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भाभी की चूत को चोदने के बाद जैसे ही मैं अपना लंड पोंछ रहा था कि अंदर में, चाची चली आईं। ये सब मेरी और उनकी सोची समझी साजिश थी जिससे कि उनकी नयी नवेली बहू को रंडी बनाया जा सके। वो इस लिए ऐसा कर रही थी कि उनके सामने बहू की पोल खुल जाए और फिर अक्सर बाहर रहने वाले बेटे की अनुपस्थिति में बहु को ब्लैकमेल करके जिससे मन उससे पेलवाया जा सके। चाची की यह चाल मैं जानता था और अक्सर उनकी चूत का परमानेंट ग्राहक तो मैं था ही। अंदर आते ही उन्होंने बड़बड़ाना शुरु किया ‘ हाय दैया, अब क्या कहूं कैसी पतुरिया बहू आई है, देखो जरा इसके चाल ढाल दो दिन नही हुए कि चुदवाना शुरु कर दिया। रंडी की तरह से। देखो कैसे बुर उघाड़ के बैठी है। साली, शरम नहीं आ रही, अरे यार करना था तो बाहर का किया होता। अपने घर के लड़कों को बिगाड़ने की जरुरत क्या थी। ऐसा बोल कर चाची ने एक लात भाभी की खुली चूत पर मारी। भाभी वहीं दोहरी हो गयी। अब बारी थी मेरी।

दिखाने के लिए चाची ने मेरा बड़ा लंड पकड़ के ऐंठ दिया। मुछ कबरे, शरम नहीं आती मां के समान भाभी के साथ मुह काला करते हुए। चल तेरी मां से बोल के तेरे को अन्दर करवाती हुं पुलिस के हवाले। तुम दोनों को अंदर करवा दूंगी’

इतना सुनते ही भाभी ने अपनी दुकान ढंकी और फिर चट सासु मां के पैरों मे गिर कर के माफी मांगने लगी। उसे परे धकेल कर चाची बाहर निकलीं और उनके पीछे मैं। जल्द से मैं चाची के पीछे उनके कमरे में घुस गया। वहां जाकर अंदर से सिटकनी बंद की और बस उन्हें दबोच लिया। मस्त मल्लू चूंचे दबाते हुए उनके पेटीकोट में हाथ लगाकर के पिघलती हुई पसीजी बुर को पकड़ लिया और बोला – बहुत अच्छी एक्टिंग की मेरी जान। तुम तो कमाल हो आंटी।

इतना सुनते ही आंटी ने कहा ‘ तुम एकदम बिगड़े हुए छोकरे हो, मुझे पता है तुम उसकी टाईट बुर के चक्कर में मुझे नहीं पूछने वाले। सब देख रही थी मैं तुम दोनों की मस्ती को छुप छुप कर खिड़की के छेद से। तुम बहुत जल्दी मुझे भूल जाओगे, अगर मैंने सब कुछ काबू में नहीं किया तो। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती।

मैने कहा, चाची, ऐसा थोड़े ही होगा तुम तो तुम हो। ओल्ड इज आल्वेज गोल्ड। और मैने उसकी बेलखौरी पकड़ कर के दबा दी। बेलकौड़ी बोले तो भगनाशा, जिसे आप चूत की घुंडी भी समझ सकते हैं। इसे दबाते ही चाची एकदम से बेचैन होकर लंड का पानी मांगने लगती है। मैं जानता था कि जब उसका दिमाग तेज चल रहा हो तो उसे क्या करना चाहिए।

अब चाची के ब्लाउज में हाथ लगा कर उसके बड़े बड़े इंडियन देसी चूंचे मसलते हुए बोला, ‘चाची इन चूंचों का कोइ जवाब नहीं, इन्हें दाब कर देखो, जितने स्वादिष्त हैं उतने ही सेक्सी भी। मन करता है आपको ही चोदता रहूं हमेशा, सच में आप ही मेरे सपनों की रानी हो।

