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(सिमरन अमित का खड़ा लंड देखाकर बहुत घबराने लगी.. बुआ बोली कि डरो मत बेटी एक ना एक दिन तो सील टूटनी ही है.. )

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हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम अजय है.. मेरी उम्र 23 साल है और में आज आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. लेकिन यह घटना कुछ समय पहली की है। दोस्तों मेरे घर में मेरी माँ नाम कमला, पापा नाम रमेश, में, मेरी छोटी बहन अलका रहते है। हमारे साथ मेरी बुआ नाम मधु और उसकी बेटी सिमरन भी रहते है। उन्होंने अपनी शादी के दो साल बाद ही अपना घर छोड़ दिया और वो वापस हमारे घर पर हमारे साथ रहने आ गई। मेरे फूफाजी मिलट्री में नौकरी करते है और हमेशा ही बुआ और फूफा की किसी ना किसी छोटी मोटी बात पर लड़ाई होती रहती है और इसी बात को लेकर बुआ ने फूफा पर कोर्ट में केस भी किया है। मेरे पापा वन विभाग में एक सरकारी नौकर है.. लेकिन वो बहुत शराब पीते है.. जिसकी वजह से उन्हे कई बार नौकरी के हाथ भी धोना पड़ा और आख़िर में पापा की नौकरी भी चली गई। में उस समय 13 साल का था और 7th वीं क्लास में पड़ता था और उस समय मेरी बहन 10 साल की थी और बुआ की लड़की 9 साल की। नौकरी चले जाने से पापा के पास कोई काम नहीं था और बस उनको तो मज़े मिल गये.. बस वो दिन रात शराब पीने में लगे रहते। उन्हें घर परिवार की कोई चिंता नहीं थी। मेरी बुआ का चाल चलन भी कुछ ठीक नहीं था और इसी वजह से वो अपने ससुराल में नहीं टिक पाई।

फिर एक दिन पापा ने कुछ ज़मीन भी बेच दी जिसकी वजह से हमारे सारे रिश्तेदारों ने हमारे घर आना जाना भी छोड़ दिया.. रिश्तेदार पहले भी उन्हें बुरा बोलते थे और कहते थे कि बुआ को घर क्यों बैठाया है? फिर मुझे धीरे धीरे थोड़ी बहुत बात समझ आने लगी थी। मेरे पापा के 4 दोस्त थे जो सप्ताह के हर शनिवार को शहर से आते थे और उस समय शराब का बहुत दौर चलता था। हमारे घर में दो कमरे है.. एक कमरे में.. में, माँ पापा और बहन सोते है और दूसरे में बुआ और उसकी लड़की सोती है.. लेकिन जब पापा के दोस्त आते थे तो मुझे और अलका को भी बुआ के रूम में सोना पड़ता था। फिर में 15 साल का हो गया और कक्षा 9th में पढ़ने लगा.. अलका 12 साल की हो गई और सिमरन 11 साल की। हमारे गावं में 8 वींth तक स्कूल था.. और 9th के लिए दूसरे गावं में जाना पड़ता था.. जो मेरे घर से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर था। फिर मुझे मेरी उम्र के साथ साथ सब कुछ महसूस होने लगा कि गावं के लोगों का हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं है। पापा शराब के नशे में हर किसी को गाली दे देते थे.. शायद हो सकता है.. कि इसी वजह से सभी का व्यवहार ऐसा हो गया होगा।

