Get Indian Girls For Sex
   

kamapichachi-hot-scenes-6
जब मैं छोटा था तो सेक्स के बारे में उतना कुछ पता नहीं था, जानने की इच्छा तो होती पर पापा मम्मी से डर लगता था और मेरी उम्र भी उतनी नहीं थी कि मैं सेक्स के बारे में किसी से बात करता, पर जब भी टीवी पर कुछ उत्तेजक दृश्य आते तो शरीर में अपने आप बिजली सी दौड़ जाती, लिंग कुछ कड़ा हो जाता और एक अदभुत आनन्द की प्राप्ति होती थी।

मैं अपने मम्मी पापा का इकलौता लड़का हूँ इसी वजह से मैं 14 साल तक अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता था। मैं अपनी मम्मी पापा के बीच में सोता था पर मैं जब सुबह उठता तो मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आता कि मेरे मम्मी पापा अगल बगल सो रहे हैं और मैं किनारे की तरफ सो रहा होता था।
मैं उठकर मम्मी से पूछता भी तो वे मुस्कुरा कर कहती- मैं तो सारी रात तेरे बगल में सो रही थी, तेरे पापा तो अभी सुबह ही आकर इधर लेटे हैं।

मैं क्या बोलता… चुप हो जाया करता था।
पर एक रात कुछ ऐसा हुआ जिसे मैं आज तक नहीं भुला पाया और उस एक घटना ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी।
आज मैं 28 साल का हूँ पर मुझे वो घटना आज भी ऐसे याद है जैसे कल की बात हो।

टाइम तो मुझे नहीं पता पर करीब रात के 1:00 बजे होंगे, हमारे कमरे का नाईट बल्ब जल रहा था जिससे कमरे में काफी रोशनी थी जिससे सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था।
पापा ने मुझे उठाया और कोने में लिटा दिया जिससे मेरी नींद खुल गई पर मैं चुपचाप लेटा रहा क्योंकि मैं जानना चाहता था कि ‘मम्मी पापा इतनी रात में करते क्या हैं।’
मैं डर तो रहा था पर हिम्मत करके मैंने अपनी पलकें इस तरह से खोली कि मुझे पापा मम्मी साफ़ तो नहीं पर धुंधले धुंधले दिख रहे थे पर उन्हें मेरी आँखें खुली नहीं दिख रही थी और न ही यह पता था कि मैं जाग रहा हूँ।

पापा मुझे बगल में लिटाकर खुद मम्मी के बगल में आकर लेट गए और धीरे से मम्मी को हिलाया और बोले- ऐ जी, सो रही हो क्या?
मम्मी कुछ नहीं बोली।
पापा फिर बोले- ऐ जी उठो न!
वो इतने धीरे बोल रहे थे कि अगर इतना सन्नाटा न होता तो मुझे कुछ भी सुनाई न पड़ता।

मम्मी की नींद हल्की सी टूटी, वो कह रही थी- सोने दो ना ! आज मैं बहुत थकी हुई हूँ, परेशान मत करो, अंकित भी आज देर में सोया है कहीं जाग गया तो गड़बड़ हो जाएगी।
पापा बोले- वह अभी छोटा है, तुम तो ऐसे बोल रही हो कि उसके सोते हुए हम पहली बार कर रहे हों।

मैं चुपचाप उनकी बातें सुन रहा था, मेरे हाथ पैर सुन्न हो गए थे।

पापा बोले- यार तुम रोज नखरे करती हो, अब जाग गई हो तो कर लेने दो, अब तो मुझे बिना करे नींद नहीं आएगी।
मम्मी गुस्से से बोली- तुम्हें तो रोज़ बिना कुछ करे नींद नहीं आती! किसी की तकलीफ भी नहीं देखते हो, तुम्हें तो रोज अपनी डोज़ चाहिए।
पापा बोले- रोज करने देती हो तुम? कभी कहती हो मेरा व्रत है, कभी पूजा है, कभी कुछ !
मम्मी बोली- अच्छा अब बस भी करो।

मम्मी ने पापा से कहा- चादर तो ओढ़ लो!
मम्मी के कहने पर पापा ने पास ही बिस्तर पर पड़ी मम्मी की मैक्सी का सफ़ेद दुपट्टा ओढ़ लिया और बोले- अब आज इससे ही काम चला लो अब चादर कौन ले कर आये!
पर दुपट्टा इतना झीना सा था कि नाईट बल्ब की रोशनी में सब कुछ दिख रहा था।
पापा ने बनियान जाँघिया पहनी थी जबकि मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज में थी। मैं भी पहली बार अपने मम्मी पापा को लाइव सेक्स करते देख रहा था।

