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मैं जीतू, अपने भैया-भाभी के साथ कानपुर में रहता हूँ। मॉम, डैड और एक बहन  भी है जो लखनऊ में रहते हैं। मेरी एज 18 साल है और भाभी की एज करीब 24 साल की है।
भैया रेलवे में मोटरमैन हैं। सुबह 5 बजे ड्यूटी जाते हैं और अल्टरनेट डे घर आते है। मैं अभी 12th की पढ़ाई कर रहा हूँ।
भाभी पे मेरी नज़र उस दिन से ही थी जिस दिन मैंने उन्हें एक बार सुबह भैया के जाने के बाद अर्धनग्न अवस्था में सोता हुआ देख लिया था। उन्होंने घुटनो तक वाली शार्ट नाइटी पहनी थी जो जांघो के ऊपर सरक गयी थी और उनकी गुलाबी रंग की रेशमी पैंटीज दिखाई दे रही थी।
भाभी मुझसे खुल कर बात करती है। खुली हुई है इसलिए बीच-बीच में कभी कभी डबल मीनिंग बातें कर के मेरे से मज़ाक भी कर लेती है। अब तक तो मैं हमेशा शरमा के "तुम जीत गयी, भाभी" कह कर उनके डबल मीनिंग मज़ाक को ख़त्म कर दिया करता था । लेकिन उन्हें अधनंगी अवस्था में देखने के बाद मेरा इरादा बदल चुका था। अब मैं उनको चोदने का मौका निकालने की फ़िराक में रहने लगा था।
एक बार उस दिन जब भैया घर नहीं आने वाले थे, मैं भाभी को मूवी दिखाने ले गया। गरम टाइप की इंगलिश मूवी! वापसी में बाहर ही डिनर कर के घर आते-आते हमें करीब 11 बज गए। इस पूरे ट्रिप में मैंने भाभी को कई जगह अनगिनत बार टच किया। बूब्स पे, कूल्हों पे, उनकी साड़ी से झांकती हुई नंगी, गोरी, चिकनी और गदराई हुई कमर पे भी टच किया। भाभी ने सब कुछ जानते हुए भी कोई स्ट्रेंज लुक नहीं दिया था।
मैं जानता था कि वो एक कुंवारी-काल से ही चुदी-चुदाई सेक्सी औरत है। वो ज़रूर जान गयी होंगी की आज उनके देवर के अंदर का कामुक मर्द जाग उठा है। मैंने पूरी मूवी के दौरान भी उनके अंग-अंग को अचानक हुए हादसे के समान छूते हुए मज़ा लिया था।
मूवी से रेस्टोरेंट आते समय बाईक पे पीछे बैठे-बैठे उन्होंने जबरन कई बार अपने बूब्स मेरी पीठ पर कस कस के दबाए। वे लगातार मेरी गर्दन को ऑलमोस्ट किस करते अपनी गर्म साँसे मेरी गर्दन पे छोड़ रही थीं। मेरा लंड एकदम टाईट हुआ जा रहा था लेकिन बेबसी में ठंडा पड़ जाता था।
रेस्टोरंट में भोजन करते समय भाभी एकदम मेरी गर्लफ्रेंड जैसा बिहेव कर रहीं थीं। भाभी मामला समझ चुकी थी और गरम हो रही थी। लाउंज में अँधेरे में हम दोनों चिपक के बैठे थे। बस नाम मात्र की दूरी दोनों ने मेंटेन रखी थी। बीच में एकबार भाभी टॉयलेट जा कर आ गयी और फिर साथ में बैठ गयी। बियर आ चुकी थी। मैंने 2 ग्लास बनवाये थे। भाभी ने पीने से मना किया लेकिन मैंने उन्हें पिला ही दी। हलके सुरूर में दोनों वहाँ से घर के लिए निकले। अब भाभी की लिपटा-लिपटी और सख़्त हो गयी थी। नशे के नाम पे भाभी ज़ोर से लिपट रही थीं।
घर आते ही भाभी सोफे पे लेट गयी। मैं नहाने चला गया। फ्रेश हो कर आया तो देखा भाभी अपने कमरे में चली गयी थी। मैंने कहा "फ्रेश हो कर सो जाओ भाभी! गुड नाईट!" मैं अपने कमरे में चला गया। लेकिन मुझे नींद कब आनेवाली थी!
