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बस में मिली सविता भाभी ने मेरा लंड चूसने से मना कर दिया मेरा लंड भाभी की चूत रंडी सविता भाभी

इंडियन सविता भाभी की सेक्स स्टोरी हिंदी में बस में मिली सविता भाभी ने मेरा लंड चूसने से मना कर दिया रंडी सविता भाभी : हैलो दोस्तों indiansexbazar.com की इंडियन पोर्न वेबसाइट पर में कमल आप सभी का बहुत स्वागत करता हु,  मैं आप सब को मेरी और सविता भाभी की सेक्स कहानी बताना चाहता हूँ। मेरी सविता भाभी मेरी रंडी बन गयी है और में रोज रोज उन्हें रंडी की तरह चोदता हु.

मेरी सविता भाभी की चूत चुदाई की यह कहानी  उस समय की है, जब मैं अजमेर में पढ़ता था। मैं रोज कॉलेज बस से ही आता-जाता था। बस में रोज काफी भीड़ होती थी क्योंकि उस टाइम ऑफिस स्टाफ भी जाता था। मैं रोज 23 सेक्टर के अड्डा से बस पकड़ता था। यहाँ भी देखे >> Big tit Boobs मोटे बोबो की नंगी तस्वीरे  नंगे मोटी भाभी के बोबे

मुझे जाते हुए अभी कुछ 20 दिन ही हुए थे कि एक दिन बस में काफ़ी भीड़ थी, कहीं भी पैर रखने की जगह नहीं थी। वैसे तो रोज ही भीड़ होती थी परन्तु उस दिन कुछ ज्यादा ही भीड़ थी। मैं लेट हो रहा था इसलिए उसी बस में चढ़ गया, मेरे पास कोई अधिक सामान नहीं था, सिर्फ एक कॉपी थी इसलिए मेरी बस में घुसने की हिम्मत हो गई थी।

बस में पैर रखने के लिए अन्दर जगह बनानी थी.. वो मैंने बड़ी मुश्किल से बनाई। मैंने आस-पास देखा तो मेरे पास लेफ्ट में अंकल थे दूसरी साइड एक बच्चा था, मैंने सोचा साली किस्मत ही बेकार है क्योंकि जहाँ भीड़ होती है वहाँ किसी माल के मम्मों में हाथ लगाया जा सकता है, परन्तु आज तो कुछ नहीं हो सकता था।

तभी एक सेक्स सी आवाज आई- संदीप, हाथ पकड़ो मेरा! मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो एक 30-32  साल की एक भाभी सीट पर बैठी थी। उन्होंने काले रंग का पजामा अपनी गांड पर पहन रखा था और हल्का गुलाबी से रंग का कुरता अपने बूब्स पर पहना था जिसमे से उनके मोटे मोटे बूब्स दबे देबे दिख रहे थे। मैंने फिर रंडी सविता भाभी के बच्चे की तरफ देखा, वो बाहर की तरफ देख रहा था।

 

मैंने उनकी तरफ चुदाई वाला गन्दा इशारा कर दिया। मैं अपनी उंगली मेरी मुठी में डाल कर अन्दर बहार करने लगा …

मैंने कुछ टाइम तो भाभी पर लाइन मारी  जिसमें भाभी ने भी मुझे दो बार देखा। पर मुझे जैसे ही देखती थीं मेरे देखने पर तुरंत बाहर को देखने लगती थीं।

फिर जब भाभी ने तीसरी बार देखा तो मैंने उनकी तरफ चुदाई वाला गन्दा इशारा कर दिया। मैं अपनी उंगली मेरी मुठी में डाल कर अन्दर बहार करने लगा. पहले तो भाभी को समझ नहीं आया कि मैं क्या कह रहा हूँ। भाभी ने फिर मेरी तरफ देखा तो मैंने फिर वही इशारा किया.. इतने में एक स्टॉप आया और सविता भाभी वंहा पर उतर गयी.

अगले दिन मैं बस में चढ़ा तो आज ज्यादा भीड़ नहीं थी, पर बैठने को जगह नहीं थी। मैं आगे खड़ा हो गया, तभी पीछे से कुछ सवारियाँ चढ़ीं। मैंने देखा तो उनमें कल वाली भाभी भी थीं।

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मैं बार-बार अपना लंड भाभी की कोहनी पर टच करता रहा मेरा लंड भी सविता भाभी के स्पर्श के कारण तनता जा रहा था …

