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तू भी एक बार बाबाजी से चुद जा – सील बन्द चूत और हब्शी लौड़ा

तू भी एक बार बाबाजी से चुद जा – सील बन्द चूत और हब्शी लौड़ा : दोस्तों ये कहानी चंदा ( चन्द्रावती ) एक 25 साल की बहुत ही सुंदर गड्राई (साइट्ली फाटटीश )शरीर की औरत है****का पति नरेश सूरत में कपडे की दुकान चलता है. चंदा पढ़ी लिखी औरत है . लेकिन उसकी आँखों में एक उदासी सी भरी रहती है. एक ऐसी उदासी जो अधूरी काम वासना की निशानी है. लगता है नरेश उसकी प्यास नही बुझा पाता.घर में चंदा की छोटी बहन भी रहती है . उसका रिश्ता नरेश के छोटे भाई ( सुरेश )से पक्का हो चुका है. नेहा ( चन्द्रावती की छोटी बहन ) कॉलेज में पढ़ती है. चंदा की देवरानी (पिंकी)भी इसी घर में रहती है मगर आज कल ग्वालियर में हॉस्टिल में रह कर पढ़ रही है. नरेश के मा बाप गाँव में रहते हैं.ये तो है परिवार का परिचय. चंदा की उदासी का कोई अंत नज़र नहीं आता . चुदाई का मन करता है मगर क्या करे. दिल तो उसका चाहता है की कहीं से कोई मर्द आए और उसकी प्यास बुझा दे. लगता है चंदा की प्रार्थना पूरी होने को है. उसकी चूत की प्यास बुझने वाली है. एक दिन एक बाबा जी- लगभग 35 साल के गेरूए कपड़े पहने, छोटे छोटे बॉल और छोटी दाढ़ी , गोरा देहकता रंग, 6 फुट का हॅटा कॅटा जिस्म- चंदा के घर आए, और भिक्षा माँगने लगे.

चंदा बाहर आई और बाबा जी को प्रणाम कर के जैसे ही नज़र उपर उठाई, की हैरान रह गयी. बाबा जी की पर्सनॅलिटी नें उसे मस्त कर दिया. बरबस ही सोचने लगी – इतना सुंदर शरीर !! ना जाने लंड कैसा होगा. मन ही मन में उनके लंड की कल्पना करने लगी. उसे अपनी चूत बाबा जी के लंड से भरी हुई लगी. बरबस ही उसकी नज़र बाबा जी के लंड की तरफ उठ गयी. बाबा जी भाँप गये की सुंदरी लंड की प्यासी है और इसका मर्द इसे सॅटिस्फाइ नही कर पाता. वो बोले: बाबा जी–` देवी कैसी हो, सब कुशल तो है ?` सुबू– `हां बाबा जी ठीक ही है.` बाबा जी — `नहीं देवी ठीक नही, मुझे बताओ, में तुम्हारी समस्या दूर करने की कोशिश करूँगा.` चंदा –` नहीं बाबा जी कुछ नही.` कहने को तो चंदा ने कह दिया मगर मन में सोच रही थी के काश कुछ ऐसा हो जाए की बाबा जी आज उसकी चोद चोद कर मन की मुराद पूरी कर दें. बाबा जी भी समझ गये की ये औरत लंड की प्यासी है मगर दिल की इच्छा बताने में शर्मा रही है . सोचने लगे उन्हें ही पहल करनी पड़ेगी. बोले ` देवी घर में कोई नही ? सेठ जी दिखाई नही दे रहे.` चंदा — `बाबा जी वो तो दुकान पर गये हैं रात को ही आएगे. उनहें अपने काम से समय नही मिलता.` बाबा जी — `अच्छा ये बात है, ये तो ग़लत है, ` शरारत से बोले,` घर में इतनी सुंदर पत्नी और उनके पास घर के लिए समय नही ? तुम कहो तो में कोई साधन करूँ की सेठ जी तुम्हारे आगे पीछे घूमने लगें.` चंदा –` उससे क्या होगा बाबा जी` यह कहते हुए चंदा नें आँखे दूसरी तरफ कर ली. बाबा जी समझ गये की माजरा सिर्फ़ चुदाई का ही नही है बलके लंड का भी है. सेठ का लंड भी इसकी चूत में समाता नही है. अब बाबा जी मूड मे आ गये. बोले: ` देवी अशांत दिखती हो कहो तो तुम्हारी शान्ती के लिए प्रयास करूँ ? क्या अंदर नही बुलाओगी ? ` अब चंदा को महसूस हुआ कि लंड के ध्यान में वो अभी तक दरवाज़े पर ही खड़े हैं.बोली `हां हां बाबा जी आईए ` अंदर आ कर बाबा जी ने इधर उधर नज़र घुमाई और पूछा ` घर में कोई नही है ………बाबा जी ने इधर उधर देखा और पूछा ` घर में कोई नहीं है क्या?` चंदा नें कहा, ` काम वालियाँ सुबह शाम आती हैं और मेरी बहन जो कॉलेज में पढ़ती है कॉलेज के बाद अपनी फ्रेंड के साथ चली जाती है. वहाँ से होम वर्क कर के 6 6.30 बजे आती है.`

बाबा जी समझ गये की मामला सॉफ है और चुदाई हो सकती है.बोले ,` तो फिर हम तुम्हारी समस्या के समाधान के लिए अनुष्ठान कर सकते हैं.` चंदा –` जैसा आप ठीक जाने` बाबा जी –`तो ठीक है, में तुम्हें बता दूँ की में तुम्हें सम्मोहित करूँगा और तुम्हारी समस्या का हल ढूँढने की कोशिश करूँगा. सम्मोहित का अर्थ जानती हो ना? तुम्हे पूरा समर्पण करना होगा, और में तुमसे कुछ पूछूँगा और तुम्हें उसके सच्चे जवाब देने होंगे` चंदा — `ठीक है बाबा जी, अगर इस से मेरी समस्या का हल होता है तो मुझे कोई ऐतराज़ नही है | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | बाबा जी — `तो चलो शुरू करते है` ये कहा कर बाबा जी ने चंदा को आँखे बंद करने को कहा और कुछ बुदबुदाने लगे`.अचानक वो बोले,` देवी तुम्हारी समस्या मेरी समझ में आ गयी है. तुम अब आँखें बंद कर लो. सोचो की तुम शून्य ( ज़ीरो) हो तुम्हारा जो भी अस्तित्वा है वो मुझ से है. तुम मुझ में हो. हम दोनो एक हैं. क्या तुम मुझे सुन रही ही ?` चंदा ` हां बाबा जी` बाबा जी –` क्या तुम समझ रही हो में क्या कह रहा हूँ.` चंदा — `हां बाबा जी ` बाबा जी –` ठीक है, अब अपना ध्यान अपनी समस्या पर लगाओ.` इतना सुनते ही चंदा के सामने बाबा जी का शरीर और लंड घूम गया.` बाबा जी –`क्या तुम अपनी समस्या को समझ सकती हो?` सबु — `हां बाबा जी.` बाबा जी –` क्या ये तुम्हारे पति से संबंधित है?` –`हां बाबा जी` –`क्या ये सेक्स से संबधित है?` –………. ….. –`बोलो देवी` (देवी मीन’स विमन) –………. ….. –`बोलो देवी` –………. ….. –`अगर तुम बोलॉगी नहीं तो समस्या का हल नहीं होगा` –………. …. –`बोलो देवी बोलो.` – `हां बाबा जी.` –`क्या सेक्स नहीं करते` –………. …. –अब बाबा जी ने ट्रंप कार्ड खेलने का फ़ैसला कर लिया-`क्या चुदाई नहीं करते?` –………. … –`बोलो देवी क्या वो तुम्हें चोद्ते नहीं?` –`हूंम्म्ममम. ….` –` यानी चोद्ते तो हैं` –हूंम्म्मममम. …` –` –`सॅटिस्फाइ नहीं कर सकते?` –`हूंम्म्ममम. ..` बाबा जी समझ गये की लोहार की चोट करने का वक़्त आ गया है. बोले ` ठीक है देवी. बाबाजी समझ गये की मामला फिट करने का वक़्त आ गया है. वो बोले,`देवी चुदवाने की इच्छा रखती हो?` चंदा –`ह्म्‍म्म्मम..` बाबा जी –`ठीक है अपना हाथ बढ़ाओ.`सम्मोहित चंदा नें अपने हाथ बढ़ा दिए. बाबा जी नें अपने हाथ मे उसके हाथ पकड़े और मसल्ने लगे. चंदा मस्ती में आने लगी. उसकी साँस ज़ोर ज़ोर से चलने लगीसुबूने बाबा जी का हाथ पकड़ लिया.थोड़ी देर के बाद बाबा जी समझ गये की औरत मस्ती में है. उन्होंने चंदा के हाथ में अपना फफनता लंड पकड़ा दिया. चंदा ने बाबा का 8″ का 3″ गोलाई का लंड हाथ में कस लिया जैसे कहीं भाग ना जाए.

