hindi intercourse tales, desi chudai ki kahani

मेरा नाम सुमन है और मैं नागपुर की रहने वाली हूं। मैं यहीं कॉलेज मैं पढ़ती हूं मेरी उम्र 20 साल की है। मैं बहुत ही सुंदर और हसीन हू। मेरी गांड में बड़ी-बड़ी है और मेरे स्तन भी मैं एक पूरा सेक्स का भंडार हूं। मेरी योनि भी अभी बहुत टाइट है क्योंकि उसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुआ है उसने ज्यादा लंड नहीं लिए हैं। मैं एक सुंदर और हसीन लड़की हूं। मेरी कॉलेज में बहुत ही मांग रहती है। सभी लोग मुझसे कुछ ना कुछ काम निकलवाते रहते हैं। मेरे घर वाले भी मुझे बहुत शरारती समझते हैं। लेकिन वहां मुझे किसी भी काम के लिए रोकते नहीं है। मैं चाहे रात को कितने बजे भी घर जाऊं मुझे कभी नहीं रोका शायद इसी वजह से मैं उनकी बात को बहुत हल्के में लेती हूं। मै बहुत बिगड़ भी गई हूं मे दारु सिगरेट सब कुछ पीने लगा हूं। मेरे बहुत सारे बॉयफ्रेंड भी है कॉलेज में लेकिन मैं हर किसी को अपने चूत नहीं देती। मेरा जिसको मन होता है मैं उसी को देती हूं।

इस बार हमारे कॉलेज में एक नए प्रोफेसर आए शायद वह नऐ-नऐ अपॉइंट हुए थे। उनका यह पहला ही कॉलेज था। वह देखने में बहुत ही हैंडसम थे उनकी हाइट भी बहुत अच्छी खासी थी। वह हमें कॉलेज में पढ़ाने आए आज उनका पहला ही दिन था क्लास का तो  उन्होंने बहुत अच्छे से पढ़ाया लेकिन लड़कों ने उनकी क्लास में ध्यान नहीं दिया। वह सब शरारती करते रहे क्योंकि वह भी नए-नए थे तो इसलिए किसी को कुछ बोल भी ना सके। आज उनका पहला ही दिन था लेकिन मुझे वह प्रोफेसर अच्छे लगने लगे थे। मैं उन पर डोरे डालने लगी थी। मैं यह चाहती थी कि कैसे वह मेरी चूत मारे। मैं यही सोच रही थी कैसे मै उनपसे बात करूं और कैसे इनके मैं करीब जाऊं लेकिन वह अभी नए-नए कॉलेज में आए थे और ज्यादा किसी से बात भी नहीं करते थे। अपने काम से काम रखते थे और चले जाते थे। वह बहुत ही शांत स्वभाव के थे। इस वजह से वह शायद कम ही बात करते थे। मैं इसी सोच में रहती थी कैसे मैं इन प्रोफेसर के नजदीक जाऊं और अपनी नजदीकियां उनसे बढ़ाऊ लेकिन यह हो ही नहीं पा रहा था।

एक दिन मैं किसी की बर्थडे पार्टी में गई थी। जो हमारे घर के पास में ही रहते हैं। उनसे हमारे बहुत ही अच्छे संबंध हैं। इसलिए वह हमें हर खुशी में बुलाते हैं। वहां पर मैंने देखा कि वह प्रोफ़ेसर भी आए हुए थे। अब मैंने सोचा इनसे बात कैसे की जाए तभी मैंने उन भैया को कहा जिनके बच्चे की बर्थडे पार्टी में मैं उनके घर गई हुई थी। मैंने उन भैया से पूछो यह प्रोफेसर आपके परिचित हैं क्या उन्होंने कहा हां यह मेरे मित्र हैं। यह कहते हुए उन्होंने मुझे कहा आओ मैं तुम्हें मिलवाता हूं। फिर उन्होंने मेरा परिचय प्रोफेसर से करवाया मैंने प्रोफेसर से कहा सर मैं आपकी ही कॉलेज में हूं तो उन्होंने मुझे पहचान लिया उन्होंने कहा हां हां मैंने तुम्हें देखा है कई बार अब तो जैसे मेरा रास्ता खुल गया था प्रोफेसर से बात करने का मैं मन ही मन बहुत खुश हो रही थी और क्यों सोच रही थी। प्रोफेसर का कितना बड़ा लंड होगा।

मैं अगले दिन कॉलेज गई और मैंने प्रोफेसर को नमस्ते किया प्रोफेसर ने मुझे भी नमस्ते कर रिप्लाई किया और कहने लगे कैसी हो सुमन सब ठीक है। मैंने कहा हां जी सब सही है। यह बात करते हुए वह अपनी क्लास में चले गए। मैं भी अपनी क्लास में चली गई अब प्रोफेसर की क्लास हमारे यहां थी। तो प्रोफेसर हमारे यहां क्लास पढ़ाने के लिए आए हम सब लोग बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे तभी अचानक से प्रोफ़ेसर आ गए। हम लोग अपने-अपने सीटों पर जाकर बैठ गए। यह देखते हुए प्रोफ़ेसर थोड़ा हिचकिचा रहे थे। किंतु उन्होंने अपनी क्लास पढ़ाना शुरू किया। वह क्लास खत्म कर कर वापस चले गए। तभी मैं उनके पीछे-पीछे गई और मैंने प्रोफेसर से कहा सर मुझे इस सब्जेक्ट में थोड़ा दिक्कत होती है। तो क्या आप मुझे सब्जेक्ट की क्लास दे सकते हैं। उन्होंने मुझे कहा ठीक है मैं तुम्हें सोचकर बताता हूं।