भाभी को किसी लड़के ने जगह दे दी उनका बच्चा उस लड़के की गोद में बैठ गया था। तभी भाभी ने मेरी तरफ देखा कुछ समय के लिए हमारी आँखें मिलीं.. फिर वो बाहर देखने लगीं। मैं धीरे धीरे जगह बनाता हुआ भाभी के पास जा कर उनसे सट कर खड़ा हो गया। मैं उनसे इतना करीब था कि जब बस झटका देकर चले, तो मेरा काला मोटा 7 इंच का लंड भाभी की कोहनी से टच हो।

फिर हुआ भी ऐसा ही.. अब मैं बार-बार अपना लंड भाभी की कोहनी पर टच करता रहा मेरा लंड भी सविता भाभी के स्पर्श के कारण तनता जा रहा था। कुछ टाइम बाद भाभी ने कोहनी हटा ली. थोड़े टाइम में मैंने भाभी की तरफ देखा तो वो भी मुझे देख रही थी। फिर उसने अपने बेग से एक पेन और पेपर निकाला और मुझे अपना मोबाइल नम्बर लिख कर दे दिया में रंडी सविता भाभी का नम्बर पाकर बहुत कुश था. इतने में मेरा स्टॉप आ गया और मैंने उतरते ही नंबर डायल किया।

बस में मिली सविता भाभी ने मेरा लंड चूसने से मना कर दिया रंडी सविता भाभी

बस में मिली सविता भाभी ने मेरा लंड चूसने से मना कर दिया रंडी सविता भाभी

 

सविता भाभी के मोबाइल पर रिंग गई और उस रंडी ने मोबाइल पिक करा।

मैं- हैलो..

सविता भाभी- हैलो कौन?

मैं- जी मैं बस में था न जो बार बार आप के हाथ पर अपना लंड टच कररहा था..।

सविता भाभी- हाँ मैं तुम्हें ऑफिस जा कर कॉल करती हूँ।

फिर करीब आधे घंटे बाद उस रंडी भाभी का कॉल आया।

“हैलो अब बोलो..”

मैं- आपका नाम क्या है?

सामने से “सविता … और तुम्हारा?”

मैं- जी रवि!

सविता- तो क्या करते हो रवि?

मैं- जी मैं बी.टेक कर रहा हूँ.. आप?

सविता- मैं एक कंपनी में जॉब करती हूँ.. चलो ओके मैं तुम्हें शाम को कॉल करती हूँ.. बाय।

फिर शाम तक मैं रंडी सविता भाभी के कॉल का वेट करता रहा, पर कोई कॉल ना आया। डिनर के बाद जब मैं 17 सेक्टर की मार्किट घूमने गया, तो कॉल आया- हाँ रवि कैसे हो?

मैं- जी ठीक हूँ.. आप बताओ।

सविता- मैं भी ठीक हूँ.. कहाँ हो तुम?

मैं- जी 17 सेक्टर की मार्किट में हूँ।

सविता- ओह मैं भी वहीं आ रही हूँ.. तुम मुझे पार्किंग के पास मिलो।

मैं पार्किंग के पास गया और उनका वेट करने लगा। कोई 15 मिनट के बाद एक आई-20 आ कर रुकी और शीशा नीचे करके उन्होंने आवाज दी- रवि आओ अन्दर।

मैं अन्दर बैठ कर बोला- सविता जी ये कार?

सविता- मेरी है.. दो दिन से रिपेयर पर थी.. आज शाम को ऑफिस से आते वक्त ले आई, इसलिए तो बस में जाती थी।

मैं- ओके!

मैं सविता के बेटे के साथ ‘हैलो…’ करने लगा।

सविता- हैलो करो संदीप।

संदीप ने हैलो की, सविता ने कहा- मुझे लगा था कि तुमने नंबर गलत न नोट कर लिया हो।

मैं- नहीं जी.. किस्मत ने साथ दे दिया, नहीं तो कहाँ मैं.. कहाँ आप!

सविता- ये क्या आप आप लगा रखी है.. नाम है मेरा.. नाम ही लो ना!

मैं- ओके सविता.. आपके पति!

सविता- वो कनाडा गए है कंपनी के काम से.. अगले साल मैं भी वहीं चली जाऊंगी।

मैं- ओके तो अब हम कहाँ जा रहे हैं?

सविता- मेरे घर.. आज तुम मेरे साथ रहना।

फिर हम एक बिल्डिंग में गए, कार पार्क की और लिफ्ट से सविता के घर गए। अन्दर आते ही सविता ने गेट बंद किया और बोली- संदीप जाओ बेटे रूम में.. गुड नाईट..

“तुम क्या पियोगे?”

“दूध..”

रंडी सविता भाभी मुस्कुराते हुए बोली के अभी रात बाकी है.. तब पी लेना दूध।”

मैं- नहीं मैं आप के  बूब्स से दूध पिने की नहीं बो