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होटल में घोड़ी बनकर गांड मरवाई – सेक्स स्टोरी हिंदी में

होटल में घोड़ी बनकर गांड मरवाई – सेक्स स्टोरी हिंदी में : मेरा नाम सुमन है मैं अहमदाबाद की रहने वाली हूं, मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं और मेरे पति एक कंपनी में नौकरी करते हैं। मेरा एक लड़का है जो कि 8 वर्ष का हो चुका है। मेरे ससुराल में मेरी सास और ससुर हैं, मेरे देवर की शादी भी दो वर्ष पहले ही हुई है। मैं अपने घर के कामों में बहुत बिजी रहती थी इसलिए मुझे बाहर के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था और मैं सोचने लगी कि मुझे कहीं पर नौकरी करनी चाहिए क्योंकि शादी से पहले मैं नौकरी कर रही थी और मैंने सोचा कि यदि मैं कुछ काम करूंगी तो मेरे पति की मदद हो जाया करेगी क्योंकि हमारे बच्चे की फीस भी बहुत ज्यादा है और वह भी किसी प्रकार से मेहनत कर के उसकी फीस भरते है। >> ट्रेन में घोड़ी बनाकर चुत चुदाई करी 30 साल की जवान आंटी की हिन्दी सेक्स स्टोरी

मैं यह सोचने लगी तो मुझे लगा क्यों ना मैं कहीं पर नौकरी कर ही लेती हूं, मैंने इस बारे में जब अपने पति से बात की तो उन्होंने मुझे मना कर दिया और कहने लगे कि तुम यदि नौकरी करोगी तो घर का काम कौन संभालेगा, वह मुझे समझाने लगे कि यदि तुम नौकरी पर जाओगी तो अजय की पत्नी क्या कहेंगे, वह सोचेगी कि तुम काम से अपना जी चुरा रही हो इसलिए तुम नौकरी करने के लिए जा रहे हो और उसे शायद इस बारे में बुरा लगे।

होटल में घोड़ी बनकर गांड मरवाई सेक्स स्टोरी हिंदी में

होटल में घोड़ी बनकर गांड मरवाई – सेक्स स्टोरी हिंदी में

इस बात से मैंने कई दिनों तक अपने दिमाग से नौकरी का ख्याल निकाल दिया परंतु एक दिन मेरी देवरानी मुझसे कहने लगी कि घर में इतना काम होता नहीं है और हम दोनों ही इस पर लगे हुए रहते हैं, यह काम एक व्यक्ति भी संभाल सकता है। मैंने जब उससे अपनी नौकरी की बात कही तो वह कहने लगी कि मुझे इसमें कोई भी आपत्ति नहीं है, मैं घर का सारा काम संभाल लूंगी यदि आप नौकरी करना चाहती हैं तो आप नौकरी कर सकती हैं। >> घोड़ी बनाकर सेक्सी लड़की को चोदा गेस्ट हाउस में हिंदी सेक्स स्टोरी

अब मुझे भी यह बात सुनकर बहुत खुशी हुई और मैंने जब इस बारे में अपने पति से कहा तो वह कहने लगे यदि वह राजी है तो तुम नौकरी कर लो क्योंकि मैं सिर्फ इस वजह से चिंतित हूं कि घर में काम कौन संभालेगा। अब मैं भी पूरी तरीके से निश्चिंत हो चुकी थी, मेरी देवरानी का व्यवहार भी बहुत अच्छा है और वह हमारे बच्चे का भी ध्यान बहुत अच्छे से रखती है इसलिए मैंने अब नौकरी के लिए अप्लाई कर दिया है लेकिन मुझे कहीं भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी।

मैंने अपनी एक पुरानी दोस्त से जब इस बारे में बात की तो वह कहने लगी कि मेरे परिचय में एक मेडिकल स्टोर है यदि तुम वहां पर नौकरी करना चाहती हो तो मैं उनसे बात कर लेती हूं। मैंने जब उसे पूछा कि क्या वह लोग मुझे अच्छी तनख्वाह दे पाएंगे, वह कहने लगी कि उनका काम बहुत अच्छा है तुम एक बार वहां पर चले जाओ। जब मैं वहां पर गई तो मेरी दोस्त ने उनसे बात की थी और उन्होंने मुझे काम पर रख लिया। मुझे ज्यादा दवाइयों के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि मैंने मेडिकल फील्ड में कभी भी काम नहीं किया है। मैंने उनसे यह बात शुरुआत में ही कह दी थी। वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम धीरे-धीरे सीख जाओगे।

