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छुट्टियों की आखिर में हम लोग दमन गए वैसे तो हर समर वेकेशन में मेरा और गुरप्रीत अंकल का परिवार हमेंशा बहार घुमने जाता था. लेकिन इस साल दादी की तबियत पतली होने की वजह से वेकेशन के आखरी दिनों तक हम लोग बहार नहीं जा पायें. गुरप्रीत अंकल मेरे डेड के साथ ऑफिस में काम करते थे. वैसे वो पंजाब से थे लेकिन नौकरी की वजह से अभी सूरत में रहते थे.
उनकी बीवी का नाम कुलदीप था. इस पंजाबी आंटी के तेवर वैसे देखने लायक थे, वोह कभी भी किसी से सीधे मुहं बात नहीं करती थी, उसे बहुत गुमान था अपने पति की 6 फिगर वाली नौकरी पर. छुट्टियां पूरी होने को थी, दादी की तबियत भी अब अच्छी थी इसलिए डेड और गुरप्रीत अंकल ने घुमने की बात कही. डेड और अंकल ने कहीं दूर जाने के बजाय यही पास दमन जाने का फैसला किया, क्यूंकि इतने दिन नहीं बचे थे अब छुट्टियों को खत्म होने में. मोम ने मना कर दिया साथ में आने के लिए क्यूंकि उन्होंने दमन बहुत बार देखा था. आखिर कार मैं पंजाबी आंटी कुलदीप, गुरप्रीत अंकल और डेड बस इतने लोग ही तैयार हुए दमन जाने के लिए. मित्रो यह सत्य घटना इसी पिकनिक में बनी थी जिस में मैंने नकचढ़ी पंजाबी आंटी की गांड मारी थी. मेरे 19 साल के जवान लंड का रस इस पंजाबी आंटी ने भरपूर पिया था. आइये देखे की यह सब कैसे हुआ.

पंजाबी आंटी की गांड मैं देखता ही रह गया

दमन पहुँचते ही गुरप्रीत अंकल और डेड पिने लगे, बल्कि दोनों ने रस्ते में ही ताड़ी लेना चालू कर दिया था. गाडी की पीछे की सिट पर मैं और पंजाबी आंटी कुलदीप बैठे हुए थे. पुरे रास्ते उसने मुझ से कोई बात नहीं की, वैसे भी वोह सुरत में भी कम ही बात करती थी. दमन आते ही हम लोगो ने एक होटल में दो रूम लिए. हमारी होटल बिच के बिलकुल सामने थी लेकिन बिच का यह हिस्सा बिलकुल उजड़ा हुआ सा था, यहाँ कोई आता जाता नहीं था. खाना खाने के बाद थकान मिटाने के लिए हम लोग होटल के अंदर के ही स्विमिंग पुल में नहाने चले गए. नहाते नहाते पुरे वक्त मेरी नजर इस पंजाबी आंटी की गांड के ऊपर ही थी. उसने भी मुझे एक दो बार उसकी गांड को देखते हुए देख लिया था. मैं सोच रहा था की इतनी बड़ी गांड में लंड देने के अपने ही मजे होंगे. शाम के खाने के बाद भी अंकल और मेरे डेड दारु के साथ डूबे रहे. इस बिच कुलदीप आंटी ने मेरे से थोड़ी बहुत बातचीत की और मुझे लगा की अब यह पंजाबी आंटी भी थोड़ी सॉफ्ट हुई थी. उसी शाम को मैं और आंटी बिच के ऊपर टहलने के लिए गए और रस्ते में मैंने जान बूझ के एक दो बार साथ चलते चलते आंटी की गांड के ऊपर हाथ जैसे की गलती से गिरा दिया. आंटी कुछ बोली नहीं और मेरी हिम्मत खुल गई. लेकिन इस टहलने के अंदर मेरा काम नहीं बना, काम तो मेरा अगले दिन बिच के ऊपर बना.

मैं और पंजाबी आंटी अकेले बिच पर गए

दुसरे दिन बड़ी सुबह आंटी ने हमारे दरवाजे के ऊपर नोक किया, मेरे डेड ने दरवाजा खोला और मैंने बिस्तर से देखा की पंजाबी आंटी स्विमस्यूट में थी. डेड उसे देख के चमके और बोले, भाभी अभी स्विमिंग करेंगी. पंजाबी आंटी हंस के बोली नहीं मुझे सुबह की हलकी धुप सेकनी हैं, आप आयेंगे. डेड बोले नहीं मैं नहीं आऊंगा. तभी में बेड से उछल के निकला और बोला मैंने आता हूँ आंटी. आंटी ने मेरी तरफ देखा, सुबह सुबह मेरा लंड पेशाब लगने की वजह से बरमुडे में टाईट हुआ था जिसकी वजह से उतना भाग उपस गया था. डेड देखे उसके पहले मैंने अपने लंड को दबा दिया. मैंने फट से ब्रश किया और चाय बना के पी ली. आंटी अंदर आ के सोफे पे बैठी थी, वो मेरी चाय ख़त्म होने की ही राह देख रही थी. मुझे बहुत जल्दी थी इस आंटी के साथ बहार जा के घुमने में. मेरी चाय खत्म होते ही हम लोग निकल पड़े. मैं मेरे आगे चल रही आंटी की मस्त गांड को देख के खुश हो रहा था. मेरे लंड में अभी भी मस्त तनाव बना हुआ था. कुलदीप आंटी बस अपनी चूत के फाटक खोल दें. मैं कब से ऐसी ही कोई बड़ी उम्र की चूत ढूंढ रहा था जो मुझे ख़ुशी भी दे और जेबखर्च भी.

तू मेरी गांड क्यों देख रहा था…???

आंटी आगे आगे चल रही थी और मैं वही मस्ती में उसकी मटकती गांड जो स्विमिंग स्यूट में मस्त लग रही थी उसे देख रहा था. थोड़ी देर में ही हम लोग बिच पर पहुँच गए और आंटी ने एक शीशी निकाली जिस में से उसने कोई तेल निकाला और वो अपने चुंचो के ऊपर के भाग, कंधे और गालो के उपर मलने लगी. बिच के उपर हम दोनों के अलावा दो कुत्ते ही थे. सुबह का वातावरण था और यह बीच वैसे भी इतना फेमश नहीं था की यहाँ लोग सुबह सवेरे भीड़ करे. आंटी ने अपनी गांड वाले हिस्से पे तेल लगाना चालू किया और मुझे पहली बार लगा की साली यह पंजाबी आंटी तो बेशर्म बनती जा रही हैं. तभी आंटी बोली, आजा ना मुझे तेल लगा दे..पीछे कमर पे मेरा हाथ नहीं जाएंगा. मैं थोडा रुका और कुछ सोचूं उसके पहले ही आंटी बोली, अरे वैसे तो तू मेरी गांड पीछे से बहुत देखता हैं और अब क्यों शर्मा रहा हैं. मैं सहम गया और मनोमन सोचने लगा तो क्या यह आंटी मेरे हिलचाल के ऊपर नजर बनाये हुए थी और उसे सब पता था की मैं क्या कर रहा हूँ. मुझे लगा की आंटी को भी चुदवाने की इच्छा जरुर होगी तभी तो उसने मुझे कुछ कहा नहीं और अब वो मुझे मालिश कर देने के बहाने अपने शरीर के स्पर्श करने का मौका दे रही थी. वैसे अगर आंटी शरीफ होती तो वो मुझ से दुरी रखती, लेकिन यहाँ तो खर्बुचा खुद छुरी के ऊपर गिरने के लिए तैयार था. मैंने तेल हाथ मे