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मेरी जिंदगी में आया पराया मर्द - जब भी वो मुझे चोदता, घोड़ी जरूर बनाता

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मैं स्वयं मालिनी मेरी उम्र अब 27 साल, रंग गोरा, कद 5’6″, वजन 55 किलो है, दिखने में सेक्सी दिखती हूँ, मुझे देख कर किसी का भी दिल मुझ पर आ सकता है, कोई भी मुझे बांहों में लेने को मचल सकता है, मेरे उरोज मध्यम आकार के हैं, और चूतड़ मोटे हैंl
रमेश मेरा पति है, जिससे मेरी शादी आज से 4 साल पहले हुई थी, इनका रंग भी गोरा है, 6′ वजन 68 किलो है, अच्छे हैंडसम आदमी हैं, इनकी उम्र 29 साल है।

माही मेरी दो साल की बेटी है।

हेमंत- यह मेरी जिंदगी में आया पराया मर्द है, यह करीब 5’8″ लंबा, मोटे शरीर का आदमी है, इसका रंग सांवला है, वजन 70 kg है, इसकी उम्र करीब 35 साल है, यह बैंक में मैंनेजर के पद पर है।

रजनी- हेमंत की बीवी है, इसका रंग भी गोरा है, यह भरे भरे शरीर वाली कुछ नाटी सी औरत है, इसके स्तन बड़े बड़े हैं और भारी चूतड़ हैं। इसकी उम्र करीब 30 साल है।
सोनू- रजनी और हेमंत का 6 साल का बेटा है जो दूसरी कक्षा में है।

मेरे पिताजी का स्वर्गवास बहुत पहले ही हो चुका था जब मैं बहुत छोटी थी। मेरी माँ ने मुझे बहुत मुश्किल से पाला था, और केवल बारहवीं तक पढ़ाया था, उस समय मेरी उम्र 18 बरस की थी।

मेरी माँ मुझे आगे पढ़ाने की जगह मेरी जल्दी से शादी कर देने की सोच रही थी, पर गरीब बिन बाप की बेटी को अच्छा लड़का मिलना कठिन था, इस तरह दो साल निकल गए, मेरा शरीर भर गया था, जवानी की महक मेरे बदन से निकलने लगी, मेरी भी तमन्ना होने लगी कि कोई लड़का बाहों में भर कर मुझे चोदे।

आते जाते लोगों के फ़िकरे मुझे सुनाई पड़ने लगे, क्या लड़के, क्या अधेड़ सभी मुझे घूरते थे, ऐसा जान पड़ता था कि बस खा ही जायेंगे पर अपनी माँ की इज्जत और परेशानी को ध्यान में रखते हुए मैंने कभी किसी को लिफ्ट नहीं दी, मैं एक शरीफ लड़की की जिंदगी जी रही थी।

इस बीच एक दो शादी के रिश्ते आये, पर कुछ समय बाद एक लड़का अपने माँ बाप के साथ मुझे देखने आया इस लड़के का नाम रमेश था। इसके पिता रेलवे विभाग में काम करते थे, लड़का देखने में सुन्दर था उसके पिता ने मुझे पसंद कर लिया और बगैर दहेज़ के शादी के लिए हाँ कर दी। इन लोगो ने बताया कि रमेश किसी बड़ी कंपनी में काम करता है।
मेरी माँ बहुत खुश हो गई, उसके सर से एक जिम्मेदारी उतरने वाली थी। हम लोग सोच रहे थे कि काम बड़ी आसानी से हो गया, उन लोगों को शादी की जल्दी थी, सो मेरी शादी एक महीने के भीतर हो गई।

मैं अपने ससुराल आ गई। मैं बहुत खुश थी, मुझे एक सुन्दर और हैंडसम पति मिला था वह मुझे बहुत प्यार करता था। मुझ पहली बार चोदने का सौभाग्य मेरे पति को ही मिला।
पर मेरी असली परेशानी अब शुरू होने वाली थी, पति मुझे साथ लेकर उस शहर में आया जहाँ वो कंपनी में काम करता था। उसकी कमाई बहुत ज्यादा नहीं थी। हम एक छोटे से किराये के कमरे में रहने लगे पर मैं बहुत खुश थी, मुझे पति का पूरा प्यार (चुदाई) मिल रही थी।

