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जीजाजी का गधे जैसा लंड देख डर गई

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जीजाजी का गधे जैसा लंड देख डर गई

जीजाजी का गधे जैसा लंड देख डर गई : बेटी को धन का सुख देने के लिए मेरे बाप ने मेरी शादी एक बूड़े मर्द के साथ कर दी. मेरे पति की मुझसे उनकी दूसरी शादी थी. पहली की मौत हो चुकी थी. उनकी एक लड़की थी जिसकी शादी हो चुकी थी. शादी के पहले मुझे उनके और परिवार के बारे मे अधिक जानकारी नही थी.

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सुहाग रात मे मैं उनको देखकर हैरान रह गई. वे देखने मे ही बहुत कमज़ोर दिख रहे थे. मेरी उमर उस समय सिर्फ़ 18 बरस थी. वे आते ही दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरी मेरी साडी खोल कर मेरे बगल मे बैठ गए. वे मुझे पकड़ कर चूमने लगे. सेक्सी सेक्सी बाते करते हुए उन्होंने मेरा पूरा ब्लाउज खोल डाला. मैंने टाइट कसी हुई  ब्रा पहन रखी थी. कुछ देर मेरे बूब्स उपर से ही सहालाने के बाद उन्होंने मेरे कसी हुई ब्रा भी खोल डाली ब्रा खोलते ही मेरे दो कबूतर  घंटे की तरह बहार लटक गए. फिर वह मेरी चुची को चूसने लगे.

मुझे अब अच्छा लगने लगा था. मैने धीरे से अपना हाथ उनके लंड की तरफ़ बढ़ाया. अभी तक कुछ भी नही हुआ था. उन्होंने अपने कपड़े खोल दिए और सहालाने के लिए बोलने लगे. मैने भी कुछ देर तक हाथ से सहलाती रही. खड़ा नही होने पर मुख मे लेने के लिए कहने लगे. क़रीब 10 मिनट के बाद भी जब नही खड़ा हो पाया तो मैं निराश हो गई. उनके लंड मे नाम मात्र का ही कडापन आया था.

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अब वे अपने मुरझाए हुए लंड से मेरी बुर रगड़ने लगे. मैं तो उनके लंड के तैयार होने का इंतज़ार कर री थी. वे मेरी बुर को अब जीभ से चूसने लगे. अभी भी उनका लंड बहुत नरम था. मैं मन ही मन अपने को कोसती रही और बाप को शराप्ती रही. वे मेरी बुर चूसने मे और मैं उनका लंड चूसने मे मशगुल थी. मुझे अब सह पाना मुश्किल था. जैसा था वैसा ही मैंने उनको चोदने के लिए कहने लगी.

वे अपना नरम नरम लंड मेरी गरम गरम बुर मे प्रवेश कराने लगे .मगर प्रवेश करने से पहले ही उनके लंड ने पानी छोड़ दिया उनका तो हो गया था पर मेरी चूत भूकी रह गयी मैं तड़पती रह गई . मैं सोचने लगी कि जब सुहागरात को ही ऐसे हो गया तो न जाने अब बाकी दिन मेरी चुदाई होगी भी या मेरी चूत ऐसे ही तड़पती रह जायगी. मैं चुपचाप रह गई| दूसरी रात भी मैंने बहुत कोशिश की मगर सब बेकार गया. इसी तरह महीनो बीत गाये. मैं भी अपनी चूत चुदाई के लिये बिस्तर पर तडपती रही.

मेरी बड़ी बहन जीजाजी के साथ तबादला होकर उसी शाहर मे आ गयी. एक दिन मेरी बहन मुझसे मिलने मेरे घर पर आ गई. और मेरा हाल ख़बर पूछने लगी. मैं चुप हो गई. जब वे ज़िद करने लगी तो मुझे सबकुझ बताना ही पड़ा. वे निराश हो गई और कुछ सोचने लगी. मैंने पूछने लगी तुम कैसी हो. जीजाजी कैसे हैं. वे कह रही थी की तुम्हारे जीजाजी तो बहुत तगडे है. वे मुझे बहुत मज्जे देते हैं और हमारी तो हर रात सुहागरात की तरह गुजरती है वो मुझे रोज रात को दबा कर चोदते है और कभी कभार तो दिन में मुंड बन जाता है तो दिन में ही चुदाई चालू कर देते है. मन ही मन मैं इर्ष्या करने लगी.