भाई अब गुड़ खाए और गुलगुला से परहेज तो संभव नहीं है ना। अगर भाभी को चोदना था तो चाची को खुश रखना ही पड़ता। अब उसके चूंचे मसलते हुए मैने उसको चूमना शुरु कर दिया। बुड्ढी को जवान लंड मिलते ही मस्ती छाने लगी। वो सिसकारियां मारते हुए बोलने लगी चोद दो बेटा मुझे चोद दो अभी का अभी।

चूत के बाद गांड की बारी

अब मेरा लंड भी दुबारा टाइट होने लगा था। भाभी को चोदने के बाद ढीला पड़ा लंड अब दुबारा चाची की ओल्ड इज गोल्ड जवानी पर फिदा होने लगा था। मैने अपना पैंट नीचे सरका दिया। चाची का ब्लाउज खोल कर के जमीन पर फेंका और साड़ी खींच दी। अब उसका उपर का हिस्सा पूरा नंगा था। नीचे पेटीकोट पहन कर के वो खड़ी थी और मुझे ललचा रही थी।

मैने अपने अंडों को चूसाने के लिए चाची को जमीन पर बिठा दिया। उसके मुह के सामने लंड लाकर मूठ मारने लगा और वो मेरे अंड्कोष को चूसने लगी। मुझे उत्तेजना हो रही थी। दो तीन मिनट के बाद मैने अपना लन्ड उसके मुह में ठूस दिया और उसकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी। यह बात मैं जानता था। अब मैने अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए जो पेलाई करी कि उसकी प्यास बुझ गयी।

मैं उसे धकेल कर कुतिया स्टाइल में लाया और पीछे जाकर ढेर सारा थूक उसकी गांड और चूत में मल दिया। अब वो एकदम अपनी गांड किसी कुत्ते की तरह हिला हिलाकर मरवाने को आतुर हो रही थी।

उसकी गांड में उंगली को ठेलते हुए मैने अपना मोटा लंड जैसे उसकी चूत के दरावजे पर रखा, वो चिल्ल्लाई, चोद दो मुझे। कमान। मैने एक जोरदार धक्का दिया और चूत के कोरों को चौड़ा करता हुआ लंड चाची के अंदर नेस्तनाबूद होता चला गया।

धकपक पकापक और जोरदार तरीके से उसको चोदते हुए मैने झुककर उसके बड़े चूंचे पकड़ लिये। वो बोल रही थी, ‘तुम सिर्फ हमारे हो, बोलो हमारे हो ना।‘

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मैने कहा हां चाची मैं सिर्फ तुम्हारा ही हूं, मुझे बस कभी कभी भाभी की चूत भी दिलाते रहियो। वो बोली, मुझे चोदोगे तो उसकी चूत भी मिलेगी, चोदने को। बस आज मैने चाची को वो जन्नत दिखाई कि वो सारे गम और तनाव भूल गयी। लंड को जरा तिरक्षा करके मैने चोदना शुरु किया तो चूत की दीवालों को छीलता हुआ मेरा लौड़ा, दनादन उसको नये नये मजे देता रहा। फिर इसी तरह एंगल बना बना कर चोदता रहा।

जब चुद चुद कर के उसकी चूत से पानी आने लगा, तो मैने झटके तेज कर दिये। दनादन पेलते हुए, मैने अपना लंड खींचा कि उसके छेद से हलाहल पानी गिरने लगा। मैने अब उसके चूत के पानी के रोक कर के उसकी गांड पर मला, और उंगली कर के अपना लंड गांड के छेद पर घुसाया और दबाकर फिर अंदर ठेलने लगा। लंड एकदम से सटा सट उसकी टाईट गांड में घुसने लगा। दना दन पेलते हुए जोरों से मैने उसकी गांड का बैंड बजाना शुरु कर दिया। उसकी तो हवा निकल गयी। पांच मिनट तक चोद कर मै अन्दर ही झड़ गया। आज चाची की चटोरी चूत तृप्त थी।