चंदा की साँसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगी. बाबा जी चंदा हाथ पकड़ कर खड़े हो गये, और पूछा, ” क्यों देवी अच्छा लग रहा है?` चंदा केवल हुंकार भर कर रह गयी. बाबा जी बोले,` देवी अंदर लोगि ?` चंदा –`जैसा आप ठीक समझे.” बाबा जी समझ गये की अब लंड चूत में डाल देना चाहिए. बाबा जी नें चंदा को बेड पर लिटा दिया, और उसकी सारी उतार दी. चंदा की चूत बिल्कुल नवेली लग रही थी. चूत के पल्लों को देख कर ऐसा लगता था की कभी चुदाई हुई ही नहीं. धीरे धीरे बाबाजी ने चंदा का ब्लाउस और ब्रा भी निकाल दी. चंदा आँखें बंद कर के केवल कसमसाती रही. अब वो इंतज़ार में थी की कब बाबा जी का बेलन उसकी चूत में जाता है. वो डर भी रही थी की कहीं चूत का कचरा ही ना हो जाए. बाबा जी ने उसके होंठ चूसना शुरू कर दिए. चंदा भी पूरा साथ दे रही थी.बाबा जी चंदा की चूचियाँ दबाने लगे. कुछ ही देर में बाबाजी नें चंदा की चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी. चंदा की चूत पानी छोड़ने लगी. बाबा जी ने एक हाथ से चूत को सहलाना शुरू कर दिया. चंदा की बुरी हालत थी. अब रहा नहीं जा रहा था.

उसने सोचा अब सम्मोहन की आक्टिंग बंद कर देनी चाहिए और खुल कर चुदाई का मज़ा लेना चाहिए. चंदा नें आँखें खोली और बाबा जी से कहा,` अब डाल भी दीजिए ना` बाबा जी नें सर उठाया और मुस्कुराए. वो भी तो आक्टिंग ही कर रहे थे. `हां देवी…….. ..` चंदा बीच में ही रोक कर बोली,` अब बस भी करिए बाबा जी, मुझे चंदा बुलाए , पर में आप का लंड एक बार फिर चूसना चाहती हूँ. ` बाबा जी –` हां लो`. कह कर बाबा जी ने लंड उसके मुँह में डाल दिया. चंदा ऐसे लग रह था की चंदा पूरा लंड खा लेना चाहती थी. बाबा जी नें भे ऐसी चुसाइ नहीं करवाई थी. चंदा अपनी जीभ लंड के सूर्ख पर रगड़ रही थी जिस-से बाबा जी पागल हो रहे थे . बाबा जी का लंड अब 9″ का हो चला था बाबा जी को लगा अगर अब चूत में ना डाला गया तो फॅट जाएगा. उन्हों-ने धीरे से लंड चंदा के मुँह में से निकाला और उसे लिटा दिया.

उसकी गांड के नीचे बड़ी सी तकिया रख दिया.चंदा की चूत एक तकिये से ही उपर आ गयी. चंदा की चूत उपरी चूत थी.दूसरी तरह की चूत नीचे की चूत होती है . ऐसी चूत के नीचे बड़े तकिये रखने पड़ते हैं. नीचे की चूत को पीछे से चोदने का ज़्यादा मज़ा आता है. खैर बाबा जी नें चंदा की टाँगें उठाई और लंड चूत के उपर रखा. चंदा मस्त हो चुकी थी ,बोली` बाबा जी इतना मोटा लंड है , मेरी चूत फॅट तो नहीं जाएगी?` ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आवाज़ बड़ी दूर से आ रही है. बाबा जी बोले,` चिंता ना करो रानी, अगर हमारे चोदने से चूत फॅट गयी तो बात ही क्या . चूत फटी है अनाड़ी के चोदने से जो सबर से नहीं चोद्ते.` चंदा — `तो फिर डाल दो ना, अब और नहीं रहा जाता . ना जाने कितनी बार ऐसे लंड का सपना देखा है, आज सामने मेरी चूत में जाने के लिए तैयार है. अब डाल ही दो बाबा.` यह सुन कर बाबा जी नें धीरे से एक धक्का लगाया और लंड का टोपा चूत में घुसेड दिया. चंदा की चूत बाबा जी की उम्मीद से ज़्यादा मस्त और टाइट थी. बाबा जी भी लंबी लंबी साँसें लेने लगे. थोड़ा और लंड अंदर डाल दिया . अब चंदा को दर्द हुआ-“आईए, मर गयी रे….बाबा जी धीरे चोदो दर्द हो रहा है.` मगर बाबा जी जानते थे की ये दरद अब मज़े में बदलने वाला है. उन्हों-ने थोड़ा लंड और डाल दिया.. ` आआआ…… …मर गयी रे बाबा जी मर जाऊंगी.` बाबा जी नें एक धक्का और लगाया और पूरा लंड चूत के अंदर कर दिया चंदा पूरे ज़ोर से चिल्लाई, ` स्वाअमीइजीई बस मर जाऊंगी , फाड़ डी मेरी, बस करो बाबाजी.`… ……… बाबा जी चंदा के चीखने से समझ गये कि, चूत सच में ही कुँवारी है. उन्हों-ने धक्के लगाने बंद कर दिए और चंदा की ओर देखने लगे. बाबा जी लंबी रेस के घोड़े थे, एक ही बार चुदाई कर के माल को हाथ से खोना नहीं चाहते थे . चंदा दरद से उब चुकी थी.

मज़ा लेने का मन होने लगा था. बाबा जी के धक्के रुकने पर आँखें खोल कर बाबाजी की तरफ देखा, और प्यासी आवाज़ में कहा, ` बाबा जी चोदो ना, धीरे धीरे, बड़ा अच्छा लगता है, आपका लंड तो मुझे आपकी गुलाम बना देगा. बाबा जी प्लीज़ चोदो मुझे , अब नहीं चीखूँगी. फाड़ दो मेरी चूत, पर चुदाई करो, हाए बाबा जी आप मुझे पहले क्यों नहीं मिले, नरेश तो ख़ास्सी है . आप का लंड तो मस्त है चोदो बाबा जी चोदो. हमेशा चोद्ते रहना . धक्के लगाओ बाबा जी , है आप का लंड है कितना बड़ा है , कितना मोटा है , ऐसा लग रहा है मेरी पूरी चूत आप के लंड से भर गयी है, आप पहले क्यूँ नहीं आए, बाबा जी किस बात की इंतेज़ार कर रहे हो, चोदो, मुझे बाबा जी प्लीज़…… …` और चंदा बड़बड़ाती जा रही थी. बाबा जी खेले खाए थे . जानते थे की ये औरत प्यासी है लेकिन चूत कुँवारी है. मोटा लंबा लंड नही झेल पाएगी इस लिए धीरे धीरे कर रहे थे.

