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दोस्त की मकान मालकिन बनी मेंडकी - वो अपनी चुत के अंदर तक मेरे लंड को ले जाने लगी

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नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आपको अपने दोस्त की माकन मालकिन के साथ चुदाई के सम्बन्ध केबारे मिएँ बताने जा रह हूँ जिन्हें सुन पक्का आप की आकंशायें भी उत्तेजित हो उठेंगी | दरसल बात यूँ थी की मेरा दोस्त राजीव ठाकुर अक्सर ही काम पर जाते वत अपनी माकन मालकिन की बुराईयां किया करता था की वो किसी ना किस बात पर उसकी खिंचाई करती रहती है | एक दिन मैंने भी सोच लिया की क्यूँ ना एक बार इसकी माकन मालकिन से ही मुलकात की जाये की असली फसाद का पता चला चले | मैं जब उसकी मकान मालकिन से बात की तो पता चला की उसकी पति अब इस दुनिया में नहीं था और वो अकेली ही अपन अगुजारा चला लिया करती थी और जब कभी कभार मेरे दोस्त को उत्तेजित किया करती तो ठुकरा दिया करता जिसपर वो उसे किसी ना कसीस बात पर परेशान किया करती साथ ही खुद भी बड़ी परशान रहा करती |

मैंने इस बात का हल भी अपने दिमाक मैं निकाल चूका था क्यूंकि वैसे भी मैं चुत – भुसयी का इतना सहुकिन हूँ तो एक मस्त जवान औरत को चोदने में तो मेरा ही फाइदा है इसीलिए मैं सोचा की अबसे मैं अपने दोस्त के मकान में रहूँगा और वो मेरे मकान में | अगले दिन से मकान मालकिन मुझे देख बहुत कुश हुई और मुझे उत्तेजित करने के लिए मेरे आधे काम तो यूँही कर दिया करती | मैंने उस पर जब कपड़े धोते – हुए देखा तो उसके खोरे बदन और मोटी छबीली गांड को देख मैं भी लट्टू हो लिया | मैं आदर से अब उसकी चुदाई करने के लिए जैसे तडपने लगा था | रात को मकान मालकिन मेरे पास आई और चाय देकर मेरे पास ही बैठ गयी और इस बार मैं भी उसके एक दम करीब बैठा हुआ था |

कुछ पल में उसके हाथ मेरी जाँघों पर लहरा रहे थे जिन्हें पहले मैंने नज़रंदाज़ किया पर मेरे लंड के उभार ने मेरे अंदर चल रही सारी हलचल उसे बता दि | अब वो बैठ – बैठे मेरे लंड को और संवार रही थी जिससे मैं भी कुब गरम होता हुआ चला गया | मैं अपने के हाथस एउसकी पीठ को सहला रहा था और उसने मेरी पैंट की ज़िप भी खोल दि अब | कुछ ही देर में मैं उसके होठों को चूसने लग गया और धीरेधीरे उसके चुचों को मसलने लगा | उसने भी अब अपने अपनी पूरी साडी को उतार दिया और ब्लाउज खोल मेरे सामने ही बात गयी | मैंने उसके ब्रा को खोल उसके चुचों को दबाते हुए उनके साथ मस्त में चूसता हुआ खेल रहा था और वो नीचे से मेरे लंड को चूस रही थी | अब मैंने कुछ ही देर मैं उसके पेटीकोट को भी उतार दिया पैंटी के अंदर हाथ डालने लगा | अब तो उससे भी रुका ना गया और उसने खुद ही अपनी पैंटी उतार दिया और उसकी मोटी पिलपिली चुत के उप्पर अपनी उँगलियाँ फेरने लगा |

मैंने काफी देर उसकी चुत में इसी तरह खुजली की और उसके बाद मैं उसके उप्पर चड गया और अपने लंड को उसकी की फांकों के बीच ही अपने हाथों से घुमाने लगा | मैंने लंड को घुमाते हुए अचनक से उसके चुत के अंदर ही पेल दिया जिससे वो काँप उठी ओर आहाह्ह अह्हहहहाहा करके अपनी गांड को हिलाने लगी | वो अपनी चुत के अंदर तक मेरे लंड को ले जाने लगी और मैं भी मस्त में उसकी चुत चोदे जा रहा था | मैंने अब उसे कुछ मेंडकी की तरह झुका दिया और प्पीचे उसके गांड के छेद को चाटते हुए उसकी फिर से नयी मुद्रा में चुत मारने लगा | हम इसी तरह का खेल पूरी रात भर खेलते रहे और मैं अंत मैं भरी सुबह उसकी चुत में झड भी गया | उसने सुबह मुझे खाना बनाकर दिया और अब हम रोज ही चुदाई काखेल नयी मुद्रा में खेलते हैं |