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सेक्सी मकान मालकिन भाभी को चोद रंडी की तरह

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सेक्सी मकान मालकिन भाभी को चोद रंडी की तरह

सेक्सी मकान मालकिन भाभी को चोद रंडी की तरह : हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अमन है.. आज में आप सभी को indiansexbazar.com पर मेरी मकान मालकिन से चुदाई (Fuck) की कहानी बताने जा रहा हूँ। वैसे यह कुछ समय पुरानी बात है और में उस समय 12वीं में पढ़ता था

मौसी की चूत फाड़ कर खून निकाला

में जिस मकान में रहता था, उसकी मकान मालकिन की उम्र करीब 36 साल थी, लेकिन वो इतनी उम्र होने के बाद भी एक बहुत ही सेक्सी औरत थी और में उन्हे भाभी कहकर बुलाता था और उन सेक्सी भाभी का नाम रीना था और में उनकी सुन्दरता का दीवाना था, मुझे जब भी मौका मिलता था, में उनसे बात ज़रूर करता और इसी बहाने मुझे उनके गोरे गोरे बोबे (बूब्स) को निहारने का मौका मिलता था और में भाभी के बोबे (बूब्स) को देखकर एकदम पागल हो जाता था, क्योंकि उनके बोबे (बूब्स) बहुत बड़े बड़े थे और साड़ी के आँचल से उनकी एक झलक ही मुझे मिल जाए तो में यही सोचकर उनसे बात करता था। फिर में बातों के बीच में उनके बड़े साईज़ के बोबे (बूब्स), गांड (Ass) को देखता रहता और शायद धीरे-धीरे इस बात का अंदाजा रंडी भाभी को भी लग गया था कि में उनके जिस्म को घूरता रहता हूँ।

फिर रंडी भाभी भी अब कभी कभी अपने पल्लू को जानबूझ कर गिरा देती और गहरे गले के ब्लाउज से गोल गोल बोबे (बूब्स) दिख जाते, लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि रंडी भाभी सेक्सी तरीके से कपड़े पहनती थी, जैसे कि जालीदार गहरे गले के ब्लाउज, जालीदार ब्लाउज से उनकी ब्रा भी साफ साफ दिखती थी और उनकी साड़ी भी नाभि से बहुत नीचे हुआ करती थी और में उनके अंग अंग का दीवाना था। उनके रसीले होंठ, मदमस्त कर देने वाले बोबे (बूब्स), नाभि, गांड (Ass) और वो सब कुछ जो उनमे मौजूद था, वो मेरी रातो की रानी थी और में जब भी मुठ मारा करता था तो में उन्ही के बारे में सोचता था और में किस्मत वाला था कि मुझे रोमा भाभी के घर में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके पति जब ऑफिस चले जाते थे, तब वो घर पर अकेले हुआ करती थी और ऐसे में जब मेरी उनसे मुलाकात हो जाती, तब में मौके का फ़ायदा उठाकर बहुत देर बातें करता था। उन पर क्या जवानी छाई हुई थी? 36 की उम्र होने के बाद भी वो एक सेक्स बम थी। मेरा लंड (Cocks) हर रोज उनके बारे में सोच सोचकर पानी छोड़ दिया करता था।

फिर एक बार मेरे माता-पिता दस दिन के लिए हमारे एक करीबी रिश्तेदार के घर दूसरे शहर गये हुए थे और मुझे खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए भाभी ने कहा कि में उन्ही के घर पर खाना खा लिया करूँ। फिर में उनकी यह बात सुनकर बहुत खुश था और वैसे भी इतना अच्छा मौका कौन गँवाना चाहेगा, तो में 8 बजे उनके घर जाता था और खाना खाने के बाद वापस अपने कमरे में चला आता था, उस वक़्त तक अंकल भी घर पर ही होते थे और फिर दो दिन बाद अंकल की कंपनी ने उनको मीटिंग के लिए दिल्ली भेज दिया और अब भाभी घर पर बिल्कुल अकेली हो गयी। फिर में उस रात को भी हर रात की तरह 8 बजे भाभी के घर पहुँचा, रंडी भाभी ने दरवाज़ा खोला और हर बार की तरह वो सेक्सी गहरे गले का ब्लाउज और जालीदार साड़ी में थी और में उस गहरे गले के ब्लाउज में से उनके सुंदर बोबे (बूब्स) को निहार रहा था, वो जब मूड कर जाती तो में उनके जालीदार ब्लाउज से उनकी काली ब्रा और पीठ को देखता, दोस्तों वाह क्या जिस्म था और मेरा तो मन कर रहा था कि उन्हे पकड़ लूँ और पूरे बदन को बारी बारी से चूमूं और उनकी गांड (Ass) भी एकदम भरी पूरी थी और में सोचता था कि ऐसी गांड (Ass) को मारने में कितना मज़ा आएगा, लेकिन आज तक मैंने किसी लड़की को नहीं चोदा था, इसलिए में इन सब बातों को केवल सोचता ही था।