तभी मुझे पता चलने लगा कि मेरे पति को शराब पीने की बुरी आदत है, वो तम्बाकू का गुटका भी खाते थे। पहले तो वो कुछ छिपाते थे, पर जब उनको भी पता चल गया कि मैं जान चुकी हूँ तो मेरे सामने ही शराब चलने लगी। उनके दोस्त भी शराबी थे वो उनके साथ शराब पीते थे और देर रात को घर आते थे।

मैं परेशान रहने लगी, कम्पनी भी कभी जाते थे, कभी नहीं। मैंने अपने ससुर से इस बात की शिकायत की पर उन्हें यह सब पहले से ही पता था, उन्होंने फिर भी रमेश को डाँटा, फटकार लगाई।

कुछ दिन ठीक रहने के बाद फिर वो ही बात, कमाई कम थी, ऊपर से शराब, घर चलाना मुश्किल हो गया। मेरे ससुर पैसे भेज देते थे पर उसमें से पति शराब में उड़ा देता था। मेरी माँ ने यह सुना तो सर पीट लियाl

रमेश की एक बात अच्छी थी, वो मुझे चाहता बहुत था। अब मुझे समझ में आया कि क्यों ये लोग बगैर दहेज़ के शादी के लिए राजी हो गए, और क्यों इन्हें शादी की जल्दी थी।
मेरे ससुर बार बार मुझे कहते- बेटी, किसी तरह इसे सुधार दो !
पर मैं क्या करती !
किसी तरह जिन्दगी चल रही थी, आये दिन कर्ज मांगने वाले आने लगे, इस बीच मैं गर्भवती हो गई। मुझ ससुर ने अपने पास बुला लिया। माही को जन्म देने के 3 माह बाद मैं वापस पति के पास आई तो फिर वही कहानी चालू हो गई।

हमारी बिल्डिंग के सामने एक छोटा बंगला था, जिसमें एक बैंक मैनेजर रहते थे जिनका नाम हेमंत था जो अपनी पत्नी रजनी और बेटे सोनू के साथ रहते थे। वो हमारी कभी कभी मदद क़र देते, उनकी बीवी भी हमारी मदद करती थी।

रमेश को सुधारने के सभी प्रयास विफल हो गए थे। इस बीच रजनी गर्भवती हो गई तो उसने मुझसे कहा- तुम काम में मेरी मदद कर दो तो मैं कुछ पैसे तुम्हें दे दिया करुँगी।
वैसे भी मैं उन लोगों के अहसान में दबी थी, मैं मान गई मैं सुबह से उनके घर चली जाती थी, बर्तन साफ, करना सफाई करना, खाना बनाना और सोनू को स्कूल भेजना ये सब मेरे काम थे।

माही भी यही रहती थी। हम हम लोग खाना भी यहीं खा लेते थे, और रात में अपने घर जाते थे। कुछ दिनों के बाद रजनी डिलीवरी के लिए अपनी माँ के घर गई, मैं हेमंत और सोनू के काम करने लगी।

जब घर पर मैं और हेमंत अकले होते तो मुझे शुरू में डर लगता था कि यह मुझसे शरारत की कोशिश न करे। वैसे तो वो सीधा आदमी था, पर जवान और खूबसूरत औरत पर मर्द की नीयत कब बदल जाये कोई नहीं बता सकता।

कुछ दिन बाद मैं समझ गई, कि यह बस यूँ ही देखता रहेगा जब तक मैं सावधान हूँ, यह कुछ नहीं कर सकता।

कभी कभी मेरे मन में भी चुदास उठती पर मैं अपने आप पर काबू रखे थी।

आखिर मेरी जिंदगी में वो खास दिन आ ही गया, मैं सोनू को स्कूल भेज चुकी थी, हेमंत भी ऑफिस जा चुके थे, माही सो रही थी। मैंने उसे गोद में लिया, हेमंत के घर पर ताला लगाया और अपने कमरे की ओर जाने लगी कि तभी रमेश का एक आवारा दोस्त आया, और बोला- भाभी, रमेश को पुलिस पकड़ कर ले गई है।

मेरे ऊपर बिजली टूट पड़ी, मैंने पूछा- क्या हुआ?

