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पड़ोस की लड़की को उसी के घर में चोदा

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मेरा नाम रोहन है मैं जयपुर का रहने वाला हूं। मैं एक अच्छी कंपनी में काम करता हूं। कुछ समय पहले हमारे पड़ोस में लड़की रहने के लिए आई थी। वह किराए पर घर ढूंढ रही थी तो हमारे पड़ोसियों ने उसे घर देखने के लिए बुलाया था। कुछ दिन बाद में वह लड़की घर देखने के लिए आई लेकिन उस दिन हमारे पड़ोसी घर पर नहीं थे तो उसने देखा कि वह लोग घर पर नहीं है। फिर वह मेरे घर आई उसने दरवाजा खटखटाया और मैंने दरवाजा खोला उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम श्रुति था। श्रुति ने बताया कि उसको यहां घर देखने बुलाया गया था लेकिन इस समय उस घर में कोई नहीं है। वह मुझसे पूछने लगी कि वह लोग कहां गए हैं।

मैंने उससे कहा कि मुझे इस बारे में तो पता नहीं है कि वह कहां गए हुए हैं। उसने मझसे मेरा फोन मांगा और कहा कि मैं उन्हें फोन करके पूछती हूं कि वह घर पर है या नहीं तो उसने मुझसे कहा मेरे फोन की बैटरी खत्म हो गई है क्या आप अपना फ़ोन मुझे दे सकते हैं। मैंने उसे अपना फोन दे दिया उसने उन लोगों को फोन किया लेकिन उनमें से किसी ने भी फोन नहीं उठाया। उसने कई बार फोन किया लेकिन किसी ने उठाया नहीं क्योंकि वह लोग घर पर नहीं थे कहीं बाहर गए हुए थे। उसके बाद मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा और कहा कि थोड़ी देर इंतजार कर लो शायद तब तक वह आ जाए। वह अंदर आई और बैठ गई तब मैंने उससे पूछा कि तुम कहां की रहने वाली हो तुम क्या करती हो।

उसने बताया कि मैं इस शहर में नई आई हूं और इसी शहर में मुझे एक जॉब मिली है। इसी जॉब के दौरान मैं अपने लिए एक किराए पर रहने के लिए घर ढूंढ रही हूं। उसने मुझे सारी बातें बताई और कुछ देर बाद उसने कहा कि तुम मेरा नंबर ले लो और जब वह आए तो मुझे फोन कर देना। उसने मुझे अपना नंबर दिया और फिर थोड़ी देर बाद वह वहां से चली गई। वह काफी देर तक मेरे साथ बैठी हुई थी और उनका इंतजार कर रही थी लेकिन वह लोग काफी देर बाद आए। जब वह लोग आए तो मैंने उनसे कहा कि एक लड़की श्रुति आई थी। वह घर देखना चाहती थी लेकिन आप लोग घर पर नहीं थे तो उन्होंने बताया कि वह कहीं बाहर गए हुए थे और आने में उन्हें थोड़ी देरी हो गई। मैंने उनसे कहा कि आप श्रुति से बात कर लीजिए। मैंने श्रुति को फोन किया और उनकी बात करवाई तो श्रुति ने कहा कि मैं कल घर देखने आ जाऊंगी।

कुछ दिनों तक श्रुति अपने किसी रिश्तेदार के घर पर रुकी हुई थी। दूसरे दिन श्रुति घर देखने के लिए आई उसने घर देखा उसे घर बहुत पसंद आया। वह वहां रहने की तैयारी करने लग गई दो दिन बाद श्रुति उस घर में रहने के लिए आ गई थी।

मैंने श्रुति से कहा कि अगर कोई चीज की जरूरत हो तो मुझे बताना मैं तुम्हारी मदद कर दूंगा। श्रुति ने कहा ठीक है जब श्रुति हमारे पड़ोस में शिफ्ट हो गई। तब श्रुति ने मुझे फोन किया और कहा कि उसे बाजार से कुछ सामान खरीदना है तो मैंने कहा ठीक है। मैं तुम्हें बाजार ले चलूंगा उस दिन हम दोनों बाजार गए और श्रुति ने काफी सारी चीजें खरीदी। उसके बाद जब हम घर आए तो मैं भी उसके घर उसके साथ सामान सेट करने पर लग गया। हम दोनों इसी बीच दोस्त बन गए थे। मैंने उसकी काफी मदद की थी क्योंकि वह इस शहर में अभी नई नई आई हुई थी। मैंने उसे पहले भी कहा था कि अगर कोई मुसीबत हो या फिर कोई परेशानी की बात हो तो तुम बेझिझक मुझसे कह सकती हो। मैं हमेशा तुम्हारे मदद के लिए तैयार रहूंगा। यह कहकर मैं अपने घर आ गया। दूसरे दिन से श्रुति अपने नई जॉब पर जाने लगी थी कभी-कभी मैं भी अपने ऑफिस जाते समय उसे उसके ऑफिस तक छोड़ देता था। जब उसे ऑफिस जाने के लिए देरी होती थी तो वह मुझसे कहती थी तो मैं उसे जल्दी से ऑफिस छोड़ देता था।

