बाद स्तनों के निप्पल तथा बच्चे के मुंह को गीले कपड़े से साफ करना चाहिए।
  • बच्चे को सोते समय उसकी करवटे बदलता रहना चाहिए। ताकि बच्चे को दूध जल्दी ही हजम हो जाए। करवटे न देने से बच्चा एक ही तरफ लेटा रहता है जिस कारण कभी-कभी बच्चे का सिर चपटा हो जाता है।
  • स्तनपान कराने के बाद बच्चे को हिचकियां आना एक साधारण सी बात है। इसलिए इसको लेकर परेशान नहीं होना चाहिए।
  • निप्पल के पीछे काले भूरे रंग का एक घेरा होता है जिसको एरोला कहते है बच्चा स्तनपान करते समय ऐरोला को अपने मसूड़े और तालु के बीच दबाता है और जुबान से दूध पीता है इस कारण बच्चा आसानी से दूध पी लेता है।
  • यदि बच्चा एरोला तक नहीं पहुंच पाता है तो वह केवल निप्पल को ही मुंह से चूसता रहता है जिससे मां को अधिक कष्ट होता है। जब मां को कष्ट हो तो हाथ की अंगुली को बच्चे के मुंह के किनारे से डाकलर बच्चे को सही स्थान तक पहुंचाए या अपनी ठोड़ी को स्तन और बच्चे के मुंह के बीच में डालकर बच्चे को दूर करना चाहिए फिर उसे सही तरीके से स्तनपान करायें।
  • स्तनपान के समय जब बच्चा ऐरोला को दबाता है तो मां के मस्तिष्क में संवेदना होती है और हार्मोन्स निकलते है जिसके कारण स्तनों में अधिक दूध उतर आता है।
  • स्तनपान करते समय बच्चों को निप्पल से दूध पीने में काफी शक्ति लगानी पड़ती है जबकि बोतल का दूध पीने वाले बच्चें को आसानी से दूध मिल जाता है। इस कारण बोतल का दूध पीने वाले बच्चों की वजन अधिक होता है जबकि मां का दूध पीने बच्चों का जबड़ा अधिक मजबूत होता है।
  • विविध

    • बच्चे के जन्म के बाद स्तनों में दूध आने से पहले एक चिकना, गाढ़ा पीले रंग का पदार्थ निकलता है जिसे खीस (कोलोस्ट्रम) कहते है। पहले दो दिन तक इसकी मात्रा लगभग 40 मिलीलीटर होती है फिर बाद में यह दूध के साथ मिलकर एक सप्ताह तक आता रहता है। यह बच्चे के लिए बहुत ही उपयोगी तत्व होता है। कुछ महिलाएं इसको उपयोगी न समझकर इसे हाथों से दबाकर बाहर निकालती है। परन्तु यह गलत विचार है।
    • स्तनों में निकलने वाले खीस (कोलोस्ट्रम) में प्रोटीन अधिक मात्रा में होती है।
    • स्तनपान करने वाले बच्चे रोग से पीड़ित नहीं होते है क्योंकि मां के दूध में रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है।
    • स्तनपान करने वाले बच्चे को कब्ज नहीं होता है तथा बच्चे का पेट भी ठीक रहता है।
    • प्रारम्भ में म