दोस्तों आज की इस कामुकता से भरी अन्तर्वासना हिंदी गे सेक्स कहानी में आप पढेंगे की कैसे घोड़ी बन अपनी सील पैक वर्जिन गांड मरवाने की वासना पूरी करी मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई ने ब्लू फिल्म देखने के बाद : दोस्तों मेरा नाम आदित्य है और मेरी उम्र 20 साल है. शुरू से ही मेरी रुचि लड़कियों में नहीं रहकर लड़कों में ज्यादा रही है जो इस बात की तरफ इशारा करती है की मैं एक गे हूँ. गे का मतलब तो समझते होंगे आप सभी. यदि आप को गे का मतलब नहीं पता तो मैं बता देता हूँ की ये गे होता क्या है.

गे या समलैंगिक एक ऐसा शब्द है जो मुख्य रूप से एक समलैंगिक व्यक्ति या समलैंगिक होने की विशेषता को संदर्भित करता है. जब एक मर्द का दूसरे आदमी से आकर्षण और सेक्सुएल रुझान हो तो उसे गे कहते हैं. अगर कोई व्यक्ति “गे” है, तो उसका आकर्षण किसी लड़की या स्त्री की तरफ नहीं होता बल्कि उसका आकर्षण का केंद्र मर्द ही होते हैं. फिर जब मैं बड़ा होने लगा तो मेरी छाती पर हलके हलके स्तन उभरने लगे. मेरी जांघें भी लड़कियों जैसी चिकनी और भारी भारी हो गयी थीं.

वर्जिन गांड मरवाने की वासना पूरी करी माँ के समलैंगिक भाई ने अन्तर्वासना हिंदी गे सेक्स कहानी

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मुझे ब्लू फ़िल्में देखते का बड़ा शोक था और मुझे गे वाली ब्लू फ़िल्में ही ज्यादा पसंद आती थी. इस तरह से वक्त के साथ मुझे पता चला कि मैं तो गे अर्थात समलैंगिक हूं. उम्र के साथ अब धीरे धीरे किसी समलैंगिक मर्द के लंड को अपनी सील पैक वर्जिन गांड के छेद में लेने और अपनी गांड की चुदाई करवाने की मेरी तलब अब बहुत ही ज्यादा बढ़ रही थी. फिर ऐसे ही मेरा ध्यान मेरे मामा पर जाने लगा. वो बचपन से ही हमारे साथ रहते थे. उनका नाम अनुज है और 26 साल के हैं.

मामा जॉब करते थे और घर-बाहर के सभी छोटे बड़े काम भी देखा करते थे. उनका गठीला बदन अब मुझ समलैंगिक लड़के का ध्यान खींचने लगा था. रोज सुबह वो वर्कआउट करने जाया करते थे. जब वापस आते थे तो डोले और छाती फूली होती थी जिसको देखकर मेरी सील पैक वर्जिन गांड में लंड लेकर चुदाई करवाने की कुलबुलाहट सी होने लगती थी. मामा की बनियान पूरी पसीने में भीगी रहती थी और मैं उनके आसपास घूमता रहता था ताकि उनके बदन को ताड़ सकूं.

मेरी कामुकता से भरी सेक्सी माँ के भाई का लंड उनकी जीन्स में साफ साफ उभार बनाये रहता था और मेरी नजर वहीं पर टिकी रहती थी. बहुत बार मैं उनको नहाते हुए देखा करता था. बॉडी एकदम मस्त बनाई हुई थी. नहाते हुए जब उनका अंडरवियर गीला रहता था जिस वजह से मुझे उनके लंड की लम्बाई और मोटाई पता लग चुकी थी. उनका लंड सोया हुआ ही 4 इंच के करीब लगता था. इन सब बातों के शुरू होने के बाद उनकी जॉब बदल गयी और वो दिल्ली रहने चले गये. वहां पर वो अपने कुछ रूममेट के साथ रहने लगे.