कोई 20 मिनट बाद मुझे भाभी के उल्टी करने की आवाज़ आने लगी। मैं दौड़ कर टॉयलेट की तरफ भागा और भाभी के पास पहुँच कर उनकी पीठ सहलाने लगा। मैंने महसूस किया कि उन्होंने नाइटी के भीतर ब्रा नहीं पहना है- शायद नीचे चड्ढी भी नहीं! मेरे लंड का कड़कपन और भी बढ़ने लगा।
मैंने भाभी से कहा- ओह्हो भाभी! आई एम वेरी सॉरी! मैंने आपको जबरन बियर पिला दी।
भाभी कुछ नहीं बोली उल्टी की और कुछ देर में शांत हो कर ब्रश किया और हाँथ मूँह धोकर संवर गयी।
मैंने 2 ग्लासेस में कोल्ड ड्रिंक निकाला और कहा- "ये पी लो थोडा अच्छा फील करोगी। फिर उनकी बांह पकड़ के डाइनिंग टेबल पे बैठ दिया। भाभी शांत थी। मुस्कुरा रही थी। बोली अब सब ठीक है। कोल्ड ड्रिंक का ग्लास हाँथ में लिए मैंने भाभी को उठाया और कहा; चलो 2-3 राउंड टहल लेते है; यहीं हॉल में। हम साथ में वाक कर रहे थे जैसे किसे बगीचे में राजा रानी करते होंगे किसी ज़माने में। भाभी ने ब्लैक रंग की नाइटी पहनी थी। फिर मैं भाभी को उनके रूम में ले जा कर उनके पास बैठ गया।
मैंने पूछा: सर में तो दर्द नहीं  हो रहा ?
भाभी: नहीं...माइल्ड सा है बस..ख़ास नहीं।
मैं बेड से खड़ा हुआ और भाभी के सर पे हाँथ फेरते हुए कहा "भाभी सच में मुझे नहीं पता था कि आप एक ग्लास बियर भी नहीं झेल पाओगी वरना पिलाता ही नहीं।"
भाभी: मैंने पहले कभी पी नहीं है।
मै: तो आज क्यों पी ली ?
भाभी: (मुझे हाँथ पकड़ के अपने पास बैठाते हुए बोली) तुम्हारे कहने से तो मैं जहर भी पी लूँगी।
मैं: अरे वाह क्या बात है भाभी आपकी!
भाभी: आज की शाम बहुत अच्छी थी।
मैं: हाँ भाभी..बहुत अच्छी शाम थी।
भाभी: मैं तुम्हारे साथ सोना चाहती हूँ।
मैं: चौंकते हुए कहा- क्या? अब आपकी शरारत शुरू हो गयी डबल मीनिंग वाली।
भाभी: हँसते हुए बोली- अरे राजा जी! अपने देवर से मज़ाक नहीं करूंगी तो मर ना जाऊंगी।
मैं: ओह भाभी ये क्या मरने वरने की बात।
भाभी : मेरे एकदम पास आते हुए बोली- नहीं करूंगी मरने की बात। लेकिन मेरी किसी को फ़िकर है भी तो नहीं।
मैं: भाभी ये क्या कह रही हो! हम सब आपको कितना प्यार करते हैं!
भाभी ने अब अपना सर मेरी गोद में रख लिया था और आँखे मूंदे-मूंदे मुझसे धीमी आवाज़ में बात कर रही थी; मानो सोने वाली हो और मैं भाभी के बालो को सर के सिरे से सहला रहा था मानो भाभी को सुलाना चाहता हूँ।
भाभी : सब मतलब, तुम भी मुझे प्यार करते हो ?
मैं: हां भाभी । क्यों आपको शक है मेरे प्यार पे?
भाभी: नहीं मुझे शक तो नहीं है, न ही कोई प्रॉब्लम है। बस तुम्हारे भईया को शायद ये पसंद न आए।
मैं: भाभी मेरा मतलब "वो" वाले प्यार का नहीं था।
भाभी: हँसते हुए बोली। प्यार में ये वाला या वो वाला भी होता है ?
