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मैंने अपनी गांड एक बच्चे की पिता से मरवाई

Maine apni gaad ek bachche ke pita se marwayi:

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मेरा नाम सिमरन है एक समय की बात है। जब मैं घर से निकली ही थी तो मैंने सामने देखा कि कुछ लोगों की भीड़ जमा हुई है। मैं फटाफट वहां पहुंची तो मैंने देखा कि एक बच्चा अपने पापा को ढूंढ रहा है। वह और उसके पापा सामान खरीदने मार्केट आए थे और वह अपने पापा से अलग हो गया। मैंने उस बच्चे से उसका नाम पूछा उसका नाम आरुष था। मैंने उससे कहा कि तुम कहां से आए हो और तुम्हें यहां पर कौन छोड़ कर गया है। उसने मुझे बताया कि वह अपने पापा के साथ मार्किट आया था। इसी बीच उसके पापा को एक फोन आया और उसके पापा फोन पर व्यस्त हो गए। बात करते-करते वह दोनों अलग हो गए फिर मैं उसको अपने घर लेकर गई। उसको आराम से बैठा कर उसके घर का पता पूछा थोड़ी देर बाद में उसको उसके घर लेकर गई। उसके पापा भी उसके लिए परेशान हो रहे थे फिर मैंने उसके पापा से कहा कि आप अपने बच्चे को संभाल नहीं सकते। उन्होंने कहा कि गलती से हमारा हाथ छोड़ गया था। हम दोनों अलग अलग हो गए फिर उन्होंने मुझे शुक्रिया कहा और मुझे बैठने को कहा। मैं थोड़ी देर उनके साथ वहां बैठ गई और बातें करने लगी। मैंने उनके घर के बारे में पूछा उनके घर पर कौन-कौन रहता है।

उन्होंने कहा कि इस घर में वह अपने बेटे के साथ अकेले रहते हैं फिर मैंने उनसे उनका नाम पूछा उनका नाम शोभित था। शोभित ने बताया कि कुछ समय पहले उसकी पत्नी ने किसी और के साथ शादी कर ली है। मैं यह सब सुनकर हैरान हो गई। मैंने उससे कहा कि तो तुमने उसे रोका क्यों नहीं तो उसने बताया कि अगर मुझे पहले पता होता तो मैं उसे जरूर रोकता। वह कहने लगे कि जब मै मेरा बेटा और मेरी पत्नी यहां रहते थे। तब उनसे मिलने उनका दोस्त आया करता था। वह अक्सर उनके घर आया जाया करता था लेकिन मुझे को इस बारे में पहले तक पता नहीं था। कि वह हमारे घर से इतना लगाव क्यों रख रहा है। जब मै ऑफिस जाता तो मेरा का दोस्त घर पर आ जाता था। एक दिन सुबह मै अचानक घर पर आया मेरी फाइल घर पर रह गई थी। मै वही लेने आया था फिर मैने देखा कि मेरा दोस्त वहां आया हुआ है। मै यह देखकर खुश तो हुआ लेकिन मै यह भी सोचने लगा कि मेरे दोस्त ने मुझे बताया नहीं कि वह घर पर आ रहा है।

मैने भी अपने दोस्त से यह सब पूछा नहीं वह हमेशा मेरी पत्नी से मिलने मेरे घर आया करता था। लेकिन यह बात मुझे पता नहीं थी। धीरे धीरे मेरी पत्नी और मेरे दोस्त के बीच में नजदीकियां बढ़ने लगी। मेरा दोस्त का मेरे घर पर रोज का आना हो गया था। कभी-कभी तो वह मेरे घर पर ठहरता था और सब साथ में मिलकर खाना खाते थे। एक दोस्त होने के नाते मैने अपने दोस्त से कुछ नहीं पूछा कि वह यहां क्यों रुक रहा है। मैने सोचा की उसको हमारे साथ रहना अच्छा लगता होगा इसीलिए वह अक्सर यहां आया करता था। एक दिन मेरी पत्नी को मेरे दोस्त का फोन आया। यह मैने देख लिया था लेकिन मैने फिर भी इस बात को नजरअंदाज कर दिया था। मुझको अपनी पत्नी पर और अपने दोस्त पर थोड़ा बहुत शक होने लग गया था लेकिन मैने फिर भी कुछ नहीं कहा मैने सोचा कि मै गलत सोच रहा हू उनके बीच ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन एक दिन मेरी पत्नी और मेरा दोस्त दोनों घर से भाग गए। और मेरी पत्नी मेरे बच्चे को यहीं छोड़ गई। जब मैने शोभित के बच्चे से पूछा कि उसकी मां कहां है तो उसने बताया कि वह तो पापा के दोस्त के साथ चली गई है।