अभी कुछ दिन पहले जब वो हमसे मिलने आये तो 10-12 दिन के लिए रुकने आये थे. अबकी बार मैंने ठान ली थी किसी भी तरह मैं अपनी वर्जिन गांड को मामा के लंबे मोटे से मरवा कर ही रहूंगा. वैसे तो उनके और मेरे बीच में बहुत बातें होती थीं. हंसी मजाक भी बहुत था लेकिन कभी गांड मरवाने की इच्छा को मैं जाहिर कर ही नहीं पाया. उनको आये हुए दो तीन दिन बीत चुके थे और मेरे हाथ कुछ नहीं लगा था. मैं बस उनको अपने बदन के इशारों में बताने की कोशिश करता कि मेरी वर्जिन गांड मार लो लेकिन वो इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे थे.

हमारा एक कमरा छत पर बना हुआ था जिसको हम स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल करते थे. फिर मैं भी उसी कमरे में रहने लगा था क्योंकि मुझे अपनी प्राइवेसी चाहिए थी. उस रात को वो मेरे रूम में ही थे. हम दोनों लैपटॉप में फिल्म देख रहे थे. बातों बातों में मैंने उनसे पूछा- मामा, कोई लड़की वड़की पटाई या बस यूं ही काम चला रहे हो? मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की हां, अंजलि नाम की एक लड़की है. वो मेरी सेटिंग है. मगर वो ज्यादा कुछ करने नहीं देती मुझे. इसलिए मैं इतना मजा नहीं ले पाता उसके साथ.

मैं बोला की तो फिर कोई और देख लो. मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की नहीं यार, इतना टाइम नहीं मिलता. उसी से काम चल जाता है. फिर वो मूवी देखने लगे. थोड़ी देर में मूवी खत्म हो गयी और हम सोने लगे. रात के 10 बजे का टाइम हुआ होगा. फिर मुझे नींद आ गयी. मामा भी पहले ही सो चुके थे. फिर अचानक 2-3 घंटे बाद मेरी नींद कुछ चीखती आवाजों ने खोल दी. मैंने उठकर देखा तो नजर उनके फोन की स्क्रीन पर गयी. मामा फोन में इंग्लिश वाली चुदाई की फिल्में देख रहे थे. मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई ने मुझे देखा तो वो सहम से गये. पर मैं मुस्करा दिया तो वो भी मुस्करा दिये.

मैं फिर वापस से करवट लेकर सो गया. सुबह उठा तो वो कहने लगे- साले रात को ऐसे क्या देख रहा था? मुझे पता है कि तू भी पोर्न फिल्म देखता होगा. बच्चा थोड़ी है अब तू. फिर उन्होंने मुझे पूछा की क्या तेरे लैपटॉप में हैं ब्लू फ़िल्में? मैंने कहा की हां मैं ब्लू फ़िल्में देखता तो हूं लेकिन मैं ऑनलाइन ही देखता हूं इस लिए मेरे पास लैपटॉप में ब्लू फ़िल्में नहीं है. मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की कोई नहीं, तू ऑनलाइन ही दिखा दे. फिर मैंने लैपटॉप पर एक पोर्न साइट खोली और उस पर गे वाली कैटेगरी पर क्लिक कर दिया. गे चुदाई की ब्लू फिल्म चलने लगी. जिसमें एक नंगा समलैंगिक मर्द दुसरे समलैंगिक मर्द की गांड मार रहा था घोड़ी बनाकर.

मामा बोले- ये समलैंगिक मर्दों की ब्लू फिल्म देखता है क्या तू? मैं बोला की मैं तो सब देखता हूं. जिस ऑप्शन पर क्लिक हो गया वही देखने लगता हूं. वो फिर चुपचाप लड़के की गांड चुदाई की फिल्म देखते रहे. मेरी लुल्ली तो खड़ी हो गयी थी. साथ में मेरे छबीले मामा बैठे थे और सामने लड़के की गांड चोदी जा रही थी. मैंने पूछा- आपने कभी किया है क्या किसी लड़के के साथ? उन्होंने न में गर्दन हिलायी और चुपचाप देखते रहे. फिर मैंने उनकी जांघ पर हाथ रख लिया. उन्होंने एक बार मेरी ओर देखा और फिर दोबारा से स्क्रीन पर देखने लगे. शायद उनको मेरी बात से कुछ पता चलने लगा था.