मै: भाभी जाने दो न! आपसे कौन जीत सकता है बातों में?
भाभी: मेरा हाँथ पकड़ते हुए बोली- कोशिश तो करो! हो सकता है जीत जाओ सब बातों में।
मैं: कौन सी सब बात ?
भाभी: बताऊँ?
मैं: बताओ न!
भाभी: सोच लो। बाद में डर के भाग मत जाना।
मैं: भाभी प्लीज़ ये सस्पेंस ख़त्म कर दो। बताओ कौन सी बात।
भाभी ने मेरा हाँथ पकड़ कर अपने बूब्स पे रख दिया और अपबे बूब्स पे मेरे हाँथ को प्रेस करते हुए कहा "इस बात की बात कर रही हूँ, भोले भंडारी"!
मै काँप सा गया था भाभी के बूब्स को पकड़ कर। ये मेरे लिए अप्रत्याशित था। इसलिए मैं सहम गया और अपना हाँथ हटाने की झूठी और अनचाही कोशिश करने लगा।
भाभी ने हाँथ को और ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे बिलकुल अपने ऊपर को ले कर आँखों में आँखे डालते हुए बोली- "क्या हुआ ? ये बात नहीं है तुम्हारे मन में?"
मैंने कुछ नहीं कहा और आँख झुका दी।
भाभी मेरे चेहरे को पकड़ती हुई बोली "बोलो न! क्या मैं नहीं हूँ तुम्हारे दिल में? तुम्हे मेरी चाहत नहीं है ?"
मैंने फिर कुछ नहीं कहा तो भाभी ने मुझे पूरी तरह से खींच कर अपने ऊपर चढ़ा लिया और दांत पीसती हुई बोली..ओह्ह्ह जीतू और उन्होंने मुझे ज़ोर से स्मूच किया।
उनके जिस्म पे मेरा जिस्म था। उनके नरम गद्देदार बदन ने मेरा लंड लोहे के सामान कड़क कर दिया था।
मैंने भाभी के चहरे को दोनों हाँथेलियो में ले कर वापस स्मूच करना शुरू किया। उनके मुँह में अंदर तक जीभ डाल कर उनकी जीभ को चूसने और चाटने लगा। नीचे मेरा फौलादी लंड भाभी की चूत पे घिस रहा था।
भाभी मोशन में अपनी कमर हिला रही थी लंड और चूत पे रगड़ ज़ोर की हो रही थी। भाभी ने अपनी नाईटी घुटनो के ऊपर खींच ली और दोनों पैरो को मेरी कमर पे लपेट के लंड को चूत पे कमर हिला के मसल रही थी और स्मूच कर रही थी।
हम दोनों अब आउट ऑफ़ कंट्रोल थे।
भाभी: ओह्ह जीतू, आई लव यू सो मच!
मैं: आइ लव यू टू! भाभी! लव यू लव यू भाभी! लव यू!
भाभी के मुँह की गर्म सांस और उनके मुँह की लार मादक लग रही थी। मैं अब भाभी के बूब्स भी मसल रहा था। मैंने उनकी नाइटी को कंधो से नीचे उतारते हुए उन्हें पेट तक नंगा कर दिया और बूब्स चूमने-चूसने लगा। बीच बीच में निप्पल को हलके से काट लेता और भाभी उई माँ कह कर मुस्कुरा देती।
आह भाभी क्या बूब्स हैं तुम्हारे! आह भाभी, यू आर टू गुड भाभी!