मम्मी फिर बोली- अच्छा लाइट तो बुझा दो!
इस बार पापा थोड़ा गुस्से से बोले- अरे यार, अब करने भी दो… बहुत नाटक करती हो तुम!
और इतना कह कर पापा ने मम्मी की ओर करवट ली और उनके शरीर के ऊपर चढ़ने लगे। पापा के पैर मम्मी के चूतड़ों पर थे, पापा मम्मी के होंठों को ऐसे चूमने लगे जैसे मम्मी के कोमल होंठ मधुर फलों के रस से भरे हों।

पापा मम्मी के होंठों को जोर जोर से चूस रहे थे और बीच बीच में दाँतों से काट भी रहे थे जिससे मम्मी के होंठ लाल हो गए थे और पापा के मुँह की राल मम्मी के होंठों पर लगने के कारण वह ऐसे लग रहे थे जैसे गुलाब की पंखुड़ियों पर ओस की बूँद।

पापा ने मम्मी के शरीर को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लिया, मम्मी की तो चीख निकल पड़ी, मम्मी गुस्से से बोली- अरे छोड़ो भी अंकित के पापा, पूरा शरीर दब रहा है, जो करना है जल्दी करो, मुझे नींद आ रही है।
उस पर पापा बोले- अरे यार! आज न तुम कुछ कर रही हो, न करने दे रही हो, थोड़ा मज़ा तो दो बेमन से मत करो। यही जल्दी जल्दी के चक्कर में मज़ा नहीं आता।

पापा के इतना कहने पर मम्मी जो इतनी देर से न नुकर कर रही थी, वे भी पापा का पूरा साथ देने लगी, उनके हाथ पापा की पीठ पर चलने लगे, मम्मी ने अपनी जीभ पापा की होंठों पर घुमाई और फिर जीभ उनके मुँह में जल्दी से डाल दी जैसे मम्मी की जीभ पापा के मुँह का मुआइना कर रही हो।
मम्मी की यह हरकत पापा को स्तब्ध कर गई और वो मुस्कुरा दिए, जवाब में मम्मी भी मुस्कुराई, जैसे उनकी मुस्कराहट सम्भोग करने हेतु प्रथम स्वीकृति हो।

पापा ने मम्मी के शरीर को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लिया, मम्मी की तो चीख निकल पड़ी, मम्मी गुस्से से बोली- अरे छोड़ो भी अंकित के पापा, पूरा शरीर दब रहा है, जो करना है जल्दी करो, मुझे नींद आ रही है।
उस पर पापा बोले- अरे यार! आज न तुम कुछ कर रही हो, न करने दे रही हो, थोड़ा मज़ा तो दो बेमन से मत करो। यही जल्दी जल्दी के चक्कर में मज़ा नहीं आता।

पापा के इतना कहने पर मम्मी जो इतनी देर से न नुकर कर रही थी, वे भी पापा का पूरा साथ देने लगी, उनके हाथ पापा की पीठ पर चलने लगे, मम्मी ने अपनी जीभ पापा की होंठों पर घुमाई और फिर जीभ उनके मुँह में जल्दी से डाल दी जैसे मम्मी की जीभ पापा के मुँह का मुआइना कर रही हो।
मम्मी की यह हरकत पापा को स्तब्ध कर गई और वो मुस्कुरा दिए, जवाब में मम्मी भी मुस्कुराई, जैसे उनकी मुस्कराहट सम्भोग करने हेतु प्रथम स्वीकृति हो।

पापा मम्मी फिर एक चूमने लगे वो एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे किसी उत्तेजक बॉलीवुड फ़िल्म के हीरो हीरोइन सेक्स करते वक़्त चूमते है, बीच बीच में उनके मुँह से सिसकारियाँ भी निकल जाती थी।
पापा, मम्मी के कान और गर्दन पर चूम रहे थे और बीच बीच में दाँतों से काट भी रहे थे। उधर मम्मी ने भी पापा के चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी थी और उनके हाथ पापा की पीठ और बालों पर लगातार चल रहे थे जिससे उन दोनों का शरीर धीरे धीरे गर्म होने लगा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था।

उसी बीच पापा को पता नहीं क्या सूझा, उन्होंने मम्मी के कान में धीरे से फुसफुसाया- मेरा चूहा तो तैयार है तुम्हारी सुरंग में घुसने के लिए ! क्या तुम्हारी सुरंग गीली हुई पवित्र जल से !
मम्मी बोली- अरे, अभी कहाँ इतनी जल्दी गीली हो जाऊँगी।
मम्मी मुस्कराई और धीरे से पापा के कान में बोली- ऐ जी, थोड़ा ढंग से प्यार करो, नहीं तो तुम्हारा पप्पू घुस नहीं पाएगा मेरी सुरंग में।
पापा हँसे और बोले- आज बहुत दिन बाद मौका मिला है मेरे पप्पू को, आज यह चीर डालेगा तुम्हारी मुनिया को !
इतना कहकर दोनों हँसने लगे।

