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Hindi Sex Stories नानाजी का सेक्स पुराण Hindi Sex Stories दो को एक साच चोदा

Hindi Sex Stories नानाजी का सेक्स पुराण Hindi Sex Stories nanaji ka sex puran part 3 sexy story

Hindi Sex Stories नानाजी का सेक्स पुराण Hindi Sex Stories nanaji ka sex puran part 3 sexy story

Hindi Sex Stories नानाजी का सेक्स पुराण Hindi Sex Stories : मेरी तंद्रि टूटी नानाजी के फ़ोन की कर्कश रिंगटोन ने। किशन चाचा का फ़ोन था। नानाजी के खेत के बाजू के खेत में जंगली सूअर और दूसरे जानवर घुस गए थे। यह भी देखे >>> दादा जी का लोडा हिलाते हुए और मुठ निकालते हुए नंगी फोटोज Nude Images नानाजी ने फट से कपडे पहने और पारुल को कहा की “मुझे जाना पड़ेगा क्यू की किशन के पास बन्दुक नहीं है तुम्हारी चूत को बोलना की उसकी चुदाई उधर से आने के बाद होगी””
नानाजी चले गए और पारुल उनके वीर्य में नहाईं नंगी वही पे लेटी रही।

मैं रूम से निकल के पारुल के पास गयी। वो बेसुध लेटी हुई थी जैसे शराब के नशे में हो। उसकी आखे बंद थी। उसका बदन नानाजी के पानी से लथपथ था। चाँद की रोशनी में चमक रहा थामैंने उसे आवाज दी। उसने आखे खोली और मेरी तरफ देख के मुस्कुराने लगी।
मैं:~ पारुल क्या बात है मेरी जान आज तो मुझे लगा की नानाजी चोद ही देंगे तुझे।
पारुल:= तू सब देख रही थी? पारुल ने उठते हुए रजाई से अपने आप को ढकते हुए पूछा।
मैं:= वो सब छोड़ चल अंदर साफ़ कर खुदको बाकी बाते बादमे करते है।
हम लोग रूम में आये पारुल ने खुदको साफ़ किया और आके बेड पे लेट गयी।
मैं:=पारुल की बच्ची बड़े मजे किये तूने आज। मेरा मन भी कर रहा था यार की मैं भी आ जाऊ पर वो नानाजी का लंड देखके हिम्मत ही नहीं हुई।
पारुल:= अरे पागल कुछ नहीं होता लंड जितना बड़ा उतना ही मजा आता है।
मैं:= बात तो ऐसे कर रही है जैसे बहोत लंड लिए बैठी है।
पारुल:= लंड नहीं लिया तो क्या हुआ पर पता तो है ना। और रुक थोड़ी देर दादाजी को आने दे अभी तो सबसे पहले लंड ही डालने को बोलती हु चूत में।
मैं:= तू कर इंतजार अपने यार का मैं तो सो रही हु… बहौत नींद आ रही है। पर मुझे उठा देना।
सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा 8 बज चुके थे। पारुल मेरे पास नहीं थी। मैं निचे गयी तो वो किचन में थी। मैंने उसके पास जाके पूछा तो उसने बताया की नानाजी अब तक नहीं लौटे है। मैंने नास्ता किया और नहाके वापस आयीं तो देखा की नानाजी अब तक नहीं लौटे थे। उनका फ़ोन भी नहीं लग रहा था। मामाजी उनको देखने के लिए खेतो में गए हुए थे। थोड़ी देर बाद हमने देखा की किशन चाचा नानाजी को सहारा देते हुए ला रहे थे। उनके कमर पर पट्टा लगा हुआ था। नानाजी को हमने सहारा देते हुए उनके कमरे में ले जाके सुला दिया। किशन चाचा ने बताया की नानाजी का पैर गड्ढे में जाने की वजह से उनकी कमर में मौच आ गयी है डॉक्टर ने कहा है की आराम करने से दो दिन ठीक हो जायेगा। मुझे बहोत बुरा लग रहा था। मैं नानाजी के पास जाके बैठ गयी। नानाजी ने मेरा चेहरा देखा वो बोले…
नानाजी:= अरे कुछ नहीं है ये दो दिन में ठीक हो जायेगा और अब दर्द भी नहीं है बस थोडा हिलने में दिक्कत होती है।
मैं:= फिर भी नानाजी मुझे आपको ऐसा देखने की आदत नहीं है।
नानाजी:= फिर कैसा देखने की आदत है? बोलो कैसे देखना चाहती हो मुझे?
नानाजी बेड पे लेटे हुए थे पर अब भी सेक्स का भूत उनके सर से नहीं उतरा था। मैंने भी अब तय कर लिया था की बेशरम बन के ही मजे लुंगी।
मैं:= जैसा आप सोच रहे हो वैसा ही देखना चाहती हु।
नानाजी:= मैं तो तुमसे पूछ रहा हु। तुम बताओ। तुम जैसा मुझे देखना चाहोगी वैसे दिखा दूंगा। मैं तो बहोत कुछ सोचता हु।
मैं:= अच्छा? क्या सोचते हो आप?

