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बैलगाड़ी की हसीन यात्रा मे मेरी जबरदस्त चुदाई - अपना ब्लाउज खोल कर एक चूची मेरे मुँह में घुसेड़ दी

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यह कहानी मेरी एक दोस्त प्रेरणा की व्यक्तिगत ज़िंदगी से से भी बहुत कुछ मिलती जुलती हुई है, इसलिए ख्याल आया कि अपने सभी दोस्तों की ज़िंदगी में भी उनकी यादों के सहारे, दस्तक देकर देखूँ कि उन्हें भी अपनी ज़िंदगी की कोई मज़ेदार घटना याद है या नहीं?
आज की कोल्हू के बैल जैसी व्यस्त शादीशुदा ज़िंदगी में सोचने का समय, खास तौर से अपने बारे में शायद ही कभी किसी को मिलता हो।
ऐसे में उसको उसकी पुरानी ज़िंदगी से उसको रूबरू करने की चेष्टा की दिशा में यह एक अनूठा प्रयास है और उम्मीद है कि आप इस कहानी के माध्यम से, हो सके तो अपने बचपन या उसके बाद और शादी से पहले की ज़िंदगी में झाँकने और हसीन लम्हों को याद करके फिर से मौकों को तलाश कर नए तरीकों से जिंदगी को नमकीन करते हुए जीने का प्रयास करेंगे।
मैं उस वक़्त शायद किशोरावस्था में रहा होऊँगा जब एक बार किसी की शादी के सिलसिले में मामा के साथ, गुलाबी जाड़े के मौसम में ननिहाल के गाँव जाने का मौका मिला क्योंकि बाकी लोग पहले ही पहुँच चुके थे।
बस से 20 मील जाने के बाद, ज़िंदगी में पहली बार बैलगाड़ी का सफर करने का मौका मिला जिससे करीब 5 मील यानि करीब 5-6 घंटे, अंधेरी रात में जंगल जैसे माहौल में कुछ और सवारियों के साथ बैलगाड़ी शेयर करनी पड़ी। टॉर्च की लाइट में बैलगाड़ी में सबसे पीछे कोने में सिमट के बैठना पड़ा क्योंकि बैलगाड़ी में पहले से ही 3 सवारियाँ थी, दो लंबाई में पैर फैलाए सो रही थी, तीसरी पैर फैला कर बाकी जगह में बैठी हुई थी।
चारों तरफ घनघोर अंधेरा, हल्की सर्दी का मौसम और उस पर खुला आकाश और बैलगाड़ी के आगे-पीछे कुछ लोग डंडे लिए हुए एवं एक आदमी लालटेन लेकर रास्ता दिखाता हुआ आगे आगे चल रहा था ताकि कोई भी अकेलापन या डर महसूस न कर सके।
करीब आधे घंटे तक, ठंड में एक ही पोजीशन में बैठने से पैर, कमर आदि में दर्द होने लगा था इसलिए धीरे से पास बैठी सवारी से कुछ दाएँ-बाएँ खिसकने के लिए रिक्वेस्ट भी की पर न ही किसी ने कोई जवाब दिया न ही उसका कोई असर होता हुआ दिखा।
थोड़ी देर बाद मै कुछ जगह बनाने की कोशिश करने वाला ही था कि अचानक एक नाजुक से हाथ ने मेरे पैर के घुटने को दबाना शुरू कर दिया।
मैं कुछ कहने कि सोच ही रहा था कि वह नाजुक सा हाथ मेरे नेकर के ऊपर महसूस हुआ। यह मुझे अच्छा भी लगा और डर भी लगने लगा कि कहीं किसी ने देख लिया तो मेरी शामत आ जाएगी।
लेकिन मेरे पीछे दूर-दूर तक भयंकर अंधेरा था, हाथ को हाथ नहीं दिखाई दे रहा था।
मैंने भी हिम्मत दिखते हुए नींद में होने के बहाने उस हाथ पर अपना हाथ ऐसे रखा कि बिना मेरा हाथ हिलाए वह हाथ कुछ कर ही न सके!