शोभित को इस बात पर बहुत गुस्सा आया। वह कहने लगा कि उसने पहले तक उनको क्यों नहीं रोका अगर वह पहले उन्हें मिलने से रोक लेता तो आज यह नोबत नहीं आती। शोभित ने मुझे अपने बारे में यह सब बताया मुझे यह सुनकर बहुत बुरा लगा। मैंने  शोभित को कहा कि वह अपने बच्चे की देखभाल के लिए फिर से शादी कर ले लेकिन शोभित ने इस बात से मना किया। क्योंकि अब उसे किसी पर विश्वास ही नहीं रहा। शोभित कहता  कि मैं अपने बच्चे की देखभाल खुद ही करूंगा लेकिन दूसरी शादी नहीं करूंगा। पहली शादी करके ही इतना पछता रहा हूं। अब मैं यह गलती दोबारा नहीं करना चाहता। मैंने शोभित को समझाया लेकिन वह नहीं माना फिर मैंने भी उस पर ज्यादा दबाव नहीं डाला। मैं और शोभित कुछ ही दिनों में बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे। हम दोनों एक दूसरे के घर आते रहते थे। मैंने शोभित को अपने घरवालों से भी मिलाया था मेरे घरवाले शोभित और उसके बच्चे को देखकर बहुत खुश हुए। शोभित का बच्चा आरुष अक्सर हमारे घर आता रहता है। उसकी जब स्कूल से छुट्टी होती है तो वह पहले हमारे घर मुझसे मिलने आता है। फिर मैं उसे उसके घर छोड़ने जाया करती।

हमेशा की तरह आरुष को उसके घर छोड़ने गई। जैसे ही मैं उसके घर पर गई तो घर पर कोई भी नहीं था। मैंने आरुष को कहा कि तुम यहां खेल लो मैं देखती हूं कि तुम्हारे पापा कहां पर हैं। वह अपने कमरे में ही खेलने लगा।  मैं शोभित को देखते हुए दूसरे कमरे में पहुंच गई जहां पर शोभित अपने लंड के बाल साफ कर रहा था। मैने देखा तो उसका लंड बहुत बड़ा मोटा था। मुझे यह देख कर बहुत अच्छा लगा कि उसका लंड इतना मोटा और बड़ा है। मैंने उसे कहा तुम्हारा तो बहुत बड़ा है वह कहने लगा हां बहुत दिनों से इसे खुराक भी नहीं मिली है। मैंने उसके लंड को देखा तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मैंने झट से उसे अपने हाथ से पकड़ लिया। मै उसके लंड को  हिलाने लगी यह देख कर शोभित भी थोड़ा अचंभित रह गया लेकिन उसे यह सब अच्छा लग रहा था। उसका लंड और भी मोटा और कड़क हो चुका था। ऐसा करते हुए मैंने उसे अपने मुंह में अंदर तक ले लिया और उसके लंड पर कुछ बाल भी लगे हुए थे जो कि मेरे मुंह के अंदर जा रहे थे। मैंने उसे पूरे गले तक उतारते हुए अंदर बाहर करना शुरू किया। मैं जैसे ही उसके लंड को अंदर लेती तो उसके अंडकोष मुझसे टकरा जाते और मुझे बहुत अच्छा लगता।

जब उसके अंडकोष मेरे मुंह से टकरा जाते और मैंने उसके लंड बाहर निकालते हुए उसके अंडों को अपने मुंह में लेना शुरू किया। उसके आंड बहुत बड़े-बड़े थे और मोटे थे वह नीच लटक रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मै उसके आंडो को अपनी जीभ से चाट रही थी। अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था और उसने भी मेरी कपड़े को उतारते हुए मुझे एकदम नंगा कर दिया। वह मेरी गांड को चाटने लगा जैसे ही वह मेरी गांड चाट रहा था तो मुझे बहुत अच्छा प्रतीत हो रहा था। अब उसने मेरी योनि को भी अपने मुंह से चाटना शुरू किया। जैसे ही वह अपनी जीभ मेरी योनि के अंदर डालता तो मेरा बदन मचल जाता। उसने मेरी चूत मे अपना लंड घुसा दिया। उसने इतनी तेजी से घुसाया कि मेरी चीख निकल गई और वह बड़ी तेजी से झटके मारने लगा। उसने अपनी स्पीड को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया जिससे मेरी चूत  और उसका लंड का घर्षण पैदा होता। जिसे गर्मी निकलती और उस गर्मी को हम दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर पाए और उसने मेरी योनि में अपना माल डाल दिया।

उसने वहीं पास में तेल की शीशी रखी थी उसने अपने लंड पर अच्छे से लगाते हुए अपने लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया। शोभित ने मुझे घोड़ी बनाते हुए मेरी गांड के अंदर लंड डालने लगा। उसने इतनी तेजी से झटका मारा कि वह मेरी पूरी गांड के अंदर चला गया और मेरी चीखे निकल पडी। वह बहुत तेज झटके मारता जाता और मेरी गांड का छेद मे दर्द होने लगा था लेकिन मुझे मजा भी आ रहा था। हम दोनों ज्यादा देर तक नहीं कर पाए क्योंकि मेरी गांड बहुत टाइट है अब उसका वीर्य फिर निकलने वाला था तो उसने उसे भी मेरी गांड के छेद के अंदर डाल दिया। उसने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। उसमें मेरे गांड की महक आ रही थी और मैंने उसे अपने मुंह के अंदर तक लेते हुए ऐसे ही चूसती रही और उसका वीर्य भी मेरे मुंह में गिरने लगा। उसका माल मेरे मुह मे पूरे अंदर तक जा चुका था। मुझे बहुत अच्छा लगा। हम दोनों आराम से बैठकर बातें करने लगे अब जब भी मैं आरुष को छोड़ने उसके घर जाती तो हमेशा ही वह मेरी गांड मारता। कहीं ना कहीं उसे उसकी बीवी के भाग जाने से उसके अंदर गुस्सा भी पैदा हो गया था। इसी वजह से वह मेरी गांड मारता था लेकिन मुझे अच्छा लगता था।


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