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मम्मी की चुदाई पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात - Hindi Sex Story

मम्मी की चुदाई पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात - Hindi Sex Story : नमस्कार! मेरी पहली कहानी " मम्मी पापा इतनी रात में करते क्या हैं? Click here to read >> " कई भागों में प्रकाशित हुई जिसे आप सब पाठकों ने पढ़ा और खूब पसंद किया इसलिए आप सभी सम्मानित पाठकों का धन्यवाद।
आप सभी के बहुत से मेल मिले, मैं उन सबसे केवल यह कहना चाहता हूँ कि मैंने केवल अपनी बचपन की यादों को आप सबके साथ शेयर किया।आपके विचारों और मेल्स का स्वागत है पर मेरे माता पिता के बारे में आप लोग कुछ भी गलत सलत न लिखे नहीं तो मैं अपने अनुभव शेयर नहीं करूँगा। अच्छा अब मैं उसी कहानी के अगले चरण पर आता हूँ।
जैसा कि मैंने अपनी पिछली कहानी में बताया था कि चुदाई करते समय पापा ने मम्मी से कहा था कि कल सुहागरात और फिर हनीमून मनायेंगे, जिस पर मम्मी ने कहा था कि अब एक हफ्ते तक हाथ नहीं लगाने दूँगी और पापा की फरमाइश पर यह भी कहा कि इस बार अकेले में करेंगे।
मम्मी ने पापा को 7 दिन की समय सीमा दी थी पर मुझे नहीं लगता था की पापा 7 दिनों तक माँ की चुदाई करे बिना रह सकते थे।

जब से मैंने पापा मम्मी को चुदाई करते देखा, तब से मुझे जैसे उनकी चुदाई देखने का चस्का लग गया। माँ की चुदाई धका धक हो रही थी
मैं अब रोज रात में जल्दी सो जाने का नाटक करता, इस उम्मीद से कि पापा मम्मी पता नहीं कब अपनी चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दे। इसी इंतज़ार में मेरी पूरी दो रात काली हो गई, मैं रात में 3:00 बजे सोया लेकिन सब बेकार, पिछली रात तो बात बनते बनते रह गई।
उस समय रात के लगभग 2:00 बजे होंगे, मैं भी बस सोने ही जा रहा था, तभी पापा रोज़ रात के तरह एक नींद मार कर उठे और मुझे मम्मी के बगल से उठाकर अलग लिटाया और खुद उनके बगल आ लेट गए।

मैं समझ गया कि अब कुछ होने वाला है। पापा, मम्मी के ब्लाउज के ऊपर अपने हाथ धीरे धीरे चलाने लगे।
मम्मी जो कि मज़े से सो रही थी, पापा की इस हरकत से उनकी नींद हल्की टूट गई।
मम्मी हल्की नींद में थी, उन्होंने पापा का हाथ अपने ब्लाउज से हटाया।
मम्मी थोड़ा गुस्से से बोली- अरे जाओ अंकित के पापा ! तुम तो कुछ समझते ही नहीं, बस जब तुम्हारी आँख खुल जाये तब तुम्हारी बन्दूक खड़ी हो जाती है फायर करने के लिए ! जैसे जैसे तुम्हारी उम्र बढ़ रही है तुम्हारी भूख और बढ़ती जा रही है। अभी परसों ही तुमने मुझे 3:30 बजे तक सोने नहीं दिया। पूरे दिन सारा बदन दर्द हुआ मेरा और दिन में नींद की झपकियाँ आती रही वो अलग!
बच्चा जवान हो रहा है, और तुम बस जब भी उठ जाओ तुम्हे अपना शिकार करना है। अब मुझे ये सब करने बहुत शर्म आती है अगर तुम्हे इतना ही शौक है तो अलग चल कर करो न ! मैं अब इतने बड़े लड़के के बगल में लेटकर नहीं करूंगी

मम्मी की चुदाई पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात - Hindi Sex Story