वो जानते थे की जैसे ही लंड चूत में सेट हो जाएगा, सब कुछ ठीक हो जाएगा. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | और वो वक़्त आने वाला था. चंदा लंड ले चुकी थी . उसका दरद कम हो गया था . अब उसे धक्के चाहिए थे, मस्त और लंबे धक्के. बाबा जी ने धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किए . हर धक्के के साथ चंदा मस्त हो रहे थे.` हाई बाबा जी….., क्या ये है चुदाई…., नरेश तो साला नमर्द है……है. .. और ज़ोर से बाबाजी …. और थोड़ा …मज़ा आ रहा है…….ऊऊहह. ..क्याआ. ..बात है ……बाबाजी आप महान हो….कसम से…..आप महानहो…. ..आह…आह बड़ा अच्छा लग रहा है. हां हां और अंदर…. आह आह…….बाबा …बाबा आह….. खुद भी घुस जाओ मेरी फुदी में …..आह फाड़ दो बाबा …ओह बाबा….ओह और ज़ोर से ….कसम से …मुझे छोड़ना मत…. आह में तुम्हारी गुलामी करूँगी आह बाबा बाबा….बाबा आह आह….` बाबा जी समझ गये की चंदा झड़ने को है. उन्हों-ने धक्के तेज़ कर दिए, बिल्कुल ऐसे जैसा कुत्ता कुतिया पर चढ़ कर 100 की स्पीड से धक्के लगाता है. बाबा जी अपनी पूरी मर्दानगी चंदा के अंडर उडेल देना चाहते थे. उनके धक्कों की रफ़्तार बढ़ती गयी और चंदा के सिसकारियाँ बढ़ती गयी.`आआह्ह. … मारो मेरी चूत तुम साले बाबा कहाँ थे…. तुम अब तक….कहाँ थे…. आह….ऊऊहह. … चोदो… फाड़ डालो.. हाआन्न… ईईईई… … आआआ.आ अगया गयी में हाए बाबा ये क्या हो रहा है……आह. …आह स्वायायायामियीयियैयियीयियी. …..स्वायायीययाया मी……एयाया. . ..हबाअस्सस्स. आअहह…. ` चीखने के साथ चंदा ने अपने चूतड़ ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे करने शुरू कर दिए मानो बाबाजी का रत्ती भर भी लंड बाहर ना छोड़ना चाहती हो. बाबा जी को भी मज़ा आ गया . उन्हों-ने धक्कों की रफ़्तार तेज़ कर दी. अब वो भी बुदबुदाने लगे,` हाई मेरी जान तेरी चूत तो स्वर्ग का मज़ा दे रही है . साली बड़ा मस्त चुदवाति है तुझे अब कभी नही छोड़ूँगा. हर हफ्ते तेरी चूत को चोदने आऊंगा.` दोनो ही बोल रहे थे .

दोनो मस्ती में थे , और अचानक लावा फट गया. बाबाजी के गले से आवाज़ निकली…. आआआहह. …एयाया. …गया… तेरी चूऊऊत में रे एयाया…. गया.` उधर चंदा चिल्ला रही थी,` आअहह… मर गयी में बाबा साले मादर्चोद अब तक कहाँ था भोसड़ी वाले. में तुझ से चुदने के लिए ही तो थी…..आह. ….आह आहह आआआआआ.. …बस बस….बाबा बस….बस बाबा आआहह…बस बाबा आह बाबा सवं सवमी.` बाबा जी ने पूरा मज़ा ले कर और दे कर अपना लंड बाहर निकाल लिया. कम से कम 50 म्ल वीरया तो निकला ही होगा. चंदा की चूत से बाहर भी वीर्या निकल रहा था. बाबा जी का पूरा लंड भी क्रीम से साना पड़ा था.

चंदा तो वीर्य सने लंड को देख कर मस्त हो गयी. वो चाट कर उसे साफ़ करने लगी. चाट-ते चाट- ते उसे चूसने लगी. बाबा जी ने उसका सिर पकड़ कर लंड पर दबा दिया. उनका लंड खड़ा होने लगा था. चंदा ने फील किया की बाबा जी फिर से मस्त होने लगे हैं. उसने और ज़ोर से चुसाइ शुरू कर दी. बाबा जी का लंड फिर तन गया. चंदा को अप्नी चूत में खुजली महसूस हुई और वो चूत को खुजलाने लगी. बाबा जी बोले` चंदा यह काम तुम्हारा नही मुझे खुजलाने दो.` बाबा जी की नियत जान कर चंदा बोली,` अभी तो चोद कर हटे हो बाबा जी अब क्या फाड़ ही डालोगे.`बाबा जी ने शरारत से कहा ,` फटनी होती तो फॅट गयी होती, अब तो मस्त चोदने का टाइम है. चंदा अब में तुझे पीछे से चोदुन्गा. पीछे से चुदाई का ज़्यादा मज़ा आता है. सही में चुदाई का असली और नॅचुरल तरीका तो पीछे से ही चूत मारने क़ा है बाबा जी नें चंदा को घुमा कर उसकी पीठ अपन्नी तरफ कर ली सुबूकी नंगी बाहों के नीचे से हाथ डाल कर उसकी चूचियाँ पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया. चंदा मस्त थी. पूरा स्मर्पण करते हुए उसने अपना सर पीछे झुकाया और बाबा जी की तरफ देखा. बाबा जी उसकी सेक्सी गुलाबी आँखों को देख कर मस्त हो गये. उन्होंने झुक कर चंदा के होंठ अपने होंठो में ले लिए और चूसने लगे.

चंदा ने अपने होंठ खोल दिए. बाबा जी नें अपनी जीभ चंदा के मुँह मे डाल दी और घूमने लगे. दोनो की मस्ती बढ़ गयी. अब औ रहा नहीं जा रहा था . बाबा जी नें चंदा को बेड के कॉर्नर पर घुटनों और कुहनियों के बल लिटा दिया. चंदा के कंधों को नीचे झुका दिया और गांड उपेर उठा दी. चंदा की चूत टाँगों के बीच से दिखाई देने लगी. नज़ारा सेक्सी था. चंदा अभी अभी चुद कर हटी थी. बाबाजी का वीर्य चूत केआस पास लगा हुआ था . मोटे लंड के कारण चूत की फाँकें कुछ फैल गयी थी और एक गुलाबी लाइन सी दिखाई दे रही थी. चंदा अपने चूतड़ ऊपेर नीचे करने लगी. बाबाजी समझ गये कि वो लंड लेना चाहती है. बाबाजी नें लंड चंदा की चूत पर रखा और एक ही बार में धीरे से अंडर घुसेड दिया. चंदा के मुँह से एक सिसकारी निकली, दर्द की नहीं ,मस्ती और मज़े की.बाबा जी नें लंड को अंडर बाहर करना शुरू कर दिया.पीछे से चुदाई में लंड पूरा अंडर जा रहा था चंदा सोच रही थी बाबाजी ठीक ही कह रहे थे की पीछे सेचुदाई का मज़ा ही अलग है . सच ही था. चंदा चुदाई के साथ सोच रही थी की कैसे बाबाजी को कहा जाए की जल्दी जल्दी आ कर चुदाई किया करें. चंदा अपनी बहन नेहा- जो उसकी देवरानी बन-ने वाली थी, को भी बाबाजी से चुदाई का मज़ा दिलवाना चाहती थी. वो जानती थी की उसका देवर सुरेश भी नरेश की तरहा ख़ास्सी है और नेहा को नहीं चोद पाएगा.