फिर मुझे भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी, शायद उनको भी मेरे दिल की इच्छा का पता चल गया था और वो भी मेरे साथ बैठकर खाना खाने लगी और फिर खाना खाते-खाते अचानक से उनका पल्लू नीचे सरक गया और मुझे उनके बड़े-बड़े बोबे (बूब्स) दिखने लगे और में तिरछी नजर से उनको देखता रहा, भाभी को भी मज़ा आ रहा था और उन्होंने पल्लू को नीचे गिराकर छोड़ दिया। फिर वो रंडी कहने लगी कि मुझे यह साड़ी बहुत परेशान करती है, मेरा तो जी करता है कि में इसे उतार दूँ। एक तो इतनी ज़्यादा गर्मी और ऊपर से यह साड़ी, यह कहते हुए रंडी भाभी ने साड़ी को निकाल दिया और अब वो ठीक मेरे सामने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में थी और हमेशा की तरह उनका पेटीकोट नाभि से बहुत नीचे था और भाभी अब मुझ पर ज़ुल्म ढा रही थी, क्योंकि उनका अधनंगा जिस्म मेरी आँखों के सामने था और फिर भाभी अब दोबारा से खाना खाने बैठ गयी। फिर खाना खा लेने के कुछ देर बाद वो मुझसे बोली कि अमन मुझे रात को अकेले में डर लगता है तो जब तक तुम्हारे अंकल नहीं आ जाते, तुम मेरे घर पर ही रात को रुक जाया करो। फिर में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन खुशी से झूम उठा और में अपनी कुछ किताबें भाभी के घर ले आया और में सोच रहा था कि शायद मुझे दूसरे कमरे में सोना होगा और इसलिए मैंने किताबों को भाभी के रूम में ना रखकर पास वाले कमरे में रख दिया।

फिर रंडी भाभी ने कहा कि क्यों अमन मेरे साथ सोने में तुम्हे क्या कोई आपत्ति है? प्लीज तुम मेरे साथ ही सो जाओ ना, तुम अपनी पढ़ाई करना और में भी वहीं सो जाऊंगी और जब तुम्हारा जी चाहे तो तुम भी वहीं सो जाना। फिर में भाभी के पास में सोने के ख्याल से बिल्कुल पागल हो रहा था, क्योंकि मैंने आज तक जिससे केवल बात की थी, मुझे आज उनके साथ सोने का मौका भी मिल रहा था और उस समय गर्मी बहुत ज़्यादा थी, इसलिए रंडी भाभी ने मुझसे कहा कि अमन तुम अपनी शर्ट उतार दो। तुम इतनी गर्मी में केवल पेंट में भी रह सकते हो और में तो सोते वक़्त ब्लाउज भी नहीं पहनती, केवल ब्रा और पेटीकोट ही पहनती हूँ। फिर अचानक से भाभी के मुँह से ‘ब्रा’ जैसे शब्द सुनकर में बहुत रोमांचित हो गया और फिर क्या था, वो अपना ब्लाउज खोलने लगी और वो जैसे जैसे हुक खोलती जाती और उनके उभरे हुए बोबे (बूब्स) बाहर आ जाते। फिर आख़िर में उन्होंने ब्लाउज खोल दिया और उसे एक तरफ फेंक दिया, ज़ालिम भाभी के बड़े बड़े कसे हुए बोबे (बूब्स) उस काली ब्रा में दबे हुए थे, उन्हे देखकर मेरा मन कर रहा था कि उनके बोबे (बूब्स) को मसल दूँ और जीभ से चाट लूँ और चूस लूँ, लेकिन मुझे संयम बनाए रखना था।

