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लेखिका: सानिया रहमान
मेरा नाम सानिया रहमान है। मैं अपने शौहर के साथ चंडीगढ़ में रहती हूँ लेकिन हम दोनों ही लखनऊ के रहने वाले हैं। मैं दिखने में बेहद खूबसूरत और सैक्सी हूँ। मेरा रंग गोरा, बाल एक दम काले घने लंबे और आँखें भुरी हैं। मैं अपने रंग-रूप का बेहद ख्याल रखती हूँ और हमेशा सज-संवर कर टिपटॉप रहना पसंद है मुझेमैंने होम-सायंस में एम-ए किया है। शौहर से मेरी शादी कुछ साल पहले ही हुई है। शौहर एक बड़ी कंपनी में मार्कटिंग मैनेजर हैं। वो सुबह जल्दी चले जाते हैं और फिर रात के आठ-नौ बजे तक वापस आते हैं। महीने में करीब दस से बारह दिन तो उन्हें चंडीगढ़ से बाहर भी जाना पड़ता है। मैं बेहद सैक्सी हूँ लेकिन शौहर छः-सात दिनों में महज़ एक ही दफा मेरी चुदाई करते हैं। मेरी चुदाई की भूख नहीं मिट पाती और मैं खूब चुदवाना चाहती हूँ।

घर में तमाम दिन अकेली रहती हूँ। घर की साफ-सफाई के लिये सुबह एक कामवाली आती है इसलिये मुझे दिन भर ज्यादा कुछ काम भी नहीं होता। वैसे टीवी से काफी वक्त बीत जाता है क्योंकि मैं केबल पर सीरियल और रियल्टी शो वगैरह देखने की शौकीन हूँ। हफ्ते में तीन-चार दिन तो अकेले ही दोपहर में मार्केट या मॉल में खरीददरी और विन्डो शॉपिंग या फिर थियेटर में फिल्म देखने निकल जाती हूँ। इसके अलावा इंटरनेट सर्फिंग भी करती हूँ और अक्सर पोर्न वेबसाइटों पर गंदी फिल्में और कहानियाँ पढ़ कर मज़ा लेती हूँ। हकीकत में सिर्फ मेरे शौहर ने ही मुझे चोदा था लेकिन तसव्वुर में तो मैं हज़ारों मर्दों से चुद चुकी थी जिनमें फिल्मी हीरो और दूसरे सलेब्रिटी से लेकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में  मिलने वाले हर तबके के गैर-मर्द शामिल थे। अक्सर मैं किसी पड़ोसी या किसी दुकानदार,  माली,  पोस्ट-मैन,  फल-सब्ज़ी वाले का तसव्वुर करते हुए केले से चोद कर अपनी चूत की आग बुझाती थी। शौहर की सर्द-महरी की वजह से वक्त के साथ-साथ मेरी तिशनगी इस कदर बढ़ गयी कि मैं किसी गैर मर्द के लंड से हकीकत में चुदवाने का सोचने लगी।

हमारे मुहल्ले में घूम-घूम कर सब्ज़ी और फल बेचने वाले आते रहते हैं। उनमें से एक फल बेचने वाले का नाम मोहन था। वो मुझसे बहुत ही मुस्कुरा-मुस्कुरा कर बात करता था और कभी-कभी मज़ाक भी कर लेता था। क्योंकि मैं हमेशा अच्छे कपड़े और सैंडल पहन कर सज-संवर के रहती हूँ इसलिये वो कईं बार मेरी तारीफ भी कर देता और कहता कि “आपको तो फिल्मों में काम करना चाहिये!” दिखने में वो भी ठीक-ठाक था। उसकी उम्र बीस-इक्कीस साल से ज्यादा नहीं थी लेकिन उसका जिस्म एक दम गठीला था। मैं अक्सर उसका तसव्वुर करते हुए अपनी चूत को केले से चोद कर मज़ा लेती थी। मैंने सोचा कि मैं मोहन को थोड़ा सा और ज्यादा लिफ्ट दे दूँ तो शायद बात बन जाये और मुझे उससे चुदवाने का मौका मिल जाये। क्योंकि मुहल्ले के लोग शौहर को अच्छी तरह से जानते पहचानते थे,  मुझे डर था कि अगर मैंने मुहल्ले में किसी के साथ चुदवाया तो शौहर को पता चल जायेगा। मुहल्ले में ज्यादातर सर्विस करने वाले ही रहते थे और नौ-दस बजे के बाद मुहल्ले में सन्नाटा हो जाता था।