क्या मस्त चुदाई चली थी हमारी!नानाजी:= अब मैं क्या क्या बताऊ की मैं क्या सोचता हु।
मैं:= सब बता दीजिये।
नानाजी:= सब बताऊंगा तो तुम भाग जाओगी।
मैं:=नहीं भागूंगी अब….
नानाजी:= ह्म्म्म बहोत बहादुर हो गयी हो….
मैं:= हा वो कल रात को पारुल कोऔर आप को……..मेरे मुह से अचानक निकल गया।
नानाजी:= क्या क्या?…. ओह तो तुम सब देख रही थी।
मैं:= (शरमाते हुए) हा वो अअ..आ.. हा सब देख लिया।
नानाजी ने मेरे हाथो पे हाथ रखा और उसे सहलाने लगे।
नानाजी:= फिर मजा आया देख के?
मैं:= मुझे नहीं पता….(मैं शरमाके दूसरी और देखने लगी)
नानाजी:= श्रुति सच कहूँ तो … पारुल के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था। जब से तुम आयीं हो बस तुम्हारी ये बड़ी बड़ी चुचिया मेरी नजरो से हटती ही नहीं। ना जाने कितनी बार इनके बारे में सोच के मैंने अपना पानी निकाला है।
नानाजी बहोत ही खुलके बात कर रहे थे। मैं भी अब सब शर्मो हया छोड़ के उनसे नजरे मिला के बात करने लगी।
मैं:= इतनी पसंद है आपको मेरी चुचिया?
नानाजी:= हा श्रुति…. बेहद पसंद है।
मैं:= तो सब दिखा दूंगी आपको आप एक बार ठीक हो जाइए।
नानाजी:= देखने या छूने के लिए कमर की जरुरत नहीं है ना….।
मैंने उनका हाथ उठा के अपनी चुचियो पे रख दिया और आखे बंद कर ली। नानाजी मेरे टॉप के ऊपर से ही मेरी चुचिया सहलाने लगे।धीरे धीरे एक एक करके दबाने लगे। मैं उनके हाथो के सख्त स्पर्श से सिहर उठी मेरे रोम रोम में मस्ती सी छाने लगी।
नानाजी:= आओह्ह् श्रुति आहा कितनी अछि है ये…. इतनी बड़ी है और कितनी सख्त है दबाने में जो मजा आ रहा है उससे पुरे बदन में एक ताकत सी महसूस हो रही है। और देखो जरा मेरा घोडा कैसे उड़ने लगा है।
मैंने उनके लंड को पकड़ा उफ्फ्फ्फ्फ़ किसी बड़े से रॉड जैसा प्रतीत हो रहा था। वो इतना गरम था की उसकी गर्माहट मुझे कपड़ो में से महसूस हो रही थी। मैं उसे मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी पर वो मेरी मुट्ठी में भी नहीं समां रहा था।
मैं:= उम्म्म नानाजी कितना बड़ा है आपका…. ऐसा तो कभी मैंने किसी मूवी में भी नहीं देखा।
नानाजी:= कोनसी मूवी?
मैं उन्हें कुछ बता पाती उतने में किसी के कदमो की आहट हुई। हम लोग संभल के बैठ गए। पारुल नानाजी के लिए खाना लायी थी। हमने नानाजी को सहारा देके बिठाया और उनहोंने खाना खाया। फिर हम थोड़ी देर बैठ के बाते करते रहे फिर नानाजी सो गए। हम भी अपने कमरे में जाके आराम करने लगे। नानाजी के पास मामाजी और मामी थे।