अपनी गांड मरवाने की वासना के चलते अब धीरे धीरे मेरा हाथ सरक कर उनके लंड की ओर जा रहा था. देखते देखते मैंने मामा के लंड को छू लिया और लंड खड़ा होने लगा. अब मैंने लंड पर पूरा हाथ रख लिया और उसको दबाने लगा. अब मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई ने भी मेरी जांघ को सहलाना शुरू कर दिया. मैंने उनके लंड को हाथ में भर लिया और उनका लौड़ा पूरा तन गया. अब मामा का हाथ भी मेरी लुल्ली पर आ चुका था. हम दोनों एक दूसरे के लंडों को सहला रहे थे. वो मेरी गांड को दबाते हुए बोले- तुझे लंड पकड़ना पसंद है क्या? मैंने हां में गर्दन हिला दी.

मेरे नन्हे नन्हे हाथों में मेरे समलैंगिक मामा का काला मोटा लंड था और मेरी हालत खराब हो रही थी क्योंकि आज जीवन में पहली बार मैंने किसी मर्द का लंड पकड़ा था. फिर मैंने उनकी लोअर में हाथ डालकर उनके अंडरवियर के अंदर हाथ ले जाकर उनके लंड को पूरा हाथ में भर लिया. बहुत गर्म और सख्त लंड था अनुज मामा का. मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की अगर तू पहले बता देता तो मैं पहले ही तुझे लंड दे देता. मैं तो तेरे को चोदना चाह रहा था बहुत दिन से. तेरी गांड बहुत मस्त है. मौहल्ले वाले समीर से भी मस्त. मैंने हैरानी से पूछा- तो क्या आपने समीर को भी?

मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की हां, मैंने उसकी गांड मारी हुई है. एक बार तो उसने भी मेरी मारी हुई है. मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मामा गांड भी चोद चुके हैं. मेरी तो लॉटरी लग गयी. अब मुझे समझ में आया कि समीर और अनुज मामा इतने अच्छे दोस्त कैसे बने हुए थे. उनके बीच में तो गांडू वाला सेक्स होता था. मैंने अब मामा के लंड की मुठ मारनी शुरू कर दी. फिर उन्होंने उठकर दरवाजा बंद कर दिया. वो मेरे सामने अपना बनियान उतारने लगे. उनका लंड लोअर को पूरा तंबू बनाये हुए था.

मैं समलैंगिक लड़का तो उनके लंड को देखने के लिए बेताब सा हो उठा था और गांड मरवाने की ज्वलंत वासना बहुत ही ज्यादा भड़क चुकी थी. फिर उन्होंने लोअर को निकाल दिया. अब अंडरवियर जब नीचे खींचा तो मेरी आँखें हैरानी से फैल गयीं. सांवले से रंग का मूसल लंड उनकी टांगों के बीच में झूल रहा था. मेरे पास आकर वो मेरे चेहरे को अपनी तरफ करके मेरे होंठों को चूसने लगे. मैं भी जैसे उनके होंठों में खो गया. फिर वो मेरे कपड़े उतारने लगे और मेरी गांड को भींचते भींचते उन्होंने मुझे नंगा कर दिया. अब मेरा कोमल गोरा बदन मामा के सामने पूरा नंगा था. उनके लंड में झटके लग रहे थे.