मुझे भी लगने लगा कि चलो मैं धीरे-धीरे ही काम सीख जाऊंगी इसलिए मैं अपने काम पर पूरा ध्यान देने लगी। मैं काम पर बहुत ही अच्छे से ध्यान देती थी और अब मैं दवाइयों के बारे में भी जानने लगी थी क्योंकि उनका मेडिकल स्टोर बहुत बड़ा है इसलिए वहां बहुत ज्यादा भीड़ होती थी और उन्होंने बहुत सारे लोग काम पर रखे हुए थे। मुझे जब अपनी पहले महीने की तनख्वाह मिली तो मैं बहुत खुश हुई, उस दिन मैं अपने बच्चे के लिए भी गिफ्ट ले गई और कुछ पैसे मैंने अपने पति को भी दिए।

वह बहुत ही खुश हुए और मुझे कहने लगे कि चलो कम से कम तुम खुश हो और घर में कुछ पैसे भी आ रहे हैं क्योंकि उनकी भी बहुत मदत हो जाती थी इस वजह से मैं भी खुश थी। जहां पर मैं काम पर जा रही थी वह हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं था, मैं बहुत खुश थी की मुझे अच्छा काम मिल गया है। मैं अपने काम में ही व्यस्त रहने लगी थी। सुबह मैं जल्दी घर से चली जाती और उसके बाद शाम को ही मैं घर लौटती थी। मेरी देवरानी भी मेरे बच्चे का ख्याल बहुत ही अच्छे से रख रही थी और मैं बिल्कुल निश्चिंत होकर काम पर लगी हुई थी।

जिस मेडिकल स्टोर में मैं काम करती थी वहां पर कई मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव आते रहते थे और हमारे दुकान के जो मालिक हैं वह उनके साथ कई सालों से काम कर रहे हैं इसलिए वहां उनका सामान रख लेते थे। वह सब बहुत ही अच्छी कंपनी से होते थे और वह लोग मुझे भी पहचानते थे क्योंकि मुझे काम करते हुए काफी समय हो गया था।

अब मैं उनका अकाउंट का काम संभालती थी। मैं उन लोगों से भी परिचित थी क्योंकि उनका जो हिसाब होता था वह मैं ही करती थी। मेरे पास एक राजीव नाम के व्यक्ति आते हैं, वह बहुत समय से आ रहे थे इसलिए मैं उन्हें बहुत ही अच्छे से पहचानती थी। वह हमेशा ही मुझे भी कुछ न कुछ गिफ्ट देते रहते थे। मेरा उनसे बहुत ही अच्छा परिचय हो गया था। राजीव जी की उम्र हुई Forty five वर्ष के बीच में रही होगी और वह बहुत ही खुश दिल और अच्छे व्यक्ति हैं। वह जब भी मेडिकल स्टोर में आते तो हमसे बहुत ही हंस कर बात किया करते थे और बहुत ही खुश रहते थे।

जब भी वह आते तो हमारे मेडिकल स्टोर में जितने भी लोग काम करते थे वह सब उन्हें देख कर खुश रखते थे इसी वजह से हमारा रिलेशन भी बहुत अच्छा हो गया था। एक बार वह मेरे पास आये और कहने लगे कि कंपनी के द्वारा कोई स्कीम चलाई जा रही है यदि आपको भी कहीं घूमने जाना है तो आपको डिस्काउंट मिल जाएगा। मैंने उन्हें कहा कि क्या आपकी कंपनी ऑफर दे रही है, वह कहने लगे यहां जिन लोगों के साथ हम बिजनेस करते हैं सिर्फ वह लोग ही जा सकते हैं, यदि आप जाना चाहती हैं तो मैं आपकी बात अपनी कंपनी में करवा देता हूं।