वह मुझे अगले दिन मिले और कहने लगे ठीक है मैं तुम्हें सुबह की क्लास दे देता हूं और मैं तुम्हारे घर पर ही पढ़ाने आ सकता हूं। मैंने कहा ठीक है सर आप मेरे घर पर ही आ जाइए। मुझे पढ़ाने के लिए अब वह तैयार हो गए तो मेरी चूत मचलने लगी। प्रोफेसर अगले दिन सुबह मेरे घर पर मुझे पढ़ाने के लिए आ गए। मैं भी सुबह नहा धोकर तैयार बैठी थी पढ़ने के लिए आज मुझे प्रोफेसर ने पढ़ाया आज मै सिर्फ उनको देखती ही रही। उसके बाद में बाथरूम में गई और अपने चूत मे उंगली से किया। मुझे बहुत ही मजा आया। आज उंगली डालने में अब ऐसे ही प्रोफेसर हमेशा मुझे पढ़ाने के लिए सुबह-सुबह आ जाते थे। आज मैंने पूरा मन बना लिया था कि प्रोफ़ेसर से अपनी चूत फड़वानी है। आज मैंने भी बहुत ही छोटी सी स्कर्ट पहन ली जिससे कि मेरी चूत साफ साफ दिखाई दे रही थी। मैंने अपने पैरों को अच्छे से  वैक्स कर लिया था। मैंने एक पतली सी टी-शर्ट पहनी जिसका गला बहुत ही बड़ा था। वह पहन ली मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। उस टीशर्ट में मेरे स्तन काफी बड़ी दिखाई दे रहे थे और मेरी निप्पल साफ-साफ दिखाई दे रही थी क्योंकि आज मैंने पूरा मन बना ही लिया था कि प्रोफेसर को अपने चूत दूंगी। प्रोफ़ेसर मुझे पढ़ाने आए मैं वहां पर बैठी हुई थी। प्रोफ़ेसर मुझे सोफे पर पढ़ाते थे तो उसकी टेबल बहुत ही छोटी थी। प्रोफ़ेसर ने भी आज क्लीन शेव कर रखी थी जिसमें की वह बहुत ही हॉट लग रहे थे। आप जैसे जैसे प्रोसेसर मुझे पढ़ाते मैंने अपने शॉर्ट को थोड़ा सा ऊपर कर दिया।

जिससे कि मेरी चूत का छेद थोड़ा-थोड़ा दिखाई देने लगा। मैं बार-बार अपनी चूत पर हाथ लगाती और कभी-कभी अपने स्तनों पर भी हाथ लगाती। प्रोफेसर का शायद खड़ा हो गया था। वह मेरी तरफ आकर्षित हो गए थे। अब उनका भी मन होने लगा था। तो वह बाथरुम में गए मुठ मारने के लिए जैसे ही वह बाथरुम में गए और मुठ मारने लगे। तो मैंने उन्हें देख लिया क्योंकि उन्होंने दरवाजे की कुंडी नहीं लगाई थी। अब मैंने भी उनको लंड पकड़ लिया और अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। उनको भी मज़ा आने लगा था वह भी मदहोश हो गए थे। उसके बाद प्रोफेसर का लंड मैंने अपने गले तक ले लिया। जिससे वह अत्यंत खुश हो गए और कहने लगे तुम बहुत अच्छे से सकिंग करती हो मुझे बहुत अच्छा लगा। प्रोफ़ेसर ने भी मुझे उठाया और मेरी शॉट्स को थोड़ा सा अपने हाथ से पकड़ लिया और मेरी चूत मैं अपनी जीभ को घुसा दिया जैसे उन्होंने अपने जीभ को मेरी चूत मे डाला मेरी पिचकारी निकलने लगी। और वह मेरे पानी को अच्छे से चाटने लगे उन्होंने पूरा अच्छे से चाट लिया और मुझे मदहोश कर दिया। अब उन्होंने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने मुंह में मेरे आधे स्तनों को ले लिया था। उसको चूस रहे थे वह बहुत ही अच्छे से मेरे स्तनों को चूस रहे थे।

उन्होंने मेरे निप्पल को भी काट लिया था और ना जाने मेरे कहां-कहां पर नाखून मार दिया थे। मैं तो मस्त हो गई थी। तभी उन्होंने मेरे शॉर्ट्स को हल्का सा ऊपर करते हुए अपने लंड को मेरी चूत मे डाल दिया। जैसे ही उन्होंने अपना लंड डाला मेरी चूत मे डाला तो मेरी चिल्लाहट ही निकल गई। उनका बहुत ही बड़ा था। अब उन्होंने झटके मारना शुरू कर दिया वह बहुत ही तेज तेज झटके मार रहे थे। जिससे कि मेरी चुतडे हिलने लगी