कुछ ही क्षणों में उस हाथ ने मेरे हाथ को हिलाया।
जब मेरा कुछ रिएक्शन नहीं मिला तो लगा जैसे उस नाजुक हाथ को आजादी मिल गई। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे बैलगाड़ी में हम-दोनों के अलावा सब सो रहे थे।
उस नाजुक हाथ वाली ने किसी आदमी को आवाज़ लगाई और मेरी गान्ड फट गई, लगा जैसे अब वह मुझे पिटवाने वाली है, मैंने फौरन ही अपना हाथ हटा लिया पर उसने मेरा हाथ उठा कर चूम लिया, तब तक, शायद जिस आदमी को आवाज दी गई थी वो लालटेन लिए हुए वहाँ आ गया और पूछा- क्या हुआ?
इस बीच मैं आने वाले आदमी की तरफ पीठ करके सोने का नाटक करने लगा, थोड़ी सी आँख खोल कर मैंने लालटेन के प्रकाश में देखा की छोटी सी गाड़ी में मेरे बगल वाली महिला, गोद में छोटा सा बच्चा, गोरी सी करीब 25-27 साल की होगी। बाकी सब महिलाएँ चादर ओढ़े सो रही थीं।
उस औरत ने आने वाले आदमी से एक बीड़ी और माचिस मांगी, और फिर 2 बीड़ी सुलगा कर एक उस आदमी को दी और एक से खुद कश लगाए।
उस आदमी ने लालटेन उठाकर गाड़ी में देखा और फिर उस औरत से कहा कि वह भी मुझे खिसका कर जगह बना कर मेरे और उसके बीच में बच्चे को लिटा कर खुद भी चादर ओढ़ कर लेटने की कोशिश करे क्योंकि सर्दी में बैल भी धीरे-धीरे चल रहे हैं, ऊपर से उल्टी हवा चल रही है।
वह औरत बोली- तू भी आकर साथ लेट जा और मुझे चूस ले!
इस पर उसने कहा कि घर पहुँचने तक तो सबर कर ले चोदी!
कुछ देर, बीड़ी खत्म होने तक, दोनों बात करते रहे और फिर हँसता हुआ आगे अपने साथियों के पास चला गया।
उन दोनों की ऐसी बातें सुन कर मेरा लंड गर्म हो गया और जैसे ही वह आदमी अपने साथियों के पास पहुँचा, उस औरत ने जो कि लालटेन के प्रकाश में मुझे अच्छी तरह से देख चुकी थी, अपना हाथ मेरे नेकर के अंदर डाल कर लंड पकड़ लिया।
अब तो मैंने भी झिझक छोड़ दी और उसको अपने ऊपर खींच कर चिपका लिया और उसके कान में फुसफुसाया कि वह भी मेरे साथ लेट जाए।
फिर उसने गाड़ी में पड़ी हुई फूस के ऊपर, एक साइड में बच्चे को लिटाया और खुद मेरे व बच्चे के बीच में लेट गई, तथा मुझे बताया कि गाड़ू में सब सो रहे हैं क्योंकि गाँव में सब जल्दी सो जाते हैं, तो मैं बिल्कुल निश्चिंत रहूँ।
और उसने मेरे होठों को चूम लिया, दुबारा चूमा और फिर चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आने लगा था।
उसने अपना शाल खोल कर हम तीनों पर डाला और अपनी धोती को कमर के ऊपर उठा कर नंगी हो गई तथा दूसरा हाथ मेरे सिर के नीचे डाल कर मुझे अपने से चिपका लिया और अपना ब्लाउज खोल कर एक चूची मेरे मुँह में घुसेड़ दी।
‘म्मम्म… म्मम्मह…’ मुझे पता नहीं क्या हो रहा था, यह मेरी ज़िंदगी का पहला सेक्स का अनुभव था और मैं चूची चूस रहा था, दूध भी मेरे मुँह में जा रहा था।
वह मेरे होठों को चूस रही थी एवम् दूसरे हाथ से लंड सहला रही थी। मैं उसकी नंगी टांगों के बीच में दबा हुआ अजीब सी सिहरन महसूस कर रहा था, बैलगाड़ी में हूँ या घर म