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मैं जीतू, अपने भैया-भाभी के साथ कानपुर में रहता हूँ। मॉम, डैड और एक बहन  भी है जो लखनऊ में रहते हैं। मेरी एज 18 साल है और भाभी की एज करीब 24 साल की है।
भैया रेलवे में मोटरमैन हैं। सुबह 5 बजे ड्यूटी जाते हैं और अल्टरनेट डे घर आते है। मैं अभी 12th की पढ़ाई कर रहा हूँ।
भाभी पे मेरी नज़र उस दिन से ही थी जिस दिन मैंने उन्हें एक बार सुबह भैया के जाने के बाद अर्धनग्न अवस्था में सोता हुआ देख लिया था। उन्होंने घुटनो तक वाली शार्ट नाइटी पहनी थी जो जांघो के ऊपर सरक गयी थी और उनकी गुलाबी रंग की रेशमी पैंटीज दिखाई दे रही थी।
भाभी मुझसे खुल कर बात करती है। खुली हुई है इसलिए बीच-बीच में कभी कभी डबल मीनिंग बातें कर के मेरे से मज़ाक भी कर लेती है। अब तक तो मैं हमेशा शरमा के “तुम जीत गयी, भाभी” कह कर उनके डबल मीनिंग मज़ाक को ख़त्म कर दिया करता था । लेकिन उन्हें अधनंगी अवस्था में देखने के बाद मेरा इरादा बदल चुका था। अब मैं उनको चोदने का मौका निकालने की फ़िराक में रहने लगा था।
एक बार उस दिन जब भैया घर नहीं आने वाले थे, मैं भाभी को मूवी दिखाने ले गया। गरम टाइप की इंगलिश मूवी! वापसी में बाहर ही डिनर कर के घर आते-आते हमें करीब 11 बज गए। इस पूरे ट्रिप में मैंने भाभी को कई जगह अनगिनत बार टच किया। बूब्स पे, कूल्हों पे, उनकी साड़ी से झांकती हुई नंगी, गोरी, चिकनी और गदराई हुई कमर पे भी टच किया। भाभी ने सब कुछ जानते हुए भी कोई स्ट्रेंज लुक नहीं दिया था।
मैं जानता था कि वो एक कुंवारी-काल से ही चुदी-चुदाई सेक्सी औरत है। वो ज़रूर जान गयी होंगी की आज उनके देवर के अंदर का कामुक मर्द जाग उठा है। मैंने पूरी मूवी के दौरान भी उनके अंग-अंग को अचानक हुए हादसे के समान छूते हुए मज़ा लिया था।
मूवी से रेस्टोरेंट आते समय बाईक पे पीछे बैठे-बैठे उन्होंने जबरन कई बार अपने बूब्स मेरी पीठ पर कस कस के दबाए। वे लगातार मेरी गर्दन को ऑलमोस्ट किस करते अपनी गर्म साँसे मेरी गर्दन पे छोड़ रही थीं। मेरा लंड एकदम टाईट हुआ जा रहा था लेकिन बेबसी में ठंडा पड़ जाता था।
रेस्टोरंट में भोजन करते समय भाभी एकदम मेरी गर्लफ्रेंड जैसा बिहेव कर रहीं थीं। भाभी मामला समझ चुकी थी और गरम हो रही थी। लाउंज में अँधेरे में हम दोनों चिपक के बैठे थे। बस नाम मात्र की दूरी दोनों ने मेंटेन रखी थी। बीच में एकबार भाभी टॉयलेट जा कर आ गयी और फिर साथ में बैठ गयी। बियर आ चुकी थी। मैंने 2 ग्लास बनवाये थे। भाभी ने पीने से मना किया लेकिन मैंने उन्हें पिला ही दी। हलके सुरूर में दोनों वहाँ से घर के लिए निकले। अब भाभी की लिपटा-लिपटी और सख़्त हो गयी थी। नशे के नाम पे भाभी ज़ोर से लिपट रही थीं।
घर आते ही भाभी सोफे पे लेट गयी। मैं नहाने चला गया। फ्रेश हो कर आया तो देखा भाभी अपने कमरे में चली गयी थी। मैंने कहा “फ्रेश हो कर सो जाओ भाभी! गुड नाईट!” मैं अपने कमरे में चला गया। लेकिन मुझे नींद कब आनेवाली थी!