पापा ने मम्मी को एक गहरा चुम्मा लिया उनकी आँखों में बहुत प्यार नज़र आ रहा था, पापा के हाथ अब मम्मी के सीने पर आ गए मैंने देखा की मम्मी की चूचियाँ कसे ब्लाउज और पापा के सीने के दबाव से दब रही हैं।
पापा ने अब उन पर भी शिकंजा कास लिया और मम्मी के ब्लाउज के ऊपर से ही उन पर अपने हाथ फेर रहे थे और मस्ती में उन्हें मसल रहे थे जिससे मम्मी के ऊपर वासना का नशा चढ़ रहा था।
अब पापा मम्मी के सीने से होते हुए उनकी कमर और नाभि पर भी खूब चुम्बन कर रहे थे।

वासना के कारण उन दोनों का चेहरा कुछ लाल पड़ गया था, वो दोनों अब पूरी तरह गर्म हो चुके थे और सम्भोग करने के लिए पूरी तरह तैयार थे पर पापा का मन अभी भरा नहीं था वो अब मम्मी की कमर से होते होते हुए उनकी जांघों की ओर बढ़ रहे थे पर मम्मी का पेटीकोट उनके काम में बाधा डाल रहा था।

पापा ने इस समस्या का हल तुरंत खोज निकाला वो उठे और अपना जाँघिया बनियान उतार कर फेंक दिया।
उन्हें देख कर मम्मी बोली- क्या अब पूरा मादरजात हो कर करोगे?
मम्मी फिर भुनभुनाई- इतना बड़ा लड़का सो रहा है बगल में… और तुम्हें तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता?

पापा उनकी बात अनसुनी करते हुये मम्मी के ऊपर आ गए और उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मम्मी से बोले- थोड़ा चूतड़ ऊपर करो!
मम्मी ने अपने चूतड़ कुछ उठाये और पापा ने पेटिकोट नीचे सरका दिया और अब उनके हाथ मम्मी के ब्लाउज पर थे। मैं समझ गया कि ब्लाउज का भी काम तमाम होने वाला है, उन्होंने धीरे से ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और मम्मी के ऊपरी शरीर को हाथों से सहारा देकर, ब्लाउज मम्मी के शरीर से अलग कर दिया।

मम्मी बोली- कुछ तो शर्म कर लो… अगर अंकित उठ गया तो बहुत बेइज्जती हो जायेगी।

पापा बोले- अगर तुम इतनी तेज़ तेज़ बोलोगी तो जरूर जग जाएगा अंकित!
उन्हें क्या पता कि अंकित इतनी देर से उन्हें चुदाई करते देख रहा है।

मम्मी अब केवल एक काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी, उनकी पैंटी इतनी टाइट थी कि उनके नितम्ब उस पैंटी की गिरफ्त से आजाद होने को मचल रहे थे, चूत वाला भाग उभरा हुआ था और उनकी चूचियाँ जो बिल्कुल टाइट हो चुकी थी और ये संकेत दे रही थी कि मम्मी चुदने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनकी टाइट चूचियों को देख कर ऐसा लग रहा था की ये मम्मी की टाइट ब्रा को अभी फाड़ डालेंगी।

मम्मी बोली- ए जी, अच्छा दुपट्टा तो ओढ़ लो, फिर करो।
पापा ने वो दुपट्टा ओढ़ लिया पर उन दोनों का नंगा शरीर उसमें से साफ़ झलक रहा था।
फिर मैंने देखा कि पापा का सिर मम्मी की टांगों के बीच में था।
यह कहानी आप Bhauja डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

तब मुझे कुछ समझ नहीं आया पर बड़े होने पर पता चला कि उस रात पापा मम्मी की चूत चाटने की तैयारी में थे।
पापा बोले- शेव नहीं किया क्या बालों को !
मम्मी बोली- नहीं, टाइम ही नहीं मिला मुझे क्या पता था कि तुम्हारा मूड बन जायेगा!
पापा बोले- मेरे तो रोज़ ही मूड बन जाये पर तुम करने कहाँ देती हो।

उस समय बिस्तर पर जोर की हलचल हुई, मैंने देखा कि पापा मम्मी की चूत अपने होंठों से चाट रहे हैं, वे चूत के छेद में अपनी जीभ डाल कर उसके रस का पान करना चाह रहे है।

उसी बीच मम्मी बोली- अब यह कच्छी क्यों उतार रहे हो मेरी… साइड पे करके चाट लो ना !
पापा बोले- यार, अच्छी तरह से गीली नहीं हो पायेगी !