हम दोनों की नजदीकयां बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और मेरा उसके घर में भी बराबर आना-जाना लगा हुआ था। जब भी वह मेरी बाइक से जाती तो उसके स्तनों मुझसे टकरा जाते और मेरा मन कई बार खराब हो जाता। लेकिन मेरी उससे बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी कि मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है। इस वजह से मैं उसे कुछ बोल भी नहीं पा रहा था और ऐसे में एक दिन वह मौका आ ही गया। जब मैंने उसे उसके घर में चोद दिया। मैं उसके घर में गया तो मैंने उसे कुछ सामान के लिए कहा तो उसने मुझे बोला कि तुम मेरे बैग से वह सामान निकाल लो। जैसे ही मैंने उसके बैग में हाथ डाला तो मुझे वहां पर एक डिलडो मिला मैंने उसे बाहर निकालते हुए उससे पूछना शुरु किया किया। यह क्या है तो वह कहने लगी कि मुझे नहीं पता यह क्या है।

मैंने उसे कहा कि तुम जानबूझकर अनजान मत बनो इसमें कोई शर्माने वाली बात नहीं है क्या तुम्हें वाकई में इसकी जरूरत पड़ती है। उसने कहा कि हां मुझे   डिलडो की जरूरत पड़ती है। मैंने उसे कहा मैंने तुम्हें पहले भी कहा था जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़े तो मुझे बोल देना। वह कहने लगी कि हां मुझे अभी सेक्स की जरूरत है। उसने अपने सारे कपड़े मेरे सामने ही उतार दिए। मैं उसके फिगर को देख रहा था। मैं उसके फिगर को देखकर एकदम से दंग रह गया। उसका शरीर इतना ज्यादा गोरा था और उसके स्तन बिल्कुल भी लटके हुए नहीं थे। उसकी चूत मे एक भी बाल नहीं था और उसकी गांड भी ऊठ रखी थी। मैं जल्दी से उसकी तरफ गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। जैसे ही उसे मैंने अपनी बाहों में लिया तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैंने तुरंत उसे बाहर निकाला और श्रुति को कहा कि तुम मरे लंड को अपने मुंह में लो और इसे चूसना शुरु करो। उसने बहुत देर तक मेरे लंड को ऐसे ही चूसना जारी रखा। ऐसा करते हुए एक समय बाद मेरा वीर्य गिर गया और उसने अपने मुंह में ही ले लिया उसका मुंह पूरा भर चुका था मेरे वीर्य से लेकिन वह बहुत खुश हो रही थी। वह मुझे कह रही थी तुम्हारा लंड तो बहुत ही बड़ा और अच्छा है।

मैंने भी उसके होठों को किस करना शुरू किया और उसके बहुत ही नाजुक और पतले पतले होंठ थे जो मुझे काफी अच्छा लग रहे थे। जब मै उसके होठों को अपने होठों से चूस रहा था। थोड़े समय बाद में उसके स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। मैंने उन्हें जैसे ही अपने हाथों से पकडा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई अनमोल चीज पकड़ ली वह बड़े ही टाइट थे। मैं उन्हें बहुत ही अच्छा से अपने मुंह में ले रहा था और अब ऐसा करते हुए। मैंने उसे वहीं उसके बिस्तर पर लेटा दिया। उसके दोनों पैरों को खोलते हुए मैंने उसकी चूत को चाटना प्रारंभ किया। जैसे ही मैं उसकी चूत को चाट रहा था तो उसने मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ लिया और अपने दोनों पैरों से मेरे मुंह को अपने  पैरों के बीच जकड़ लिया। यह मेरी उत्तेजना और बढ़ रही थी और वह भी मज मे आ गई थी उसके योनि पूरी गीली हो चुकी थी। अब उसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था और मेरा लंड भी हिलोरे मारने लगा। मैंने अपने फड़फड़ाते हुए लंड को उसकी चूत मे घुसेड़ दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत मे घुसेड़ा तो उसकी एक तेज आवाज निकले और फिर वह रुक गई।

अब वह सिर्फ सिसकियां ले रही थी और मैं ऐसे ही झटके मार रहा था। मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में ले रखा था और उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ा हुआ था। मैं उसे ऐसे ही चोद रहा था उसकी उत्तेजना भी  बढ़ने लगी थी। उसने मुझे कस कर अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया था। जिससे कि मैं उसे काफी तीव्र गति से धक्के मारने लगा और मेरे लंड अंदर बाहर हो रहा था। जैसे-जैसे मैं तीव्र गति से झटके देता तो उसकी सिसकियां और बढ़ जाती उसकी सांसें गर्म होने लगती। मेरे शरीर का तापमान भी बढ़ चुका था और उसे भी गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी हम दोनों पसीना-पसीना हो चुके थे। मेरे लंड और उसकी चूत से जो गर्मी उत्पन्न हो रही थी उसी गर्मी में मेरा वीर्य निकल गया और मुझे पता भी नहीं चला कब उसकी योनि में जाकर गिरा। जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो हम दोनों ऐसे ही काफी देर तक पंखा खोलकर लेटे रहे। काफी देर बाद मेरे शरीर का तापमान थोड़ा ठीक हुआ। मैंने उससे बोला कि मुझे काफी अच्छा लगा तुम्हारी टाइट चूत मारने में उसके बाद से मैं श्रुति की हमेशा ही चूत मारता हूं।

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