वे बोलने लगी की मैं कल तक कुछ सोचती हू. कल 12 बजे मेरे घर आ जाना बैठ कर बाते करेंगे. मुझे कुछ आशा दिखाई देने लगी. सुबह होते ही मैं जल्दी जल्दी काम निपटा कर तैयार हो गाई. ठीक 12 बजे मैं दीदी के घर पहौच गई. वे मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

दीदी मुझे अपने बेड रूम मे ले गई और टीवी चला दिया और बोलने लगी की तुम कुछ देर तक वीडियो देखो मैं काम निपटा कर आती हूँ. एक सीडी वही पर राखी हुआ थी जिस पर लिखा हुआ था हम दोनो. मैंने उसी सीडी को लगा कर देखने लगी. सीडी देखते ही मैं घबरा गई और दरवाज़े की तरफ़ देखी. दीदी बाथरूम मे थी. मुझे और अधिक देखने की इच्छा जागृत हो गई. इस सीडी मे तो जीजाजी और दीदी का रंगीन खेल भरा हुआ था अर्थात यह तो मेरी दीदी की चुदाई की बीपी थी जो दीदी और जीजाजी ने मिलकर बनाई थी.

जीजाजी का गधे का लंड लंड तो देखते ही बनता था. लग रहा था की दीदी बहुत रोएगी. मगर वो तो मज़े ले रही थी. मैं सोचने लगी काश मुझे कोई ऐसे चोदने वाला मिलता.

उसी समय दीदी अंदर आगई और कहने लगी तुम को यह कैसा लग रहा है? मैंने सीडी बंद कर दी. उसी समय जीजाजी भी आगये. मुझे देखते ही वे मुस्कुरा दिए. दीदी कहने लगी अरे सेक्ससाली की तरफ़ भी तो देखो. वह बेचारी शादी होने के बाद भी कुँवारी चूत लेकर घूम रही है.

दीदी कहने लगी आज तुम्हारे जीजाजी को तुम्हारी चुदाई करने के लिए ही मैंने बुलाया है . कल तुमसे मिलने के बाद मैने इनको सब कुछ बता दिया था. दीदी कहने लगी अब तुम लोग अपना काम करो मैं बाहर देखती हूँ. जीजाजी कह रहे थे तुम तो बहुत सेक्सी लगती हो. तुम्हारे स्तन तो काफ़ी बड़े है और वे दीदी के जाने के बाद बिना रूम बंद किए ही मेरे स्तन दबाने लगे. वह कह रहे थे की जब तुम्हारी दीदी ही यह चाहती है की में तुम्हारी चुदाई करू तुम्हारी गांड मरू तो उससे क्या छिपाना वो बोलते है ना जब मीया बीबी राजी तो क्या करेगा काजी ..

वैसे तो साली आधी घर वाली होती ही हैं. लेकिन मैं तुम्हारी इच्छा के बिना कुछ नही करूँगा. मैं चुप चाप थी. मैं सोचने लगी की कही वे चले ना जाए. इससे अच्छा मौक़ा अब नही आने वाला मैं मुसकुराने लगी.जीजाजी समझ गए की मैं अपनी चुदाई के लिये सहमत हू.

उन्होंने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को खोल दिया . मेरे चुचि को मसलने लगे . मैं भी अब सहयोग करने लगी थी. जीजाजी के लॅंड का उभार अब पैंट पैर दिखाई देने लगा था. मैंने उनका पैंट पैर हाथ डाला तो वे पैंट खोल दिए.

