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हेलो फ्रैंड्स, मेरा नाम शीतल है. मैँ एक 19 साल की इंडियन लडकी हूँ और एक कौलेज मेँ पढती हूँ. आज मैं आप लोगो को एक लंड चूसने की अपनी आपबीती बताने जा रही हूँ. मैँ दिखने मेँ सुन्दर और भरी पूरी हूँ. मेरे कौलेज के पास कुछ लडके हमेशा खडे रहते हैँ. वो मवाली किस्म के हैँ. लगता है जैसे वो लडकियाँ पटाने वहाँ आते हैँ. खैर एक दिन की बात है, मैँ अकेले कौलेज जा रही थी तभी उनमेँ से एक लडका आया और बोला कि अगले हफ्ते होने वाले एग्ज़ाम के पेपर उसके पास हैँ.
मैँ चौंक गई और उसे शट अप कह कर चली गई. जब क्लास मेँ मैँ गई तो पता चला कि इस बार पेपर बहुत टफ आने वाला है. मेरे तो पसीने छूटने लगे सोच कर ही क्योंकि साल भर मैँने पढाई नहीँ किया था और अब टफ पेपर कैसे लिख पाऊंगी. मुझे डर था कही मेरे घर वाले फेल होने पर मेरी शादी गांव मेँ ले जाकर किसी गंवार से ना करा देँ.  इसी उधेड बुन मेँ मैँ कौलेज से बाहर निकली और घर आई. रात भर मेरे दीमाग मेम यही सब चलता रहा कि क्या करूँ. तभी मुझे वो मवाली लडके की बात याद आयी. मुझे लगा कि मुझे उसकी मदद लेनी चाहिये. लेकिन फिर मुझे लगा कि कहीँ वो मुझे फंसा ना दे. लेकिन फिर सोची कि ट्राय करने मेँ क्या हर्ज़ है.

इसी सोच विचार मेँ पूरी रात निकल गयी. सुबह जब मैँ कौलेज जा रही थी तो वो लडका सामने आया लेकिन उसने मेरी तरफ देखा तक नहीँ. मुझे लगा कि कहीँ यह हाथ से निकल ना जाये. इसलिये मैँ खुद उसके पास गयी और उससे पूछने लगी. वो बोला कि पेपर तो मैँ दिला दूंगा लेकिन उसके बदले मेरा एक काम करना होगा. मैँने पूछा कौन सा काम तो वो बोला, मेरा लंड चूसना होगा. मैँने उसे गुस्से से देखा तो वो हंसते हुए बोला, सोच लो फायदा तुम्हारा ही है. मैँने कुछ देर सोचा फिर बोला कि ठीक है लेकिन पहले पेपर चाहिये. वो बोल ठीक है. फिर उसने मुझे कौलेज के लैब मेँ मिलने को कहा लेक्चर के समय. मैँने उसे हाँ कहा और क्लास मेँ चली गयी. क्लास मेँ बैठकर सारे समय बस यही सोच रही थी कि कैसे मैँ यह सब करूंगी. तभी लेक्चर खत्म हुआ. मुझे याद आया कि मुझे अब जाना होगा नहीँ तो वो लडका चला जायेगा. मैँ बाथरूम जाने के बहाने से उठी और क्लास से बाहर निकल आई. क्लास के बाहर यहाँ वहाँ देखने के बाद मैँ लैब की ओर  चल पडी. वहाँ पर कोई नहीँ था. मुझे डर लगने लगा कि कहीँ कुछ गडबड ना हो जाये. बस इसी उधेड्बून मेँ मैँ लैब के दरवाजे पर पहुंच गयी. मुझे लगा कि कोई वहाँ पर खडा है, मैँने जैसे ही अन्दर झांका तो पाया कि  वो लडका दरवाजे के बगल मेँ खडा हो कर मुस्कुरा रहा है. उसके हाथ मेँ पेपर थे जो वो मुझे दिखा कर पास मेँ बुला रहा था.

कोलेज की लेब में मिलने का तय हुआ

मैँ डरते हुए उसके पास पहुंची और उसने मुझे पेपर दिये. मैँ पेपर को पढने लगी तो उसने लैब का दरवाजा बन्द कर दिया. मैँ डर गयी तो वो बोला गीव एंड टेक. फिर वो मेरे पास आगे बढा. उसने मुझे हाथ से पकडा और एक कुर्सी पर बैठा कर मुस्कुराने लगा. मेरा दिल ज़ोरोँ से धडकने लगा. मेरी सांसे तेज़ हो गयीँ. समझ नहीँ आया कि मैँ क्या करूँ. उमैँने उसकी पैंट को देखा, वहाँ उसका लंड पैंट मेँ तना हुआ दिख रहा था, जिसे  वो अपने हाथ से मसल रहा था. मैँने कांपते हाथोँ से उसे छूआ तो मुझे जैसे करंट लग गया. मैँने हाथ तुरंत पीछे हटा लिया. उसने फिर से मेरे हाथ को पकडा और अपने लंड पर रख दिया और अपने हाथ को मेरे हाथ पर दबाने लगा ताकि उसके लंड को मैँ पकद सकूँ.

