Get Indian Girls For Sex
   

एक गाँव की मजबूर लड़की की चुदाई - मजबूरी का फायदा उठाया और घोड़ी बना कर चोदा

bollywood actress Katreena Kaif Nude fucking porn41

ट्रेन से उतरते ही सीता की जान में जान आ गई। वो भगवान का शुक्रिया अदा की। बिहार की ट्रेन में भीड़ ना हो ये कभी हो नहीं सकता। इसी भीड़ में गाँव की बेचारी सीता को अपने पति श्याम के साथ आना पड़ा। श्याम जो कि T.T.E. है। हालाँकि वो भी गाँव का ही है मगर नौकरी लगने के बाद उसे शहर रहना पड़ा। 6 महीने पहले दोनों की शादी हुई थी। शादी के बाद श्याम ज्यादा दिन तक अकेला नहीं रह पाया । काम के दौरान वो काफी थक जाता था। फिर घर आकर खाना बनाने का झंझट। मन नहीं करता खाना बनाने का पर क्या करता? होटल में अच्छा खाना मिलता नहीं । कभी कभी तो भूखा ही रह जाता। ऐसा नहीं है कि वो महँगे होटल में नहीं जा सकता था। मगर सिर्फ पेट की भूख रहती तब ना। उसे तो नई नवेली पत्नी सीता की भी भूख लग गई थी। आखिर क्यों नहीं लगती? सीता थी ही इतनी सुंदर । पूरे गाँव में तो उतनी सुंदर कोई थी ही नहीं। तभी तो उसकी शादी एक नौकरी वाले लड़के से हुई । श्याम जब सीता को पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। एकदम चाँद की तरह चमकती गोरी रंग, नशीली आँखें, गुलाबी होंठ,कमर तक लम्बे लम्बे बाल,नाक में लौंग, कान में छोटी छोटी बाली, गले में पतली सी Necklace जिसमें अँगूठी लटकी थी।सफेद रंग की समीज-सलवार में सीता पूरी हुस्न की मल्लिका लग रही थी। दोनों के परिवार वाले देख चुके थे, पर सबकी इच्छा थी कि ये दोनों भी एक-दूसरे को देख लें तो अच्छा रहेगा। सीता अपने भैया-भाभी के साथ श्याम को देखने गाँव से 5 किलोमीटर दूर एक मंदिर में गई थी।गाँव में शादी से पहले लड़के का घर पर आना तो दूर, बात करना भी नहीं होता है। पर श्याम के परिवार वाले की जिद के कारण एक मुलाकात हो सकी ।
तय समय पर श्याम अपने एक दोस्त के साथ सीता से मिलने गाँव के बाहर मंदिर पर पहुँच गया था। अभी तक सीता नहीं पहुँची थी। दोनों वहीं बाहर बने चबूतरे पर बैठ कर सीता के आने का इंतजार करने लगे। श्याम के मन में काफी सवाल पैदा हो रहे था। अजीब कशमकश था, पता नहीं गाँव की लड़की है कैसी होगी? रंग तो जरूर सांवली होगी। खैर रंग को गोली मारो, अगर शारीरिक बनावट भी अच्छी मिली तो हाँ कर दूँगा। पर अब हाँ या ना करने से क्या फायदा। जब माँ-बाबूजी को रिश्ता मंजूर है तो मुझे बस एक आज्ञाकारी बेटा की तरह उनकी बात माननी थी। सब कह रहे हैं अच्छी है तो अच्छी ही होगी।अच्छा
वो आएगी तो मैं बात क्या करूँगा? साथ में उसके भैया-भाभी भी होंगे तो ज्यादा बात भी नहीं कर पाऊंगा।अगर पसंद आ भी गई तो बात नहीं कर पाऊंगा।फिर तो शादी तक इंतजार करना पड़ेगा। शहर में ही ठीक था। आराम से मिल सकते थे,बात करते, date पर जाते वगैरह वगैरह। पर यहाँ बदनामी की वजह से कुछ नहीं कर सकते भले ही आपकी उससे शादी क्यूँ ना हो रही हो
तभी मोटरगाड़ी की तेज आवाज से श्याम हड़बड़ा गया।सामने देखा सीता अपने भैया-भाभी के साथ पहुँच गई ।सीता को देखते ही श्याम को जैसे करंट छू गया हो। उसके मन में अब एक ही सवाल रह गया था," गाँव की लड़की इतनी सुंदर कैसे? मैं तो बेकार में ही इतना सोच रहा था"