मैं भाभी नाइटी को कमर तक ले आया और जांघो के बीच जा कर उनके पेट पे किस करने लगा। भाभी पागल हो रही थी। मेरे सिर को पकड़ रखा था भाभी ने और मेरे बालों को खीच रही थी।
उनकी नाभि में जीभ डाल के सर्कल बनाने लगा और दोनों हाँथो से बूब्स और निप्पल मसल रहा था।
मैंने भाभी की दोनों टाँगे फैलाई और चूत को देखने लगा। भाभी ने आँखे बंद कर ली थी और मेरे कंधो को सहला रही थी।
मैंने अपना मुँह खोल कर भाभी की चूत पर रखा और गर्म साँसे उनकी चूत पर देने लगा। भाभी ने कस कर मेरे कंधो को पकड़ लिया। फिर मैंने भाभी की चूत डपर जीभ फेरी और चाटने लगा।
चूत के लहसून को चाट-चाट कर चूस लेता और फिर पूरी चूत पर अपनी जीभ से सर्कल बनाता।
भाभी कसमसाने लगी- उम्म्म्म्म् जीतूऊऊऊओ, आआह्!
मै भाभी की चूत चाटने में मगन था। दोनों हांथो से उनकी चूत के होटो को फैला कर चूत में भीतर तक जीभ घुसा देता। चूत का गाढ़ा नमकीन मलाईनुमा पानी मुझे पागल कर रहा था।
मेरी जीभ भाभी के क्लिट को चाट कर चूस कर नीचे को आती और दरार से नीचे होल में पूरी घुस जाती और चूत के भीतर जीभ से सर्कल कुछ ऐसे बनाता जैसे चूत के भीतर से मलाई को खुरच रहा हो और बाहर आते आते पूरा गाढ़ा पानी चूस कर पी जाता।
भाभी कभी अपने हाँथ मेरे सर पे कास देती, कभी तकिया दबोचने लगती। जिस मोशन में मैं भाभी की चूत चाट रहा था उसके उलटे मोशन में भाभी अपनी कमर हिला हिला कर चूत चटाई का मज़ा ले रही थी।
भाभी: आह्हह्ह जीतू! ये मज़ा तेरे भैया ने सिर्फ सुहागरात को दिया था। बस फिर नहीं किया ऐसा उन्होंने। व्रत रखते है तो चूत नहीं चाटते। थक के सो जाते औंधे हो कर। मैं तड़पती रहती हूँ जीतू। आह्ह जीतू, तू मुझसे दूर मत होना! करता रह ऐसे ही; पी जा मेरा सारा प्रेमरस। अपनी भाभी की चूत का।
मैं: कभी तुमसे दूर नहीं जाऊंगा भाभी। आपको पूरा सुख दूंगा।
मैंने चूत को चाट चाट कर चिकनी और गीली बना दिया था। भाभी अपनी जांघो से मेरा सर दबा लेती तो कभी अपनी कमर को ऊंचा उठा कर मेरे मुँह पे चूत को रगड़ती।
भाभी की चूत में 2 उंगलियाँ डाल के मैंने गाढ़ा रस निकाला और भाभी के बूब्स पे मल दिया। फिर बूब्स पे से रस चाटने लगा। उनके निप्पलो से मैं फिर खेलने लगा।
भाभी मचल रही थी। उन्होंने मेरी टी-शर्ट निकाल दी। मैंने सिर्फ चंद सेकंड के लिए टी-शर्ट उतारने के लिए अपना मुँह उनके बूब्स पे उठाया और भूखे की तरह फिर से बूब्स पर टूट पड़ा।
मैं भाभी के बूब्स चाट रहा था और भाभी मेरी नंगी पीठ पर अपने सख़्त पंजो से निशाँन बना रही थी। फिर मैं साइड में लेट गया और भाभी मेरे लंड पे टूट पड़ी। पाजामा और अंडरवियर निकाल के फेंक दिया और लंड को पागलो की तरह चूमने लगी।
भाभी के खुले हुए मुलायम बाल मेरे पेट पर गुदगुदी कर रहे थे और वो आँखे बंद किये लंड चूस रहीं थीं।
सुपाड़े को भाभी बहुत ही मज़े ले कर एन्जॉय कर रही थी। उमके हाँथ मेरी जांघो पे थे, सहलाए जा रही थी और लंड चूस रही थी।