अचानक चंदा का ध्यान टूटा. बाबाजी ज़ोर ज़ोर से चुदाई कर रहे थे. पूरा लंड बाहर निकाल फिर अंडर डालते थे. चंदा मस्त हो चुकी थी. अपने चूतदों को ज़ोर ज़ोर से ऊपेर नीचे कर रही थी. धीरे धीरे उसके दिमाग़ नें काम करना बंद कर दिया. वो कुछ भी सोच नहीं पा रही थी. केवल चूत लंड चुदाई और बाबाजी ही उसके ख़यालों में थे.मस्ती पूरी तरह हावी थी. मज़ा आने वाला था. चंदा के मुँह से सिसकारिया निकलने ल्गी थी. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो मुँहसे कुछ बड़बड़ा रही थी. धीरे धीरे उसकी मस्ती बढ़ती गयी. उसकी आवाज़ ऊँची होती गयी. बाबाजी का हर धक्का उसे स्वर्ग की सैर करा रहा था,` आह बाबा जी……. क्या चीज़ हो आप……. कैसे चोद्ते हो…. आह…..बाबाजी आप और कैसे कैसे चोद सकते हो….सब तरहा से चूत मारो मेरी……मैं कहती थी ना की मेरी चूत फॅट ना जाए…….. अब कहती हूँ फाड़ दो इसे…….धक्के मार कर.` चंदा को पता नही था की वो क्या बोल रही है. मॅन की बातें ज़ुबान पर आ रही थी. बाबाजी उसकी बातें सुन कर और भी सेक्सी हो रहे थे. उनके धक्कों की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. ` अहह….बाबा जी बाबाजी….. …आअहह. बाबा ……बाबा आह….फाड़ दो ….फाड़ दे बाबा साले…..बाबा मॅदर चोद…….बाबा चूतिया….. .फाड़ दे साले. आह….बाबाजी प्लीज़ और ज़ोर से… और ..हां ऐसे ही…हः… आह…आह बाबा जी मज़ा आने वाला है….सवमीज़ी. …रोज़ चोदना मुझे….कभी जाना मत…..आह. ..बाबाजी मेरी बहन को भी स्वर्ग दिखा दो…..अहहहः. …उसे भी चोदना ` चंदा को मज़ा आने वाला था. वो अपने चूतड़ ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी. बाबाजी नें अप्ना मज़ा रोक लिया और चंदा के बाद झड़ने का फ़ैसला किया. अचानक चंदा को मज़ा आ गया वो ज़ोर से चिल्लाई, ` आह…….मर गयी रे……ये क्या कर दिया बाबा…..इतना मज़ा ? हे भगवा…..ये बाबा क्या चीज़ है ……..हाए ……और क्या चीज़ है ये लंड और चूत…..आह आह आह ….बाबा आह.. मर गयी…..मर गयी. बाबा फाड़ दे साले फाड़ मेरी चूत…. फाड़ ….फा….. आह……. .` और इसके साथ ही वो पस्त हो गयी.अब बाबा जी की बारी थी. बाबाजी नें मज़ा लेने का मॅन बनाया और ज़बरदस्त धक्कों के साथ झाड़ गये. एक ऊँची आवाज़ उनके गले से निकली…..आआआआः हह…. ….आआआगयाआ आ…स उउउब्ब्ब्ुऊउ… ..आअहह. ……..किययाया चूऊत है……..आआहह ह……. ..सुउुबुउउउ. ….सुउुउउ ब्ब्ब्बुउउउ` नीचे चंदा को अपनी चूत में बाबाजी का वीर्य गिरता महसूस हुआ तो उसेफिर मज़ा आने लगा. बाबा जी का वीर्य गिरता ही जा रहा था.थोड़ी देर में सब शांत हो गया. बाबा जी नें लंड बाहर निकाला. चंदा सीधी हुई और बाबाजी का लंड प्यार से चूस चाट कर सॉफ किया. खड़ी हो कर पूछने लगी, `बाबाजी अब कब आओगे`. जल्दी ही आऊंगा, नेहा की कुँवारी चूत जो चोदनि है.` चंदा नें प्यार से उनकी तरफ देखा और उनके गले लग गयी और अगली चुदाई के सपनों में डूब गयी. चंदा की बहन नेहा की चुदाई चंदा बाबाजी से अलग हुई और कपड़े पहनने लगी. बाबाजी ने भी कपड़े पहन लिए. चंदा अंदर गयी और 5000 रुपये ले कर आई और बाबाजी को देने लगी, `बाबाजी , ये लीजीए मेरी तरफ से भेंट.` ` ये क्या है?` `बाबाजी आप ने मेरी इतनी अच्छी चुदाई की, आप इसे ले लीजिए` `नहीं सुबू, में चुदाई के पैसे नहीं लेता, और ना मुझे इनकी ज़रूरत है. हमारे आश्रम के पास बहुत पैसा है. हां अगर तुम इच्छा रखती हो तो में 1000 रुपये रख लेता हूँ , क्यों की हम इस शहर में भी आश्रम खोल रहे हैं.` ` ठीक है बाबाजी, फिर आप बैठिए, में आप के लिए खाना बनाती हूँ`. `ठीक है ` कह कर बाबा जी बैठ गये.

चंदा दूध भरा गिलास और ड्राइ फ्रूट लाई और हंस कर बोली, `बाबाजी आप ने बहुत मेहनत की है ये पीलीजिए, तब में खाना बनाती हूँ`बाबाजी भी हँसने लगे. खाना ख़तम हो गया. चंदा और बाबा जी सोफा पर बैठ गये. चंदा नें पूछा, ` अब कब आओगे बाबा जी ?` `जब तुम बुलाओ` ` मेरा क्या में तो कहती हों जाओ ही मत, दिन रात मुझेचोद्ते रहो` `नहीं, पर तुम जब कहो में आ जाऊँगा` `जल्दी से जल्दी कब आ सकते हैं` चंदा की आँखों के सामने बाबाजी का लंड घूमने लगा. `ठीक है आज मँगवार है अगले मंगलवार को आऊंगा` वो बातें कर ही रहे थे की नेहा आ गयी. बाबाजी को देख कर वो रुक गयी. चंदा ने दोनो का परिचाए करवाया,` बाबाजी ये मेरी बहन नेहा है, रस्मी ये बाबाजी हें प्रणाम करो`. नेहा नें प्रणाम किया और बोली,` दीदी में ज़रा फ्रेश हो लूँ`. ` चंदा बोली ठीक है जा. बाबाजी भी जाने वाले हें` रस्मी चली गयी. बाबा जी नें पूछा, ` चंदा तुम इस लड़की की चुदाई की बात कर रही थी?` ` हां बाबाजी`. `मगर क्यूँ, ये तो कुँवारी है.

मेने तुम्हें चोदा है इसका मतलब ये नही की में कुँवारी लड़कियों की ज़िंदगी बर्बाद करूँ. चुदाई मेरा पेशा नहीं है. में केवल उनें ही चोद्ता हूँ जो अपने विवाहित जीवन से निराश होती हैं. इसे चोदुन्गा तो इसकी सील टूट जाएगी चूत खुल जाएगी. ये इसके पति के साथ धोका होगा ` बाबाजी में आपकी भावनाओं की कदर करती हूँ मगर ये मेरी बहन मेरी देवरानी बन-ने वाली है और मेरा देवर सुरेश भी मेरे पति नरेश की तरहा नमार्द है. जहाँ तक सील का स्वाल है उसका लंड तो सील तक पहुचेगा भी नहीं फिर जब मेरी तरहा कल भी चुदाई बाहर से ही करवानी है तो आज ही क्यों नहीं.आआप परेशान ना हों और अगली बार इसकी भी चुदाई करें….