तभी उसे अपने दोस्त का ख्याल आया। उसकी तरफ देखा तो उसे तो एक और झटका लगा। साला मुँह फाड़े एकटक देख रहा था, मन तो किया दूँ साले को एक जमा के। पर चोरी से ही एक केहुनी दे दिया तो लगा वो भी सो के उठा हो। फिर मेरी तरफ देख के शैतानी मुस्कान दे रहा था साला। खैर हमने उसे एक तरफ करके भैया भाभी को प्रणाम किया। फिर भैया कुछ बहाने से गाड़ी से 5 मिनट में आ रहा हूँ बोल के चले गए।
"आपका नाम?" भाभी मेरे दोस्त की तरफ देखते हुई पूछी
"जी..मैं... मैं... रमेश। श्याम की दोस्त।" आशा के विपरीत हुए सवाल से साला अपना Gender भी भूल गया।
पर भाभी मुस्कुराती हुई बोली,
"रमेश जी, इन्हें कुछ देर के लिए अकेले बात करने देंगे तो अच्छा रहेगा।तब तक हम दोनों कहीं एकांत में चलते हैं।"
रमेश चुपचाप भाभी की तरफ बढ़ने लगा।
"और हाँ श्याम जी... अभी सिर्फ बात करना और कुछ नहीं । मैं पास में ही हूँ, बातें नहीं सुन सकती पर देख जरूर रहुँगी ही..ही...ही" भाभी हँसती हुई रमेश के साथ मंदिर के बाहर निकल गई।
अब मैं भला क्या बात करता? सामने साक्षात परी जैसे लड़की खड़ी जो थी। मैं सिर्फ नाम ही पूछ सका। आवाज भी इतनी मीठी कि कोयल भी शर्मा जाए। बाकी के 10 मिनट तो बस सीता को देखता ही रहा। गजब की थी सीता। ऊपर से नीचे तक देखा पर कहीं से भी मुझे कमी नजर नहीं आई।वो अपनी नजरें नीची किए हुए मंद मंद मुस्कुराती रही। कभी कभी जब मेरी तरफ देखती तो लगता अपने आँखों से ही मुझे घायल कर देगी।
तभी मुझे भाभी और रमेश आते हुए दिखे। मुझे तो उम्मीद ना की ही थी, फिर भी फोन के लिए पूछ लिया। वो ना में गर्दन नचा दी। पर मैं फिर भी काफी खुश था।
"क्यों श्याम जी, बात तो कुछ किए नहीं! लगता है आपको हमारी सीता पसंद नहीं आई। घर जाकर बाबूजी को मना कर दूँ क्या?" भाभी आते के साथ ही पूछ बैठी।
"नहीं..नहीं.. भाभी जी। मुझे तो पसंद है बाकी इनसे पूछ लो" हड़बड़ाते हुए मैंने कहा जैसे किसी बच्चे से टॉफी माँगने पर बच्चा हड़बड़ा जाता हो।
मेरी बात सुनते ही सब ठहक्का लगा कर हँसने लगे। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ तो मैं भी शर्मा के मुस्कुरा दिया।
"तब तो लगता है कि जल्द ही आप दोनों फँसोगे क्योंकि सीता को भी आप पसंद आ गए" भाभी बोली
"पर भाभी जी आपने तो इनसे पूछा ही नहीं फिर कैसे आप समझ गई?" तभी रमेश बोल पड़ा।
"क्यों ? आपके दोस्त के पास क्या कमी है जो पसंद नहीं आएँगे? अच्छे खासे गबरु जवान लग रहे हैं। बॉडी भी काफी अच्छा है। दिखने में भी अच्छे हैं। सरकारी नौकरी करते हैं। मैं अगर कुवांरी रहती तो मैं ही शादी कर लेती इनसे।" एक बार फिर हम सबको हँसी आ गई भाभी की बात पर। तभी मोटरगाड़ी की आवाज सुनाई दी। भैया भी तब तक आ गए। हमें एक अच्छे लड़के की तरह घर जाना ठीक लगा अब। मैंने उन लोगों से इजाजत ले कर रमेश के साथ निकल गया।
दोनों की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। श्याम अपने सुहागरात को ले काफी व्याकुल था। आखिर क्यों ना हो इतनी सुंदर बीबी जो मिली ।लाल जोड़ों में तो सीता और भी कहर ढा रही थी। सुहागरात के लिए सीता कोई खास सोची नहीं थी
थोड़ी सी डर जरूर थी कि पहली बार सेक्स करूँगी तो पता नहीं कितना दर्द होगा। भाभी कहती थी कि पहली बार दर्द होती है, मैं सह भी पाऊंगी या नहीं। अगर ना सह पाई तो कहीं नाराज हो गए तो क्या करूँगी।हमें तो ठीक से मनाना भी नहीं आता।इसी उधेड़बुन में खोई सीता पलंग पर बैठी थी।