मैंने उन्हें कहा कि उसके लिए मुझे क्या करना होगा, वह कहने लगे कि आपको कुछ पैसे जमा करवाने हैं और उसके बाद कंपनी आपको कुछ कूपंस देगी जिससे कि आप घूमने के लिए जा सकती हैं और आप अपने परिवार को भी अपने साथ लेकर जा सकती हैं। मैंने उन्हें कहा यह तो बहुत अच्छा है, मैं इस बारे में अपने पति से बात करूंगी यदि वह हां कह देते हैं तो मैं आपको उसके बारे में सूचित कर दूंगी। वह कहने लगे कोई बात नहीं आप कुछ दिन बाद मुझे इसके बारे में बता देना, मैं आपका करवा दूंगा।

मैंने जब इस बारे में अपने पति से बात की तो वह कहने लगे कि एक बार तुम उनसे पूरी जानकारी ले लो, उसके बाद तुम मुझे बता देना क्योंकि काफी समय से हम लोग भी कहीं घूमने नहीं गए हैं और मैं भी सोच रहा हूं कि हम भी घूमने के लिए चले, यदि कंपनी के द्वारा कोई स्कीम चल रही है तो तुम उनसे जानकारी ले लेना।

मैंने जब राजीव से बात की तो उन्होंने मुझे उसकी पूरी जानकारी दी और वह कहने लगे कि आप थोड़ा समय निकालकर मेरे साथ मेरे ऑफिस में ही चल लेना, वह आपको सब कुछ समझा देंगे और मैं वापस आते वक्त आपको आपके घर छोड़ दूंगा, मैंन अपने मेडिकल स्टोर के मालिक से कहा कि मुझे आज जल्दी जाना है तो वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम निकल जाओ और मुझे कुछ देर बाद ही राजीव जी मिल गए, वह मुझे अपने साथ अपनी बाइक में ऑफिस लेकर गए और वहां पर उन्होंने मुझे उसी स्कीम के बारे में पूरी जानकारी दी, मैंने कुछ पैसे भी उन्हें दे दिए। मैं बहुत खुश थी और उसके बाद राजीव जी मुझे कहने लगे कि मैं आपको घर पर छोड़ देता हूं।

मैंने राजीव जी से कहा ठीक है आप मुझे मेरा घर छोड़ दीजिए जब वह मुझे घर ला रहे थे तो मेरे स्तनों उनसे टकरा रहे थे मेरा मूड उस दिन बहुत खराब होने लगा क्योंकि मैंने कई दिनों से अपने पति के साथ अच्छे से सेक्स नहीं किया था इसलिए मैं सोचने लगी कि आज मैं अपनी चूत राजीव जी से ही मरवाती हूं।

मैंने भी उनके लंड को पकड़ लिया और वह समझ चुके थे उनको क्या करना है। वह मुझे एक होटल में ले गए जब वह मुझे होटल में ले गए तो उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मैं उनके सामने नंगी थी मैंने उनसे कहा कि आज आप मेरी इच्छा को पूरा कर दीजिए। उन्होंने मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया वह बहुत देर तक मेरी योनि को चाटने रहे मुझे बहुत मजा आ रहा था जब वह मेरी योनि को चाटते जाते मेरा तरल पदार्थ पूरा बाहर की तरफ आने लगा। उन्होंने अपने लंड को मेरे मुंह से डाल दिया जैसे ही उनका लंड मेरे मुंह में गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा मैं उनके लंड को पूरे अंदर तक ले रही थी।

उसके बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही अपने मोटे और कड़क लंड को पीछे से मेरी गांड में डाल दिया मुझे बहुत दर्द हुआ मैं चिल्लाने लगी मैंने पहली बार किसी से अपनी गांड मरवाई थी। उनका लंड मेरी गांड के अंदर जाता तो मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द होता लेकिन उन्होंने मुझे इतनी तेजी से धक्के दिए कि मेरा पूरा शरीर दुखने लगा था और मुझे बहुत मजा आ रहा था। उन्होंने मेरी गांड से खून निकाल दिया और उनका लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था मुझसे भी उनके लंड की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रही थी। वह भी मुझसे कहने लगे कि मुझसे आप की गांड की गर्मी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही है उन्होंने इतनी तेज तेज मुझे झटके दिए कि कुछ समय बाद ही उनका वीर्य मेरी गांड के अंदर ही गिर गया। जैसे ही उनका माल मेरी गांड में गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा।

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