फिर वो मुझे नीचे लिटा कर मेरे स्तन को चूसने लगे. मैं मदहोश सा होने लगा. ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी स्वर्ग में हूं. उनकी गर्म सांसें मेरी वासना को और ज्यादा बढ़ा रही थीं. मेरी छोटी छोटी गोल चूचियों को चूसते और दांतों से काटते हुए वो नीचे की ओर बढ़ रहे थे. मेरे पेट पर चूमने के बाद उन्होंने मुझे दूसरी तरफ पलटा दिया. अब मेरी गांड मामा के सामने ऊपर की ओर थी. उन्होंने मेरे चूतड़ों पर अपने गर्म होंठों से चूमा तो मेरे लंड में सरसरी दौड़ गयी. बहुत अच्छा लगा मुझे! मेरा मन किया कि गांड को मामा के गर्म होंठों पर लगा दूं और वो मेरे छेद को जोर जोर चाटें और चूमें.

तीन चार मिनट तक उन्होंने मेरी गांड के साथ खेल खेला जिस कारण से अब मेरी वर्जिन गांड का टाइट छेद अब खुद ही ढीला सा पड़ने लगा. जैसे कि वो लंड के इंतजार में खुद को तैयार कर रहा है. अब मामा मेरे बगल में आ लेटे और फिर उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. मैं मामा के जिस्म का दीवाना था और मैंने अपनी हर चाहत पूरी करने की ठान ली. मैंने उनके होंठों को चूसना शुरू किया. वो भी मेरा सिर पकड़ कर मेरी लार पीने लगे. फिर मैं नीचे गर्दन को चूसने लगा. उस समलैंगिक मर्द की सुराई जैसी गर्दन चूसने में मुझे और ज्यादा वासना होने लगी. वो भी मुझे कसकर भींचने लगे.

फिर मैंने छाती के निप्पल मुंह में भर लिये. उनके निप्पल बहुत रसीले थे. मन कर रहा था कि चूसता ही रहूं. मगर मेरी हालत ऐसी थी कि किसी भूखे के सामने ढेर सारा खाना डाल दिया गया हो और वो हर एक चीज को चखना चाह रहा हो. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपने मामा के गठीले कसरती बदन को कहां कहां से चूमूं और चाटूं. हर हिस्से को चूसना चाह रहा था मैं! बेसब्री से उनकी छाती और पेट को चूमते हुए मैं नीचे जाने लगा. जैसे ही उनके झांटों के एरिया पर किस किया तो उन्होंने मेरे सिर को नीचे दबाते हुए खुद ही मेरे होंठों को अपने लंड के टोपे पर लगवा दिया.

उनके लंड से निकली कामरस की बूंद को मैंने जीभ की नोक से चाट लिया. फिर उनकी आँखों में देखते हुए अपना मुंह खोलकर उनके मोटे सुपारे को अपने मुंह में भर लिया और आंख बंद करके चूसने लगा. हाय … इतना रसील लंड था उनका. मेरे मुंह में लार की धार बह निकली. दो मिनट में ही लंड को मैंने थूक में सान दिया. मामा के मुंह से निकलती सिसकारियां बता रही थीं कि वो कितने आनंद में हैं. उनका एक हाथ मेरे सिर पर था जो मेरे सिर को बार बार उनके लंड पर दबा रहा था. दूसरे हाथ से वो अपने पेट और छाती को सहला रहे थे. उनका ये कामुक रूप देखकर मेरा तो मन जैसे खिल उठा.

समलैंगिक सेक्स के दौरान इतना रसीला मर्द आज मुझे चूसने के लिए मिल गया है. ये हिम्मत मैंने पहले क्यूं नहीं दिखाई? मैं अपने आप से ही प्रशन पूछ रहा था. उस टाइम मुझे एसा लग रहा था जैसे मैं सातवें आसमान पर हूँ. क्या टेस्ट था उनके लंड का! वो मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुंह को अपने लन्ड पर आगे पीछे कर रहे थे. मामा पूरे खिलाड़ी थे. मुझे लंड चूसते हुए 8-10 मिनट हो गये लेकिन वो झड़े नहीं. अब उन्होंने मुझे उठने के लिए कहा. मैं समझ गया कि मेरी वर्जिन गांड की प्रथम चुदाई का शुभ मुहूर्त हो गया है और अब कुछ ही पलों में मेरी वर्जिन गांड चुदने वाली थी.