तभी हल्की आहट से दरवाजा खुला और श्याम अंदर आ गए।सीता देखते ही उठ के खड़ी हो गई।
"अरे ! खड़ी क्यों हो गई?" श्याम प्यार भरी व्यंग्य से सीता से पूछा।
कुछ सोचने के बाद सीता फिर से बैठ गई और श्याम को हल्की नजरों से देखने लगी।
श्याम तो बेसब्र था ही अपने मिलन को लेकर, पर सीता को महसूस नहीं होने देना चाहता था कि मैं व्याकुल हूँ। उसने एक गंजी और तौलिया पहन रखा था। वो सीता के पास आकर बैठ गया और सीता को देखने लगा। सीता अपने तरफ देखते देख शर्मा कर अपनी नजरें दूसरी तरफ कर ली।
"क्या हुआ? डर लग रहा है क्या?" श्याम धीरे से पूछा
कोई जवाब ना पाकर श्याम बोला," मैडम, हम दोनों शादी किए हैं।कोई प्रेमी नहीं हैं जो डर रही हैं। आज हमारी पहली रात है तो थोड़ी शर्म हमें भी आ रही है।अगर आपकी इजाजत हो तो हम ये शर्म दूर कर लें।" श्याम ने सलाह और सवाल दोनों एक साथ कर दिए।
अब बेचारी सीता क्या कहती? श्याम कुछ जवाब ना पाकर सीता के और निकट हो गया और गले से लगा लिया। सीता का चेहरा शर्म के मारे लाल हो गया था। आज जिंदगी में पहली बार किसी मर्द ने छुआ था। मर्द की बाँहेँ औरत को कितना आनंद देती है, बेचारी सीता को क्या मालूम? अभी तो वो बस श्याम के सीने में सहमी सटी हुई थी।
सीता की तरफ से कोई Response ना पाकर श्याम थोड़ा परेशान होने लगा, मगर आज पहली मुलाकात की वजह से ज्यादा कुछ करना ठीक नहीं समझा। उसने सीता के दोनों कंधे पकड़ कर हल्के से अलग किया। फिर अपना चेहरा सीता के काफी निकट ले जाकर धीमी आवाज में कहा," I Love you सीता ! पता है पहली बार तुम्हें देखते ही मुझे प्यार हो गया था। उस दिन से मैं तुम्हारा पल-पल इंतजार कर रहा हूँ।अपने दिल का हाल कहना था तुमसे।ढेर सारा प्यार करना चाहता हूँ तुमसे और तुम्हारी ढेर सारी बातें सुननी थी हमें।"
सीता नजरें नीची किए मूक बनी बैठी थी
सीता के बगल में बैठा श्याम कंधों पर हाथ रखकर सीता के गालोँ को सहलाने लगा। स्पर्श पाकर सीता अजीब रोमांच से भर गई। श्याम अब अपना चेहरा सीता के कंधों पर रख दिया जो कि सीता के गालोँ से सट रही थी। सीता का रोम रोम श्याम के गर्म साँसोँ से सिहर गया। सीता के जिस्म की खुशबू श्याम को मदहोश कर रही थी। श्याम अपना दूसरा हाथ बढ़ाकर सीता के चेहरे को अपनी तरफ किया जिससे सीता के होंठ श्याम के होंठ के काफी निकट हो गए। दोनों की गर्म साँसें टकरा रही थी। सीता आगे होने वाली का चित्रण को याद कर तेज साँसें लेने लगी और उसके होंठ कंपकंपाने लगे। श्याम ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और होंठ सीता के तपते होंठों से चिपका दिए।
श्याम तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया सीता के अनछुई होठोँ का रस पाकर। सीता के तो अंग अंग सिहर गए अपने जीवन की पहली चुंबन से। अंदर से वो भी काफी उत्तेजित हो गई थी मगर शर्म की वजह से बर्दाश्त कर रही थी। मगर बकरा कब तक अपने जीवन की खैर मनाती। श्याम जैसे ही सीता के चुची पर अपना हाथ रखा, सीता चिहुँक के श्याम को दोनों हाथों से जकड़ ली। श्याम तो अब और कस के होठोँ को चुसने लगा और चुची को धीमे धीमे दबाने लगा।कुछ ही देर में जोरदार चुंबन से सीता की साँसे उखड़ने लगी थी। मगर श्याम इन सब से अनभिज्ञ लगातार चूसे जा रहा था। अंततः सीता बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने होंठ पीछे खींचने लगी तब श्याम को महसूस हुआ। श्याम क