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मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी

मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी : हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम प्रियंका शर्मा (मेरी इंस्टाग्राम प्रोफाइल: @modern_priyankaa) है, मैं दिल्ली से हूँ. और यह कहानी मेरे एक दोस्त देवू की है घर में सब उसे देव बुलाते है। जब हमने आख़री बार चुदाई की थी तभी उसने अपनी भाभी के साथ चुदाई का किस्सा मुझे सुनाया था इसलिए उसकी आज्ञा लेकर मैं यह कामुक कहानी लिख रही हूँ। यहाँ भी देखे >> दोस्त की मासूम बहन के दोनों पैरों को चौड़ा कर उसकी वर्जिन चूत में लंड डाला जब उसने मेरे को बताया कि उसने अपनी सगी भाभी के साथ और अपनी चचेरी भाभी के साथ भी सेक्स किया है तो मुझे पहले तो शॉक लगा पर फिर मैंने भी उसकी हक़ीक़त को ख़ुशी से क़बूल कर लिया क्योंकि वो मेरी प्यास भी बुझा ही देता था।

तो चलिए अब मेरी हिन्दी सेक्स स्टोरी ” मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी “ पर आते है। भाभी की चुदाई की कहानी देवू की जवानी। सीमा भाभी हमारे घर के तीसरे फ्लोर के एक फ्लैट में रहती थीं. वो एक हाउस वाइफ थीं. सीमा भाभी की शादी को 5 साल हो गए थे, उनकी एक 4 साल की छोटी लड़की भी थी. भाभी के हज़्बेंड यानि कि भैया का नाम विकास था, जो कि पेशे से एक टूरिस्ट वैन के ड्राइवर थे. इस वजह से अक्सर बाहर चलते ही रहते थे. आए दिन वे कहीं बाहर घूमने के लिए भी बुकिंग लेते रहते थे.

मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी

मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी (2)

आज से 2 साल पहले सीमा भाभी और विकास भैया को रूम की तलाश थी, इसलिए हमने उनको कमरा रेंट पर दे दिया था. भाभी एक शांत स्वाभाव की 27 साल की पतली सी, छोटे चूचों वाली माल किस्म की औरत हैं. भाभी अपने काम से काम रखती हैं. मेरा ऊपर आना जाना किसी न किसी बहाने से लगा रहता था. जब भी मम्मी कपड़े धोती थीं तो मैं ही उन धुले हुए कपड़ों को ऊपर सूखने डालने जाता था. तीसरे फ्लोर की ग्रिल पर ही मैं कपड़े सुखाने डालता था. इसलिए जब भी मेरा ऊपर जाने का चक्कर लगता था, मैं भाभी के कमरे में जरूर झाँक लेता था.

मुझे अक्सर भाभी एक मैक्सी में ही दिखती थीं. उनकी मैक्सी का गला इतना बड़ा होता था कि अगर भाभी कभी झुकी हुई दिख जाती थीं, तो मुझे उनकी दोनों चूचियाँ (बूब्स) बाहर आती हुई दिखने लगती थीं. मेरी भी हमेशा यही कोशिश रहती थी कि मैं भाभी को कुछ ऐसी पोजीशन में देखने का प्रयास करूं, जिसमें मुझे उनके मस्त बूब्स हिलते हुए दिख जाएं.

इस बात को भाभी ने भी ताड़ लिया था. इसलिए भाभी मुझे देखते ही सबसे पहले अपनी मैक्सी का गला ठीक करती थीं. सीमा भाभी को लेकर मेरे मन में सिवाए उनके मस्त जिस्म को देखने के अलावा कभी कोई बुरे विचार नहीं आए थे क्योंकि हम एक दूसरे से ना के बराबर बात करते थे. वैसे भी सीमा भाभी का फिगर नताशा भाभी जितना सेक्सी तो नहीं था, जिसे देख कर मेरा लंड भी सलामी दे दे. मतलब सीमा भाभी से मेरा अब तक ऐसा ही बर्ताव रहता था.