एक शनिवार को पापा के चारों दोस्त हमारे घर आए.. उस समय शाम के 6 बज चुके थे। तो पापा ने मुझे मीट लाने बाजार भेज दिया.. क्योंकि वह दोस्त शराब खुद ले आए थे। फिर जब में मीट लेकर आया तो माँ और बुआ नहाने की तैयारी कर रही थी। फिर माँ मुझसे बोली कि अजय तुम अपना और अलका का स्कूल बेग बुआ वाले कमरे में रख दो.. आज मेहमान आए है तो तुम वहीं पर सो जाना। तो मैंने समान उठाया और बुआ के रूम में चला गया.. वो गर्मी के दिन थे तो माँ और बुआ खाना बनाने लगी थी। पापा और उनके दोस्त शराब पीने बैठ चुके थे.. पापा के चारों दोस्त शहर में बहुत बड़े कारोबारी थे और बहुत आमिर थे। रात 8 बजे माँ ने मुझे अलका और सिमरन को खाना दे दिया और कहा कि अब तुम जाकर सो जाओ। एक घंटे के बाद अलका और सिमरन सो गई.. लेकिन में सोच रहा था कि पापा ऐसा क्यों करते है? और हमारे सब रिश्तेदार आस पड़ोस के लोग उन्हें पसंद नहीं करते है.. क्यों कोई हमारे घर आना पसंद नहीं करता ? तो सोचते सोचते मुझे ख्याल आया कि अगर मेहमान दूसरे रूम में सोते है तो माँ, पापा और बुआ कहाँ सोते है? फिर मैंने सोचा कि शायद हो सकता है कि वो लोग बाहर ही सो जाते होंगे.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। बर्तनो की आवाज़े आ रही थी.. शायद वो सभी खाना खा रहे थे। फिर थोड़ी देर बाद शांत हो गये.. वो रात के 11 बजे का टाईम था। बुआ रूम में आई और देखा कि हम सब सो चुके है और फिर बाहर चली गई। में उस टाईम सोया तो नहीं था.. लेकिन मेरी आँखे बंद थी और में सोने की कोशिश कर रहा था। तभी थोड़ी देर बाद मुझे पेशाब लगा तो में बाहर आँगन में पेशाब करने गया और मैंने वहाँ पर देखा तो बाहर कोई भी नहीं सो रहा था।

तो में सोचने लगा कि दूसरे रूम में मेहमान है तो माँ, पापा और बुआ कहाँ सो रहे है? हमारा घर गावं से बाहर था और घर के चारो तरफ काँटेदार तार लगे हुए थे.. क्योंकि पापा जब वन विभाग की नौकरी करते थे.. तो उन्होंने घर की चारदिवारी अच्छे से करवाई थी और कोई भी अंदर आना चाहे तो गेट से ही आ सकता था.. बाकी कोई रास्ता नहीं था। फिर में माँ, पापा बुआ कहाँ सोए है यह देखने के लिए पापा के रूम की पिछली खिड़की से देखने के लिए खिड़की के पास गया। रूम की लाईट चालू थी और जैसे ही मैंने खिड़की से देखा तो मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गयी। पापा के चारों दोस्त नंगे है.. माँ और बुआ भी बिल्कुल नंगी है.. उनके दो दोस्तों के पास माँ थी और दो के पास बुआ। पापा कुर्सी पर बैठे थे और यह सब कुछ देख रहे थे। एक दोस्त माँ के बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा.. दूसरे दोस्त का माँ ने लंड मुँह में डाल लिया और पूरे जोश से चूसने लगी और बुआ बारी बारी से दोनों के लंड चूस रही थी।

फिर एक दोस्त बेड पर सो गया तो बुआ उसके लंड के ऊपर बैठ गई और दूसरे ने अपना लंड बुआ के मुँह में डाल दिया.. बुआ ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी और बोल रही थी कि मार दोगे क्या? प्लीज़ आराम आराम से करो। फिर दोनों ने अपनी स्पीड बड़ा दी और बुआ ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी। पापा के दोनों दोस्त और माँ बोल रहे थे कि चोदो और ज़ोर से चोदो। तो बुआ माँ से बोलने लगी कि भाभी आपका नंबर भी आएगा आप क्यों ज्यादा खुश हो रही हो? इतने में एक ने माँ को बेड पर लेटा दिया और माँ को मसलने लगा और दूसरा बोला कि इसे भी दोनों एक साथ चोदते है.. तो माँ और बुआ दोनों चिल्लाने लगी। फिर पोज़िशन चेंज करके चारों ने उन दोनों की चुदाई की और में उसके बाद अपने रूम में आकर सो गया.. शायद पूरी रात उनका यह प्रोग्राम चलता रहा। फिर सुबह जब माँ रूम में चाय लेकर आई तो उन्होंने मुझे और दोनों बहनों को जगाया.. तब 10 बज रहे थे और मेहमान जा चुके थे। तो मुझे माँ का चेहरा देखते ही रात का सीन मेरे दिमाग़ में घूमने लगा।

