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मैं बनी सेठ जी की रखैल

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हैल्लो दोस्तों, में एक घरेलू औरत हूँ और मेरी उम्र 26 साल है, मेरी शादी को दो साल हो गये है और मेरे पति एक फेक्ट्री में नौकरी करते है और उनकी नौकरी शिफ्ट में होती है, वो शराब के आदी भी है और शाम को कभी कभी तो पीकर भी नौकरी पर जाते है और वहां पर वो मशीन ऑपरेटर का काम करते है. उनकी पहचान के एक सेठ जी है जो कभी कभी हमारे घर पर आते है और वो दोनों एक साथ में बैठकर दारू पीते है. सेठ जी हमेशा मेरे जिस्म जो देखते है और जब भी में उनके सामने आती हूँ तो में हल्की सी स्माईल दे देती हूँ तो वो खुशी से फूले नहीं समाते. दोस्तों मेरी पढ़ाई B.A. तक हुई है, लेकिन फिर भी में कोई नौकरी नहीं करती और सेठ जी हमेशा मुझसे कहते है कि अगर तुम कहोगी तो में तुम्हे कहीं नौकरी पर लगवा दूँगा, लेकिन मेरे पति राकेश नहीं चाहते थे कि में नौकरी करूँ, इसलिए में अब तक किसी भी नौकरी पर नहीं जा पाई.
दोस्तों मेरे जिस्म का कलर बहुत गोरा है, मेरे बूब्स और गांड का साईज़ भी बड़ा है और चेहरा भी दिखने में बहुत ही अच्छा एकदम मासूम सा है, होंठ बिल्कुल गुलाबी छोटे छोटे से है, मेरे फिगर का साईज 36-30-36 है और जब भी में किचन से चाय लेकर आती हूँ और उन्हे चाय देते समय सेठ जी हमेशा मेरे बूब्स पर नज़र रखते है और जब भी वापस किचन की तरफ जाती हूँ तो वो मेरी गांड को ताकते है, लेकिन मेरे पति उनसे कुछ भी नहीं कहते क्योंकि वो जानते है कि उन्होंने सेठ जी को कुछ भी कहा तो वो उन्हे नौकरी से हटवा देंगे. तो एक दिन की बात है जब मेरे पति दारू पीकर नौकरी पर गये और फिर बीच रास्ते में उनका किसी से झगड़ा हो गया और फिर उन्होंने जिससे ज्यादा झगड़ा होने पर उसकी कार के शीशे तोड़ दिए और घर पर वापस आकर छुप गये, में भी उनकी यह हालत देखकर बहुत डर सी गई और मैंने तुरंत कॉल करके सेठ जी को बुला लिया. तो सेठ जी ने मेरे पति से कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाओ में उन लोगो को संभलता हूँ और उसी समय उन्होंने अपने फार्म हाउस पर मेरे पति को कुछ पैसे देकर आउट ऑफ स्टेशन भेज दिया.
तो उसके कुछ ही घंटो के बाद जिनका मेरे पति से झगड़ा हुआ था वो लोग हमारे घर पर मेरे पति को मारने के लिए आए, लेकिन फिर सेठ जी ने उन्हे समझाया और उनके नुकसान की भरपाई के लिए उन्हे 20,000 रुपए दे दिए और में यह सब देखकर रो रही थी, लेकिन कैसे भी समझा बुझाकर सेठ जी ने उन्हे रुपए देकर वापस लौटा दिया और उन लोगों के जाने पर मेरी जान में जान आई. तो सेठ जी मेरे पास आए और कहने लगे कि कोई बात नहीं यह सब होता रहता है और तुम क्यों डरती हो? अभी में हूँ ना तुम्हारा ध्यान रखने के लिए, लेकिन मेरी आँख से आँसू रुक नहीं रहे थे. तो यह सब देखकर सेठ जी ने मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख दिया और फिर मेरे आँसू पोंछने लगे, मेरा सर उन्होंने अपने सीने पर रख लिया और मेरी पीठ सहलाने लगे.