लेकिन जब से सीमा भाभी ने मुझे नताशा भाभी के साथ चुदाई करते देखा था. तब से उनके बर्ताव में बदलाव आने लगा था. मैंने भी उनकी चाहत को समझ लिया था कि जो भाभी अपने काम से काम रखती थीं, आज वही भाभी मुझे देख कर स्माइल पास करती हैं और अकेले मिलने पर कमेन्ट भी मारती हैं.

उनके इस बदलते बर्ताव से मुझे टेंशन होने लगी थी, क्योंकि मुझे थोड़ा डर लगा रहता था कि कहीं सीमा भाभी, मेरी मम्मी को सब कुछ ना बता दें. यही सोचते हुए मुझे उनसे जाकर बात करना उचित लगा. मैं नताशा भाभी के जाने के दूसरे ही दिन सीमा भाभी से बात करने के लिए ऊपर तीसरे फ्लोर पर गया. उस वक्त दिन के 3 बज रहे थे. मैंने सीमा भाभी के कमरे के बाहर खड़ा होकर उन्हें आवाज़ दी, पर भाभी की कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उस टाइम भाभी के कमरे का दरवाजा खुला था, बस एक परदा लगा था. मैंने पर्दे को थोड़ा खिसका कर अन्दर झांका, अन्दर झांकते ही मेरी गांड फट गई.

भाभी और उनकी 4 साल की बेटी सो रही थी. भाभी के दोनों चुचे मैक्सी के गले से बाहर की तरफ़ निकले हुए थे. मैं उनके परदे को छोड़ कर अपने रूम में नीचे जाने लगा. मुझे अभी भी सीमा भाभी के नंगे बूब्स वासना से भड़का रहे थे. नीचे जाते ही मैं जल्दी से टॉयलेट में घुस गया और भाभी के नाम की मुट्ठ मारने लगा. बस पांच मिनट में लंड हल्का हो गया तो मैं अपने रूम में आकर सो गया.

दो घंटे की गहरी नींद लेने के बाद मैं उठ गया. थोड़ी देर बाद माँ भी आ गई थी. माँ बताने लगीं कि तेरी नताशा भाभी का कॉल आया था, तेरी भाभी वहां अभी और 2-3 दिन रहने की इजाज़त माँग रही थी क्योंकि तेरी भाभी की सहेली के पति काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए न्यूयॉर्क जा रहे हैं. जिस कारण नताशा वहां और रुकने की इच्छा जाहिर कर रही थी, मैं उसकी बात मान गई हूँ.

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मैं माँ की बात सुनकर ‘हूँ हां …’ कह कर चुप ही रहा. यहाँ भी देखे >> मस्त गाँड वाली भाभी को चोद दिया Read sex story in Hindi फिर मैं खाना खा कर सोने के लिए अपने रूम में आ गया. बिस्तर पर लेटते ही दोपहर का वही सब नजारा मेरी आंखों के सामने आ गया कि कैसे सीमा भाभी अपने चूचों को बाहर निकाले सो रही थीं. यही सोचते हुए मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और मैं फिर से टॉयलेट में जा कर भाभी के नाम की मुट्ठ मारने लगा.

अब मेरे मन में सीमा भाभी की चुदाई के विचार आने लगे थे. इसलिए मेरा मन फिर से भाभी के चुचे देखने का होने लगा. मैंने सोचा कि भाभी को देखने का कल वाला समय ही सही रहेगा क्योंकि रात में जाने में खतरा था. अगर भाभी दिन में मुझे देखतीं, तो मैं बहाना बना सकता था कि मैं काम से आया था, लेकिन रात में क्या बहाना बनाया जा सकता था.

दूसरे दिन मैं जानबूझ कर उसी टाइम पर ऊपर भाभी के कमरे के बाहर आ गया. उधर कल जैसी ही स्थिति आज भी थी. मैंने फिर से परदा खिसका कर अन्दर झांकने की कोशिश की. मैंने देखा कि आज उनका एक बूब मैक्सी के गले के बाहर था और भाभी की मैक्सी उनकी गोरी जांघों तक उठी हुई थी जिससे भाभी की बिना पेंटी की कमसिन चूत दिख रही थी. हालांकि उनकी काली झांटों के कारण चूत तो ठीक से नहीं दिखी लेकिन नजारा बड़ा कामुक था.