अब उनका लॅंड बाहर निकल चुका था. मैं अपने हाथ से उनके लॅंड को सहालाने लगी. अपने पति का लॅंड से जीजाजी का लॅंड को तुलना कर रही थी. मन ही मन मैं सोचने लगी की मेरी दीदी कितनी लॅकी है की उसे ऐसे लॅंड वाला पति मिला है. कुच्छ देर तक मैं उनके लॅंड को देखती रही. इतने मे जीजा जी कहने लगे कैसा है मेरा हथियार? तुम्हारे पति का कैसा हैं?

मैं कहने लगी, जीजाजी उनका तो खडा ही नही होता हैं. मैं महीनो से तरप रही हू. आपका लॅंड तो काफ़ी मोटा और बड़ा है. दीदी को तो बहुत दुखता होगा. उसी समय दीदी आ गई. बोलने लगी अरे केवल देखते ही रहोगी. मैं बोलने लगी दीदी इनका तो बहुत मोटा है, मैं नही सह पाऊँगी. दीदी कहने लगी हां, मोटा तो है लेकिन सहना ही पड़ेगा. पहली बार मुझे भी बहुत दर्द हुआ था. लेकिन अब तो मजा आता है.

जीजाजी को दीदी कहने लग बेचारी तुम्हारा घोड़-लॅंड देख कर डर गई है. मेरे बहन को मत रूलाना. बेचारी अभी तक तो कुँवारी जैसे ही तो है. इतना कह कर दीदी फिर चली गई. जीजाजी अब मेरी साड़ी और पेटी कोट भी खोल दिए .वे मेरे बुर को चटने लगे. मुझे बेड पैर सूता दिए और अपना लॅंड मेरे बुर मे डाल कर चूसने के लिए कहने लगे.

वे मेर उपर चढ़े हुये थे . अपनी जीभ से मेरी टिट चाट रहे थे. मुझे काफ़ी मजा आरहा था. मैंने भी दोनो हाथो से उनका सिर पाकर कर दबाने लगा. ज़ोर ज़ोर से लॅंड चूसने के लिए कह रहे थे. उनका लॅंड का स्वाद लेने मे मुझे भी मजा आरहा था. इतने ही मे अपना पूरा लॅंड मुख मे अंदर तक धकेलने लगे. जीजाजी का पूरा मोटा लंड मेरे मूह में भर गया था. मुझे तो पहली बार इतना तगड़ा लॅंड मिला था. मैं मज़े से उनका लॅंड चुस रही थी और जीजाजी मेरे बुर चुस रहे थे.

उसी समय मुख मे गरम गरम और नमकीन टेस्ट आने लगा. वे और ज़ोर से लॅंड अंदर किए. मुझे तो मजे का स्वाद आरहा था. कुछ देर तक और चूसती रही. वे बाहर लिए और बाथरूम मे चले गए. बाथरूम से आने के बाद वे फिर मुझसे अपना लॅंड सहलवाने लगे. क़रीब ५ मिनट के बाद वे फिर तैयार होगए. जीजा जी का लॅंड फिर से पहले जैसे ही कठोर और मोटा होचुका था. इस बार वे मुझे पट सुला दिए.

मेरी गांड मे थोडा थूक लगाए और एक अंगुली घुसा कर बाहर भीतर करने लगे. मैं कहने लगी जीजाजी इसमे भी करोगे क्या. इसमे तो बिल्कुल भी नही सहा जायगा. आज बुर मे ही कर लो. फिर कभी इसमे. जीजाजी नही माने और कहने लगे गांड लिए बिना मैं तुम्हारी बुर नही लूंगा. अगर मेरी शर्त मंज़ूर है तो बोलो नही तो छोड़ देता हूँ तुम्हारी चुदाई.

मुझे तो आज चुदाई का भरपूर मजा लेना था. मैं चुप रही. मैं मुसकूरा दी और कहने लगी आप बहुत बदमाश हो आज से में आप का सामान जो करना है करो गांड मरो चूत मरो या मेरे मुह में लोडा डाल कर मुठ निकालो आज मैं सब कुछ सहने को तैयार हूँ.

दोस्तो बाकी की कहानी अगले भाआग में, अभी में बहुत गरम हो रही हूँ..
अभी अलविदा

 

 

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