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कुसुम की कॉल गर्ल बनने की कहानी

Kusum ki call girl banne ki kahani:

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दोस्तों मेरा नाम कुसुम है और मैं एक पढ़ी लिखी युवती होती हूं। मेरे घर में परिस्थितियां तो अच्छी थी। सब लोग पैसे वाले थे मेरे चाचा मेरे पापा इन सब का अच्छा कारोबार चलता था। किंतु मैं एक लड़की हूं। इस वजह से यह लोग मुझे पसंद नहीं करते थे और हमेशा इग्नोर मारा करते थे। मुझे कुछ भी चाहिए होता था। तो वह लोग बड़े समय बाद मुझे वह चीज लाकर देते थे कम से कम 10 15 बार बोलने के बाद बचपन से ही मैं यहां देखती आई हूं। अब मैं बड़ी हो चुकी हूं और एक सुंदर युवती हूं। इसलिए मैंने फैसला कर लिया था। कि अब मैं कहीं बाहर ही रहूंगी और खुद ही पैसा कमाऊंगी मेरे पास ग्रेजुएशन की डिग्री तो थी। मैंने घर में बात की कि मुझे बाहर नौकरी करने जाना है। यही देखते हुए उन्होंने मुझे कहा ठीक है तुम्हारी मर्जी जो तुम्हें ठीक लगे तुम वह कर लो बाद में हमें कुछ बोलना मत मैंने कहा यह मेरी खुद की जिम्मेदारी है। मुझे अपने पैरों पर खड़ा होना है। यह कहते हुए मैंने अपने पिताजी से जाने के लिए परमिशन मांग ली। उन्होंने मुझे कुछ पैसे दिए और कहां कुछ बाद में चाहिए हो तो ले लेना। मैंने कहा नहीं नहीं इतने में हो जाएगा मेरे खर्चे की क्या है। बचपन से ही तो कम चीजों से ही काम चलाया है। मैंने अपनी एक सहेली को फोन किया जो कि बेंगलुरु में रहती थी। मैंने उसे अपनी सारी समस्याएं बताई और कहा मेरा मन अब घर में नहीं लगता है। तो मैं बेंगलुरु आना चाहती हूं और वहीं पर रह कर कुछ काम करना चाहती हूं। ताकि मैं अपनी लाइफ को अच्छे से जी सकूं। और कुछ पैसे कमाता सकू मेरी सहेली ने कहा ठीक है तू यहां आजा मैं यहां तेरे लिए कुछ जॉब सर्च करती हूं।

बाकी जब तक तू आएगी तो तब हम तेरे लिए कोई नौकरी ढूंढ लेंगे। मैंने कहा ठीक है मैं चार-पांच दिन में बेंगलुरु के लिए निकल जाऊंगी। यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया और सोचने लगी आज तक तो मैं घर से बाहर गई नहीं अब कैसे रहूंगी। मुझे अपनी मां की भी बहुत याद आ रही थी। यह सोचते हुए मैंने एक बार को तो सोचा कि बेंगलुरु जाने का फैसला कैंसिल कर दू लेकिन अब मन बना ही लिया था तो जाना ही था। आखिरकार कब तक ऐसे घुट-घुटकर जीती और अपनी लाइफ को बर्बाद करती। यह सोचते हुए मैंने जाने का पूरा मन बना लिया। मैंने ट्रेवल एजेंट से टिकट बुक करवा ली और मैं बेंगलुरु के लिए निकल पड़ी। मुझे बेंगलुरु के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। बस यह मालूम था कि बेंगलुरु एक अच्छी सिटी है। और काफी एडवांस भी है अन्य शहर के मुकाबले मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन से उतरी तो मैंने अपनी सहेली को फोन किया कि मैं बेंगलुरु पहुंच चुकी हूं। तो उसने कहा ठीक है मैं आती हूं तुझे लेने के लिए तुम वहीं स्टेशन पर बैठ जाना। मैं वहीं स्टेशन पर बैठ गई और कुछ समय बाद वह मेरे पास पहुंच गई। जैसे ही वह मेरे पास पहुंची तो उसने मुझे गले लगा लिया और बोला कैसी है तू ठीक तो है। मैंने कहा ठीक नहीं है बस अब कुछ अपना ही जीवन में नया करना है यही सोचकर मैं बेंगलुरु आई हूं। इसमें मुझे तेरा साथ चाहिए उसने कहा ठीक है मेरा पूरा साथ है और तू मन लगाकर यहां पर काम कर। मेरी सहेली मुझे अपने घर ले गई। हम लोग रात को बेंगलुरु शहर घूमने निकल पड़े। बेंगलुरु शहर की अलग ही बात है वहां रात को काफी अच्छा लगता है। वह अन्य शहरों के मुकाबले बहुत ही अच्छी सिटी है। मुझे घर की भी याद आ रही थी पर बेंगलुरु में अच्छा लग रहा था।