भाभी की बिना पेंटी की कमसिन चूत इस सीन को देखकर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया

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इस सीन को देखकर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया. मैंने आज थोड़ी हिम्मत की और जैसे ही थोड़ा पास जा कर देखने की कोशिश की कि उतने में ही भाभी ने करवट ले ली. उनके करवट लेने से मेरी गाँड़ फट के हाथ में आ गई और मैं हड़बड़ाहट से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा, जिससे दरवाजे के पास टेबल पर रखा ग्लास गिर गया. गिलास गिरने की आवाज से भाभी की झट से आंख खुल गई.

भाभी मुझे देखते ही अपनी जांघों से मैक्सी ठीक करने लगीं और अपना बाहर निकला हुआ गोरा बूब्स मैक्सी के अन्दर कर लिया. मैं चुपचाप सिर झुका कर वहीं खड़ा हो गया.

सीमा भाभी गुस्से से कहने लगीं- देव, तुम्हें इस तरह मेरे कमरे में अन्दर आकर मुझे देखते हुए शर्म नहीं आई?

मैं- भाभी सॉरी … वैसे भी मैंने आपको आवाज़ दी थी. पर जब आपका कोई उत्तर नहीं मिला, तब मैं अन्दर आ गया.

जबकि आज मैंने भाभी को आवाज दी ही नहीं थी.

भाभी- अच्छा तो इसका मतलब ये हुआ कि तुम सीधा अन्दर आ जाओगे और कल भी तुम आए थे ना?

मैं उनके मुँह से ये सुनकर चौंक गया.

मेरे मुँह से अचानक ही निकल गया कि नहीं भाभी, मैं तो आज ही आया हूँ और आपने मुझे देख भी लिया. भाभी अपने मुखड़े पर बिल्कुल हल्की सी स्माइल के साथ, जो कि उन्होंने बिल्कुल शो नहीं होने दी थी, कहने लगीं- अच्छा आज देख लिया … नहीं तो तुम क्या कल भी आते? सच बताओ तुम कल भी आए थे न क्योंकि कल ये परदा ऐसे भी आधा खुला हुआ था?

उनकी इस बात से मेरी फट गई. मैंने इस बात का ध्यान ही नहीं दिया था. मैं हड़बड़ाते हुए कहने लगा- नहीं भाभी … वो तो मैं ऐसे ही बस कपड़े सुखाने आया था.

भाभी- झूठ मत बोलो देव … कल आंटी जी ने कोई कपड़े धोए ही नहीं थे … ये बात तुम भी जानते हो.

मैं- सॉरी भाभी.

भाभी- मुझे ऐसे देखते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती क्या? ऑश … सॉरी में तो भूल ही गई थी … शर्म और तुम्हें … जो कि अपने भाई की वाइफ को ऐसे चोदता हो, उसे शर्म किधर से आती होगी.

भाभी के मुँह से खुल्लम खुल्ला ‘चोदता हो.’ जैसे शब्द सुन कर मेरे लंड में हलचल होने लगी.

मैं- भाभी प्लीज़ मेरी बात पर यकीन कीजिए … मैंने आज आपको आवाज़ दी थी, आपने नहीं सुना था, तब मैंने परदा हटा कर देखा था, तो आप सो रही थीं. जैसे ही मैं जाने को हुआ, ये ग्लास गिर गया. सॉरी भाभी … मेरा वो मतलब नहीं था जैसा आप सोच रही हो. मैं तो बस इसी बारे में एक रिक्वेस्ट करने आया था आपसे बात करने के लिए.

भाभी- किस बारे में बात करने के लिए आए थे?

मैं- भाभी जो अभी आपने कहा, आपने उस दिन मुझे और नताशा भाभी को चुदाई करते हुए देख लिया था, इसलिए मैं आपसे रिक्वेस्ट करने आया था कि प्लीज़ इस बात को मम्मी को कभी ना बताएं.