मैंने पोजीशन चेंज की और हम 69 के पोज़ में आ गए। भाभी मेरे उपर थी और उनकी चूत मेरे मुँह पे थी। चूत चाटने के दौरान भाभी कभी कभी चिहुंक के मेरे मुँह पे पूरा प्रेसर दे देती। उसी तरह कभी कभी मैं अपना लंड भाभी के मुँह में ज़ोर से ठेल देता।
अब हम दोनों मेन कोर्स के लिए तैयार थे।
भाभी को लिटा कर, उनकी जांघो के बीच आकर मैंने उनकी टाँगे फैलाते हुए अपनी बाँहो में उठाया और लंड को लगा दिया चूत के निशाने पे। भाभी की चूत कोई कुँवारी चूत तो थी नहीं, चुदा चुदाया भोसड़ा था, गप्प से खा गयी पूरा लौड़ा अंदर। मैं उन्हें हचहचा के चोदने लगा। हर शॉट के साथ भाभी की मोनिंग बढ़ती जा रही थी।
कमरा भाभी की ऊऊम्मम, आह, ओह और भाभी के काम-रस भरी चूत की फच्चर-फच्च से गूँज रहा था।
हर शॉट में लंड पूरा का पूरा अंदर घुस जाता। भाभी ने अपनी टाँगे छुड़वा ली और उन्होंने अपनी टांगो को मेरे पैरोँ पर नागिन की तरह लपेट लिया। मेरे शॉट अब तेज़ हो रहे थे। इसी बीच भाभी ने कहा- ज़रा कम स्पीड रखो राजाजी, ये खेल पूरी रात का है। एकाएक फव्वारा न निकाल बैठना अपने भईय्या की तरह।
चोदते-चोदते हाँफते हुए मैंने कहा- नो फिकर भाभी, बस आप देखती जाओ सुबह तक चुदाई चलेगी।
भाभी अपनी कमर को चुदाई की ताल में हिला रही थीं और मुझे कस कास के जकड रही थी। भाभी ने मेरे शरीर को कस के जकड़ा और अब सिर्फ मेरा लंड और कमर ही हिल रहे थे जो भाभी की चूत में पंपिंग कर रहे थे। भाभी रगड़ देती चूत को लैंड पे और जब लंड एकदम डीप में होता तो अपनी कमर को गोल गोल घुमा कर चूत की किनारी को लंड से खुरचवाती।
मैं भाभी को गले पे और बूब्स पे किसिंग कर रहा था। दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए चुदाई एन्जॉय कर रहे थे। भाभी की मस्ती अब चरम सीमा पर थी।
भाभी ने कहा- जीतू तू मुझे अपनी रांड की तरह बहुत ही बुरी तरह ट्रीट करके चोद! मुझे अपने लंड की भिखारन बन जाने दे। तेरे भईय्या शीघ्रपतन के शिकार है। मेरी चूत में 2 मिनट से ज्यादा नहीं टिक पाते। कभी कभी तो फोरप्ले में ही दम तोड़ देते है। आह्ह जीतू! फाड़ दे मेरी चूत को। फाड़ के रख दे इस मुई को। इसकी खुजली इतना तड़पाती है कि मुझे मजबूर कर दिया तेरे से चुदने को। फाड़ दे इस छिनाल चूत को!
भाभी के मुँह से ऐसे शब्द सुन कर मेरा जोश सातवें आसमान पे था।
मैं भी भाभी का साथ दे रहा था- तुझे रंडी बना कर ही चूत की ठुकाई कर रहा हूँ। तू है मेरी रंडी- ले साली ले धक्का चूत में। मेरे भाई की ये वाली कमी तो मैं रोज़ पूरी करूंगा। अब तुझे क्या चाहिए.इस घर पे और हम दोनों भाइयों के दिलों पे राज़ कर रंडी
भाभी: राज ही करूंगी तुम दोनों के लौडों पे। अब तो मेरी चुदाई रोज़ होगी! तेरे भईय्या तो अल्टरनेट डे आते हैं। ऊऊह्ह्! अब तो तू ही सहारा है राजा। लगा शॉट पूरी ताकत से। मस्सल दे रे...मस्सल् के रख दे मेरी चूत के लहसून को। रगड़ रज्जाआ...आआह,  राग्गड्डड्ड के रख दे भाभी की चूत को!