मम्मी बोली- यह काम करना ज़रूरी हैं अभी… रात के 2 बज रहे है और तुम्हें सब कुछ धीरे धीरे मज़े लेकर करना है जैसे की नए जोड़े अपनी शादी के शुरूआती दिनों, सुहागरात या फिर हनीमून में करते हैं।
पापा बोले- अरे जानेमन, सुहागरात कल और हनीमून परसों मना लेंगे।
मम्मी बोली- तुम कभी नहीं सुधरोगे !

मम्मी ने कहा- आज जो करना हो, कर लो, जितने मज़े लूटने हों, लूट लो, अब मैं तुम्हेंम एक हफ्ते तक हाथ भी नहीं लगाने दूँगी।

और मैंने महसूस किया कि पापा ने अपने हाथों से मम्मी की कच्छी जाँघों से होते हुए नीचे सरका दी यानि उतार दी और फिर मम्मी ने अपनी टांगों को पूरा खोल कर फैला दिया क्योंकि मैं उनके बगल में ही लेटा था इसलिए टांगों को पूरा फैलाने के कारण वो मेरे शरीर से बार बार टच हो रही थी ऐसा इस लिए हो रहा था क्योंकि पापा बहुत जोर जोर से उनकी फुद्दी को चाट और चूस रहे थे और मम्मी का पूरा शरीर तेज़ी से हिल रहा था।

मुझे बहुत मजा आ रहा था, मेरा लंड पूरा अकड़ गया था, पापा के हाथ मम्मी की नंगी कोमल जांघों को सहला रहे थे। मम्मी के मुँह से अब सिसकारियाँ भी निकल रही थी जो कुछ तेज थी और कमरे में गूंज रही थी।
मम्मी- आह… अम्म… थोड़ा धीरे करो ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… थोड़ा और नीचे… यहाँ… सुनो… एक बार दाना भी रगड़ दो।

उस समय मुझे नहीं पता था कि दाना क्या होता है लेकिन शायद पापा ने रगड़ा और मॉम ने अपनी टाँगें इकठ्ठी कर ली और शायद पापा का मुँह अपनी जांघों में दबा लिया।
मॉम- ऊऊओ… आह्ह्ह… म्मम्म… हो गई मैं तो… आह्ह ह… निकल गया…!!!

और ऐसा लगा कि मम्मी कांप रही हैं… मम्मी का जो हाथ मेरी तरफ था उससे उन्होंने दुपट्टे रुपी चादर को भी शायद कस के पकड़ रखा था।
ये शब्द आज भी ताज़ा हैं मेरे दिमाग में ‘आह… अम्म… थोड़ा धीरे करो ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… थोड़ा और नीचे… यहाँ… सुनो… एक बार दाना भी रगड़ दो। ऊऊओ…आह्ह्ह्ह… म्मम्म… हो गई मैं तो… आह्ह ह… निकल गया…!!!’

और फिर बिस्तर पर हलचल हुई और पापा मम्मी के ऊपर फिर आ गए पर शायद जगह कम होने की वजह से ही वो कह रहे थे- यह अंकित भी तुम्हारे बगल में ही सोयेगा! एक तो तुम करने नहीं देती और करने देती हो तो इसकी वजह से मज़ा नहीं आता… जल्दी जल्दी करना पड़ता है।
मम्मी- आह… अम्म… थोड़ा धीरे करो ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… थोड़ा और नीचे… यहाँ… सुनो… एक बार दाना भी रगड़ दो।

उस समय मुझे नहीं पता था कि दाना क्या होता है लेकिन शायद पापा ने रगड़ा और मॉम ने अपनी टाँगें इकठ्ठी कर ली और शायद पापा का मुँह अपनी जांघों में दबा लिया।
मॉम- ऊऊओ… आह्ह्ह… म्मम्म… हो गई मैं तो… आह्ह ह… निकल गया…!!!

और ऐसा लगा कि मम्मी कांप रही हैं… मम्मी का जो हाथ मेरी तरफ था उससे उन्होंने दुपट्टे रुपी चादर को भी शायद कस के पकड़ रखा था।
ये शब्द आज भी ताज़ा हैं मेरे दिमाग में ‘आह… अम्म… थोड़ा धीरे करो ह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… थोड़ा और नीचे… यहाँ… सुनो… एक बार दाना भी रगड़ दो। ऊऊओ…आह्ह्ह्ह… म्मम्म… हो गई मैं तो… आह्ह ह… निकल गया…!!!’

