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संगीता की गांड के छेद में हाथ की ऊँगली डालते ही वो उह उह करने लगी. इधर मेरा लंड खड़ा हो चूका था और वो भले संगीता सीनियर हो लेकिन उसकी चूत के लिए भी बेताब था. मैंने संगीता की चुंची वापस अपने हाथ में ली और दुसरे हाथ की ऊँगली को और आगे खिसकाया. संगीता थोड़ी हिली और उसने अपने मुहं को मेरे शोल्डर के उपर रख दिया. उसके ऐसा करने से उसकी एक चुंची मेरे सीने के ऊपर आ रही थी. मैंने संगीता की गांड के छेद में हिम्मत कर के ऊँगली डाल ही दी. सच में गरम गांड क्या होती हैं तो मुझे आज पता चला. संगीता ने एक और आह भरी और वो बोली, “वाऊ बड़ा अनुभवी लगता हैं तू तो और मुझे कहता हैं की कभी चुदाई नहीं की, जूठ बोला था ना…!”

उसकी चुंची चूस के गांड में ऊँगली की

मैं कुछ नहीं बोला और मैंने संगीता को आगे की और धक्का मार के उसकी चुंची को अपने मुहं में ले ली. संगीता ने अपने हाथ मेरे मस्तक के ऊपर रख दिए और मुझे अपनी और जोर से खिंच लिया. मैंने ऊँगली को पिछले छेद में हिलाना चालू कर दिया और संगीता को मजा आने लगा. संगीता अब मेरे बालों को जोर जोर से मसलने लगी और मैंने उसकी चुंची को वैसे ही मजे से चूस रहा था. अब मैंने अपने दोनों हाथो को उसके कूल्हों पर रख दिया और उसकी गांड को फैला डाला. संगीता ने मस्ती से मोनिंग की और वो बोली, “कुलदीप प्लीज़ मेरी चूत को चाट लो आज तुम. और मेरी गांड को भी अपनी जबान से मजे करा दो.”

मैं मन में ही बोला की रानी आज तो तेरी चूत को अपने लंड के तेज़ाब से ही भिगोना हैं बस तू एक बार चुदवा ले मुझ से. मैं अब निचे बैठ गया और संगीता ने अपनी जांघे बेड के ऊपर के गद्दे के ऊपर रखी हुई थी. उसने अपने हाथ से पीछे का छेद अभी भी खुला रखा हुआ था. वो बड़ी बेसब्री से चाहती थी की मैं अपनी जबान से उसे मजे दे दूँ. मैंने अपनी ऊँगली को उसके दोनों छेदों पर रगडा और देखा की बहुत सारी चिकनाहट जमा हो चुकी थी. अब मैंने हलके से अपनी जीभ को उसकी चूत के होंठो पे लगा दिया. संगीता ने अपना एक हाथ मेरे माथे पे रख के मुझे अपने अंदर खिंच लिया. उसकी गांड के छेद से गंध आ रही थी; लेकिन सच बताऊँ तो उस गंध में भी एक मादकता भरी हुई थी. मैंने चूत को चाटते हुए अपनी एक ऊँगली को वापस गांड पे रखा और उसे सहलाने लगा. संगीता ने मेरे माथे को जरा जोर से अपने छेदों के ऊपर दबा दिया. अब की मेरा मस्तक गांड के ऊपर रगड़ रहा था. मैंने चूत के ऊपर से जबान को हटा के संगीता की गांड पे रख दी.

संगीता के बदन में जैसे के करंट का झटका लगा हो और वो भी 1000 वोल्ट का. वो फट से आह कर बैठी और बोली, “वाऊऊउ मेरी डार्लिंग…कम ओन सक माय एस जस्ट लाइक धेट.” उसके ऐसा बोलने से मेरे लंड में भी जैसे की गरमी चढ़ रही थी. मैंने एक हाथ से उसके कुल्हें को खोला और दुसरे हाथ से अपने लंड के सुपाडे को सहलाने लगा. संगीता की गांड के छेद में मेरी जीभ टकरा के उसके शरीर में उत्तेजना के कंपन फैला रही थी. संगीता अपने मुहं से आह ओह ओहा आह आहाआआआ के आवाज निकालते जा रही थी जो मुझे भी उत्तेजित कर रहे थे. संगीता ने अब बेड के ऊपर सीधे लेट के अपनी जांघो के पास से टांगो को ऊपर की तरफ उठा ली. ऐसा करने से निचे उसकी चूत और गांड वाला भाग मेरे सामने खुला हुआ था. उसने मेरी और देखा और बोली, “अब चाटो इसे आराम से…!”

मैंने अपनी जबान को बारी बारी उसकी गांड और भोसड़ी के छेद के ऊपर रगड़ी और मैं उसे किसी कुत्ते की तरह चाटने लगा. संगीता ने अपनी चूत के होंठो को अपने एक हाथ से पकड के खोला. उसकी चूत अंदर से लाल लाल थी; भले उसका रंग सांवला था. मैंने उसकी उस लाल लाल त्वचा को अपने होंठो से छू लिया और अब मैं उसके कूल्हों को दोनों साइड से फाड़ के उसे और भी फैला रहा था. संगीता मस्तियाँ रही थी और वो मेरे माथे को अपनी तरफ जोर से खींचने में व्यस्त थी. मैंने जीभ को छेद के अंदर डाल दी और संगीता को जैसे एक साथ 100 100 खुशियाँ मिलने लगी हो…! उसके मुहं से आह ओह ओह मजाआआआ आया रहा हैं….वाऊऊ वगेरह निकलने लगा…! मैंने अपने हाथ से लंड को और भी जोर से हिलाना चालू कर दिया. लेकिन संगीता तो शायद लंड लेना ही नहीं चाहती थी. वो अभी भी चूत चटवाने में ही खुश लग रही थी. मैंने सोचा की चलो बहुत चुसाई हो गई अब सही चुदाई का मजा लेते हैं. और जाने से पहले मैंने आखरी बार गांड के और आगे के छेद पे अपनी जबान फेर दी.