करीब एक हफ्ता लगा मुझे हिम्मत जुटाने में और सही मौका मिलने में। इस दौरान मैंने एहतियात के तौर पे बर्थ-कंट्रोल पिल्स भी लेनी शुरू कर दी। फिर एक दिन मेरे शौहर दो-तीन दिन के लिये बाहर गये हुए थे और मैं पक्के इरादे से मोहन का इंतज़र करने लगी। उस दिन मैंने तैयार होने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। गुलाबी रंग के डिज़ायनर सलवार कमीज़ के साथ काले रंग के ऊँची ऐड़ी के सेन्डल पहने और मैचिंग लिपस्टिक, ऑय-शेडो, फाऊँडेशन वगैरह से पूरा मेक-अप किया था। करीब ग्यारह बजे मोहन की आवाज़ सुनायी पड़ी,  “केले ले लो केले!” वो जब मेरे घर के सामने आया तो बोला, “मेम साब! केले चाहिये? बहुत ही लंबे और मोटे केले हैं!” मैंने कहा, “पहले अपने केले दिखा तो सही!” वो गेट खोलकर बरामदे में मेरे पास आया और अपने सिर से फल की टोकरी उतार कर ज़मीन पर रख दी। फिर वो खुद भी नीचे बैठ गया और उसने मुझे एक बहुत बड़ा केला दिखाते हुए कहा,  “मेम साब! आप ये केला देखो! बहुत ही अच्छा है आपको मज़ा आ जायेगा!” मैंने मुस्कुराते हुए सैक्सी अंदाज़ में कहा, “ये केला तो मुलायम सा है मुझे एक दम टाइट और बड़ा केला चाहिये!” उसने मुझे दूसरा केला दिखाते हुए कहा, “तो ये वाला देखो!” मैंने कहा,  “मुझे कोई खास केला दिखा!” उसने दूसरा केला निकाला और मुझे दिखाते हुए बोला, “फिर ये वाला देखो... आपको ज़रूर पसंद आयेगा! लंबा-मोटा है और टाइट भी है और बहुत पका भी नहीं है!”

मोहन ने निक्कर और बनियान पहनी हुई थी। उसके निक्कर के ऊपर से ही उसका लंड महसूस हो रहा था। ऊपर से उभार देखने में ही मैंने अंदाज़ा लगाया कि उसका लंड आठ-नौ इंच से कम लंबा नहीं होगा। मैंने बिल्कुल बेहया होकर अपना पैर उठा कर सैंडल से उसके लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहा,  “तूने जो वहाँ पर एक स्पेशल केला छुपा कर रखा है वो नहीं दिखायेगा? वो क्या किसी और के लिये छुपा रखा है!” वो बोला,  “आप मज़ाक कर रही हैं!” मैंने अपने होंठ दाँतों में दबाते हुए कहा,  “मैं मज़ाक नहीं कर रही हूँ!” वो शरमाते हुए बोला,  “मैं ये केला यहाँ पर कैसे दिखा सकता हूँ?” मैंने इधर उधर देखा तो आसपास कोई नहीं था। मैंने मोहन से कहा,  “तू अंदर आ जा और फिर मुझे अपना केला दिखा!” वो अंदर आ गया तो मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैंने उससे कहा, “अब तू अपना वो खास केला मुझे दिखा!” वो बोला,  “मेम साब ये केला आपके लायक नहीं है... ये बहुत ही बड़ा है!” मैंने कहा,  “ये तो और अच्छी बात है! मुझे बड़ा केला ही चाहिये!” उसने शरमाते हुए अपना लंड निक्कर से बाहर निकाला और बोला, “लो देख लो!” उसका लंबा और मोटा लण्ड देखकर मेरी धड़कनें तेज़ हो गयीं और चूत में खलबली सी मच गयी। मैंने कहा,  “बेहद शानदार केला है ये तो! मुझे तेरा केला पसंद  है... मुझे यही केला चाहिये!” वो बोला,  “मेम साब बहुत दर्द होगा!” मैंने कहा,  “बाद में मज़ा भी तो आयेगा!” वो बोला,  “वो तो मुझे पता नहीं मेम साब! लेकिन ये केला खाने से आपकी फट सकती है! अब तक मेरी भाभी और आपकी तरह ही एक मेम साब के कहने पर उन्हें अपना ये केला खिला चुका हूँ और दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर सकीं! दोनों की कईं जगह से कट फट गयी थी और दोनों ने ही फिर कभी इसे खाने की हिम्मत नहीं की!” मैंने कहा,  “मैं तो कईं दिनों से ऐसा ही केला ढूँढ रही थी!” वो बोला,  “आप सोच लो मेम साब! मैं तो जैसा आप कहेंगी वैसा करने के लिये तैयार हूँ… आगे आपकी मर्ज़ी! कुछ हो गया तो मुझ पर इल्ज़ाम मत लगाना!”