अगर ये बात है तो ठीक है, में अपने एक चेले को भी ले कर आऊंगा. मगर एक बात बताओ, तुम्हे कैसे मालूम की सुरेश भी नमार्द है, क्या उस-से भी चुदाई करवाई थी` `हाँ बाबाजी, जब नरेश मेरी प्यास नहें बुझा सका तो मेने सुरेश को फँसाया, पर वो भादुआ तो नरेश से भी बेकार निकला.` ` तो फिर तुम नेहा की शादी इस-से क्यों करवा रही हो` ` बाबाजी जी , ये मेरे सामने रहेगी तो दिल को तस्सली रहेगी. अगर कहीं और शादी हो गयी और भी कोई नमार्द ही मिल गया तो क्या होगा . अपनी हालत देख कर मन डरने लगा है. बस अब आप हम दोनो बहनों को चोद्ते रहिए` `ठीक है तो फिर अगले मंगलवार को अपने चेले के साथ आता हूँ. ` फिर धीरे से बोले, ` मेरा चेला तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़ होगा`. चंदा कुछ समझी नहीं. बाबाजी चले गये. नेहा बाहर आई, ` क्या बाबाजी चले गये दीदी?` ` दीदी एक बात पूछूँ, आज बड़ी खुश लग रही हो क्या बात है?` चंदा शरमाई, `नही बस ऐसे ही`. `नही दीदी कुछ तो है , बताओ ना`. ` अरी कुछ नहीं, अच्छा एक बात तो बता, कॉलेज में तेरा कोई बाय्फ्रेंड है?` नेहा हैरान हो गयी. दीदी नें कभी उस-से ऐसी बात नही की थी.बोली,` नहीं दीदी.” ` पर आज कल तो सब लड़कियों के बॉय फ्रेंड्स होते हैं` ` हां पर मेरी शादी भी तो तय हो गयी है` ये कहते हुए वो कुछ उदास हो गयी. वो सुरेश और नरेश जीजा जी के बारे में जानती और समझती थी. ` नेहा, में जानती हूँ तू क्या सोच रही है. तेरे जीजा जी में मर्दानगी की कमी है और सुरेश भी ऐसा ही है. फिर भी में तुम दोनो की शादी करवा रही हूँ. नेहा में ये इस लिए कर रही हूँ की इस-से तुम मेरे पास तो रहोगी. कहीं दूसरी जगहा भी ऐसा आदमी मिल गया तो क्या होगा? या तो फिर तुम ही अपने लिए कोई ढूंड लो जो पूरा मर्द हो.

मगर एक बात है यहाँ ढेर सारा पैसा और आज़ादी है , कोई रोक टोक नही. अगर थोड़ा सोच समझ कर चलें तो सब ठीक हो सकता है. आ इधर मेरे पास आ. तू कह रही थी ना की आज में बहुत खुश हूँ, हां ये सच है, आज में खुश हूँ. तू मेरी बहन ही नहीं मेरी सहेली भी है. हम दोनो एक ही नाव के सवार हें. हमे एक दूसरे का राज़दार भी बन-ना है. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | ये जो बाबा जी आए थे, ये आज मुझे दो बार चोद कर गये हैं. मेरी तस्सली हो गयी है. अगले मंगलवार को फिर आएँगे और साथ इनका एक चेला भी होगा. अगली बार में चाहती हूं की तू भी चुदाई करवा और मज़ा ले.` `मगर दीदी…….. .` `नहिएं नेहा, में तड़पति रही हूँ सेक्स के लिए, में तुझे तड़पने नहीं दूँगी.` ये कह कर चंदा नें नेहा को बाहों में ले लिया, और अंजाने ही उसके होंठ चूसने लगी……. ……… चंदा और नेहा देर तक एक दूसरे से लिपटी रही.अलग हुई तो दोनो की आँखें गुलाबी हो रही थी. दोनो कामुक थी, और चूत गीली हो रही थी. चंदा को तो फिर बाबाजी की याद आ गयी. चूत फिर लंड माँगनें लगी. बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू किया. नेहा को एक बार फिर चूमा और पूछा,` नेहा सच सच बताओ, तुमने कभी चूत नही चुदवाइ?` ` नहीं दीदी, सच`. `कभी दिल नहीं करता था ?` ` दिल तो करता था, पर मेरी सहेली रेखा और में मूली चूत में डाल कर मज़ा लेती थी.` `मूलीइीईई, ` चंदा हैरानी से चिल्लाई और हँसने लगी, `मेने सुना था की जवान लड़किया केला चूत में लेती हैं या आजकल रब्बर या प्लास्टिक के लंड मिलते हैं, पर ये मूली ? में कुछ समझी नही इसका मतलब है कुछ भी डाल लो चूत में, लौकी, तौरई…कुछ भी? `अर्रे दीदी, ये कोइमामूली मूली नही होती, इसे स्पेशल बनाया जाता है` `स्पेशल बनाया जाता है, वो कैसे?` `देखो दीदी, पहले तो अपनी चूत के साइज़ के अनुसार मूली मूली सेलेक्ट कर लो.

फिर इसे 7-8 दिन के लिए कहीं रख दो. 7-8 दिन के बाद ये नरम हो जाएगी- बिल्कुल लंड की तरहा नरम और फ्लेक्सिबल- चूत को ना दुखाने वाली. बस मूली लंड तैयार है. क्रीम लगाओ और जितना चाहे अंदर लो और जैसे चाहे चोदो.` `कमाल है, तू कितनी बड़ी मूली लेती है ?` नेहा नें हाथ से गोलाई और लंबाई बताई. चंदा नें देखा, मूली का लंड बाबाजी के लंड बहुत छोटा था. चंदा को तस्सली हुई की नेहा अभी चुड़दक़्कड़ नही हुई थी और बाबा के लंड का पूरा मज़ा लेगी. बोली, ` बस इतना ही.` `हां दीदी,में तो इतना ही लेती थी, पर रेखा काफ़ी बड़ी मूली लेती थी.` फिर शरारत से बोली,` दीदी आप भी ले कर देखो ना कभी.` `हॅट, तू भी एक बार बाबाजी से चुद जा, मूली भूल जाएगी.` दोनो बहनें हँसनें लगी. दिन बीत गये . मंगलवार आ गया. सुभह से ही चंदा बाबा जी का इंतेज़ार कर रही थी. 11 बजे डोरबेल बजी. चंदा भागी और दरवाजा खोला. बाबा जी ही थे. अपने चेले के साथ.चेला भी गुरु की तरह मस्त था.

गोरा लंबा, लेकिन क्लीन शेव. चंदा सोचने लगी नेहा की चुदाई मस्त होगी. `आइए बाबा जी स्वागत है.` बाबा जी अंदर आए और सोफा पर बैठ गये, और बोले ` चंदा ये है हमारा चेला. हम डाल है तो ये पात. हम से दो कदम आगे.` चंदा शर्मा गयी, और चेले की तरफ देख भी नहीं सकी. बाबा जी बोले, ` सुबू, वक़्त कम है, क्या कहती हो. नेहा घर में है क्या ?` `हाँ बाबाजी` ` तो फिर देर किस बात की है.` `वो शर्मा रही है बाबाजी` `ओह तो फिर में जा कर लाता हूँ`. `नहीं बाबा जी में जाती हूँ और ले कर आती हूँ.` चंदा अंदर गयी और कुछ देर बाद नेहा के साथ वापस आ गयी……. चंदा नेहा को ले कर आ गयी. बाबा जी नें अपने पास जगह बनाते हुए कहा, ` आओ नेहा मेरे पास बैठो.` नेहा शरमाती शरमाती बाबा जी के पास बैठ गयी. बाबा जी बोले, ` नेहा एक बात बताओ, क्या चंदा नें तुम्हें कुछ समझाया है, तुम समझ रही हो ना.` नेहा नें हां में सर हिलाया. बाबा जी बोले, ` तो फिर शरम का परदा उतार दो और पूरा मज़ा लो. क्या तुम तैयार हो नेहा? में बार बार इस लिए पूछ रहा हूंकि में किसी लड़की पर कोई ज़ोर ज़बदस्ती नही करता, बोलो नेहा.` नेहा नें बाबाजी के तरफ देखा और हां में सर हिला दिया. बाबाजी बोले, `तो ठीक है चंदा हमे सॉफ सॉफ बात करने चाहिए. में नेहा को चोदुन्गा और ये मेरा चेला तुम्हारी चुदाई करेगा.` चंदा को अच्छा नहीं लगा. वो तो बाबाजी का लंड लेना चाहती थी. बाबाजी उसके चेहरे के भाव पढ़ गये,” चंदा चिंता मत करो, ये हमारा चेला चुदाई में हमारा गुरु है. मेने तुम्हें कहा था ना की में तुम्हारे लिए सर्प्राइज़ लाऊंगा, ये है वो सर्प्राइज़.