अरी मेरी भाभी, चटनी बना दूंगा चूत की आज तो! दिल तो रेस्टोरेंट के अँधेरे लाउंज में ही कर रहा था जब तू छिनाल की तरह अपने जवान देवर से चिपक रही थी कि तेरी चूत में लंड घुसेड़ दूँ।
मेरे राजा, उसी टाईम डाल देता यह लंड मेरे जलते हुए भोसड़े में! मैं कौन सा तुझे रोकने वाली थी तेरी भाभी! मेरे इस भोसड़े में तभी मलाई की बाढ़ आ गई थे रे, भाभीचोद लौंडे! इसीलिए टॉयलेट में जाकर टिश्यू से चूत की सफाई की थी। डाल और डालता रह डीप में; कह कर भाभी कमर हिला हिला कर लौड़ा ले रही थी बुर में।
कुछ शॉट्स के बाद मैं रिलेक्स करने को भाभी के ऊपर ही पड़ा रहा। भाभी ने करवट लेते हुए मुझे अपने ऊपर से साइड में गिरा लिया और मेरा सीना चूमने लगी। फिर मेरे मेहनती लंड का धीमा मुठ मारने लगी। लंड भाभी के चूत-रस में लिप्त था और भाभी की लंबी लंबी पतली पतली उंगलियां और अत्यंत सॉफ्ट हाथ मेरे गीली लंड पर एकदम स्मूथली सरक रहा था।
फिर भाभी ने मेरे लंड को मुँह में लिया और 10 -12 बार उपर नीचे किया। अंत में भाभी ने ढेर सारा थूक मेरे लंड पे छोड़ा और तुरंत ऊपर चढ़ के लंड को चूत पे साधते हुए पूरी तरह मेरे लंड पे बैठ गयी। लंड फिसलता हुआ भाभी की चूत में पूरा का पूरा समा गया। अब भाभी मेरी गर्दन को चाटने और चूमने लगी।
भाभी की बुर नहीं, भोसड़ा था। झूठ नहीं कहूँगा, अगर मेरा लंड 8 इंच से कुछ और बड़ा भी होता तो भी भाभी उस लंड को निगल के नाभि तक खा जाती। वह मेरे ऊपर मेरे जिस्म पर पूरी तरह से चिपकी हुई, मात्र अपनी कमर को ऊपर नीचे हिला हिला कर मुझको चोद रही थी। मुझे लपेटी हुई उनकी टांगो की पकड़ भाभी के हर शॉट के बाद और कस्स जाती और उनका मेरे गले पे होता हुआ चुम्बन और सख़्त होता जाता। भाभी मेरे गले पे बाईट भी कर रही थी। मैंने कहा भाभी आराम से; दाग़ आ जाएगा लव बाईट वाला।
भाभी ने मुझे कस के चूमा और मेरे कान में कहा- दाग़ ही तो बना रही ही राजा। दाग़ तो ऐसा बनाऊँगी की कल तुम कंही बाहर न निकल सको और मुझे दिन दोपहर से शाम तुम्हारे भैया के आने तक रगड़ रगड़ के चोदो।
भाभी के शॉट्स अब स्पीड ले रहे थे। वो झड़ने की ओर बढ़ रही थी। उनकी मज़बूत पकड़ और चूत का लंड पे पड़ता हुआ शॉट्स मुझे संकेत दे रहा था। मैं भी भाभी के कान चूसने लगा और भाभी अपनी स्पीड दिए जा रही थी। भाभी ने मेरे हाँथ की बगलों में से अपने दोनों हाँथो को पार करते हुए मेरी गरदन को जकड लिया और अपनी कमर को लंड के सुपाड़े की लंबाई तक उठाती और गच्च से पटकी देती लंड फिर अंदर ही जाता। चूत की बहती हुई मलाई ने इतना चिपचिपा कर रखा था की फ़च्चर फ़च्चर मची हुई थी कमरे में। भाभी ने कस के मुझे जकड़ा और ज्यादा स्पीड से मुझे चोदने लगी। मेरा जिस्म पत्थर का बन चुका था और लंड भी जिस पर भाभी चूत का वार किये जा रही थी।
मैं भाभी का कान चूस रहा था और भाभी मेरी गर्दन। शॉट पे शॉट लेती हुई वो मुझे जकड़ती जा रही थी। आआअम्म्माआआआ करती हुई भाभी ने ज़ोरदार धक्के से लंड को पूरा अंदर लिया और फिर बाहर नहीं निकाला। कस के लिपट गयी भीतर ही भीतर खरोंचने लगी चूत को और मेरे कान को ऑलमोस्ट खाती हुई भाभी झड़ने लगी। ह्ह्ह्हूओ हो हो हो करती हुई कोई 5 मिनट तक चढ़ी पड़ी रही। शांत होते होते उनका बदन ढीला हो रहा था। फिर एकदम निढाल पड़ गई। मैं उनकी पीठ सहला रहा था। फिर मैंने उनको करवट लेते हुए साइड में लिटा छोड़ा और लंबी सांस लेते हुए उन्हें चूमते हुए पुछा- हो गया भाभी? आ गई ठंडक?
