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नमस्कार दोस्तों मैं रोहित आज आप लोगों के लिए बहुत ही मस्त कहानी लेकर आया हूँ ये मेरी जिन्दगी की सच्ची कहानी है | ये मेरी पहली कहानी है मुझे आशा है की आपको पसंद आयेगी | मेरी उम्र 24 साल है और मैं हरद्वार का रहने वाला हूँ और वहीँ एक कंपनी में जॉब करता हूँ | मैं देखने में काफी हैण्डसम हूँ और मुझसे लड़कियां बहुत जल्दी इम्प्रेस हो जाती है | मैंने बहुत सी लड़कियों को पटाया है पर आज जो कहानी मैं लेकर आया हूँ वो मेरे लिए सबसे ख़ास है | अब मैं ज्यादा आप लोगों का समय ना लेते हुए सीधे कहानी पर ले चलता हूँ |

आज जो कहानी मैं आप लोगो को सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी कंपनी में जॉब करने वाली एक लड़की की है | वो बहुत ही खूबसूरत और हसीन है | मैं आपको बता दूं की उसकी उम्र लगभग 22 साल होगी | उसका 32-30-34 का कमाल का फिगर देखकर तो कोई भी उसका दीवाना हो जाए | मैं आपको बता दूं की मैं कंपनी में आपरेटर की पोस्ट पर हूँ और वो प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में काम करती है | मैंने उसको जब पहली बार देखा था तभी से मैं उसका दीवाना हो गया | क्या अदाए थी उसकी मैंने मन में सोंच लिया था की मैं उसको पटा कर ही मानूंगा | मैं रोज उसको लाइन मारने लगा वो भी जब मुझे देखती थी तो हमेशा मुझे देखकर वो स्माइल करती थी | एक दिन मैं कैंटीन में खाना खाने के लिए गया मैंने देखा की वो भी बैठी खाना खा रही थी | उसके सामने वाली कुर्सी खली पड़ी थी तो मैं उसके पास गया और मैंने उससे कहा की क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ उसने कहा हाँ क्यूँ नहीं | फिर मैं बैठ गया और हम दोनों खाना खाने लगा | मैंने उससके कहा हेल्लो मेरा नाम रोहित है | उसने अपना नाम दिव्यांशी बताया मैंने उसके नाम की तारीफ करते हुए कहा की आपका नाम बहुत सुंदर है बिलकुल आपकी तरह | उसने एक प्यारी सी स्माइल दी फिर मैंने उससे पूछा की आप यही की रहने वाली है | तो उसने कहा नही मेरा घर दिल्ली में है और मैं यहाँ किराये पर रहती हूँ | फिर हम दोनों ने बहुत सारी बातें की और फिर खाना खाने के बाद हम दोनों अपने अपने काम पर चले गए | उस दिन के बाद हम दोनों रोज साथ ही में खाना खाने लगे |

धीरे-धीरे हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए | मैंने उसको अपना नंबर दिया और उससे कहा की अगर तुमको कभी भी किसी चीज की जरूरत हो मुझे काल करना | एक दिन की बात है वो काम पे नहीं आई मेरे पास उसका नंबर भी नहीं था जो मैं उससे फोन करके पूछता की क्या बात है | उस दिन मैं पूरा दिन उसके बारे में सोंचता रहा और जब शाम को मैं घर पहुंचा तो एक नए नंबर से कॉल आई मैंने फोन उठाया तो उधर से आवाज आई हेल्लो रोहित बोल रहे हो मैंने कहा हाँ आप कौन उसने कहा की मैं दिव्यांशी बोल रही हूँ मैंने कहा क्या हुआ आज तुम कम्पनी क्यूँ नहीं आई थी | उसने कहा की मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं थी इसीलिए मैं नहीं आई थी | मैंने उससे पूछा की अब तुम्हारी तबियत कैसी है तो उसने बताया की अभी कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है | मैंने कहा की तुम डाक्टर के पास नहीं गयी | उसने कहा की मैं डाक्टर के पास गयी थी | मैंने कहा चलो कोई बात नहीं तुम अपना एड्रेस बताओ मैं तुमको अच्छे डाक्टर से दवा दिलाता हूँ | फिर उसने मुझको अपना पता बताया और मैं उसके घर पहुंचा | मैंने उसको ले जाकर एक अच्छे से डाक्टर से दवा दिलाई और फिर उसको उसके घर छोड़ा | सुबह मैंने उसको फोन किया और उसका हाल-चाल पूछा उसने बताया की अब वो बिलकुल ठीक है | मैंने उससे कहा की आज तुम और आराम कर लो कल से काम पर आना पर उसने कहा नहीं तबियत अब बिलकुल ठीक है और वो आज काम पर जाएगी | मैंने कहा चलो कोई बात नहीं मैं तुमको तुम्हारे घर से पिक कर लूँगा | क्यूंकि मैं रोज बाइक से कम्पनी जाता था | मैं उसके घर पहुंचा क्या कमाल लग रही थी आज वो | फिर हम दोनों कम्पनी के लिए निकल पड़े उस दिन के बाद मैं रोज उसको लेने उसके घर जाने लगा |