भाभी- वाह बेटा … चुदाई करते वक़्त तुम्हें ये बात नहीं सूझी थी. जब तो काफ़ी मज़े से चूत चाट रहे थे तुम अपनी भाभी की … और वो भी बड़े चाव से देवर का लंड चूस रही थी.

अब खुल्लम खुल्ला लंड चूत चुदाई जैसे शब्द माहौल की कामुकता को खोलने लगे थे.

मैं- सॉरी भाभी.

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भाभी- वैसे चल कब से रहा ये सब नताशा और तेरा? और मुझसे झूठ मत बोलना.

मैं- भाभी उस दिन सेकंड टाइम था.

भाभी- फर्स्ट टाइम कब हुआ था?

मैं- फर्स्ट टाइम … वो जब मैं एग्जाम देने एमपी गया था, तब वहां हुआ था.

भाभी- बहुत पक्की चुदक्कड़ लगती है ये नताशा, जो एक साथ दो लंड खा रही है, एक अपने पति का और एक तेरा. उसके पति से उसका पूरा नहीं होता क्या, जो अब वो तेरे लंड के पीछे पड़ी है?

भाभी के इस तरह के शब्द सुन कर मेरे लंड में हलचल होने शुरू हो गई और लंड धीरे धीरे भाभी के सामने निक्कर में ही टेंट बनाने लगा जिसको भाभी ने भी नोटिस कर लिया.

मैं भी सीमा भाभी के सामने खुल कर चुदाई भरे शब्द इस्तेमाल करता हुआ बात करने लगा, जिससे भाभी गर्म हो जाएं.

मैं- दरअसल भाभी … नताशा भाभी बोलती हैं कि राम भैया का लंड मेरे लंड से छोटा है और मेरे जितना मोटा लंड भी नहीं है. जिस वजह से नताशा भाभी भैया के संग चुदाई में प्यासी की प्यासी रह जाती हैं.

मैं देख रहा था कि सीमा भाभी अब मेरे खड़े लंड को निहार रही थीं.

भाभी- अच्छा जभी तेरा ये ऐसे निक्कर फाड़ के बाहर आने को हो रहा है.

मैं भाभी के सामने निक्कर के ऊपर से लंड को एड्जस्ट करते हुए कहने लगा- नहीं भाभी, ये तो बस आपकी रेस्पेक्ट में खड़ा हुआ है. ये सुनते ही भाभी के मुखड़े पर कटीली मुस्कराहट आ गई- अच्छा दिखा तो जरा अपना लंड … मैं भी तो देखूं कि ये सही से रिस्पेक्ट कर भी रहा है या नहीं.

मैंने अंजान बनते हुए पूछा- मतलब भाभी?

भाभी- अब लंड दिखा रहा है या वहीं आकर निक्कर के ऊपर से पकडूं इसे?

मैं भाभी के बेड के करीब आ गया. करीब आते ही भाभी ने निक्कर के ऊपर से मेरा लंड पकड़ कर दबा दिया- वाकयी देव … बड़ा सॉलिड लंड है तेरा.

मैं- भाभी लेकिन आप वो बात मम्मी को तो नहीं बताओगी ना?

भाभी- चूतिए … अगर बताना ही होता, तो मैं उसी दिन बता सकती थी … लेकिन जब से तेरा लंड नताशा की चूत चोदते हुए देखा है ना … तब से यही सोच कर मेरी चूत पता नहीं कितनी बार पानी छोड़ चुकी है. मेरे नीचे पता नहीं अजीब सी इचिंग होने लगती है, जब भी मैं वो लम्हा याद करती हूँ, जिसमें तुम नताशा की चूत चाट रहे थे.

मैं मन ही मन समझ गया था कि सीमा भाभी भी अपनी चूत मुझसे चटवाना चाहती हैं. भाभी ने काफ़ी गर्म होते हुए मैक्सी के ऊपर से अपनी चूत को सहलाया- मुझे कल भी पता था, जब तुमने कल मुझे आवाज़ दी थी. मैंने जानबूझ कर अपने मम्मे बाहर करके सोते हुए रहने का ड्रामा किया था. मैं देखना चाह रही थी कि तुम मेरे मम्मे देख कर क्या करते हो. लेकिन तुम कल चले गए थे. आज मैंने ही वहां टेबल पर किनारे पर जानबूझ कर ग्लास रखा था ताकि मेरे करवट लेते टाइम तुम जल्दी से जाने की सोचो, तो पहले पर्दे से फिर ग्लास से टकराने से वो गिर जाए.