भाभी ने मुस्कुराते हुए मुझे चूमते हुए मेरे कान में कहा "हाँ" और फिर लिपट गयी। अब मेरी बारी थी। करीब 5 मिनट बाद; मैंने भाभी को सहलाना शुरू किया। पेट पर किस करते हुए चूत तक पहुँचा और भाभी का रसीला पानी चूसने और चाटने लगा। भाभी एक लाश की तरह पड़ी रहा बस ज़रा सा चिहुक जाती जब मैं उनके क्लिट को होंटो से काटते हुए खींचता।
मेरा लंड अब रेडी था। मैंने भी बहुत सा थूक छोड़ा भाभी की चूत पे और उनकी टांगो को फैला कर अपने हांथो को बेड पर जमाते हुए उनकी टांगो को मेरे हांथो से लॉक कर दिया। फिर चूत में लंड घुसाया। मोशन बनाते बनाते भाभी भी साथ देने लगी।
भाभी तेरी चुदाई बड़ी मस्त मस्त है गाते हुए मैं स्पीड पकड़ने लगा। भाभी मुस्कुराते हुए जवाब में गाने लगी- ओ मेंरे राजा तेरा भी लौड़ा बड़ा सख़्त-सख्त है। हम दोनों हँसने लगे और लिपटते हुए मैंने स्पीड बढ़ा दी। भाभी अब कमर उचकाने लगी थी। मेरी स्पीड की ताल से ताल मिलाती हुई सवालिया अंदाज़ से मेरी आँखों में आँखे डाले मानो पूछ रही थी की ये स्पीड ओके है? दन-दन शॉट्स लग रहे थे। अब मैं भी क्लाइमेक्स की ओर बढ़ रहा था। भाभी पक्की चुदक्कड़ है और ये बात भाँप गयी थी। अब उनका उद्देश्य मेरा माल निकालने का था।
भाभी को लिपटाते हुए उनकी गर्दन को जकड़ के मैं तेज़ शॉट्स देने लगा। भाभी भी इक्वल रिस्पांस देते हुए मेरे कान में फुसफसाई- पानी अंदर छोड़ना चूत के भीतर। मुझे आज तुम्हारे वीर्य के धार अपनी बच्चेदानी पे महसूस करनी है।
मैंने कहा- भाभी, जोश जोश में कंही कुछ हो गया तो 9 महीने का बैन लगा बैठोगी। भाभी चूत के स्पीड बढ़ाती हुई बोली- वो सब मेरे पे छोड़ दो। बस डालो पानी आज चूत में। अब तक जिससे भी चुदी हूँ, निशानी के तौर पे उस मर्द का पहला पानी मैंने चूत के अंदर ही निकलवाया है।
भाभी की जोशभरी बातें मेरे अंदर तूफ़ान ला रही थी। हाआआआ हह आआआ करता हुआ मैंने भाभी के चूत के अंदर ही पिचकारी मारी। पानी का फ़ौवार पड़ते ही भाभी ने कस के मुझे जकड़ लिया और मेरे गले और कान को चूमने और चाटने लगी। 8 से 10 शॉट्स में पानी का नल बंद हुआ और भाभी की जलती हुई चूत में ठंडक पड़ गयी।

 

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