मुझे भी बहुत अच्छा महससू हो रहा था, लेकिन कुछ देर के बाद अब उनका हाथ मेरी पीठ पर से धीरे धीरे नीचे जा रहा था और अब उनका हाथ मेरी गांड पर था और वो बहुत प्यार से मेरी गांड को सहलाने लगे और अब उनका एक हाथ मेरी गांड को सहला रहा था और उनका तना हुआ लंड एकदम मेरी चूत के ऊपर था और में समझ गई कि सेठ जी मुझे चोदना चाहते है. फिर में मौका देखकर उनसे थोड़ सा अलग हो गयी और वो भी नॉर्मल हो गये और उन्होंने अपनी जेब से कुछ रुपय निकालकर मेरे हाथ में दे दिए और कहा कि यह तुम घर खर्च के लिए रखो और भी कोई चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझसे बे झिझक माँग लेना. तो में महसूस करने लगी कि यह आदमी मेरी इतनी मदद कर रहा है और बहुत पैसे वाला भी है और मुझे पर जान भी छिड़कता है और फिर मैंने सोचा कि क्यों ना में इसे एक बार अपनी चूत पर सवार होने दूँ और सेठ जी को मेरी चूत का इतना मज़ा दूँ कि वो मेरी चूत के बिल्कुल दीवाने हो जाए और फिर वो मेरे बिना रह ना सके और फिर हमारी पैसे की समस्या भी खत्म हो जायेगी और मेरे पति जो मुझे ठीक से चोद भी नहीं पाते थे तो मेरी चुदाई की समस्या भी खत्म हो जायेगी.
फिर मैंने सेठ जी से कहा “सेठ जी आपने हमारी इतनी मदद की है कि में आपको बता नहीं सकती और अब में आपका यह एहसान कैसे उतारूंगी? तो सेठ जी बोले कि इसमें एहसान की क्या बात है? तुम्हारी मदद करना तो मेरा काम था और में तुम्हारी मदद नहीं करता तो फिर कौन करता? तो मैंने कहा कि सेठ जी आपने हमारे लिए बहुत कुछ किया है और अब मेरे पास आपको देने के लिए सिर्फ़ यह मेरा जिस्म ही बचा है.
फिर मैंने इतना कहकर अपनी सारी का पल्लू थोड़ा सा नीचे गिरा दिया और कहा कि आप अगर चाहे तो में आपको खुश कर सकती हूँ. तो मेरे मुहं से यह बात सुनकर सेठ जी से रहा नहीं गया और वो बोले कि मुझे भी तुम बहुत पसंद हो इसलिए तो में तुम्हारी इतनी मदद कर रहा हूँ और ऐसे सिर्फ़ पल्लू हटाने से क्या होगा? दोस्तों में तो बिल्कुल बेशरम ही हो चुकी थी, मैंने सेठ जी से कहा कि सेठ जी मेरा पल्लू हटाना यह तो सिर्फ़ एक शुरुवात है. आप बेडरूम में चलिए तो सही, फिर देखिए में आपके लिए कैसे नंगी होती हूँ? और मेरे इतना कहते ही सेठ जी ने झट से मुझे अपने गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया और फिर मुझे नंगी करने का काम शुरू कर दिया.
उन्होंने जल्दी से मेरी साड़ी को खींचकर उतार दिया और एक कोने में फेक दिया और फिर ब्लाउज को एक जोरदार झटका देकर फाड़ दिया, पेटिकोट का नाड़ा खोलकर उसे नीचे खींच दिया और उसे भी दूसरे कोने में फेंक दिया, मेरी ब्रा और पेंटी को भी एक ही मिनट में खींचकर उतार दिया.
फिर सेठ जी ने कहा कि अरुणा तुम अब अपनी दोनों टाँगे खोल दो ज़रा आज हम भी तो देखे कि राकेश ने तुम्हारी चूत का ख्याल रखा है या फिर चोद चोदकर तुम्हारी चूत को बड़ा कर दिया है और अब में पूरी तरह से उनके सामने बिल्कुल नंगी थी, लेकिन में बहुत खुश थी कि आख़िरकार मैंने सेठ जी के लिए अपने दोनों पैरों को खोल दिया औ