मैं भाभी की प्लानिंग सुनकर टोटली शॉक्ड था. मुझे जान कर इतनी हैरानी हो रही थी कि मैं सीमा भाभी की चुदास को शब्दों में बयान नहीं कर सकता. फिर आख़िरकार भाभी के नर्म हाथों में मेरा लंड आ गया था, जिसे भाभी सहलाने लगी थीं. फिर मैंने भी भाभी के चुचे उनकी मैक्सी के ऊपर से पकड़ लिए.

तभी भाभी ने भी मेरे लंड को पकड़ लिया. उन्होंने मेरे निक्कर में हाथ डाल कर लंड को बाहर निकाल लिया था. कुछ देर में ही लंड एकदम भाभी के मुँह के सामने तन्ना रहा था. भाभी भी मेरे गुलाबी सुपारे को बड़ी ललचाई नजर से देख रही थीं. मैं भाभी के मुँह में लंड डालने को हुआ, पर भाभी ने लंड चूसने से मना कर दिया.

 

भाभी- प्लीज़ देव … मैं ये सब नहीं चूसती हूँ … तुम्हारे भैया का लंड भी मैंने आज तक नहीं चूसा है.

मैं भाभी को इमोशनल करते हुए बोला- भाभी हमने भी तो कभी चुदाई नहीं की है … आपको मेरी कसम है, आज सिर्फ़ मेरे कहने पर कर लो … इसके बाद मैं कभी आपको लंड चूसने के लिए नहीं कहूँगा.

भाभी- ठीक है … देव आज तुम्हारे लंड का रस चख कर देखती हूँ.

 

भाभी के मुँह में लंड देते हुए मैंने उनकी मैक्सी उतार दी. भाभी मेरा पूरा लंड मुँह में ले कर बड़े मजे से चूसने लगीं. फिर भाभी ने अपनी चूत की तरफ़ इशारा किया. मैंने फ़ौरन भाभी को अपने ऊपर खींच लिया और 69 में आकर भाभी की झांटों भरी चूत पर अपने होंठ रख दिए. अब मैं अपनी जीभ से भाभी की चूत चाटने लगा. दूसरी तरफ़ भाभी भी मेरे लंड को काफ़ी अच्छे से चाट रही थीं.

कुछ ही देर बाद भाभी गांड उठा उठा कर अपनी चूत मेरे होंठों पर रगड़ने लगीं. जिससे कुछ देर बाद ही उनकी चूत का लावा मेरे मुँह पर फूट पड़ा. भाभी ने अपना सारा कामरस मेरे मुँह पर निकाल दिया. मेरा लंड भी झड़ गया था जिसे भाभी ने भी पूरा सफाचट किया हुआ था.

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मैं मन ही मन हंस रहा था कि सीमा भाभी भी कितनी बड़ी चुसक्कड़ निकली, कहां तो लंड चूसने में कतरा रही थीं और कहां मेरे लंड का रस चाट कर साफ़ कर दिया. खैर … अब मैं उठ कर भाभी के ऊपर लेट गया और मैंने भाभी की टांगों को अच्छे से चौड़ा कर दिया ताकि लंड बेहिचक सीधा भाभी जी की चूत में घुस जाए.

मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर सैट किया और एक ज़ोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा आधा लंड सीधा भाभी की चूत में घुस गया. इसी के साथ ही भाभी की आंखें बड़ी हो गईं और एक दर्द भरी कराह भी निकल गई.

मैंने उनकी आह कराह को इग्नोर किया और ताबड़तोड़ 5-6 झटकों में अपना पूरा लंड भाभी की चूत में घुसेड़ डाला. भाभी की मादक सिसकारियां निकलने लगीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… देव …

मैं भाभी की चूत पर धड़ाधड़ वार करता हुआ कहने लगा- आह भाभी, कैसा लगा मेरा लंड?