और फिर बिस्तर पर हलचल हुई और पापा मम्मी के ऊपर फिर आ गए पर शायद जगह कम होने की वजह से ही वो कह रहे थे- यह अंकित भी तुम्हारे बगल में ही सोयेगा! एक तो तुम करने नहीं देती और करने देती हो तो इसकी वजह से मज़ा नहीं आता… जल्दी जल्दी करना पड़ता है।

पापा बोले- यार, जगह नहीं मिल रही हैं एक बार पकड़ के लगा लो ना !

मम्मी बोली- पहले कंडोम तो पहन लो !
पापा- नहीं यार कंडोम से मज़ा किरकिरा हो जाता है।
मम्मी बोली- अंकित के पापा तुम्हें तो मज़ा ही नहीं आता कभी और मैं हर दूसरे महीने प्रेग्नेंट हो जाती हूँ। अभी दो महीने पहले एबॉर्शन करना पड़ा था तुम्हारी वजह से! अब मैं कोई रिस्क नहीं लूँगी।
मम्मी गुस्से से बोली- तुम क्या चाहते हो कि मैं इतने बड़े लड़के के सामने पेट फ़ुला कर घुमूं?

पापा बोले- अरे कुछ नहीं होगा!
मम्मी ने कहा- नहीं, पहले लगा लो!
पापा बोले- आज मैं नहीं लाया, आज करने दो, कल कंडोम से !
मम्मी बोली- अब एक हफ्ते नाम न लेना बिल्कुल ! अच्छा जब झड़ने लगना तो निकल लेना उसमें से!
पापा बोले- अच्छा करने तो दो अब !
मम्मी बोली- रुको…!!

और फिर ऐसा लगा कि मम्मी ने अपना हाथ अपनी जांघों के बीच में से ले जाकर पापा का लंड पकड़ के अपनी योनि के मुँह पर लगा लिया… और फिर मम्मी हल्के से बोली- …चलो !

और फिर ऐसा लगा की मम्मी का शरीर कुछ हिला, शायद पापा अपना लिंग मम्मी की चूत में डालने की कोशिश की इस वजह से ऐसा हुआ।

मम्मी- उह्ह.. गया क्या पूरा?
पापा- हाँ गया पूरा का पूरा, इतना चिकना जो कर दिया है तुम्हारी मुनिया को !

मम्मी- थोड़ा धीरे करना… अंकित बिल्कुल साथ लेटा हुआ है।
पापा बोले- चिंता मत करो.. इतनी चिकनी हो गई हो कि अभी निकलवा दोगी मेरा…!!

और फिर बेड पर हल्की हल्की हलचल महसूस होने लगी।
पापा धीरे धीरे धक्के लगाने लगे, जिससे उनको बहुत मज़ा आ रहा था, मम्मी की आँखें बंद थी।
बेड काफी पुराना था और इसी वजह से उसमें से ‘चुर चुर’ की आवाज आ रही थी।

पापा जब धक्के लगा रहे थे तो उनके मुँह से ‘हू हु’ की आवाज निकल रही थी जिससे मुझे महसूस हुआ कि शायद मम्मी की चूत एकदम टाइट थी और पापा को अपना लंड उसमे प्रवेश करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी और टाइट चूत की वजह से ही जब पापा का लंड मम्मी की चूत में जाता तो एक अजीब सी कुच कुच कुच… की आवाज निकल रही थी।

पापा ने आखिर कह ही दिया- इतने साल हो गए हमारी शादी को लेकिन इतने साल बाद भी कितनी टाइट है तुम्हारी, जैसे सुहागरात में थी और मैंने तुम्हारी सील तोड़ी थी।
तब मुझे यह नहीं पता था कि सील तोड़ना क्या होता है।

मम्मी बोली- अच्छा अच्छा अब बातें मत बनाओ, अब करो भी! ए जी मान जाओ अंकित जाग जाएगा… जल्दी करो… बहुत देर हो गई!
और फिर मुझे लगा कि पापा ने जबरदस्ती मम्मी की टांगों को थोड़ा सा फैलाया और धक्के तेज़ कर दिए।

मम्मी बोली- धीरे…! …अहह… उफ़… म्मम्म हाय माँ…!!! यार धीरे करो…
पापा तेज़ सांस लेते हुए- क्यों, मज़ा नहीं आ रहा क्या… लाओ इन चूचों का रस तो पी लूँ कितने कड़े हो चुके है ये !

मम्मी बोली- इतने साल से देख रहे हो ! अभी भी मन नहीं भरा तुम्हारा… कोई भी जगह हो, ये ज़रूर खुलवाते हो… अरे बाबा रुको, मैं ही खोलती हूँ!