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पापा बोले- ए जी, तुम इतनी खूबसूरत हो कि जब भी तुम्हारे शरीर का कोई भी अंग खुला दिख जाता है तब बस मेरी नियत ख़राब हो जाती है।
पापा बोले- आज यहीं कर लेते हैं, सुहागरात तो अकेले ही मनायेंगे कल !
मम्मी बोली- कंडोम लाये हो?
पापा बोले- नहीं!
मम्मी बोली- तो आज कुछ भी नहीं।
पापा बोले- करने दो न!
मम्मी बोली- आज कोई बहाना नहीं। मुझे पिल्स से अलरजी है मेरा जी मतलाता है, नहीं तो मैं पिल्स ही ले लूं, और तुम कंडोम लगाते नहीं, तुम्हें मज़ा नहीं आता, अगर झड़ते वक़्त निकालने को कहती हूँ, तो तुम निकालते नहीं, कहते हो कि अगर झड़ते वक़्त निकाला तो इतनी देर जो सेक्स किया उसका सारा मज़ा किरकिरा हो जायेगा और तुम्हारे मज़े के चक्कर में मैं फंस जाती हूँ। अभी दो महीने पहले बच्चा ठहर गया था तो एबॉर्शन कराना पड़ा।
अभी जब पिछले महीने मासिक होने में देरी हुई तो मैं तो डर ही गई, मैंने सोचा कहीं फिर तो पेट से नहीं हो गई, पर भला हो भगवान का जो मासिक दो दिन बाद आ ही गया और मेरा डर खत्म हुआ।

पापा बोले- तो क्या हुआ अगर प्रेग्नेंट हो गई थी? अंकित का एक और भाई या बहन आ जाते और अंकित का भी मन लग जाता।
मम्मी बोली- हाँ ! अब इतने बड़े बच्चे के सामने मैं माँ बनूँगी। उसके सामने पेट फूला कर घूमूँगी इधर उधर! क्या सोचेगा वो अपनी माँ के बारे में!
पापा बोले- अभी अंकित बच्चा है। क्या बारह तेरह साल के बच्चों की माँ कभी दुबारा माँ नहीं बन सकती।
पापा बोले- करने दो न ऐसे ही, चलो अंकित की एक बहन ले आयें अबकी बार!
मम्मी बोली- न बाबा ! अब इस उम्र में दुबारा माँ बनूंगी! मुझे शर्म आती है।

पापा बोले- करने दो न!
मम्मी बोली- नहीं, अब जब कंडोम लाओगे, तभी कुछ करने की सोचना।
मम्मी ने करवट ली, पापा उन्हें मनाते रहे पर वो पापा को तड़पता छोड़ चुपचाप सो गई।
पापा भी उनसे नाराज हो गये और सो गए।
अब मैं जाग कर क्या करता, मैं भी मायूस होकर सो गया।
papa mumy ki dusri suhag raat
सुबह हुई तो मैंने ध्यान दिया कि पापा मम्मी से बात नहीं कर रहे थे, उनकी बोल चाल बंद थी। मम्मी कुछ बोलती भी तो केवल हाँ या नहीं में उत्तर देते बस! आप सभी मेरी माँ की चुदाई की कहानी पड़ रहे है |
मुझे मम्मी पापा की उस रात की बात याद थी कि वो दोनों इस बार अकेले और सुहागरात वाली रात की तरह सेक्स करना चाहते हैं।
मैं पापा मम्मी को उनकी दूसरी सुहागरात मानाने और उन लोगो को उसका पूरा आनंन्द लेने का मौका देना चाहता था और उन्हें सुहागरात मनाते देखना चाहता था।
पर अब सुहागरात तो क्या, रोज़ की चुदाई के आसार नहीं दिख रहे थे, पापा मम्मी से बेहद नाराज़ थे।
सुबह हुई तो मैंने ध्यान दिया कि पापा मम्मी से बात नहीं कर रहे थे, उनकी बोल चाल बंद थी। मम्मी कुछ बोलती भी तो केवल हाँ या नहीं में उत्तर देते बस!
मुझे मम्मी पापा की उस रात की बात याद थी कि वो दोनों इस बार अकेले और सुहागरात वाली रात की तरह सेक्स करना चाहते हैं।
मैं पापा मम्मी को उनकी दूसरी सुहागरात मनाने और उन लोगो को उसका पूरा आनंन्द लेने का मौका देना चाहता था और उन्हें सुहागरात मनाते देखना चाहता था।
पर अब सुहागरात तो क्या, रोज़ की चुदाई के आसार नहीं दिख रहे थे, पापा मम्मी से बेहद नाराज़ थे क्यों की वाह माँ की चुदाई नहीं कर पा रहे थे। पापा को रोज सोने से पहले माँ की चुदाई की आदत पड़ चकी थी शादी के बाद शायद पापा रोज माँ की चुदाई कीया करते होंगे