अरे यह लौड़ा तो मस्त बड़ा था

किसी तरह मैँने उसके लंड अब को पकडा और दबाने लगी. उसने आंखेँ बन्द कर लीँ और वो आहेँ भरने लगा. मुझे भी कुछ कुछ अच्छा लगने लगा था. मैँ जैसे जैसे उसके लंड को मसलती उसकी सांसेँ और आहेँ दोनोँ ही तेज हो जाती थीँ. मुझे यह खेल काफी रोमांच से भरा लगा. मैँने उसके लंड के ऊभार को महसूस करने की कोशिश की. उसकी लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने का फैसला किया. उसे पूरी तरह से मैँने हथेली मेँ भर लिया और वो सिसकियां लेने गया. मुझे यह बहुत अच्छा लगा. यहाँ मेरी भी सांस फूलने लगी. मेरी भी चूत मेँ पानी आने लगा. मुझे लगा कि यह कुछ अजीब नशा है. फिर उसने अपने ज़िप खोली और मेरा हाथ अंडरवियर पर छुआ दिया.

लौड़े की गर्मी को अपनें मुहं में भर ली

हाय, क्या गर्म गर्म अहसास था. बहुत मज़ा आ रहा था. उसका लंड काफी मोटा था. मैँने अब उसके लंड को बुरी तरह से मसलना शुरु कर दिया. वो लम्बी लम्बी आहेँ भरने लगा. यहाँ मैँ भी अपनी चूत को जींस के ऊपर से मसलने लगी. मुझे नहीँ पता था कि सेक्स मेँ इतना मज़ा आयेगा. मैँ वैसे भी अनछुई हूँ. आज तक मुझे किसी ने भी नहीँ छुआ नहीँ है. मैँ भी अब गर्म हो चुकी थी. मैँने उसे देखते हुए उसे अपने नाखूनोँ को उसके लंड पर गडा दिया और वो और ज़ोर से आह आह करने लग गया. उसके लंड से पानी निकलने लगा जो उसके अंडरवियर को हल्का सा गीला कर दिया. मुझे उस गीलेपन को छूने मेँ बहुत मज़ा आ रहा था.

थोडी देर तक ऐसे ही लंड के सामने बैठ कर मैँ उसे अंडरवियर के ऊपर से दबाये जा रही थी. फिर अचानक थोडी देर के बाद उसने मेरा हाथ हटाया और अपनी जींस को घुटने तक नीचे कर दिया और फिर एक झटके से अपने अंडरवियर को भी नीचे कर दिया. हाय, क्या गठीला लंड था. करीब 9’’ का मोटा तगडा लम्बा. हाय, मैँ उसकी तारीफ मेँ तो एक कीताब लिख सकती हूँ. पूरा का पूरा नागराज था वो. एकदम चोकोबार की तरह. ऊपर से लाल लाल सुपारा चमडी के ऊपर से झांक रहा था. और हल्की सी वीर्य की दो बून्दे लंड के छेद मेँ से निकल आई होँ, जैसे सुबह्की ओस घास पर गिरी हो. मैँ मंत्र मुग्ध हो कर अपने आप आगे बढी और अपनी जीभ बिना किसी झिझक के बाहर निकाल ली, और सट से आंख बन्द करके मेरी जीभ ने जैसे ही उस अमृत की दो बून्दोँ को जीभ से छुआ तो अहसास हुआ कि कितना मधुर स्वाद रहा होगा उस अमृत का जिसके लिये देवता और दानवोँ मेँ लडाई छिडी थी.

वीर्य का अमृत चाट लिया

खैर, इस अमृत को अच्छे से चाटने के बाद मुँह अपने आप खुल गया और मैँने उस विशालकाय मूसल लंड को मुँह मेँ भर लिया इस लालच मेँ कि कहीँ वो मुरझा ना जाये या यो कहेँ कि गल ना जाये किसी चोक्कोबार आईसक्रीम की तरह. मैँ हमेशा से इसी तरह से चोकोबार आईसक्रीम चूस कर खाया करती थी. अब वक्त आ गया था इस अनोखे स्वाद को तन्मय हो कर पा सकूँ, बिना किसी रुकावट के. मैँ अपने सिर को उस लंड पर दबाने लगी जब तक कि वो मेरे गले के तल को छूने ना लगा. एक और झटका मेरे मुँह का उस महाकाय लंड पर और उस लडके के मुँह से सिस्कारी निकल गयी. उसकी आंखेँ ऊपर चढ गयी जैसे किसी ने उसे कोई धतूरा पिला दिया हो.

मुझे उसे इस हालत मेँ देखने मेँ बहुत मज़ा आ रहा था और उसकी बढती सिस्कारियोँ को और तेजी से सुनने के लिये मैँने अपने मुँह को ज़ोर ज़ोर से उसके लंड पर ऊपर नीचे करना शुरु कर दिया और तभी एक हल्की सी चीख उसके गले से निकली और एक तेज विस्फोट के साथ कुछ गर्म गर्म चीज़ मेरे गले के अन्दर टकराई. मैँ तुरंत पीछे हटी और देखा कि उसका लंड किसी जवालामुखी की तरह लावा उगल रहा है. मुझ इंडियन लडकी को देख कर वो मुस्कुराया और कपडे पहन कर वहाँ से मुझे उसी हालत मेँ छोड कर चला गया. उसने मुझे लैब के बहार निकलने पर पेपर दे दिए और उसकी यह मदद की वजह से मैं पास भी हो गई. फिर तो मेरा चक्कर इस लड़के के साथ चल पड़ा और यह लड़का मुझे अक्सर चोदता रहता हैं, वोह मेरी चूत से खुश हैं और मैं उसके लौड़े और उसकी एग्जाम के वक्त मदद दोनों से.

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