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जन्मदिन पर मिला अनोखा गिफ्ट

हैल्लो दोस्तों, में मनीषा एक बार फिर से आप सभी के सामने गंदीकहानियाँ डॉट कॉम पर अपनी दूसरी कहानी लेकर आई हूँ और में उम्मीद करती हूँ कि आप सभी ने मेरी पिछली कहानी जरुर पढ़ी होगी, जिसमें मैंने बहुत जमकर चुदाई के मज़े लिए और मुझे अब तक सेक्स की बहुत आदत हो गई है और अब मेरा मुंबई से लौटने के बाद मन नहीं भर रहा। खैर में आपका ज़्यादा टाईम ना लेते हुए अपनी स्टोरी पर आती हूँ। दोस्तों जैसा कि मैंने आप सभी लोगों को अपनी पिछली कहानी में धीरज के बारे में बताया था और मेरी उससे बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और में उसके साथ घूमने फिरने भी लगी थी। मेरा जन्मदिन 14 जून को होता है तो उसने मुझसे उस दिन अपने साथ मिलकर जन्मदिन मनाने को कहा तो में तैयार हो गई, क्योंकि उस समय मेरे घर वाले दुबई गये थे, इसलिए मुझे कोई समस्या भी नहीं थी। thirteen को उसने मुझे बताया कि उसका कोई बहुत अच्छा दोस्त है, वो 14 को दिल्ली से आ रहा है तो इसलिए शायद वो कल शाम को मेरे साथ नहीं रह पाएगा, क्योंकि उसे अपने उस दोस्त से मिलने जाना होगा।

फिर मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं है, में भी तुम्हारे साथ उससे मिलने चल चलूंगी और फिर हम दोनों वहाँ से लौटकर रात का खाना खा लेंगे और 14 को में अपने घर से तैयार होकर eleven:30 पर निकली और हम सहारा गूँज में मिले। मैंने उससे उसकी गाड़ी को वहीं पर खड़ा करके मेरे साथ कार से चलने के लिए कहा, लेकिन उसने मुझसे कहा कि तुम कार को खड़ा कर दो, हम दोनों बाईक से चलते है। फिर मैंने अपनी कार को वहीं पर खड़ा कर दिया और अब में उसके साथ लम्बी ड्राइव पर निकल गई और हम लोग पिकनिक पर पहुंचे, वहाँ पर हम बहुत दूर तक घूमते रहे। उसके बाद हम बोटिंग के लिए गये और ठंड की वजह से झील में 2-three बोट ही थी और जब हमारी बोट के आस पास कोई बोट नहीं थी, तब उसने पेड्ल मारने बंद कर दिए और वो मुझे किस करने लगा, तो मैंने उससे कहा कि पागल हो क्या कोई हमें देख लेगा? तो वो कहने लगा कि हमारे जैसे पागल ही इस ठंड में बोटिंग कर रहे होंगे, इसलिए हमे यहाँ पर कोई नहीं देखेगा और फिर वो मुझे किस करते हुए मेरे बूब्स को भी दबाने लगा और थोड़ी देर तक में उससे कुछ नहीं बोली, जिसकी वजह से उसकी हिम्मत ज्यादा बढ़ती चली गई, लेकिन जब उसका हाथ नीचे जाने लगा तो मैंने उससे कहा कि अब यहाँ से चलो।

अब वहाँ से निकलकर हमने कुछ फास्ट फूड लिया और उसके बाद हमने फिल्म देखने का विचार बनाया, इसलिए हम पास के सिनेमा में फिल्म देखने पहुंचे। फिर मैंने देखा कि वहां पर कुछ ख़ास भीड़ नहीं है, हम दोनों आखरी की सीट पर बैठ गये। फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा कि क्यों ना में आज़ रात को उसके साथ ही रुक जाऊं? तो मैंने उससे पूछा, लेकिन हम रूकेंगे कहाँ? तो उसने मुझसे कहा कि हम किसी होटल में रूकते है। मैंने उससे कहा कि नहीं कोई हमे वहां पर देख लेगा तो बहुत बड़ी मुश्किल हो जाएगी, लेकिन फिर भी मैंने बाहर निकलकर अपने घर पर फोन करके बता दिया कि में आज रात को अपनी सहेली शालिनी के रूम पर ही रुक जाऊंगी, लेकिन मैंने धीरज को इस बारे में कुछ नहीं बताया। फिर हम दोनों फिल्म देखने लगे और थोड़ी देर बाद मुझे उसका हाथ मेरे पैर पर महसूस हुआ तो वो मेरी जाँघ को सहला रहा था और जब मैंने उसे मना नहीं किया तो उसका एक हाथ मेरे बूब्स पर आ गया और वो मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरी निप्पल को दबाने लगा। मैंने उसे ऐसा करने के लिए मना किया, उससे कहा कि प्लीज ऐसा मत करो, लेकिन जब उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया तो मैंने धीरे से उसकी पेंट की चैन को खोलकर उसका लंड अपने हाथ से सहलाने लगी और अब हम दोनों के बदन में वो आग लग चुकी थी और हमें रूम का समझ नहीं आ रहा था कि कहाँ मिलेगा, जब फिल्म ख़तम हुई तो मुझे अपने अंदर कुछ गीला गीला सा लग रहा था। हम बाहर निकलने वाले ही थे कि उसके दोस्त का फोन आ गया कि वो होटल में उसका इंतज़ार कर रहा है। फिर मैंने अपनी कार बाहर निकाली और उससे कहा कि में तुम्हें होटल तक छोड़ देती हूँ। तब उसने मुझसे कहा कि हाँ तुम भी चलो हम थोड़ी देर रुककर वापस आ जाएँगे। फिर मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है और हम दोनों होटल पहुंचे। उसके बाद उसने मुझे वहां पर अपने दोस्त से मिलवाया, उसका नाम समीर था। फिर उसके दोस्त ने उससे पूछा कि में कौन हूँ? तब उसने अपने दोस्त से कहा कि में उसकी दोस्त हूँ, तब समीर ने पूछा क्या यह वही है? तो धीरज का जवाब हाँ में था, लेकिन पहले मैंने इस बात पर इतना ध्यान नहीं दिया और अभी 7 भी नहीं बज़े थे कि जब धीरज ने उसे बताया कि आज़ मेरा जन्मदिन है। फिर उसने मुझसे पार्टी के लिए कहा तो मैंने कहा जैसी पार्टी चाहिए ले लो और फिर हम सब होटल से बाहर निकल आए तो वहाँ से वो लोग एक बेकरी पर गये और एक केक लिया। उसके बाद एक कपड़ो की दुकान पर से पसंद करके मेरे लिए एक ड्रेस खरीदी, तब धीरज ने मुझसे मेरे फिगर का आकार पूछा तो मैंने धीरे से उसको बता दिया।