सीनियर की चूत मार ली

संगीता को वही लेटा छोड़ के मैं उठ गया. वो कुछ सोचे उसके पहले ही मैंने अपने काले नाग को उसके छेद पे सेट कर दिया. उसके चूत की और मेरे लंड की गरमी आमने सामने टकरा गई और मैंने हलके से एक झटका दे दिया. संगीता के मुहं से आह निकल गया. मैंने पीछे से हाथ आगे डाला और उसकी चूंचियों को अपने कब्जे में ले लिया. संगीता ने एक आह निकाल दी अपनें मुहं से. मैंने अपने लंड को एक ही झटके में आधे से ज्यादा उसकी चूत में पेल डाला था और अब एक झटका और देना था बस. लेकिन मैंने उसके लिए जरा भी जल्दबाजी नहीं की. मैंने अपने आधे लंड को अंदर थोडा हलाया और उसे चूत की दीवारों के ऊपर रगड़ दिया. गरम गरम चमड़ी एक दुसरे से घिसे तो क्या अहसास होता हैं ना….! संगीता की चुंची और निपल्स बहुत कडक हो चुकी थी जैसे की वो एक टेनिस बोल हो. मैं चुंचियो को दबाता रहा और इस बिच मैंने एक झटका और दे दिया. अब की मेरा लंड पूरा अंदर जा चूका था और इर्द गिर्द की जकडन जैसे मेरे लंड को दबोच रही थी. संगीता ने अपनी गांड को थोडा सेट किया और वो अब उसे हलके हलके से आगे पीछे करने लगी. मेरा कड़ा हुआ लौड़ा उसकी चूत के अंदर धीरे धीर अंदर बहार होने लगा. संगीता के मुहं से अभी भी ओह ओह आआ आह निकल रहा था. लंड एकदम से तो सेट होनेवाला नहीं था.

मैंने अब अपने दोनों हाथो को संगीता की गांड के उपर रख दिया. मैं उसकी गांड को आगे पीछे करने में उसकी मदद करने लगा. संगीता अब कुछ कुछ सेट लग रही थी क्यूंकि अब उसकी गांड और भी जोर से आगे पीछे हो रही थी. मैंने भी उसकी बढ़ी हुई गति को देख के अपने लंड के झटके कुछ फास्ट किये. मेरा पूरा लंड बहार आता था और फिर एक झटके में उसकी चूत में जाता था. संगीता अपनी गांड को अब और भी जोर जोर से झटके देने लगी. संगीता की गांड के ऊपर ग्रिप रखे हुए अब मैंने अपने लंड को जरा जोर से अंदर बहार करना चालू कर दिया था. संगीता अब हेवी मोनिंग कर रही थी और मेरी गांड भी फट रही थी. मुझे यह तो पता था की दुसरे सीनियर को पता हैं की अंदर क्या हो रहा हैं लेकिन फिर भी डर तो लगता ही हैं. संगीता ने अपनी ऊँगली को चूत पे रखी और वो मुझ से चुदते चुदते वहाँ पे ऊँगली करने लगी. वो निचे के होंठो को ऊँगली से पसार के और भी मजे लेने में लगी हुई थी. मैंने संगीता को और भी जोर जोर से आगे पीछे करना चालू कर दिया और वो जोर जोर से आह करने लगी. मैंने अपना हाथ गांड से हटा के उसके मुहं पे रख दिया. मैंने अपनी ऊँगली उसके मुहं में लोलीपोप बना के दे दी जिस से उसकी आवाज रुक जाए किसी तरह से. संगीता मेरी ऊँगली को ऐसे चूस रही थी जैसे उसके मुहं में बकरे का लंड हो.

संगीता आह आह कर के अभी भी हिल रही थी. मेरी उत्तेजना जैसे मेरे लंड के आ बसी थी. मैंने फचफच की आवाज से अपने झटको की तीव्रता और भी बढ़ा दी. संगीता भी अपने मटके जैसी गांड को जोर जोर से हिलाती रही. तभी मेरे लंड ने अपनी आखरी सांस उसकी चूत में ली. वीर्य की पिचकारी निकल के सीधी अंदर की गुफा में भर गई. संगीता ने अपने छेद को टाईट कर के सभी मावा अंदर ले लिया. मैं थक चूका था सीनियर की ऐसी चुदाई के बाद. मैंने लंड बहार निकाला और पलंग पे संगीता के पास लेट गया. संगीता ने मेरा हाथ पकड़ के अपनी चूंचियों पे रख दिया. मैंने वहाँ थोडा मसल दिया और उतने में वो भी उठ खड़ी हुई. उसने कपडे पहने और मुझे कहा की उसकी आगे से कोई रेगिंग नहीं होंगी और अगर कोई उसके लिए कहे तो उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर दिया की इस नंबर पे कॉल कर देना मुझे. आधी घंटे के बाद रवी, प्रकाश और गुरु आये. मुझे प्रकाश ने बताया की उसे भी एक सीनियर जिसका नाम पल्लवी था वो एक कमरे में ले गई थी. मैं समझ गया की उसे भी चूत का मजा मिला होंगा मेरी तरह.  गुरु और रवी का रेगिंग हुआ था पुरे समय और हमदोनो चुदाई के मजे ले रहे थे. वैसे फायदा दोनों का हुआ था; वरना संगीता की काली गांड और चूत को चाटनेवाला कहाँ से ले के आती वो…!

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