दूसरी बात ये जवान है नातुज़रबेकार है नेहा अभी नयी है , ये उसकी चूत को नुकसान पहुँचा सकता है. नेहा को मुझे ही चोदने दो. और एक बात, इसका लंड ले कर तुम मेरा लंड भूल जाओगी.` चंदा अनमने मॅन से बोली,` बाबाजी में आपके लंड को भूलना नहीं चाहती, पर आप कहते हेँ तो ठीक है. मगर बाबाजी आप दोनो हम दोनो को यहीं चोदोगे?` बाबा जी बोले ,` यहीं ठीक रहेगा , अपनी चुदाई के साथ दूसरे की भी चुदाई देखो`. ये कह कर उन्हों-ने चंदा को बाहों में भर कर चूम लिया और चेले से बोले, `लो रामदास, इनकी कामाग्नि को शांत करो`.और खुद उन्होंने नेहा को बाहों मे ले लिया. बाबाजी नें नेहा के और रामदास नें चंदा के कपड़े उतार दिए. दोनो उन्हें बेतहाशा चूमने लगे. दोनो औरतें गरम हो गयी. चंदा नें तो नारारण का लंड हाथ में लिया और उसे एकदम शॉक लगा. बाबा जी का लंड देखने के बाद वो सोच रही थी की इस-से बड़ा लंड हो ही नहीं सकता, पर ये…..ये तो गधे के लंड जैसा था. बाबाजी ठीक ही कह रहे थे , ये लंड नेहा की कुँवारी चूत को फाड़ सकता था. चंदा से रहा नहीं गया. वो जल्दी से जल्दी रामदास का लंड देखना चाहती थी. उसने रामदास के कपड़े उतार दिए. रामदास का लंड ऐसे था मानो संसार मे रामदास का लंडसिर्फ़ एक बड़ा लंड है. चंदा नें एक नज़र बाबा जी की तरफ डाली. दोनो की नज़रा टकराई. चंदा की आखों में ऐसा लंड देने के लिए बाबाजी के लिए आभार था. बाबा जी मुस्कुराए और नेहा को गरम करने में जुट गये. नेहा नें जब बाबाजी का लंड देखा तो घबरा गयी. उसने चंदा की तरफ देखा मगर वो रामदास के साथ मस्त थी. बाबाजी नेहा की उलझन को समझ गये. बोले ` नेहा घबराओ मत. में तुम्हारी चूत में उतना ही लंड डालूँगा जितना तुम ले सकोगी. अब शरम उतार दो और मस्ती करो. देखो चंदा कैसी मस्ती कर रही है.` नेहा नें उधर देखा.

चंदा रामदास का लंड अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी, मगर इतना मोटा लंड मुँह में समा नही रहा था. नेहा सोचने लगी अगर ये लंड मुँह में नही जा रहा तो चूत में कैसे जाएगा. जब नेहा की ख्याल टूटा तो देखा की बाबाजी अपना लंड उसके मुँह के पास ले आए है. नेहा नें सोचा जब चुदवाना ही है तो फिर शर्म कर क्या फाय्दा. बाबाजी सही कह रहे थे . आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | नेहा ने बाबा जी का लंड मुँह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया. पहली बार लंड मुँह में गया था, नेहा तो निहाल हो गयी. उसे मालूम नही था कि लंड की चुसाइ इतनी मस्त होती है.रस्मी ज़ोर ज़ोर से लंड चूसने लगी. बाबाजी मस्ती में आ गये. नेहा को लिटा कर उसकी चूत चूसने लगे. उधर चंदा के मुँह में रामदास का लंड समा नही रहा था. मगर वो इस जंबो लंड को अपनी चूत में महसूस कर रही थीसुबूने लंड चूसना बंद किया और प्यासी नज़रों से रामदास को देखा. रामदास समझ गया की चंदा अंदर लेना चाहती है. अब तक रामदास शांत था. जैसे ही चुदाई का टाइम आया वो जानवर बन गया. चंदा की टाँगें उठा कर उसने अपनें कंधों पर रख दी और एक ही झटके में लंड चंदा की चूत में घुसेड दिया. चंदा को लगा की कोई अंगारा उसकी चूत में चला गया हो. वो ज़ोर से चीखी, `हाई में मर गयी , बाबाजी मुझे बचाओ इस-से, इसने मेरी चूत का कबाड़ा कर दिया, ये किस को ले आए आप. ये तो जानवर है.` मगर रामदास चोदता जा रहा था.

कोई तरस नही कोई रहम नही. रामदास के धक्के चंदा कीजान निकाल रहे थे. उधर चंदा की हालत देख कर नेहा डर गयी. मगर बाबाजी ने उसे हिम्मत बँधाई, ` डरो मत तुम्हारी दीदी अभी ठीक हो जाएगी. अब तुम भी अपनी टाँगें खोलो ओए मेरा लंड ले लो. नेहा अब तक पतली छोटी मूली ही चूत में लेती थी,इतना बड़ा लंड कैसे चूत में जाएगा समझ नही पा रही थी.बाबा जी नें उसकी टाँगें फैलाई और अपना लंड नेहा की चूत पर रख दिया (मगर अंदर नही डाला) कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे. नेहा अंदर लेने की इच्छा करने लगी और थोड़ा थोड़ा हिलने लगी. बाबाजी जी नें लंड थोड़ा सा अंदर डाला और रुक गये. ऐसे ही कुछ देर चलता रहा. बाबा जी का आधा लंड अंदर जा चुका था.रस्मी पेशोपश में थी के और लंड ले तो कोई तकलीफ़ तो नहीं होगी? दिल तो चाह रहा था मगर दरद से डर रही थी. मस्ती डर पर हावी थी. एक बार फिर लंड लेने के लिए हिली, और बाबाजी नें एक ही झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया. बकरी को एक दिन तो हलाल होना ही था. `आआआआअ.. …….मर गइईई, डिडियीयैआइयीयिमिन मर गइईए. मेरी चूऊऊओत फाड़ दी बाबाजी नें. दीदी प्लीज़ मुझे बचाओ.` चंदा उसे क्या बचाती. उसकी तो अपनी चूत का भोसड़ा बन रहा था. रामदास वहशयों की तरहा चंदा की चुदाई कर रहा था.उधर बाबाजी ने थोडा रुक कर धक्के लगाने शुरू कर दिए….

दर्द का अहसास कम हो रहा था. मस्ती दोनो बहनों पर हावी हो रही थी. चीखो के जगहा सिसकारियों ने ले ली थी. दोनो बहनें बड़बड़ा रही थी, ` हां बाबाजी मज़ा आ रहा हाइपर ज़रा धीरे चोदो. आआअहह. …बाबा जी आआआ. पूरा जा रहा है . हाआन रामदास तुम आदमी हो की जानवर. कैसे चोद्ते हो. पर आहह ऐसे ही, ऐसे हीईई….. हन्न्न…. ऐसे ही चोदो. साले कितना मोटा है तेरा…..बाबाजी ठीक ही कहते थे….. साले तू नेहा की तो फाड़ ही देता. आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह नारया…… ..ज़रा लंबे लगाओ.आआहहस्वँ ई जी आआहह क्या मस्त चला लाए हूऊ……. आआअहहस्वँ ईज़ी रशमी को ज़बरदस्त चोदो. कोई हसरत ना रह जाए.` उधर रशमी चिल्ला रही थी, ` डीडीिईई…. म्ज़ा आआआअ…. गया मेरपयारी दीदी……क्या स्वरग की सैर करवाई है……बाबाजी तो मस्त चोद रहे हैं आआआआ…. बाबाजी …बाबाजी …..करो बाबाजी ज़ोर से करो…..हाए ये क्या हो रहा है…….बाबाजी ….प्लीज़ बाबाजी …….चोदो. …जैसे मेरी दीदी को चोदा था……..आआहह हौर नेहा ज़ोर ज़ोर से चूतड़ उछालने लगी.

