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मेरा नाम राजीव है मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता हूं, मेरी उम्र 35 वर्ष की है और मैं मुंबई में रहता हूं, मेरे माता-पिता भी मेरे साथ ही मुंबई में रहते हैं। पहले वह गांव में रहते थे लेकिन वह अब मुंबई में ही मेरे साथ रहने लगे हैं। उन्होंने मुझे मुंबई में ही पढ़ाई करवाई और वह खुद गांव में काम करते थे परंतु उसके बावजूद भी उन्होंन कभी भी पैसे की कमी नहीं होने दी। मुझे मेरे पिताजी पर बहुत गर्व है और मैं हमेशा ही उनकी बहुत रिस्पेक्ट करता हूं क्योंकि जिस प्रकार से उन्होंने गांव में रहकर मुझे पढ़ाया है वह बहुत बड़ी बात है और उसके बाद मैं एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग गया। मेरे बहुत कहने के बाद ही वह मुंबई आये।

पहले वह मुंबई आने को तैयार नही थे,  फिर मेरी पत्नी ने उन्हें काफी जिद करते हुए कहा कि आप मुंबई आ जाइए, उसके बाद ही वह लोग मुम्बई आए क्योंकि मेरी पत्नी ने उन्हें मना लिया था। वह लोग मेरे लड़के के साथ ही खेलते रहते है, मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब वह खुश होते है। मुझे उनके चेहरे की मुस्कुराहट देख कर बहुत ही अच्छा महसूस होता था। मेरे पिताजी का व्यवहार बहुत ही अच्छा है। मैं जिस कंपनी में काम करता हूं वहां से मुझे हर प्रकार की सुविधा मिलती है, मुझे जो घर रहने के लिए मिला है वह भी कंपनी के द्वारा ही मुझे दिया गया है। मेरी पत्नी भी घर में रहकर घर का सारा काम करती है इसलिए मुझे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती। मैं सुबह अपने ऑफिस निकल जाता हूं और शाम को ही मेरा ऑफिस से आना होता है। मेरे माता-पिता भी मेरे लड़के के साथ खेलते रहते हैं और वह उसी में ही अपना समय बिता देते हैं। वह लोग हमेशा ही सुबह के वक्त मॉर्निंग वॉक पर जाते हैं। मैं भी काफी मोटा हो गया था क्योंकि मैं सुबह देरी से उठता था और सीधे अपने ऑफिस चला जाता इसलिए मेरा मोटापा बहुत बढ़ने लगा था। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मैं भी आपके साथ मॉर्निंग वॉक पर चला करूंगा। अब मैं उनके साथ ही सुबह मॉर्निंग वॉक पर जाता और उस वक्त मेरी उनसे काफी बातें होती। मुझे भी उनके साथ जाना बहुत अच्छा लगता था। मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होता था जब मैं उनके साथ घूमने जाता था। मेरा वजन भी धीरे-धीरे कम होने लगा था और मुझे भी अंदर से एक अच्छी फीलिंग आने लगी थी क्योंकि मैं काफी समय बाद बाहर घूमने के लिए जा रहा था।

एक दिन मैं अपने पिताजी के साथ बैठकर बाहर हॉल में बात कर रहा था और मेरी पत्नी रूम में थी, मैं उन्ही के साथ बैठा हुआ था और कुछ देर बाद मैं टीवी देखने लगा लेकिन मेरी पत्नी बाहर नहीं आई, मुझे लगा कि मुझे कमरे में जाना चाहिए। मैं जब कमरे में गया तो वह किसी से फोन पर बात कर रही थी, उसने जैसे ही मुझे देखा तो उसने तुरंत अपने फोन को काट दिया और मुझे कहने लगी कि मेरी बहुत ही पुराने दोस्त का फोन आया था इसलिए मैं उससे बात कर रही थी। उस दिन तो मुझे उस पर शक नहीं हुआ लेकिन यह सिलसिला अक्सर होने लगा, मैंने कई बार उसे समझाया कि यदि तुम्हारा किसी व्यक्ति के साथ संबंध है तो तुम इस चीज को छोड़ दो या अपने मर्यादाओं में रहो लेकिन उसके बावजूद भी वह फोन पर ही लगी रहती थी। मैंने भी ठान लिया कि मैं यह पता करके ही रहूंगा कि यह फोन पर किससे बात करती हैं, वह अक्सर मेरे लड़के को छोड़ने के लिए जाती थी तो उसके बाद वह किसी व्यक्ति से मिलती थी। मैंने एक दिन अपने ऑफिस से छुट्टी ली। और उसका पीछा किया, जब मैंने उस व्यक्ति के साथ अपनी पत्नी को देखा तो मुझे बहुत ही गुस्सा आया परंतु मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा। काफी दिनों तक मैंने उसे समझाया परंतु वह बिल्कुल भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी, मुझे लग रहा था कि अब और मुझे अपनी पत्नी के साथ नहीं रहना चाहिए। मुझे उसे डिवोर्स दे देना चाहिए परंतु मैं ऐसा नहीं कर पाया। मैं जबर्दस्ती ही उसके साथ रिश्ते में था, मैं उसके साथ बिल्कुल भी खुश नहीं था क्योंकि वह उसी व्यक्ति से फोन पर बात किया करती थी और मुझे भी अपनी पत्नी संजना से बिल्कुल भी कोई लेना-देना नहीं था लेकिन मैंने यह बात अपने माता पिता के सामने कभी भी नहीं आने दी और मैं अपने रिश्ते को ऐसे ही जबरदस्ती खींच रहा था।