अब वो दुकान से बाहर निकल आया और वो मुझसे कहकर गया कि तुम कपड़े पेक करवाओ, में दस मिनट में आता हूँ और हम दोनों वो कपड़े पेक करवाकर कार में बैठ गये। तभी थोड़ी देर में धीरज लौट आया और हम जब होटल लौटकर आए, तब समीर ने खाने का ऑडर किया और तब धीरज ने मुझसे पूछा कि क्या में ड्रिंक करना पसंद करूँगी? तो मैंने कहा कि नहीं मुझे घर जाना है तो उसने मुझसे कहा कि वैसे घर पर तुम्हारे पापा मम्मी नहीं है। फिर तुम थोड़ी तो पी सकती हो। अब मैंने उसकी बात सुनकर उससे कहा कि हाँ ठीक है, में थोड़ी पी लूँगी। समीर ने बोतल निकाली और स्नॅक्स का ऑडर कर दिया। तब धीरज ने कहा कि पीने से पहले केक तो काट लो। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, तब समीर ने मुझे मेरा ड्रेस गिफ्ट किया और उसने मुझसे कहा कि तुम इसे पहन लो। उसके बाद में केक काटना तभी एक छोटा सा पेकेट धीरज ने भी मुझे दे दिया और कहा कि यह मेरा गिफ्ट है, मैंने उससे पूछा इसमे क्या है? तो वो मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगा कि बाथरूम में जाकर देख लेना और में बाथरूम में कपड़े बदलने चली गई। जब मैंने धीरज का गिफ्ट खोलकर देखा तो उसमे ब्रा और पेंटी थी, में उसको देखकर शरमाकर सोचने लगी कि धीरज ने शायद इसलिए मेरा फिगर पूछा था।

अब मैंने एक हल्का सा बाथ लिया और में कपड़े बदलने लगी। जब मैंने ब्रा पहनी तो उस पर लिखा था, मुझे ज़ोर से दबाओ और जब पेंटी पहनी तो उस पर लिखा था चोदो मुझे ज़ोर से। उसके बाद मैंने समीर का दिया हुआ स्कर्ट पहना वो लंबी स्कर्ट थी, जिसमें साईड कट था, जब मैंने टॉप पहना तो वो बहुत छोटा था, उसमे से मेरी नाभि साफ साफ दिखाई दे रही थी। फिर मैंने जब धीरज से पूछा कि तुम्हारे पास कोई परफ्यूम है क्या? तो उसने कहा नहीं, में तैयार होकर बाहर निकल आई, जब में बाहर निकली तो दोनों मुझे अपनी फटी फटी आँखों से देख रहे थे। अब उन्होंने केक को टेबल पर सजा दिया और मुझसे काटने के लिए कहा। मैंने जैसे ही केक को काटा और धीरज को खिलाया तो उसने केक सहित मेरा हाथ वहीं पर रोक लिया और कहा कि आज ऐसे ही किस करते है, आधा केक उसके मुहं के बाहर था। मैंने आगे बढ़कर उसे अपने मुहं में ले लिया ही था तो उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया, जैसे तैसे मैंने खुद को उससे छुड़वाया। फिर मैंने केक समीर को खिलाया, समीर ने मुझे हग किया और मेरे गाल पर एक किस ले लिया। फिर उन्होंने ड्रिंक बनाई, मुझे उस समय मुंबई की याद आ गई।

फिर मैंने उससे कहा कि जो कुछ खाना पीना है ज़ल्दी कर लो, मुझे उसके बाद अपने घर भी जाना है। तब धीरज बोला कि तुम आज यहीं पर रुक जाओ। मैंने उससे पूछा क्या मतलब? तो उसने कहा कि कुछ नहीं। फिर हमने ड्रिंक की, में कहती तो यही थी कि यह मुझे यहीं पर रोक लें three-three पेग होने के बाद समीर ने पूछा, धीरज ने क्या गिफ्ट दिया है? यह तो बताओ। फिर मैंने उससे कहा कि में तुम्हें नहीं बता सकती। तब धीरज ने मुझसे कहा कि दिखा भी दो। फिर मैंने उससे कहा कि नहीं में खाना खाकर घर पर जाऊंगी, तो वो कहने