वो बोला- कंपनी में लेन देन को लेकर किसी से मारपीट हो गई है, आप थाने जाकर पता करो !

मैंने माही को एक पड़ोस में दे दिया और थाने जाने लगी, पहली बार थाने जाने के कारण मुझे बहुत डर लग रहा था।

मैं जैसे ही थाने पहुँची, एक सिपाही ने पूछा- क्या काम है?

मैंने कहा- मेरे पति को पुलिस पकड़ कर लाई है।

वो बोला- तेरे आदमी का नाम क्या है?

मैं बोली- रमेश !

“अच्छा वो जो कंपनी में मारपीट में अन्दर है?”

मैंने कहा- हाँ !

मैंने कहा- वो कैसे छुटेंगे?

वो बोला- मैं कुछ नहीं कर सकता, साब से बात करो !

फिर बोला- यहीं खड़ी रह ! मैं बात करता हूँ।

वो मेरे को वहीं खड़ा कर अंदर गया, फिर आकर बोला- चलो साब बुला रहे हैं।

मैं थानेदार के कमरे में जाने लगी, वहीं से मुझे लॉकअप में बंद रमेश दिखाई दिया, वो बहुत उदास था, मुझे देख कर उसके आँखों में आँसू आ गए।

मैं थानेदार के कमरे में चली गई, वह बोला- मारपीट का केस है, आज शनिवार है, कल कोर्ट की छुट्टी है, सोमवार को जमानत करा लेना।

मैं रोने लगी तो वो बोला- साले पहले लफड़ा करते हैं, फिर बीवी को भेज देते है यहाँ रोने के लिए। ऐ ठाकुर ! इस लड़की को बाहर ले जाकर समझा दे।

ठाकुर नाम का एक हवलदार मुझे बाहर एक तरफ लेकर गया और बोला- देख लड़की, अभी केस लिखा नहीं है, एक बार एफ आई आर लग गई तो हम भी कुछ नहीं कर सकेंगे। तू पाँच हजार रुपये लेकर आ जा, साब को बोल कर पार्टी समझौता करा दूँगा। नहीं तो जिंदगी भर कोर्ट और वकील के चक्कर लगाती फिरेगीl

मैं चुपचाप कमरे पर आई, अपने ससुर को फोन किया, वो बोले- बेटा, आज की बस तो निकल गई, मैं कल शाम तक आऊँगा।

मैं वापस थाने गई, मैंने ठाकुर से कहा- पैसे कल तक आ जायेंगे।

वो बोला- ठीक है, मैं कल शाम तक पार्टी से समझौता करा दूंगा, तू अपने आदमी को छुड़ा लेना।

मैं वापस घर आई, मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था, तभी माही को तेज बुखार आने लगा, मेरे पास दवा व डाक्टर के लिए पैसे नहीं थे। तभी खिड़की से देखा कि हेमंत और सोनू आ रहे थे।
मुझे उनके लिए चाय और खाना बनाना था, मैं सोच रही थी कि ये लोग जल्दी कैसे आ गए।
मैं चाभी ले कर हेमंत के घर गई, रोने से मेरी आँखें सूज गई थी।

हेमंत बोला- मुझे ऑफिस में पता चला कि रमेश अंदर हो गया है, तुम बताओ कि बात क्या है?

मैंने हेमंत को सारी बात बता दी, वो बोला- ठीक है, कल छुड़ा लेंगे। तुम मेरे लिए चाय बना दो और खुद भी पी लेना। और खाना भी जल्दी बना दो।

मैंने कहा- माही को बहुत बुखार है।

उसने कहा- ठीक है, चाय पीकर माही को डाक्टर को दिखा देंगे।
मैं बोली- मेरे पास पैसे नहीं हैं।

हेमंत बोला- पैसे की फिकर मत करो, तुम चाय पीकर माही को लेकर आओ, मैं कार बाहर निकलता हूँ।

मैं चाय पीकर तैयार हो कर माही को ले आई, मैं सोनू माही और हेमंत कार से डाक्टर के पास गए, वहाँ बहुत भीड़ थी, काफी टाइम हो गया, दवाई वगैरह लेते करते रात के 8 बज गए।

तभी पुलिस की गाड़ियों की आवाज आने लगी, लोग भागने