अब हर शनिवार पापा के दोस्त आते और पूरी रात माँ और बुआ की चुदाई करते और उसके बदले उन्हें कुछ पैसे दे जाते और यह सिलसिला जब में 18 साल का हो गया तब तक चलता रहा और मेरी 12 वीं भी पूरी हो गई। अलका 15 साल की और सिमरन 14 साल की हो गई थी.. और अब वह भी सेक्स का मतलब समझने लगी थी और अब आगे की पढ़ाई के लिए मुझे शहर में जाना पड़ता था। गावं में बदनामी भी बहुत होने लगी थी और लोग मुँह पर बोल देते थे कि रमेश अपनी बीवी और बहन से धंधा करवाता है। अब और भी कई लोगों ने हमारे घर पर आना शुरू कर दिया था। एक दिन माँ, पापा और बुआ अपने रूम में बैठे थे और बातें कर रहे थे। तो माँ बोली कि अब बच्चे बड़े हो रहे है.. गावं में भी सभी लोगो को पता लग चुका है और अब हमारे पास पैसे भी बहुत हो गये है.. क्यों ना हम यह सब कुछ बंद कर देते है। फिर बुआ बोली कि भैया हम ऐसा करते है कि गावं में सब कुछ बेचकर शहर में एक घर ले लेते है.. वहाँ पर सब ठीक रहेगा.. क्योंकि शहर में किसी को किसी से कोई मतलब नहीं होता है। पापा को यह आईडिया पसंद आया और उन्होंने गावं की सारी जमीन जायदाद बेचकर शहर में एक घर ले लिया। फिर हम सारे लोग शहर में आ गये और शहर में आकर फिर से वही धंधा शुरू हो गया और में हर रोज़ उनको देखता था। एक रात को में खिड़की से देख रहा था और में जैसे ही पीछे मुड़ा तो मैंने देखा कि मेरे पीछे अलका खड़ी थी। तो में उसे एक साईड में ले गया और पूछने लगा कि तुम यहाँ पर क्या कर रही हो? तो अलका बोली कि जो तुम कर रहे हो। फिर उसने बताया कि मुझे सब कुछ पता है.. हमारे घर में क्या होता है? और मैंने पूछा कि सिमरन को? तो वो बोली कि उसे भी यह सब पहले से ही पता है।

फिर में और अलका रूम में आ गये.. उस टाईम सिमरन भी जाग रही थी और हम आपस में बातें करने लगे। अलका उस टाईम 16 साल की थी और सिमरन 15 की.. वो दोनों एकदम गोरी और मस्त माल बन चुकी थी। तो अलका बोलने लगी कि भैया माँ और बुआ क्या करती है हमे सब पता है? फिर मैंने उनको बोला कि तुम कभी भी ऐसा मत करना। तो उन दोनों ने कहा कि हम कभी भी कोई ग़लत काम नहीं करेंगी और मुझे उन दोनों पर पूरा विश्वास था। फिर मुझे इंजिनियरिंग करने के लिए एक बहुत अच्छे कॉलेज में एड्मिशन मिल गया और में दूसरे शहर में एक इंजिनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में रहता था और हमेशा मेरे घर की फोटो मेरे दिमाग़ में घूमती रहती थी.. लेकिन मुझे अलका और सिमरन पर पूरा विश्वास था कि वो यह ग़लत काम कभी भी नहीं करेगी।

माँ और बुआ जो मर्ज़ी पड़े करते रहे। माँ और बुआ को यह भी पता चल गया था कि में उनकी सारी रासलीला को जानता हूँ.. धीरे धीरे हमारे घर पर अब बड़े बड़े लोंगो का आना जाना शुरू हो गया और शहर की बड़ी बड़ी हस्तियाँ भी आनी शुरू हो चुकी है। शहर में तबादला होने के बाद पापा भी अब इंग्लिश शराब पीने लगे थे क्योंकि बुआ और माँ बहुत पैसे कमा रहीं थी। फिर एक दिन हमारे कॉलेज में किसी बात को लेकर हड़ताल हो गई। 2-3 दिन के बाद भी हड़ताल खुलने के चान्स नहीं दिखे और मुझे ऐसा लग रहा था कि हड़ताल लंबी चलेगी। तो मैंने सोचा कि क्यों ना में अपने घर का एक चक्कर लगा आता हूँ? और में माँ, पापा को बिना बताए ही घर आ गया और मुझे घर आते आते लगभग 11 बज गये और मैंने सोचा कि आज सब को सरर्प्राइज़ देता हूँ। तो में गेट के ऊपर से चड़कर अंदर आ गया.. शहर में आकर हमने तीन बेडरूम का घर ले लिया थ