कोई 20 मिनट बाद मुझे भाभी के उल्टी करने की आवाज़ आने लगी। मैं दौड़ कर टॉयलेट की तरफ भागा और भाभी के पास पहुँच कर उनकी पीठ सहलाने लगा। मैंने महसूस किया कि उन्होंने नाइटी के भीतर ब्रा नहीं पहना है- शायद नीचे चड्ढी भी नहीं! मेरे लंड का कड़कपन और भी बढ़ने लगा।
मैंने भाभी से कहा- ओह्हो भाभी! आई एम वेरी सॉरी! मैंने आपको जबरन बियर पिला दी।
भाभी कुछ नहीं बोली उल्टी की और कुछ देर में शांत हो कर ब्रश किया और हाँथ मूँह धोकर संवर गयी।
मैंने 2 ग्लासेस में कोल्ड ड्रिंक निकाला और कहा- “ये पी लो थोडा अच्छा फील करोगी। फिर उनकी बांह पकड़ के डाइनिंग टेबल पे बैठ दिया। भाभी शांत थी। मुस्कुरा रही थी। बोली अब सब ठीक है। कोल्ड ड्रिंक का ग्लास हाँथ में लिए मैंने भाभी को उठाया और कहा; चलो 2-3 राउंड टहल लेते है; यहीं हॉल में। हम साथ में वाक कर रहे थे जैसे किसे बगीचे में राजा रानी करते होंगे किसी ज़माने में। भाभी ने ब्लैक रंग की नाइटी पहनी थी। फिर मैं भाभी को उनके रूम में ले जा कर उनके पास बैठ गया।
मैंने पूछा: सर में तो दर्द नहीं  हो रहा ?
भाभी: नहीं…माइल्ड सा है बस..ख़ास नहीं।
मैं बेड से खड़ा हुआ और भाभी के सर पे हाँथ फेरते हुए कहा “भाभी सच में मुझे नहीं पता था कि आप एक ग्लास बियर भी नहीं झेल पाओगी वरना पिलाता ही नहीं।”
भाभी: मैंने पहले कभी पी नहीं है।
मै: तो आज क्यों पी ली ?
भाभी: (मुझे हाँथ पकड़ के अपने पास बैठाते हुए बोली) तुम्हारे कहने से तो मैं जहर भी पी लूँगी।
मैं: अरे वाह क्या बात है भाभी आपकी!
भाभी: आज की शाम बहुत अच्छी थी।
मैं: हाँ भाभी..बहुत अच्छी शाम थी।
भाभी: मैं तुम्हारे साथ सोना चाहती हूँ।
मैं: चौंकते हुए कहा- क्या? अब आपकी शरारत शुरू हो गयी डबल मीनिंग वाली।
भाभी: हँसते हुए बोली- अरे राजा जी! अपने देवर से मज़ाक नहीं करूंगी तो मर ना जाऊंगी।
मैं: ओह भाभी ये क्या मरने वरने की बात।
भाभी : मेरे एकदम पास आते हुए बोली- नहीं करूंगी मरने की बात। लेकिन मेरी किसी को फ़िकर है भी तो नहीं।
मैं: भाभी ये क्या कह रही हो! हम सब आपको कितना प्यार करते हैं!
भाभी ने अब अपना सर मेरी गोद में रख लिया था और आँखे मूंदे-मूंदे मुझसे धीमी आवाज़ में बात कर रही थी; मानो सोने वाली हो और मैं भाभी के बालो को सर के सिरे से सहला रहा था मानो भाभी को सुलाना चाहता हूँ।
भाभी : सब मतलब, तुम भी मुझे प्यार करते हो ?
मैं: हां भाभी । क्यों आपको शक है मेरे प्यार पे?
भाभी: नहीं मुझे शक तो नहीं है, न ही कोई प्रॉब्लम है। बस तुम्हारे भईया को शायद ये पसंद न आए।
मैं: भाभी मेरा मतलब “वो” वाले प्यार का नहीं था।
भाभी: हँसते हुए बोली। प्यार में ये वाला या वो वाला भी होता है ?
मै: भाभी जाने दो न! आपसे कौन जीत सकता है बातों में?
भाभी: मेरा हाँथ पकड़ते हुए बोली- कोशिश तो करो! हो सकता है जीत जाओ सब बातों में।
मैं: कौन सी सब बात ?
भाभी: बताऊँ?
मैं: बताओ न!
भाभी: सोच लो। बाद में डर के भाग मत जाना।
मैं: भाभी प्लीज़ ये सस्पेंस ख़त्म कर दो। बताओ कौन सी बात।
भाभी ने मेरा हाँथ पकड़ कर अपने बूब्स पे रख दिया और अपबे बूब्स पे मेरे हाँथ को प्रेस करते हुए कहा “इस बात की बात कर रही हूँ, भोले भंडारी”!
मै काँप सा गया था भाभी के बूब्स को पकड़ कर। ये मेरे लिए अप्रत्याशित था। इसलिए मैं सहम गया और अपना हाँथ हटाने की झूठी और अनचाही कोशिश करने लगा।
भाभी ने हाँथ को और ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे बिलकुल अपने ऊपर को ले कर आँखों में आँखे डालते हुए बोली- “क्या हुआ ? ये बात नहीं है तुम्हारे मन में?”
मैंने कुछ नहीं कहा और आँख झुका दी।
भाभी मेरे चेहरे को पकड़ती हुई बोली “बोलो न! क्या मैं नहीं हूँ तुम्हारे दिल में? तुम्हे मेरी चाहत नहीं है ?”
मैंने फिर कुछ नहीं कहा तो भाभी ने मुझे पूरी तरह से खींच कर