पापा बोले- मैं खोल देता हूँ, थोड़ा पीठ ऊपर करो!
और मैंने देखा कि पापा के हाथ मम्मी की पीठ पर उनके ब्रा के हुक को टटोलने लगे।

मम्मी बोली- खोलो न जल्दी… देर पे देर कर रहे हो।
पापा बोले- लो हो गया!
और मम्मी की ब्रा उनके कंधो से होते हुए निकाल दी।

अब एक बार फिर से पापा चूचियों पर टूट पड़े जैसे उन्हें खा डालेंगे। अब एक तरफ पापा मम्मी की चूत को अपने लौड़े से चोद रहे थे वहीं उनके हाथ मम्मी की चूचियों का मर्दन कर रहे थे उन्हें चाट और दांतों से काट भी रहे थे।

पापा किसी छोटे बच्चे की तरह मम्मी के चूचों को चूस रहे थे जिससे चुस्स चुस्स की आवाज लगातार आ रही थी।
मम्मी के हाथ पुनः पापा की पीठ पर चल रहे थे और उन दोनों के होंठ आपस में लिपटे हुए थे। ऐसा करने से उन्हें असीम आनन्द की अनुभूति हो रही थी और उत्तेजना के कारण उनके मुख से सिसकारियाँ निकल जाती थी।

हे भगवान…!!!!!! यह मैं क्या सुन रहा हूँ… मेरे मम्मी पापा मेरे साथ एक ही बेड पर हैं और मेरी ही उपस्थिति में चुदाई का प्रोग्राम चल रहा है और ये लोग यह सोच रहे हैं कि मैं सो रहा हूँ…
लेकिन एक बात माननी पड़ेगी मेरे मम्मी पापा की… कि अभी तक बड़े ही शालीन ढंग से काम चल रहा था…

मम्मी बोली- सुनो ..!! मैं फिर से होने वाली हूँ… अब कर ही रहे हो तो 5-6 झटके थोड़ी जोर से मार दो… या फिर ऐसा करते हैं कि बाथरूम में चलते हैं… वहाँ आराम से करना खड़े होकर! यहाँ तुम्हें मज़ा भी कम आ रहा है, जगह जो कम है।
इतना कह कर वो जोर से खिलखिलाई।
पापा बोले- आज तुम भी मजे ले रही हो खूब ! किसी दिन अकेली हो तो तुम्हें नानी याद दिला दूंगा। तुम्हारा अंग अंग न तोड़ दूं तो कहना!
मम्मी बोली- सुनो ..!! मैं फिर से होने वाली हूँ… अब कर ही रहे हो तो 5-6 झटके थोड़ी जोर से मार दो… या फिर ऐसा करते हैं कि बाथरूम में चलते हैं… वहाँ आराम से करना खड़े होकर! यहाँ तुम्हें मज़ा भी कम आ रहा है, जगह जो कम है।
इतना कह कर वो जोर से खिलखिलाई।

पापा बोले- आज तुम भी मजे ले रही हो खूब ! किसी दिन अकेली हो तो तुम्हें नानी याद दिला दूंगा। तुम्हारा अंग अंग न तोड़ दूं तो कहना!
मम्मी बोली- चलूँ क्या बाथरूम !
पापा बोले…!!! नहीं बस मेरा भी निकलने वाला है…..यहीं रुको !!!

मम्मी धीरे से बोली- बिस्तर के नीचे की तरफ एक टॉवल पड़ी है, उसी को ले लो और देखो अंदर मत करना, मुझे बहुत डर लगता है प्रेग्नेंट होने से।

पापा- यार एक मिनट रुको !
और फिर ऐसा लगा कि वो दोनों अलग हुए।

पापा- तुम्हारी कच्छी कहाँ गई?
मम्मी- क्या करोगे कच्छी? टावल ले लो।
पापा- दो तो सही!
मम्मी- क्यों कच्छी में क्यों करोगे?
पापा- कहाँ है कच्छी यार?
मम्मी- मुझे नहीं पता… तुमने ही उतारी थी!
पापा- हाँ मिल गई… चलो सीधी लेट जाओ !

और मॉम शायद कमर के बल लेट गई।
पापा फिर बोले- ला यार, चूची ही चूस लूँ थोड़ी तुम्हारी !

और फिर मुझे छोटी-छोटी चुस चुस की आवाजें आने लगी।

मम्मी- सारा मोशन तोड़ दिया कच्छी के चक्कर में !
पापा- सिर्फ 20 झटकों में अपना और तुम्हारा दोनों का निकलवा दूंगा… और फिर चैन से सो जाना… बस एक बात मान लो !
मम्मी- क्या?
पापा- मेरे ऊपर आ जाओ मैं नीचे से करता हूँ तुम्हें..
मम्मी- यार क्या कर रहे हो तुम… स्टाइल बदल बदल के करना जरूरी है अभी, बस ऐसे ही कर लो ! जब अकेले में करना जो कहोगे वो कर दूँगी… लेकिन अभी नहीं।

‘अकेले में कब करोगी, रोज तो ये अंकित रहता है बगल में!’