भाभी- डंडा सॉलिड है तुम्हारा देव … तुम्हारे भैया से भी मोटा लंड है तुम्हारा … ऐसा लग रहा है तुम्हारा ये लंड मेरी चूत को फाड़ ही देगा.

कुछ देर बाद मैंने भाभी के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया. यहाँ भी देखे >> ढोंगी साधू बाबा के लंड से निकले वीर्य का प्रशाद मेरी गांड और चूत में हिन्दी सेक्स स्टोरी इससे भाभी का भोसड़ा खुल कर मेरे सामने आ गया था. भाभी के भोसड़े पर लंड रख कर मैं जोरदार झटके मारने में लग गया. इससे मेरा लंड भाभी की चूत को पूरा चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया. अब मेरा लंड भाभी की चूत को जम कर चोद रहा था. भाभी भी मज़े से अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत चुदवाने का मजा लूट रही थीं.

इसके बाद मैंने भाभी को अपने लंड पर बैठने के लिए कहा. ये मेरा फेवरिट पोज़ है. मैं सीधा लेट गया और भाभी टांगें खोल कर मेरे लंड पर बैठने लगीं. उनके मेरे लंड पर बैठते ही मेरा 6 इंच का लंड उनकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा का पूरा भाभी की चूत में फंस गया, जिससे भाभी को थोड़ा दर्द होना शुरू हो गया. भाभी ने दर्द के मारे अपनी गांड थोड़ा ऊपर उठा ली. मैंने नीचे से भाभी की चूत में धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए.

मेरी रंडी भाभी मेरे खड़े लंड पर जंप करने लगी और मस्त होकर चुदवाने लगी

अंगूरी भाभी के नंगे फोटो भाबी जी घर पर हैं Shilpa Shinde Porn Anguri Bhabhi With Big Black Cock xxx photo fucking images (18)

अब भाभी को मेरे खड़े लंड पर जंप करने में आराम हो गया था. आख़िरकार वही हुआ, भाभी मस्त हो गईं. अब मैं अपनी स्पीड बढ़ा कर ज़ोर ज़ोर से उनकी गांड उठा कर उन्हें चोदने लगा. भाभी जी ने भी मेरे खड़े लंड पर मज़े से जंपिंग करना शुरू कर दिया, जिससे मुझे परम आनन्द की प्राप्ति होने लगी.इस बार फिर से भाभी ने मेरे लंड पर अपना कामरस निकाल दिया, जिससे मेरा लंड पूरा भाभी के माल में लथपथ हो गया. अब मेरा लंड और चिकना हो गया था. मैं भाभी की चिकनी चूत की तेज़ी से चुदाई करने लगा.

अंत मैं भी भाभी की चूत में ही डिसचार्ज हो गया. कुछ देर बाद हम एक दूसरे को साफ करने के लिए बाथरूम में आ गए. भाभी मुझे नहलाने लगीं, मेरे लंड को अच्छे से साफ करने लगीं और माल से लथपथ अपनी चूत को भी साफ करने लगीं. इसके बाद सीमा भाभी मेरे लंड की मुरीद हो गईं. इसी तरह जब भी विकास भैया लंबे टूर पर जाते, भाभी और मैं जम कर चुदाई का मज़ा ले लेते.

कहानी सुनने के बाद मैं और देवू होटल से अपने अपने घर निकल गए। इसके बाद मैं अपनी अगली सेक्स स्टोरी में लिखूंगी कि कैसे देवू ने मुझे अपने लंड का मुरीद बना कर कैसे मेरे सील तोड़ी थी और कैसे मैं दर्द से चीख पड़ी थी। ये सब अगली कहानी में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी की नई वेबसाइट पर पढ़ें। दोस्तों आप को मेरी हिन्दी सेक्स स्टोरी ” मस्त भाभी की मक्खन चूत में मेरा कामरस हिन्दी सेक्स स्टोरी “ कैसी लगी मुझे ईमेल करके बताना ना भूलना मुझे आप के ईमेल का इंतजार रहेगा. मेरी हिंदी में एडल्ट सेक्स स्टोरी पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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