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मेरे नाम सरिता है और मेरी उम्र करीब 48 साल है। मेरा एक बेटा है जो करीब 23 साल का है और एक कॉलेज मे पढता है। उसका एक काफी अच्छा दोस्त, विक्की, है जो उसके साथ काफी समय व्यतीत करता था। वो दोनों अक्सर साथ ही पढ़ते थे। कभी उसके घर पर और कभी मेरे घर पर। उन दोनों की वजह से मै और विक्की की मम्मी काफी अच्छे दोस्त बन गये थे। मेरे पति की डेथ काफी समय पहले हो गयी थी और घर मे मै और मेरा बेटा ही रहते थे। एक बार विक्की की मम्मी को कहीं बाहर जाना था तो उन्होंने मुझे फ़ोन करके पूछा कि मुझे कोई समस्या न हो तो विक्की 4-5 दिन के लिए मेरे यहाँ रहा जाये। मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। वैसे भी ये लोग काफी समय साथ बिताते थे। अगले दिन विक्की सारा सामान लेकर हमारे घर आ गया और मेरे बेटे के रूम मे शिफ्ट हो गया।
3 दिन बच्चो के साथ कैसे निकले पता ही नहीं चला। लेकिन इस बार मुझे विक्की मे कुछ बदलाव महसूस हुए। जैसे कि वो मेरे साथ रहने के कोशिश करता। और मेरी मदद के बहाने से मुझे छुने की कोशिश करता। एक बार मैने उसे अपने दरवाजे के बाहर पकड़ा। वो शायद मुझे कपडे बदलते हुए देख रहा था। मैने उसका बचपना समझ कर उसे अनदेखा कर दिया और मुस्कुरा के चली गयी। उसने मेरी मुकुराहट का गलत मतलब निकाल लिया। मेरा बेटा खेलकूद मे भी भाग लेता था और उसको 4 दिन के लिए कही बाहर जाना था। घर मे विक्की और मै अकेले थे। मेरा बेटा सुबह-सुबह निकल गया था। मै दुबारा जाकर सो गयी और मै अपने रात के कपड़ो मे थी। विक्की भी कुछ देर सोकर नहाने चला गया और पता नहीं क्या हुआ? मुझे विक्की के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी। मैने जो पहना था वो ही पहन के विक्की के रूम मे भागी। देखा तो विक्की नंगा बाथटब मे नंगा लेटा और एक मकड़ी से डर रहा था। मेरे दरवाजा खोलने के आवाज़ से मकड़ी भाग गयी। विक्की का लंड खड़ा था और उसका एक हाथ लंड पे था और वो हस्त्मथुन कर रहा था। मैने ये सब देखा और चुप हो गयी। मैरे कपडे बड़े कामुक थे। उसमे से सब कुछ दिख रहा था। पारदर्शी होने के कारण मेरे चुचे और निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे। ड्रेस काफी ऊची थी तो मेरी भरी हुई जांघे दिख रही थी।
उसने मुझे देखा और बोला- आंटी आप बड़ी खुबसूरत हो और सेक्सी भी। देखो आपको को देखकर ये कितना फूल गया है और फडफडा रहा है। आंटी मैरे लंड मे बड़ा दर्द हो रहा है। क्या आप मेरी मदद करेंगी? मैने बोला- ठीक है। मुझे भी लंड देखकर बैचेनी हो गयी थी और मैरे अन्दर की दबी हुई प्यास फड़क उठी। मै टब के बाहर के बैठ गयी और एक हाथ मे विक्की का लंड पकड़ लिया और उसकी मुठ मारने लगी। विक्की बोला- मज़ा नहीं आ रहा आंटी। आप अन्दर आ जाओ।
अब मै भी टब मे घुस गयी और उसकी टांगो की तरफ बैठ गयी और अपने दोनों हाथो से विक्की के लंड को पकड़कर मुठ मारने लगी। विक्की थोडा सा उठा और मैरे चूचो को दबाने लगा। मैरे मुह से मस्त आवाज़े निकलने लगी। फिर उसने अपने हाथ मैरे कपडे के नीचे घुसा दिए और मैरे बदन पर मस्ती मे हाथ फेरने लगा। मुझे भी मज़ा आने लगा था।
उसने थोडा सा जोर लगाकर मैरे सारे कपडे उतार दिए और मुझे नंगा कर दिया और मैरे चुचे दबाने लगा। अब तक मेरी चूत मे खुजली शुरू हो चुकी थी। उसका लंड भी काफी बड़ा हो चुका था। विक्की बोला- आंटी हाथ से नहीं चूत से लंड की बैंड बजाओ। फिर मै थोड़ी सी ऊपर उठी और मैने अपनी चूत को अपने एक हाथ से खोला और विक्की के लंड के ऊपर रख दिया और धम से नीचे बैठ गयी।
विक्की की सारी खाल नीचे खीच गयी और वो सिस्त्कार उठा। मेरी चूत ने भी काफी समय बाद लंड का स्वाद चखा था तो मै मस्ती मे खो गयी। मैने मस्ती मे अपने आपको ऊपर नीचे करना जारी रखा। विक्की तो झड चुका था लेकिन मै नहीं झड़ी थी। मै उसके लंड पर कूदती रही। विक्की की हिम्मत थी। जब तक मै झड़ी नहीं उसने अपने लंड को खड़े रखा और मुझे पूरी तरह से संतुष्ट किया। मुझे विक्की का लंड आज अपने अन्दर डलवाके बड़ा मज़ा आया।
उसके बाद जब तक मेरा बेटा वापस नहीं आया मैने और विक्की खूब मस्ती की और विक्की ने मुझे दिन रात चोदा और मेरी काफी बरसो की कसर पूरी कर दी।