बाबाजी समझ गये की लड़की गयी. उन्हों-ने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी. टाइट चूत ने उन्हें भी मस्त कर दिया. उन्हों-ने भी मज़ा लेने का मंन बना लिया. नेहा चिल्ला रही थी, ` बाबा जी ज़ोर से चोदो आज तो कमाल हो गया. है दीदी अब हमेशा चुदवाउन्गि बाबाजी ……बाबाजी. …..स्वाआआआअ म्म्म्मीईज्ज्ज्जीइ. …. ..आआआआ आआआ`. उधेर बाबाजी भी झाड़ गये,`आबीयेयेयीयायग गग्ग्घगया ….. चंदा तुम्हारी बहन बड़ी सेक्सी है…….आआअहह हह`. चंदा और रामदास की कुश्ती जारी थी. चंदा उचक उचक कर चुदवा रही थी. पूरी चूत लंड से भरी हुई थी. नेहा चंदा के पास आ कर बैठ गयी और चुदाई देखने लगी रामदास का मोटा लंड जब बाहर निकलता था तो चूत की स्किन भी बाहर आ जाती थी. दोनो मस्ती में ज़बरदस्त चुदाई कर रहे थे | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |.. दुनिया से बेख़बर. नेहा ने बाबाजी की तरफ देखा जो नंगे लेटे हुए थे. नेहा नें उनका लंड चूसना शुरू कर दिया. अब वो भी चंदा की तराहा लंड की प्यासी थी. बाबाजी से दोबारा चुदने के लिए तैयार पिंकी, सुबू`और ननद की चुदाई नेहा और चंदा चुद चुकी थी.

नेहा तो एक बार बाबाजी क़ा वीर्य पी भी चुकी थी. चंदा रामदास का मोटा लंड ले कर निहाल हो चुकी थी. हालाँकि उसकी चूत में जलन हो रही थी, फिर भी वो बोली ,` बाबा जी आप का चेला तो मस्त चुदाई करता है.एक बात बतायए बाबा जी ऐसे कितने तीर हैं आप के पास. बाबाजी हंस दिए,` हां एक तीर है, विप तीर, विप लोगों के लिए.` ` उसकी क्या ख़ासियत है बाबा जी ?` `वो चुदाई महीने में एक बार करता है, और जब करता है तो जल्दी झाड़ता नहीं. जब झाड़ता है तो चूत वीर्य से भर जाती है.और वीर्य चूत से बाहर आने लगता है.और सब से बड़ी बात तो ये है की झड़ने के बाद भी उसका लंड खड़ा रहता है, जब तक वो चाहे, यही उसकी ख़ासियत है.` चंदा बोली ,` बाबाजी आप के चेले तो एक से बढ़ कर एक हैं, आप उसे ले कर आईए.` ` ठीक है सुबू, तुम्हारी और नेहा की चुदाई से में बहुत खुश हूँ, अगली बार में उसे ले कर आऊंगा. उसके चुदाई का एक महीने का बनवास भी अगले महीने ख़तम होने वाला है- अच्छा अब चलते हेँ.` चंदा नें बाबाजी को एक जोरदार किस दिया और अलविदा कहा.नेहा भी बाबाजी के लंड के ख़यालों में थी.

अगले दिन पिंकी आ गयी.वो 2 महीने में एक बार आती थी.घर में खुशी का महॉल था. चंदा भाभी बहुत खुश थी. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |..  चंदा की उदासी उस-से देखी नहीं जाती थी.वो अपने भाइयों के बारे में जानती थी और किसी भी तराहा चंदा को खुश देखना चाहती थी.पिंकी हॉस्टिल में रहती थी और खुले दिमाग़ की लड़की थी. एक बाय्फ्रेंड भी था. जब मूड होता था चुदवाने से भी पीछे नहीं हट-थी थी. सेक्स टॉयस भी यूज़ करती थी और जब मंन करता था रुब्बुर का लंड चूत में खूब लेती थी. इस बार वो भाभी के लिए भी एक रुब्बुर का लंड ले कर आई थी.नेहा कॉलेज जा चुकी थी.पिंकी आ कर चंदा के पास आ कर बैठ गयी और बोली, ` भाभी इस बार आप बड़ी खुश हो, चेहरा भी दमक रहा है. बताओ ना भाभी क्या बात है ?` ` अर्रे कुछ नही रे.` मगर पिंकी से छुपा नहीं पाई और शर्मा गये. पिंकी सोचने लगी की ऐसा नूर , ऐसी खुशी तो केवल चुदाई से ही आ सकती है, क्या भाभी नें किसी से चुदाई करवानी शुरू कर दी है ? पिंकी नें पूछने का मंन बनाया और बात शुरू की.` नहीं भाभी कुछ तो है. में आप की ननद भी हूँ और सहेली भी, आप के दरद को जानती हूँ. मुझे अपने भाइयों के बारेमें पता है. ` फिर वो धीरे से बोली , ` भाभी में आप के लिए रुब्बुर का लंड ले कर आई हूँ, जब चाहो क्रीम लगा कर अंदूर डाल लो` ` अर्रे पिंकी ये कैसी बात कर रही हो, मुझे तो समझ नही आ रहा`. `अर्रे भाभी शरमाना कैसा, एक बात बताऊं, मेरा एक बाय्फ्रेंड है, जो कभी कभी मुझे चोद्ता है, और अगर मेरा मंन चुदाई का करता है और वो वहाँ नहीं होता तो में रुब्बुर के लंड से काम चला लेती हूँ.` ` पिंकी तू तो बड़ी शरारती हो गयी है.` ` हां भाभी और में दिल से चाहती हूँ की आप भी कुछ शरारती बनें. ` फिर भाभी के पास आ कर बोली,` भाभी मुझे आप की खुशी में एक मस्त राज लग रहा है, और अगर ये सच है तो में बहुत खुश हूँ` ` राज कैसा, चंदा नें नज़रें चुरा कर पूछा.` ` भाभी अब चुपाओ मत, मेरा ख्याल है की आप नें चुदाई करवाई है और वो भी मस्त.` चंदा को जैसे शॉक लगा.

उसने पिंकी की आँखों में देखा, उसे वहाँ सच में ही प्यार और खुशी दिखाई दी.` चंदा नें पिंकी को बाहों में भर लिया और सारी बात बता दी. `हाई भाभी , नेहा भी ?` पिंकी बोली, ` फिर तो भाभी आप मुझे भी चुदवाओ, प्लीज़.` ` अर्रे इसमें प्लीज़ की कोई बात नहीं है. शायद ये तेरी किस्मत है की इस मंगल वार को बाबाजी अपनें एक और चेले के साथ आ रहे हैं. मगर तू तो मंगल तक चली जाएगी.` ` नहीं भाभी अब तो में चुदवा कर ही जाऊंगी….. ……… .. पिंकी बोली`भाभी अब तो में चुदवा कर ही जाऊंगी.` और पिंकी नें दो दिन की छुट्टी ले ली.` भाभी जिस तरहा के लंड आप नें बताए हैं, वाइज़ लंड से तो में ज़रूर चुदना चाहूँगी.` मंगलवार आ गया, बाबाजी का इंतेज़ार हो रहा था. नेहा नें भी छुट्टी लेली थी. 11 बजे के करीब बाबाजी आ गये, और चंदा की तरफ देख कर बोले, ` ये है वो वीआइपी तीर गुरु. केवल नाम का ही गुरु नहीं, चुदाई का भी गुरु. औरत को पूरा मज़ा देने के लिए महीने में केवल एक बार चुदाई करता है.` चंदा ने देखा गुरु भी बाबाजी और रामदास की तरह सुन्दर था. लेकिन रामदास का एक और रूप वो देख चुकी थी.