रात के खाने तक मामाजी और मामी नानाजी के पास मंडराते रहे। लेकिन रात को सोने के वक़्त पारुल ने उनसे कह दिया की मैं और श्रुति दादा जी के पास रुकेंगे। मामा ने मना किया तो नानाजी ने उनको कह दिया की उन्हें 2 दिन खेतो का काम संभलना है और वो आराम करे। मामा जी उनकी बात को नहीं टाल सके।
हमने अपना बिस्तर निचे जरूर लगाया था। पर हम नानाजी के दोनों तरफ से जाके पैर लंबे करके पलंग से पीठ टीकाके बैठे हुए ऐसे ही हँसी मजाक की बाते कर रहे थे। नानाजी अचानक से दोपहर वाली बात का जिक्र करते हुए बोले…..
नानाजी:= अरे श्रुति तुम दोपहर में किस मूवी की बात कर रही थी?
पारुल:= क्या मूवी दादाजी ? क्या बात कर रही थी?
नानाजी := अरे ये बता रही थी मेरे जैसा लंड उसने किसी मूवी में भी नहीं देखा।
पारुल:= क्या? ऐसी बाते कराती है तू अपने नानाजी से? तुझे शर्म नहीं आती?
पारुल मुझे झुटमुट का डाँटते हुए बोली।
मैं:= तू चुप कर… मैं तो सिर्फ बाते कराती हु तू तो ना जाने क्या क्या कर बैठी है।
नानाजी:= अरे झगड़ा क्यू कर रही हो … श्रुति तू बता क्या बोल रही थी?
पारुल:= हम तो ऐसेही मजाक कर रहे थे दादाजी।
मैं:= वो नानाजी वैसी वाली मूवी होती है ना उसकी बात कर रही थी।
हम तीनो अब ऐसे पेश आ रहे थे एक दूसरे के साथ जैसे बहोत अच्छे दोस्त हो। जिनमे कोई पर्दा नहीं कोई लिमिटेशन नहीं। जैसे मैं और पारुल थे।
पारुल := कैसी मूवी श्रुति? जरा खुलके बता ना।( पारुल मेरी टांग खीचने के हिसाब से बोली)
नानाजी:= हा श्रुति अछेसे बता।
मैं:= वो चुदाई वाली मूवी…. मैं झट से बोल दिया।
वो दोनों हस पड़े। मैं भी फिर हँसने लगी।
नानाजी:= क्या होता है उसमे मैंने तो कभी नहीं देखि चुदाई वाली मूवी।
मैं:= हा बनिए मत हमें पता है की आप कितने बड़े चोदु है।
ऐसी बाते करना बड़ा अजीब लग रहा था अपने नाना के साथ पर एक अजीब सी लहार दौड़ जाती शरीर में जो सीधा चूत तक जाके खत्म होती।
नानाजी:= चोदु? क्यू मैंने ऐसा क्या किया?
मैं:= हमने देखा था आपको वो मालती चाची को चोदते हुए। कितनी गन्दी थी वो और उनकी चूत….छी..।
नानाजी:= अगर मुझे पता होता की तुम दोनों अपनी चूत फैलाये मेरे लिए बैठी हो तो मैं क्यू चोदता उसको।
पारुल:= हमें भी कहा पता था की आप हमें चोदने के लिए रेडी हो… इसका तो पता नहीं पर मैं तो बहोत पहले ही आपका लंड ले लेती।
पारुल ने ऐसा बोल के नानाजी का लंड पकड़ लिया और उसे दबाने लगी।
नानाजी:= सच कहते है लोग की पोती नातिन अपने दादी और नानी का दूसरा रूप होती है।
मैं:= नानाजी बताई ये ना हमें नानी के बारे में…. वैसे तो हम जानते ही है पर वो चुदाई में कैसी थी?
नानाजी:= क्या बताऊ बेटा वो कैसी थी। वो बहोत ही कामुक औरत थी। उसे जबतक दिन में एक बार और रात को दो बार ना चो