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दवा देकर बच्चों से जिस्मफरोशी - सिर्फ 50 रुपये में जिस्मफरोशी हो सकती है

बांग्लादेश में दस बारह साल की छोटी बच्चियों को जबरन देह व्यापार में धकेला जा रहा है. वे बड़ी दिखने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल करती हैं, जिसे गायों को मोटा करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

मेकअप से पुता चेहरा, तंग ब्लाउज और लंबे पेटीकोट वाली किशोरियां टंगैल शहर के रेड लाइट इलाके की गलियों में घूमती ग्राहकों को इशारे करते हर शाम दिखती हैं. छोटी छोटी गलियों वाले कंडापारा झुग्गी बस्ती में साथ चाहने वाले मर्दों की कोई कमी नहीं. कंडापारा बांग्लादेश की राजधानी ढाका से कुछ ही घंटों की दूरी पर है.

दहलाने वाले हालात

कंडापारा सस्ता रेड लाइट इलाका है. सिर्फ 50 रुपये में जिस्मफरोशी हो सकती है. अधिक से अधिक ग्राहकों को लुभाने की जरूरत के कारण युवा सेक्स वर्कर बड़े पैमाने पर स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि वे अपनी उम्र से बड़ी दिख सकें. 17 साल की हाशी कहती है, "मेरे अब के शरीर और बचपन के दुबले पतले शरीर में काफी अंतर है." हाशी को 10 साल की उम्र में एक दलाल यहां ले आया और उसे देह व्यापार में ढकेल दिया. उसने उसे कंडापारा में बेच दिया जहां उसे स्टेरॉयड दिया जाने लगा.

माथे पर काली बिंदी लगाते हुए हाशी करती है, "मैं पहले से ज्यादा तंदरुस्त हूं और बहुत से कस्टमर की सेवा करने की हालत में हूं, कभी कभी तो 15-15 तक." वह अपने छोटे से कमरे में बैठी है, जहां एक बिस्तर है, एक स्टोव है और कमरे की दीवारें हिंदी सिनेमा के सितारों के पोस्टरों से भरी है.

हाशी जैसी 900 लड़कियां कंडापारा में रहती हैं और शोषण से भरी दर्दनाक जिंदगी जीने को मजबूर हैं. उनमें से कुछ की उम्र बस 12 साल है. वे कर्ज और लांछन की जिंदगी जी रही हैं, ओराडेक्सन ले रही हैं जो भरी पूरी दिखने के कारण अधिक ग्राहक तो लाता है, लेकिन साथ ही लाता है खतरनाक साइड इफेक्सट्स भी.

गायों को मोटा करने वाला ड्रग

ओपाडेक्सन को डेक्सामेथासोन के नाम से भी जाना जाता है. जलन और एलर्जी के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल होता है जबकि किसान मवेशियों को मोटा करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. सेक्स वर्करों के बीच काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि कंडापारा और 14 अन्य कानूनी रेड लाइट इलाकों में 90 फीसदी से ज्यादा सेक्स वर्कर ड्रग लेती हैं या उन्हें यह लेने के लिए मजबूर किया जाता है.

इस स्टेरॉयड्स से उनकी भूख बढ़ जाती है, वजन तेजी से बढ़ने लगता है और उनके शरीर को देख कर लगता है कि वे तंदुरुस्त और अपनी उम्र से बड़ी हैं. इससे अच्छी काया वाली लड़कियों को चाहने वाले ग्राहक आकर्षित होते हैं. पुलिस को संतुष्ट रखने में भी मदद मिलती है. देह व्यापार के लिए बांग्लादेश में कानूनी उम्र 18 साल है.

लत की मुश्किल

ये लड़कियां एक बार ड्रग्स लेना शुरू करती हैं तो उन्हें इसकी लत लग जाती है. उनका कहना है कि यह उन्हें मजबूत और तंदुरुस्त रखता है. इससे वे बिना किसी थकान के दिन में अधिक ग्राहकों से निपट सकती हैं और ज्यादा कमा सकती हैं. हाशी कहती है,"मालकिन ने मुझे टैबलेट लेने पर मजबूर किया. उसने मुझे मारा पीटा और खाना बंद कर दिया. मुझे धमकी दी और मेरे कर्ज का वास्ता दिया."

उसका एक चार साल का बेटा है जो रिश्तेदारों के साथ रहता है. हाशी ने उसे दो साल से नहीं देखा है. हाशी बताती है, "यहां कस्टमर हमेशा तंदुरुस्त लड़की चाहते हैं. मैं ओराडेक्सन लेती हूं. मुझे ग्राहकों की जरूरत है ताकि मैं अपना खर्च चला सकूं और कर्ज वापस कर सकूं. यदि किसी दिन मुझे ग्राहक नहीं मिलता तो अगले दिन मैं खा नहीं सकती. मैं अपने बेटे के लिए भी कुछ बचाना चाहती हूं."

कंडापारा की अधिकतर सेक्स वर्कर की यही कहानी है. उन्हें उनके गरीब परिवार वाले 20,000 टका की छोटी रकम के लिए बेच देते हैं. दलाल उन्हें ऐसी औरतों को बेचते हैं, जो पहले खुद सेक्स वर्कर हुआ करती थीं वे सेक्स वर्कर को बंधुआ मजदूरों की तरह रखती हैं. उनसे देह व्यापार कराती हैं और ज्यादातर पैसा यह कह कर रख लेती हैं कि उन्होंने दलालों को कमीशन दिया है.

ओराडेक्सन से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, चर्म रोग और सिरदर्द जैसी बीमारियां हो जाती हैं और इसकी लत लग जाती है. यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम कर देती है. छोटी सी सफेद टैबलेट कंडापारा की झुग्गी बस्तियों में आसानी से मिल जाती है. सिर्फ 15 टके में यह बिना किसी डॉक्टरी सलाह के लिए उपलब्ध है. बहुत सी लड़कियां सालों से कंडापारा में यौनकर्मी हैं लेकिन अनपढ़ होने के कारण उन्हें पता नहीं कि उनका कर्ज चुका या नहीं. उन्हें अपने अधिकारों के बारे में भी पता नहीं है. उम्र बढ़ जाने पर वह परिवार की उपेक्षा के डर से घर भी नहीं लौट पाती.

रिपोर्ट: रॉयटर्स/महेश झा

संपादन: एन रंजन यह आर्टिकल निम्न लिंक से लिया गया है :-  DW.COM