मैं मोहन के करीब गयी तो उसके जिस्म से पसीने की बास आ रही थी। मैंने कहा, “तेरे जिस्म से तो बास आ रही है… पहले तू नहा ले उसके बाद मैं तेरे इस केले का स्वाद चखुँगी!” मैंने उसे बाथरूम में लेजाकर एक अच्छी सी महक वाला साबुन दे दिया। उसने अपनी बनियान और निक्कर उतार दी और नहाने लगा। मैं वहीं खड़ी उसे निहारती रही। उसने जब अपने लंड पर साबुन लगा कर उसे खूब रगड़ा तो उसका लंड एक दम टाइट हो गया। मैं उसके नौ इंच लंबे और बहुत ही मोटे लंड को देखती ही रह गयी। लंड लम्बा तो था ही लेकिन उससे ज्यादा खास बात थी उसकी गैर-मामुली मोटाई। “सुभान अल्लाह!” मेरे मुँह से निकला और मेरे जिस्म में उसके लंड को देखकर आग सी लगने लगी। मैंने कहा,  “ला मैं तेरे इस केले पर साबून लगा देती हूँ।” मैंने उसके हाथ से साबुन लेकर उसके लंड पर साबुन लगाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही उसके लंड का जूस निकल कर मेरे सैंडलों पर गिरने लगा। मैंने खिझते हुए थोड़ा गुस्से से कहा,  “ये क्या? तेरे लंड का जूस तो इतनी जल्दी निकल गया?” वो बोला,  “मेम साब क्या करूँ ज़िंदगी में तीसरी बार किसी औरत ने मेरे लंड पर अपना हाथ लगाया है वो भी एक साल बाद  इसलिये मैं जोश में आ गया लेकिन अब इसका जूस जल्दी नहीं निकलेगा!” मैंने कहा, “अब तो तेरे लण्ड को खड़े होने में थोड़ा वक्त लगेगा अब तू जल्दी से नहा कर बाहर आ जा ताकि मैं तेरे केले का स्वाद चख सकूँ!” वो बोला,  “बस मैं अभी आता हूँ मेम साब!”

मैं बाहर बेडरूम में आ गयी। पहले तो मैंने अपनी उंगलियों से अपने पैरों और सैंडलों से उसके वीर्य को पोंछा और फिर अपना हाथ नाक के पास ले जाकर सूँघा। फिर ज़ुबान बाहर निकाल कर मैं अपनी उंगलियों से मोहन का वीर्य चाटने लगी। मेरी चूत की हालत खराब थी और खूब भीग गयी थी। मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फटाफट सलवार कमीज़ उतार दी और पैंटी चूत पर से एक तरफ खिसका कर सहलाने लगी। इतने में ही वो भी नहा कर मेरे बेडरूम में नंगा ही आ गया। वो आँखें फाड़े मुझे निहारता रह गया क्योंकि मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने उसके सामने मौजूद थी और अपनी चूत सहला रही थी। मैं अपनी चूत सहलाना छोड़ कर उसके करीब आ गयी। अब उसका जिस्म खुशबू से महक रहा था। मैंने उसका ढीला लंड अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर बाद नीचे बैठते हुए म