अब मैं नौकरी के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय बाद मेरी नौकरी एक कंपनी में लग गई। वहां पर सैलरी कम थी पर शुरुआत करने के लिए ठीक था। तो मैंने वह कंपनी ज्वाइन कर ली। कुछ समय वहां नौकरी करने के बाद जो वहां का मालिक था वह मेरे साथ बदतमीजी करने लगा। वह मुझे अपने ऑफिस में बुलाता हूं और कभी वह मेरी गांड पर हाथ फेरता। कभी वह मेरे स्तनों को दबाता यह मुझे अच्छा नहीं लगा और मैंने कुछ समय बाद वह ऑफिस छोड़ दिया। मैंने दूसरा ऑफिस ज्वाइन किया तो वहां पर भी यही स्थिति थी। तो मैंने वह भी छोड़ दिया इस प्रकार से मुझे चार पांच महीने तक खाली बैठना पड़ा और मेरे पास पैसे भी खत्म हो गए थे। मेरे पास कोई चारा भी नहीं था। मेरी सहेली की जॉब जा चुकी थी और हम दोनों खाली बैठी हुई थी। फिर हम लोग रात को ऐसे ही घूम रहे थे। तो हमने वहां पर देखा कि कुछ लड़कियां सड़क के किनारे खड़ी हो रखी हैं और कुछ लोग आकर उन्हें ले जा रहे हैं। मेरे दिमाग में तो यही चल रहा था यह हो क्या रहा है। मैंने अपनी सहेली से पूछा यार इन लड़कियों को यह पुरुष लेकर जा रहे हैं पर क्यों तो उसने मुझे बताया कि यह कॉल गर्ल हैं। इनको यह पुरुष अपने साथ सेक्स के लिए ले जा रहे हैं। मैंने अपनी सहेली से पूछा यह लोग कितना कमा लेते होंगे तो उसने कहा यह लोग लाखों में कमा लेते हैं। हम लोग घर वापस आ गए। मैं रात भर यही सोचती रही मैं यह काम कर के देखती हूं क्योंकि पैसे भी खत्म हो चुके है। अब कुछ रास्ता भी नहीं बचा है।

मैं भी अगले दिन वहीं पर खड़ी हो गई। कुछ पुरुष वहां पर आए वह दो पुरुष थे और उनका ड्राइवर उनके साथ था। उन्होंने मुझे बोला दिखने में तो तुम अच्छी हो कितने लोगी बोलो मेरे मुंह से कुछ ज्यादा ही निकल गया पर उन्होंने मुझे वह पैसे दे दिए और अपने साथ दोनों ले गए। वह दोनों पुरुष अधिक उम्र के थे। वह मुझे एक घर में ले गए जहां पर कोई भी नहीं था। मुझे कहने लगे तुम दारु पीती हो क्या पहले मैंने मना किया पर फिर मैंने पी ही लिया मैंने कहा यह दोनों आज मेरी चूत फाडेगे तो पी लेती हूं नहीं तो मुझसे सहन नही होगा। मैंने बहुत ज्यादा शराब पी ली मुझे नशा हो चुका था। मुझे हल्का हल्का याद था कि उन लोगों ने मेरे साथ क्या किया। पहले उन दोनों ने मेरे कपड़े उतार दिए और वह दोनों के दोनों मेरी चूत चाटने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसके बाद हम दोनों ने मुझे अपने लड चुसवाए। मुझे अच्छा लग रहा था क्योंकि उन दोनों के बड़े-बड़े लंड थे। कसम से मजा आ रहा था मेरे तो चूत का पानी निकलता जा रहा था। यह बहुत ही अच्छा अनुभव था मेरे लिए उसके बाद उन दोनों ने मेरी पिंक चूत को  अपने लंड से लाल कर दिया चोद चोद कर।

वह दोनों बहुत अच्छे से मुझे चोद रहे थे। उन दोनों ने मेरी बारी बारी से चूत मारी। दो-तीन घंटे तक हो ऐसे ही करते रहे। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। कभी वह मुझे sixty nine पोज मे करवाते। कभी वह डॉगी स्टाइल मैं मुझे चोदते। कभी तो वह मेरी टाइट योनि मैं अपनी तीन चार उंगलियां डाल लेते और ऐसे ही करते रहते हैं अंदर बाहर मुझे वाकई में मजा आ रहा था। और मैं सोच रही थी यह मेरे लिए अच्छा काम है। अब से मैं यही करूंगी उन दोनों ने मेरी योनि में अपना वीर्य गिरा दिया और कुछ बूंदें हैं उन्होंने मेरे ऊपर भी गिरा दी मैंने वहां पी लिया मुझे अच्छा लगा। उसके बाद से मुझे नशा हो गया क्योंकि दारू खाना सब फ्री में मिल रहा था। मेरी इच्छा भी पूरी हो रही थी और उसके साथ-साथ पैसा भी मुझे मिल रहा था। तो मुझे इसका नशा हो गया और मैं एक कॉल गर्ल बन गई मैंने ऐसा करते-करते बहुत कमा लिया और अब मेरे कुछ फिक्स कस्टमर हैं। जिनके पास मेरी हमेशा ही बुकिंग रहती है। वह मेरे योवन का रसपान करते हैं और मुझे उस की अच्छी खासी कीमत देते हैं। जिससे कि मैं अपने जीवन को अच्छे से चला पा रही हूं और बेंगलुरु में अय्याशी से जिंदगी काट रही हूं। मेरे घर वाले यहां पर दो बार आकर गए उन्होंने भी मेरा रहन-सहन देखा तो वह भी