अपनी गांड मरवाने की वासना पूरी करी मेरी माँ के समलैंगिक भाई ने :- मेरे जीवन में आज पहली बार मेरी वर्जिन गांड को किसी समलैंगिक मर्द के लंबे और मोटे लंड का आनंद भोगने को मिलने वाला था. मेरी सील पैक वर्जिन गांड मारने के लिए उन्होंने मुझे घोड़ी बनने के लिए कहा. मुझे उनका लंड देखकर ही डर लग रहा था. मैंने पूछा- ज्यादा दर्द तो नहीं होगा घोड़ी बनकर गांड की चुदाई करवाने में? मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की यार … तू भी क्या लड़कियों की तरह डरता है? चल जल्दी से घोड़ी बन जा गांड मरवाने के लिए आज हम दोनों की वासना शांत हो जायगी! मन ही मन मैं तो खुश हो रहा था कि आज मेरी घोड़ी बनकर गांड मरवाने की वासना पूरी हो जाएगी. मैं घोड़ी बन गया.

फिर थूक हथेली में लेकर वो मेरी गांड के छेद पर मलने लगे. उनकी उंगलियां जब मेरी गांड के छेद को सहला रही थीं तो मेरा छेद फैलने लगा. मेरी आंखें आनंद में बंद होने लगीं. फिर उन्होंने लंड पर थूक मला और मेरे छेद पर सुपारा टिका दिया. एक दो बार मेरे छेद को लंड के टोपे से सहलाया. मेरी आह्ह … निकल गयी. फिर उन्होंने शॉट मारा तो लंड एकदम से फिसल गया. मेरी गांड टाइट थी. उन्होंने थोड़ा और थूक अपने टोपे पर लगाया. लंड डालने से पहले अपनी उंगली पर थूक लिया और मेरी गांड में दे दी. उनकी इस हरकत से मुझे दर्द हुआ लेकिन फिर गांड लंड लेने के लिए खुलने भी लगी.

वो उंगली को अंदर बाहर करने लगे. मुझे उनकी खुरदरी उँगली गांड में लेकर बहुत मजा आ रहा था. उंगली करने के बाद उन्होंने फिर से लंड को छेद पर टिकाया. अबकी बार बहुत जोर से शॉट मारा और उनका सुपाड़ा मेरी गांड के दरवाजे को तोड़ता हुआ अंदर जा फंसा. मेरी तो हालत ख़राब हो गई. जिन्दगी में पहली बार इतना दर्द महसूस किया था. किसी तरह मैंने अपने मुंह पर हाथ रखकर अपनी चीख दबाई लेकिन दर्द मेरी जान निकाल रहा था. मामा मेरे ऊपर आ लेटे और मैंने कहा की छोड़ दो मामा, नहीं लिया जा रहा. मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले की लिया जायेगा. तू तो पूरा ले लेगा मेरी जान … बस थोड़ी देर रुक जा.

वो मेरी चूचियों को भींचते हुए मुझे प्यार करने लगे. मुझे अच्छा लगा और फिर कुछ देर में पहले झटके का दर्द कम होने लगा. अब उन्होंने धीरे धीरे अपना खड़ा लंड मेरी सीलपैक वर्जिन गांड के छेद में सरकाना शुरू किया. बड़ी मुश्किल से लंड फंसता हुआ अंदर जा रहा था. धीरे धीरे करके मेरी माँ के समलैंगिक भाई ने मेरी गांड में पूरा लंड उतार दिया. ऐसा लगा कि जैसे कुछ मोटी चीज मेरे पिछवाड़े में ठूंस दी गयी हो. धीरे धीरे मेरी माँ के समलैंगिक भाई ने मेरी गांड के अंदर धक्के लगाने चालू किये. अब मेरी वर्जिन गांड को उनके लंबे और मोटे लंड को रास्ता देना ही था क्योंकि मेरी गांड के पास कोई और मार्ग नहीं था अपनी काम वासना शांत करवाने के लिए.