मैं अपने रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं था और ना ही मैं संजना के साथ खुश था। मैं उससे बहुत ही कम बात किया करता था और वह भी मुझसे बहुत कम बात करती थी। एक दिन मुझे मेरी कॉलेज की दोस्त का फोन आया, उसका नाम सोनिया है। वह मुझे कहने लगी क्या तुम मुंबई में ही हो, मैंने उसे कहा कि हां मैं मुंबई में ही हूं। मैंने उसे पूछा कि तुमने इतने समय बाद मुझे कैसे फोन कर लिया, वह कहने लगी कि मैं भी मुंबई शिफ्ट हो गई हूं। मैंने सोनिया से कहा कि तुम तो विदेश में रहती थी। वह कहने लगी की मैं अब यहीं पर रह रही हूं और यहीं पर मैंने एक कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी है। उस दिन उससे बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि उससे मेरी बात काफी समय बाद हो रही है। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारे पास जब समय हो तो हम लोग मिल लेते हैं। मैंने उसे कहा कि इस हफ्ते हम लोग मुलाकात कर लेते हैं, मैं जब फ्री हो जाऊंगा तो मैं तुम्हें फोन कर दूंगा। मैंने अपनी छुट्टी के दिन सोनिया को फोन कर दिया और जब मैंने उसे फोन किया तो वह मुझसे मिलने के लिए आ गई। हमारे घर के पास ही एक मॉल है, मैंने उसे वहीं पर बुला लिया।

जब वह मुझसे मिली तो वह मुझसे मिलते ही मेरे गले मिल गई और कहने लगी कि तुम तो बिल्कुल भी नहीं बदले, तुम जैसे पहले थे वैसे ही अब भी हो। मैंने भी सोनिया से कहा कि तुम्हारे अंदर भी बिल्कुल बदलाव नहीं हुआ है। सोनिया भी पहले जैसे ही थी। वह अभी भी उतनी ही सुंदर थी जितने कॉलेज के समय में थी। मैं उसके साथ बैठा हुआ था और हम कॉलेज की पुरानी बातें याद कर रहे थे। मैं उसे कहता कि तुम अब भी उतनी ही सुंदर हो जितनी पहले थी। मैंने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा तो वह चुप हो गई, उसमें कुछ भी जवाब नहीं दिया। जब मैंने उसे दोबारा वही सवाल पूछा तो वह मुझे कहने लगी कि मेरे पति का देहांत हो चुका है और इसीलिए मैं मुंबई आकर रहने लगी हूं। जब मैंने यह सुना तो मुझे बहुत दुख हुआ और वह रोने लगी। काफी देर बाद उसने बोला कि उनका जब देहांत हुआ तो मुझे बहुत बुरा लगा और मैं कई समय तक सदमे में ही थी इसीलिए मैंने मुंबई आने का फैसला कर लिया था। लेकिन वह बहुत ही हिम्मत वाली महिला है, यह मुझे पहले से ही पता था। उस दिन हम दोनों ने ज्यादा बात नहीं की और वह अपने घर चली गई। मैंने जब सोनिया को कुछ दिनों बाद फोन किया तो मैने उससे पूछा कि क्या तुम फ्री हो, वह कहने लगी कि इस हफ्ते तो मैं समय नहीं निकाल पाऊंगी लेकिन कुछ समय बाद तुम मुझे मिल लेना। अब मैं भी अपने काम में व्यस्त था और सोनिया भी अपने काम में व्यस्त थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे को समय नहीं दे पाए और ना ही हम दोनों एक दूसरे से मिल पाए। मैं अपनी पत्नी से बिल्कुल भी खुश नहीं था वह मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं करती थी। वह सिर्फ फोन पर ही लगी रहती हैं। एक दिन सोनिया का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि आज मेरे पास समय है यदि तुम फ्री हो तो तुम मुझे मिल लेना,  मैंने उसे कहा कि मेरा एक काम है मैं वह काम पूरा कर के तुम्हें मिलता हूं। मुझे किसी से उस दिन मुला