फिर जैसे तैसे मैंने पढ़ाई में ध्यान लगाना शुरू किया और थोड़ी ही देर बाद भाभी बोली कि अमन मेरी कमर में दर्द हो रहा है, अगर तुम बुरा ना मानो तो तेल से इसकी मालिश कर दो? तो यह बात सुनकर मेरा लंड (Cocks) धीरे धीरे खड़ा होने लगा। फिर मैंने लंड (Cocks) को ठीक किया और भाभी के करीब पहुँच गया। फिर भाभी बोली कि तुम बुरा मत मानना, में तुमसे मालिश करवा रहीं हूँ, क्या करें दर्द इतना ज़्यादा हो गया है। फिर मैंने कहा कि इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, आपको जो भी काम हो करवाना है करवा लीजिए, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। फिर क्या था? मैंने भाभी की कमर की मालिश शुरू कर दी और उनके मक्खन की तरह कोमल बदन पर मेरे हाथ घूमने लगे और मेरा लंड (Cocks) खड़ा होने लगा। फिर मैंने भाभी के शरीर को हाथ लगाते ही वो बोली हाँ कितना अच्छा लग रहा है, मेरे बदन की थकान जैसे कि तुमने खत्म कर दी। फिर वो बोली कि थोड़ा और नीचे दबाना और मेरे पेटीकोट को भी उतार दो। इससे तुम्हे मालिश करने में आसानी होगी और मुझे भी आराम मिलेगा।

दोस्तों मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने कुछ नहीं किया तो इस पर भाभी बोली कि सोच क्या रहे हो पेटीकोट को उतार दो और फिर दोबारा ऐसा सुनते ही मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और उसे नीचे सरका दिया। फिर भाभी की गोरी और गोल-गोल गांड (Ass) मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उनकी गांड (Ass) के आस पास मालिश शुरू कर दी और में उनकी गांड (Ass) को धीरे-धीरे मसल रहा था और भाभी भी सिसकियाँ ले रही थी, उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बोली कि ज़रा ज़ोर से मसलो ना, दर्द बहुत ज़्यादा है और आज तुम्हे ही मेरे जिस्म के दर्द को खत्म करना है। फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और अब मुझे भी ऐसा करने से बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड (Cocks) जो सांप की तरह खड़ा था, उनके पैर में रगड़ रहा था। फिर भाभी बिल्कुल नासमझ बनते हुए बोली कि यह क्या है मेरे पैरों के पास? तो मैंने कहा कि भाभी यह मेरा लंड (Cocks) है, तो इस पर भाभी ने कहा कि अपना लंड (Cocks) अपनी भाभी को नहीं दिखाओगे और एक बार जी भरकर में भी तो देखूं कि मेरे अमन का लंड (Cocks) कैसा है? और यह कहते हुए वो एकदम उठ गयी। दोस्तों भाभी ने पेटीकोट के नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी, इसलिए उनकी चूत (Pussy) उनके झांटो के बीच से साफ साफ दिखाई दे रही थी।

फिर भाभी ने मेरी पेंट को खोल दिया और अब में केवल अंडरवियर में था और फिर उन्होंने मेरी अंडरवियर को पकड़ा और उसे भी नीचे कर दिया। मेरा लंड (Cocks) पूरी तरह से तनकर खड़ा हुआ था और उनकी चूत (Pussy) को सलामी दे रहा था। फिर मेरे खडे लंड (Cocks) को देखकर भाभी बोली कि बाप रे तुम्हारा लंड (Cocks) कितना बड़ा है और यह तो एकदम तनकर खड़ा है और क्या अपनी भाभी के जिस्म को देखकर तुम भी बेताब हो गये? क्यों अमन क्या कभी किसी लड़की को चोदा है? और इस 8 इंच के लंड (Cocks) का क्या फ़ायदा? अगर इसे इस्तेमाल ही ना किया हो और ऐसा कहते ही भाभी उसे अपने मस्त होठों से चूम लिया। फिर मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी। फिर भाभी ने धीरे से कहा कि क्या तुम मुझे चोदोगे? और अब वैसे भी इस लंड (Cocks) का इस्तेमाल होना चाहिए ना, क्योंकि ऐसे लंड (Cocks) को देखकर मेरी भी जवानी भड़क उठी है और आज सारी रात