मम्मी उन्हें शांत कराती हई बोली- अबकी बार जब करेंगे तो अकेले ही करेगें, अंकित को दूसरे कमरे में लिटा देंगे या हम ही चले जाएँगे बगल वाले कमरे में।

पापा ने शायद मॉम की चूची मुँह में ली और फिर से मम्मी को चोदना शुरू कर दिया।
मम्मी- अह्ह अम्म… अहह ! अह !

और शायद 20-25 धक्कों के बाद पापा ने कहा- सविता, कितनी देर लगेगी तुमको?
मम्मी- बस.. बस… अहह… बस… 2-3 जोर से… अह्हह्म्म… गई… गई… ऊऊओ… ह्ह्ह्हह… गई… गई मैं…
और उनका जिस्म पूरा अकड़ गया।

मैं तब तो नहीं समझा था कि मम्मी का सारा शरीर क्यों अकड़ा था, पर जब कुछ बड़ा हुआ तो मैंने जाना।
मम्मी झड़ चुकी थी पर पापा अब भी धक्के लगाये जा रहे थे।

पापा- मेरी जान, मेरा भी आने वाला है… अह्ह्ह… मम्म…
मम्मी जल्दी से हिली और अपने हाथ पापा के लंड को बाहर निकालने के लिये बढ़ाये और बोली- कच्छी में.. कच्छी में… मेरे अन्दर नहीं !

पाप बोले अंदर ही कर लेने दो न ऐसे करते करते बीच में निकालने से वह मज़ा नहीं आता जो अंदर झड़ने में आता है, मुनिया भी कस के जकड़ लेती है पप्पू को।
मम्मी बोली- नहीं!!!

पर पापा के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था, उन्होंने मम्मी के हाथों को अपने हाथ की गिरफ्त में ले लिए और मम्मी के हाथों को बिस्तर पर फैला दिया। उन दोनों की हथेलियाँ आपस में जुड़ी हुई थी और दोनों लोगो की उंगलियाँ आपस में लॉक थी।

पापा ने 3-4 तेज़ झटके मारे जिससे बिस्तर तेज़ी से हिलने लगा औए एक तेज़ हलचल हुई…
मम्मी चीखी- अरे निकालो अंकित के पापा !
पर पापा ने उनके मुँह पर अपने होंठ सटा दिए जिससे मम्मी की आवाज न निकल पाये। शायद पापा ने सारा वीर्य मम्मी की चूत में ही निकाल दिया और उनकी चूत को अपने गरम वीर्य से भर दिया।

मम्मी की आँखों में आंसू थे, वो रोने लगी और बोली- तुम कभी भी मेरी बात नहीं मानते, तुम्हें जो करना रहता है वही करते हो।

पापा ने उनके आंसू पोछे और उनके चेहरे पर एक चुम्बन जड़ दिया।
मम्मी उन्हें पीछे धकेलते हुए बोली- हटो, कभी भी बात नहीं मानते हो तुम! अगर इस बार बच्चा ठहरा तो बताऊँगी तुम्हें !
पापा बोले- यार आई पिल्स ले लेना।

पापा उन्हें मनाते हुए बोले- अरे मेरी जान, अगर मैं करते करते बीच में निकालता तो क्या मज़ा आता इतनी देर सेक्स करने का !
तुम भी तड़पती रहती और मैं भी तड़पता रहता, बाथरूम जा कर फिर मुठ मारनी पड़ती। देखो तुम्हारी मुनिया ने मेरे मेरे मुन्ने को इतनी तेज जकड़ लिया कि उसने अपना सारा माल एक जगह तुम्हारी मुनिया में ही उड़ेल दिया, वेस्ट नहीं की एक भी बूँद।

पापा बोले- अच्छा, सच बाताओ मज़ा आया या नहीं?

मम्मी अब मुस्कुराई और हाँ में सिर हिला दिया और बोली- अब हटोगे ऊपर से?
पापा बोले- रुको, अब तुम्हारी कच्छी का काम आ गया।
मम्मी- अब क्या होगा कच्छी का?