मैंने पापा मम्मी का प्रेमालाप करने के लिए एक तरकीब सोच ली जिससे मैं मम्मी पापा को उनकी सुहागरात मानते देख लेता और उन्हें मुझ पर शक भी नहीं होता।

पापा नहाने के बाद बैडरूम में जाकर शॉप पर जाने की तैयारी करने लगे, मम्मी पापा की नाराजगी को समझ रही थी इसलिये वो पापा को मनाने में लगी हुई थी।

सुबह नाश्ते की टेबल पर जब मैं, मम्मी और पापा नाश्ता कर रहे थे तब मैंने उनसे कहा- पापा मेरे एग्जाम होने वाले हैं और आप लोग रात मे टीवी ऑन कर देते हो, कुछ पढ़ाई नहीं हो पाती। अब मुझे एग्जाम की तैयारी करनी है इसलिए मैं आज से बगल वाले कमरे में पढाई करूँगा और वही सोऊँगा।
पापा बोले- तुम्हें जो करना हो करो, मैंने क्या रोका है तुम्हे पढ़ाई करने से !

मम्मी पापा को वहीं पर मेरे सामने ही मना रही थी, वो पापा से कह रही थी- अब जाने भी दो न! सॉरी बाबा!
पापा कोई जवाब नहीं दे रहे थे, फिर वो चुपचाप दुकान चले गए।

पापा ने मुझे बगल वाले कमरे में शिफ्ट होने की इज़ाज़त दे दी। मैंने भी अपना बोरिया बिस्तर बाँधा और एग्जाम तक के लिए अपने बेडरूम से बिल्कुल सटे दूसरे कमरे में आ गया।
इस कमरे में एक बेड था, एक कुर्सी और एक मेज थी, बेड जिस दीवार से सटकर लगा था उस दीवार पर ही एक लकड़ी की खिड़की थी जो हमारे बैडरूम की ओर ही खुलती थी पर मैं उसे कहाँ खोल सकता था।

जब मम्मी शाम 3:50 के आस पास सब्ज़ी लेने मॉर्केट गई तभी मैंने जल्दी से पेंचकस लाकर खिड़की में छोटा सा छेद कर दिया। अब मैं कभी भी बेड पर लेटे हुए भी मम्मी पापा की चुदाई देख सकता था। मैंने अपना सारी बुक्स वगैरह दूसरे कमरे में शिफ्ट कर ली। मेरी तैयारी पूरी हो चुकी थी, अब मैं पापा मम्मी को चुदाई करते कभी भी देख सकता था।

आज मैं बहुत रोमांचित था।
करीब 7:30 बजे पापा घर में आये और अपने बेड रूम में कपड़े बदलने चले गए।
मम्मी जो बाथरूम में नहा रही थी, नहा कर बेड रूम में चली गई। मेरा दिल कह रहा था कि कुछ मज़ेदार देखने को मिल सकता है अब!

पापा को बेड रूम में देख कर मम्मी ने उन्हें छेड़ने के उददेश्य से अपना पेटीकोट नीचे गिरा दिया उनके मोटे मोटे नितम्ब साफ़ देखे जा सकते थे और फिर झट से ऊपर ऊपर उठाया। मानो मम्मी यह दिखाना चाह रही हो कि पेटीकोट उनसे अनजाने में नीचे गिर गया हो।

पापा भी चुदाई के माहिर खिलाड़ी हैं, उन्होंने तपाक से मम्मी से कहा- अब ये सब करने से कुछ नहीं होगा! अब जब कहोगी तब ही करूँगा और वो भी कंडोम के साथ! तुम्हारी दुत्कार ललकार कौन सुनेगा रोज रोज!

मम्मी मुस्कुराते हुए बेड की तरफ आई और पापा के बगल में आकर बैठ गई और पापा के चेहरे पर एक चुम्बन कर दिया और कहा- ऐ जी, तुम कुछ समझते नहीं हो, बस नाराज़ हो जाते हो, मेरी मज़बूरी भी समझा करो।

पापा का गुस्सा सुबह के मुकाबले काफी कम था पर वह इसे मम्मी को शो नहीं करना चाहते थे। पापा अब भी कुछ नहीं बोले और टीवी ऑन कर देखने लगे।
मैं ये सब खिड़की में बने छेद से देख रहा था।

मम्मी भी अब साड़ी पहन कर बाहर आ गई और किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी।

लगभग 8:30 बजे मम्मी ने खाना बना लिया और क