गांड की चुदाई के दौरान मेरी सकड़ी गांड धीरे धीरे चौड़ी होने लगी और मेरी गांड की चुदाई के दौरान लंड ने अपनी गति बढ़ानी शुरू कर दी. मामा के धक्के तेज होने लगे और लंड से चुदने का मुझे पहला मजा मिलने लगा. कुछ ही देर की गांड चुदाई के बाद मेरी गांड अब खुद ही लंड को और अंदर तक रास्ता देने लगी. मेरा मन करने लगा कि मामा आज तो अपना पूरा का पूरा लंड मेरी आँतों तक पेल डाले. मेरी आह्ह … आह्ह … निकल रही थी और मामा की ओह्ह … मेरी जान … ओह्ह मेरी रानी … ओह्ह मेरे चिकने करके सीत्कार से फूट रहे थे. इस तरह हम दोनों मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई बोले कीभांजा चुदाई में डूब गये.

घोड़ी बन गांड मरवाने में बड़ा आनंद आ रहा था मगर मेरी गांड में दर्द भी बहुत हो रहा था. अब लग रहा था कि मैं कुतिया हूं और मामा एक ठरकी कुत्ते का रूप ले चुके हैं जो अपनी कुतिया को बुरी तरह चोद देना चाहते हैं. मेरा अंग अंग दर्द करने लगा. उनके धक्के झेलते झेलते मेरा चेहरा लाल हो उठा. वो फिर मेरे स्तन दबाते हुए और जोर से लंड को पेलने लगे. मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था. मेरी गांड के चिथड़े खुल रहे थे. धक्के मारते हुए मेरी माँ के समलैंगिक भाई बड़बड़ा रहे थे- जोर से ले भांजे … हम्म … हम्म … और ले … आह्ह … ले भोसड़ी के … मेरा पूरा लंड ले ले तू आज अपनी इस गांड के अंदर! जब मेरी गांड की चुदाई करते करते उनका लंबा और मोटा लंड झड़ने को हो गया तो बोले- बता, माल तेरी इस फटी हुई गांड में ही छोड़ दूं या मुंह में पीयेगा भांजे?

मैंने आज तक कभी किसी का माल नहीं पिया था, मैंने कहा की मुंह में मामा. मेरी माँ के समलैंगिक भाई ने मेरी खून से संदी गांड से अपना खड़ा लंड निकाला और मुंह में दे दिया. फिर वे मेरे मुंह की चुदाई करने लगे और एक मिनट के बाद उनका वीर्य मेरे मुंह में जाने लगा जिसका मीठा-खट्टा और नमकीन सा स्वाद मुझे मिलने लगा. समलैंगिक सेक्स के दौरान आज पहली बार वीर्य का स्वाद मिला था. मेरी माँ के समलैंगिक भाई के लंड से निकला गर्म गर्म माल अमृत के जैसा लग रहा था. फिर जब सारा माल मेरे गले में अंदर जा चुका तो उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया.

मैंने चाटकर मेरी माँ के समलैंगिक भाई का लंड साफ किया. फिर रात को मेरी कामुक माँ के समलैंगिक भाई ने फिर से गांड मारी. मेरी गांड सूज कर लाल हो चुकी थी मुझसे टट्टी भी नहीं करी जा रही थी. माँ के समलैंगिक भाई से गांड की चुदाई करवाने के बाद अगले दिन तो मुझे चलने में भी बहुत ही ज्यादा दिक्कत हो रही थी मगर हाँ मेरी गांड मरवाने की काम वासना अच्छी तरह से शांत हो चुकी थी. दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आप सभी को हम मामा और भांजे की ये कामुकता से भरी अन्तर्वासना हिंदी गे सेक्स कहानी ” गांड मरवाने की वासना पूरी करी माँ के समलैंगिक भाई ने “ बहुत पसंद आई होगी और आप इस हिंदी सेक्स कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करोगे …