एक वाहशी चुड़दकड़ का. वो बात अलग है की उसकी चुदाई नें उसे मस्त कर दिया था सुबूकी आँखों के आगे रामदास की चुदाई घूम गई जो उसनें पीछे से की थे, लगता था जैसेचूत फॅट ही जाएगी. बाबा जी नें पिंकी की तरफ देख कर कहा , ये कौन है? ` `बाबाजी ये मेरी ननद है, कॉलेज में पढ़ती है छुट्टियो में घर आई है ये भी आपसे चुदवाना चाहती है आपको कोई ऐतराज तो नही `नहीं मुझे कोई ऐतराज़ नहीं. ` बाबाजी अनुभवी थे, स्मझ गये की लड़की चुदाई मजबूरी में नहीं, मज़े के लिए करवा रही थी, यानी खूब मज़ा देगी. बाबाजी के चेलों ने कपड़े उतार दिए. उनके लंड खड़े हो गये थे.पिंकी की नज़र रामदास के लंड से हट नही रही यही. चुदवाना चंदा भी उस-से चाहती थी पर पिंकी का मॅन देख कर वो बाबाजी की तरफ मूड गयी.पर बाबाजी नें कहा ,` चंदा आज तुम गुरु से चुदवाओ. में नेहा को चोदुन्गा जिस-से इसकी चूत रामदास का लंड लेने लायक हो जाए. और हां तुम सब जितना मज़ा लेना चाहो लेलो फिर अंत मे गुरु तुम सब को एक एक बार फिर चोदेगा.` सब बात को समझ गयी और सब नें कपड़े उतार दिए. उनके नंगे जिस्म और चिकनी चूते तीनों मर्दों को मस्त कर रही थे. उनके लंड फंफनाने लगे, जैसे फॅट जाएँगे. रामदास का लंड तो जैसे लंबा ही होता जा रहा था. नेहा बाबाजी की बाहों में चली गये , चंदा नें गुरु का लंड अपने हाथों में ले लिया और पिंकी रामदास का लंड अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी.रामदास का लंड पिंकी के मुँह में जा नहीं रहा था.पिंकी नें रामदास को नीचे लिटा दिया और उसके लंड पर बैठ गयी.

एक हाथ से लंड पकड़ कर चूत में लेने की कोशिश की मगर लंड मोटा था, अंदर नहीं जा पाया. पर पिंकी की ये हरकत रामदास को गरम करने के लिए काफ़ी थे. उसने पिंकी के कंधे पकड़े और नीचे से उचक कर एक जोरदार धक्का लगाया, और पूरा लंड पिंकी की चूत को चीरता हुआ अंदर घुसेड दिया. आआआअ….. .मररर… .गइई. मैईएन…..फाड़ दी मेरी चूत……. …भाभी मुझे बचाओ…… बाबाजी.. …..आआहह. …..रामदास नहीं ……प्लीज़. …..नाआअ. करूऊओ. नहियियैआइयैयीन. ……निकालूऊओ ओ….हहााआ ईई…. मर …..गइईए. मगर नरायण नहीं रुका. चंदा नें पिंकी की तरफ देखा और उसे अपनी चुदाई याद आ गयी. सोचने लगी, ये पिंकी अभी चिल्ला रही है अभी मस्त हो जाएगी. सुबुको गुरु पीछे से चोद रहा था, बिना रुके धक्के लगा रहा था. चंदा गरम थी. चूत मे आग लग रही थी. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |.. मुँह से आवाज़ें निकल रही थी,`…..हाँ …..गुरु… ..ज़ोर से ….क्या चुदाई है…….वाह …उरू….तुम ….भी….. आआहह. ….बाबाजी. ….आ आप्प्प्प. और आआप …के चेलए……क्या. ….खूओब. …हैं ….अरे…. .पिंकी… म्ज़ा आना शुरू हुआ की नही……. .आह…… .हाआअँ भाभी……. .आअब्ब्ब्ब. …..आआ. ..रहा है……ये रामदास …….बड़ा. ….जालिम है. नेहा बाबा जी का लंड पा कर निहाल थी. बस एक ही बात बोल रही थी….हाआअँ बाबाजी….. .छोड़ो… …चिॉडो. ….ज़ोर …..से छोड़ो. सारे कमरे में सिसकारियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी.जल्दी ही सब को मज़ा आ गया. कमरा सिसकारियों की आवाज़ों से भर गया. केवल गुरु की ही आवाज़ नही थी. अब पार्ट्नर बदल गये. गुरु पिंकी को चोदने लगा. बाबाजी चंदा की चोदने लगे.

चंदा के जहाँ में तो रामदास का लंड था. मगर कुछ बोली नहीं. नेहा बाबाजी से चुदवाने के बाद सोच रही थी की रामदास का लंड और मस्ती देगा. उसने सोच रामदास भी बाबाजी की तराहा आराम से चोदेगा. खैर चुदाई का दूसरा दौर शोरू हो चुका था. गुरु और पिंकी मस्त थे. चंदा और बाबाजी एक दूसरे में सामने की कोशिश कर रहे थे. रामदास नेहा को पीछे से चोदने की तैयारी कर रहा था. नेहा की कमर कस कर पकड़ कर उसने एक वहशियाना धक्का लगाया और उसका लंड चीरता हुआ नेहा की चूत मे घुस गया. नेहा दरद के मारे चीख उठी. `बाबाज्वी दीदी मुझे बचाओ, में मर जाऊंगी….. .ये रामदास मुझे मार देगा. पर किसी को उसकी चीखें सुन-ने की फ़ुर्सत नहीं थी. रामदास चोद्ता रहा. नेहा की चूत फूल कर छोटे गुबारे जैसी हो गयी. सब मस्त थे. सब झड़ने को थे. कमरा चीखो सिसकारियों से गूज़ रहा था.एक और दौर चुदाई का ख़तम हो गया. अब रामदास चंदा की तरफ मूड गया. बाबाजी पिंकी को चोदने लगे. गुरु नेहा की तरफ बढ़ा की वो घबरा गयी.

उसकी चूत दुख रही थी. मगर यहाँ हर कोई केवल चुदाई के बारे में सोच रहा था. गुरु नें लंड धीरे से नेहा की चूत पर रखा. चूत विर्य से भरी पड़ी थी. लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया. चुदाई का ये दौर भी ख़तम हो गया. गुरु नें बाबाजी की तरफ देखा, और बाबाजी नें सर हिला कर इज़ाज़त देदी और कहा,` अब आखरी चुदाई होने वाली है. सब गुरु के वीर्य का टेस्ट करेंगी, लेकिन साथ ही सेक्स का भी मज़ा लेंगी. चंदा रामदास के लंड पर बैठेगी, और पिंकी मेरे लंड पर. नेहा आज और लंड लेने के लायक नहीं है. इस तराहा तीनों गुरु का लंड चूसेंगी और गुरु का कमाल देखेंगी. सब तैयार हो गये. बड़ी मुश्किल से चंदा ने रामदास का लंड अपनी चूत में लिया. पिंकी बाबाजी के लंड से मस्त थी. नेहा अपनी सूजी हुई चूत में उंगली कर रही थी. एक बार फिर चुदाई का दौर शुरू हो गया. चुदाई के साथ चुसाइ भी चालू थी. लड़किया मस्त थी. आअन्न्न्नह. ……ग्लग. ……हुउऊन्न्ञणणन् न…….हम म्‍म्म्मम…..ग्लग. ……आआअहह ……रामदास. ….स अली…….. .ग्लग…. …बाबाजी. …..अहगलुग .. ..ऊउउउउउउउह एयायाययीयीयियी. …….ग्लग आबीयेएयययेया. और सारे झड़ गये. अब गुरु की बारी थी. एक जोरदार आवाज़ के साथ उसके लंड में से ढेर सारा वीर्य बाहर निकल पड़ा. इतना वीर्य! तीनो देविया एक दूसरे को देखने लगी ओए गरम गरम क्रीम चाटने लगी. लेकिन ये क्या ये तो निकलना बंद ही नहीं हो रहा था . तीनो फिर मस्ता गयी. कमरा फिर सिसकारियों ओए चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था……………!!!!!!!!!!!!! फरक ये था की इस बार इसमें गुरु की आवाज़ भी शामिल थी समाप्त…

तू भी एक बार बाबाजी से चुद जा – सील बन्द चूत और हब्शी लौड़ा

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