एक दिन की हम दोनों कैंटीन में खाना खा रहे थे उसने मुझसे कहा की रोहित आज मेरा जन्मदिन है | मैंने उसको मुबारकबाद दी और उससे कहने लगा की आज तुमको पार्टी देनी पड़ेगी | उसने कहा ठीक है ले लेना पार्टी मैंने कहा की चलो हम अज किसी अच्छे होटल में डिनर पर चलते है उसने कहा की होटल में नहीं आज मैं तुमको अपने हाँथ से खाना बनाकर खिलाउंगी मैंने कहा ठीक है | काम से छुट्टी के बाद मैंने उसको घर छोड़ा और फिर मैं उसके लिए गिफ्ट लेने मार्केट चला गया | मैंने उसके लिए गिफ्ट खरीदा और और फिर मैं रेडी होकर उसके घर पहुंचा | उसने कहा वेलकम फिर मैंने उसको गिफ्ट दिया | उसने कहा की इसकी क्या जरूरत थी मैंने कहा अरे जरूरत क्यूँ नहीं है | फिर उसने कहा क्या है इसमें मैंने कह खुद देख लो | उसने गिफ्ट खोला मैंने उसके लिए एक ड्रेस खरीदी थी | ड्रेस देखकर वो बहुत खुश हुई | फिर मैंने उससे कहा पहन कर दिखाओ वो रूम से चेंज करके आई वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी | मैंने उसका हाँथ पकड़ा और उससे कहा दिव्यांशी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ | उसने मुझे अपने गले लगा लिया और कहने लगी की मैं भी तुमको बहुत प्यार करती हूँ | फिर हम दोनों ने एक दूसरे को किस किया मैं किस करते हुए उसके बूब्स को सहलाने लगा वो गरम होने लगी फिर उसने मुझे रोकते हुए कहा ये सब अभी नहीं चलो पहले हम खाना खा लेते है |

फिर हम दोनों ने साथ में बैठकर डिनर किया और हम एक दुसरे को घूरे जा रहे थे वो मुझे बड़ी कातिल निगाहों से देख रही थी | हम दोनों ने खाना ख़तम किया उसके बाद हम उसके बेडरूम में पहुंचे | मैंने उसको अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गर्दन पर किस करने लगा फिर मैंने उसको बेड पर लिटा दिया | मैंने उसकी ड्रेस उतार दी और अब वो सिर्फ मेरे सामने ब्रा और पैंटी में लेटी हुई थी | उसके गोरे बदन पे उसकी पिंक कलर की ब्रा और पैंटी बहुत ही अच्छी लग रही थी | फिर मैंने उसके बदन को चूमना सुरु किया और उसकी ब्रा को निकाल दिया | उसके बूब्स बहुत ही मस्त और टाइट थे मैं उसके निपल्स को सहलाने लगा | वो गर्म होने लगी थी फिर मैंने उसकी नाभि को चुमते हुए उसकी पैंटी को निकाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा | वो मचलने लगी मैंने उसकी चूत में अपनी उँगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा | उसके बाद मैंने अपनी पैंट खोल दी और अपना लंड निकाल कर उसके सामने किया | मेरे लंड को देखकर वो डर गयी उसने कहा की तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है | मैंने उससे लंड चूसने को कहा पहले तो उसने कहा की मुझे ये सब नहीं अच्छा लगता | मैंने उसको समझाया की तुम इसको चूसोगी तभी तो जानोगी की क्या मजा मिलता है इसको चूसने में | फिर मेरे बहुत कहने पर वो मान गयी और मेरे लंड को उसने मुहँ में ले लिया और चूसने लगी | मुझे बहुत ही मजा आ रहा था | मैं उसके मुहँ में धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा और उसके मुहँ को पकड़ कर चोदने लगा मैंने लगभग 15 मिनट उसके मुहँ को चोदा फिर मैं उसके मुहँ में ही झड गया | फिर उसने मेरा लंड चाट कर साफ़ किया अब मैंने उसकी दोनों टैंगो को फैलाया और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी और उसकी चूत को चाटने लगा |

वो मेरे सिर को अपने हाँथों से अपनी चूत में दबाने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा मैं समझ गया की वो झड़ने वाली है | मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा | तो दी देर बाद वो झड गयी फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और उसकी चूत में डाल दिया | वो एक दम से चीख पड़ी और मुझसे लंड निकालने को कहने लगी पर मैंने उसकी एक नहीं सुनी और धक्के लगाने लगा | कुछ देर बाद वो शांत हो गयी और अपनी कमर चला कर मेरा साथ देने लगी मैंने उसकी मस्त चुदाई की | लगभग 15 मिनट के बाद वो झड गयी | पर मैं फिर भी उसको चोदता रहा थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर उसके बूब्स पर पिचकारी छोड़ दी | उस रात मैंने उसकी चार बार चूत मारी और फिर मैंने उसकी गांड भी चोदी | वो मुझसे बहुत ही संतुष्ट थी | उस दिन के बाद जब भी मेरा मन होता था मैं उसकी चुदाई करता था |