पापा मम्मी के ऊपर से उठे और मम्मी की कच्छी से उनकी योनि पोंछने लगे।

अब वो दोनों उठकर बैठ गए, वो दोनों पूरे नंगे थे और पापा फिर बाथरूम चले गए, मम्मी भी उठी और अपनी ब्रा, ब्लाउज, पेटीकोट पहना, साड़ी और पैंटी अभी भी बिस्तर पे थी।

मम्मी ने कच्छी नहीं पहनी थी, शायद वो अपनी मुनिया में भरे वीर्य को साफ़ करना चाहती थी।
वैसे मम्मी रोज़ रात में सोने से पहले साड़ी उतार देती थी, वो कहती थी कि बहुत गर्मी लगती है। पर आज मुझे मालूम चला कि वो ऐसा क्यों करती थी। उन्हें केवल मौसम वाली गर्मी ही नहीं लगती थी बल्कि ज़िस्म की गर्मी भी लगती थी और वह इसी बहाने जिस्म की गर्मी भी शांत करती थी।

दो मिनट बाद जब पापा बाथरूम से बाहर आये तो उनके शरीर पर बनियान और जाँघिया थी।

अब मम्मी भी अंदर गई और जब वापस आयीं तो उन्होंने पापा से कहा- मैंने अपनी वेजाइना पानी से खूब धो ली है, अब तो प्रेग्नेंट नहीं होंऊँगीं न !
पापा बोले- रिस्क मत लो, कल मैं आई पिल्स ला दूंगा, ले लेना। यार… सारा का सारा तुम्हारी मुनिया पी गई… आज जो बचा कूचा था वो इस पैंटी ने सोख लिया।
पापा बोले- मैंने तुम्हारी मुनिया को चूमा चूसा उसका रस पिया अब तुम भी मेरे पप्पू को चूसो।

मम्मी- धत्त…!!! शरारती कहीं के… ये दो तीन बार तुम्हें क्या ओरल सेक्स का शौक चररा गया है।
पापा बोले- चूस लो न !

मम्मी ने पापा के गाल खींचे और मुस्कुरा कर बोली- जान, अब अगली बार जब करेंगे तो जो कहोगे जैसे कहोगे वैसे कर दूँगी।
पापा झट से बोले- सुहागरात को!
मम्मी बोली- हा हा… इस बार सुहागरात की तरह करेंगे।

मम्मी बोली- अच्छा मेरी पैंटी दे दो, पहन लूँ।

पापा बोले- मैं इस पैंटी को अपने तकिये के नीचे रख कर सोऊँगा, रात को नींद अच्छी आएगी !
और फिर पापा मम्मी हँसने लगे और फिर मम्मी, पापा के सीने से लगकर लेट गई और बोली- अंकित के पापा मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।
पापा बोले- तुम में मेरी जान बसती है।

कुछ देर बात करते करते वो दोनों एक दूसरे से चिपट कर सो गए।
मुझे उनकी चुदाई देख इतनी खुशी हुई जितनी पहले कभी नहीं हुई।

उस दिन के बाद से मैंने उन्हें चुदाई करते हुए कई बार देखा और मुझे उनकी चुदाई देखने की आदत सी पड़ गई, अगर मैं उन्हें किसी दिन सेक्स करते नहीं देखता था तो मुझे नींद नहीं आती थी।
पापा मम्मी ने अपनी सुहागरात कैसे मनाई जैसा कि वो कह रहे थे वो अगली कहानी में !
मेरी कहानी पसंद आई या नहीं, मुझे जरूर बतायें। Click Here to read>>पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात

Related Pages

मेरी सैक्सी अम्मी को चाचा ने चोदा रंडी की तरहे... मेरी सैक्सी अम्मी को चाचा ने चोदा रंडी की तरहे मेरा नाम मलाज है। मैं आपको एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। यह बात उस समय की है जब मैं करीब 10-12 साल...
Beautiful Secretary Fucked By Her Boss HD Porn Videos Beautiful Secretary Fucked By Her Boss HD Porn Videos - Full HD Porn Videos FREE Download Beautiful Secretary Fucked By Her Boss HD Porn Videos ...
इंडिया की लड़की की चुदाई के फोटो और hd पोर्न XXX Photo... इंडिया की लड़की की चुदाई के फोटो और hd पोर्न Indian couple recording their sexual adventure Indian Amateur Nude Images Huge natural tits babe Sensual a...
Horny Canadian MILF Kianna Dior takes two hard cocks Horny Canadian MILF Kianna Dior takes two hard cocks in live show Nude fucking pic XXX Nude Porn Photo Horny Canadian MILF Kianna Dior takes two ...
करीना कपूर जैसी दिखने वाली लड़की की चुदाइ - काले लंड से खेलना शुरु कर ... इस इंडियन जवानी की हलकट कहानी जो कि करीना जैसी दिख रही है और अपने ब्वायफ़्रेंड जो शाहिद, अरे नही सैफ़, अरे नही कोई इनके जैसा ही लड़का है, उसको अपन...

Indian Bhabhi & Wives Are Here