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रंडी मौसी ने मुझे पटा कर अपनी चूत में मेरा काला मोटा लंड डलवाया

रंडी मौसी ने मुझे पटा कर अपनी चूत में मेरा काला मोटा लंड डलवाया randee mausee ne mujhe pata kar apana choot mein mera kaala mota land dalavaaya : नमस्कार. मेरा नाम धर्मेन्द्र है, मैं 24 साल का हूँ और में एक कॉलबॉय भी हु… मैं मेरी ज़िंदगी की असली चुदाई की कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हु. बात उस समय की है, जब मैं छोटा था. मेरी दादी का घर बहुत ही छोटे से देहात में है और मेरी नानी का घर शहर में है.

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नानी का काफ़ी बड़ा परिवार है, मेरी नानी की चार लड़कियां है और मेरी सग़ी मौसी की दो लड़कियां हैं, एक रात की बात है. मैं और मेरी सेक्सी मौसी की लड़की घर में खेल रहे थे, तो मेरी मौसी की लड़की सुमन ने कहा कि चलो अब हम लोग आपस में पेला पेली धका धक करते हैं. मुझे नहीं पता था कि ये क्या होता है. सुमन मुझ से केवल एक साल बड़ी है और उसकी बहन आशा एक साल छोटी है.

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मैंने पूछा- ये ” पेला पेली धका धक “क्या होता है?
तब उसने कहा- पेला पेली धका धक वाही जो मम्मी पापा एक दुसरे के साथ करते है रोज रात को… मैंने रात को मम्मी पापा को एक दूसरे के ऊपर सोते हुए देखा है. चलो हम भी वैसा ही करते हैं.
मैंने कहा- मैं तेरे ऊपर सो जाऊँगा, तो तेरी साँस फूलने लगेगी और तू मर जाएगी.
तब उसने कहा- ऐसा कुछ नहीं है, पेला पेली धका धक करते हुए मेरी मम्मी मरी क्या? नहीं मरी ना फ़ालतू बात करते हो.

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मेरे बात वह नहीं मानी और मजबूर होकर मुझे उसके ऊपर लेटना पड़ा. वो ज़मीन पर लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया.
वो मेरे बालों को सहलाने लगी और कहने लगी- धर्मेन्द्र कैसा लग रहा है.
तब मैंने कहा- ठीक ही लग रहा है.
फिर वो बोली- मजा आएगा बस यूँ ही पड़े रहो.

मैं उसके ऊपर चढ़ा रहा. कुछ देर तक वो कुछ नहीं बोली, फिर अचानक ही उसने मुझे अपने ऊपर से उतार दिया. मैं बैठ गया, उसने अपनी सलवार का इजारबंद खोलना चालू किया. मैं उसे देखने लगा, उसने टाइट सलवार पहनी थी, जिससे उसे अपनी सलवार नीचे करने में तकलीफ़ हो रही थी.

फिर मैंने उसे अपनी तरफ खिसकाया और उसकी सलवार पकड़ कर नीचे की तरफ खींच दिया तो उसकी सलवार नीचे आ गई. वो अन्दर ब्लैक कलर की पैंटी पहने हुए थी.
वो बोली- धर्मेन्द्र मेरी इस पैंटी को नीचे करो.
मैंने कहा- क्यों?
तो उसने कहा- करो ना.

मैंने उसकी पैंटी नीचे की, तो देखा कि उसकी सुन्दर सी चूत के ऊपर हल्के हल्के बाल हैं और उसकी चुत एकदम गुलाबी रंग की है. उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी गुलाबी चूत के ऊपर रखा, उसकी गुलाबी चूत पसीने से गीली हो गई थी और गर्म थी.
तभी मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी, तो मैंने सुमन से कहा- कोई आ रहा है.

उसने जल्दी से अपनी पैंटी ऊपर कर ली और अपनी सलवार पहनने लगी. तभी निशा सेक्सी रंडी मौसी आ गईं और उन्होंने हम दोनों को देख लिया.
“क्या कर रहे हो धर्मेन्द्र बेटा?”
“कुछ नहीं मौसी जी …”
“कुछ तो कर रहे हो..” कह कर वो मुस्कुराने लगीं.
“क्या कर रही थीं सुमन, सच बोल, नहीं तो तेरी मम्मी को बताती हूँ.”
सुमन कुछ नहीं बोली और अपना सिर नीचे कर लिया.
तभी मेरी मम्मी आ गईं- क्या हो रहा है?

तब निशा मौसी ने सब कुछ सच सच बता दिया और मम्मी मुझे पकड़ कर छत पर ले गईं. फिर तो मेरी जम कर पिटाई हुई. मेरी कुछ समझ ही नहीं आया कि किस बात को लेकर मेरी पिटाई हुई मेरे पापा मम्मी भी तो रोज रात को यही करते है

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इसके घटना के कुछ महीनों बाद मैं मुंबई चला आया और यहाँ से करीब 3 साल बाद वापस गया. मुंबई से वापस आने के बाद अब मैं एक जवान मर्द बन चुका था और अब तक सुमन की बहन आशा उससे भी ज्यादा सेक्सी लगती थी. वो आशा, जो बचपन में सांवली थी, आज वो अपने आप में एक ख़ूबसूरत लड़की थी. मैंने आशा को कभी भी बुरी नजर से नहीं देखा था. आशा मुझसे एक साल छोटी थी और पतली दुबली सी लड़की थी. रंडी मौसी ने मुझे पटा कर अपनी चूत में मेरा काला मोटा लंड डलवाया randee mausee ne mujhe pata kar apana choot mein mera kaala mota land dalavaaya.

मेरे मौसा जी कोई काम धाम नहीं करते थे. इसलिए सेक्सी रंडी मौसी आज भी मायके में ही रहती थीं. हम लोग मुंबई से आकर नानी के यहाँ पर ठहरे.. क्योंकि मेरा जो घर था वो मिट्टी का कच्चा घर था और इतने दिन मुंबई में रहने के बाद अब वो भी गिरा पड़ा था, जो रहने के लायक बिल्कुल नहीं था.

सुमन इस वक़्त घर पर नहीं थी. मैं तो बस सुमन को देखना चाहता था . नानी से पूछने पर पता चला कि वो एक दो दिन में आ जाएगी. खैर मैं मन मार के अपने दिन गुजारने लगा. इस वक़्त बहुत ज्यादा ठंडी थी , हम सभी लोग, निशा सेक्सी रंडी मौसी, उनकी माँ, मेरे चचेरा मामा और मैं सभी एक रज़ाई में बैठ कर मुंबई की बातें कर रहे थे और एक दूसरे को मुंबई की कहानी बता रहे थे.

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निशा रंडी मौसी और मैं एक जगह बैठे हुए थे रजाई गरम थी, इसलिए बाहर निकलने का दिल नहीं कर रहा था. मैंने महसूस किया कि कोई मेरे पैर पर अपना पैर रगड़ रहा है. जब मैंने निशा मौसी की तरफ देखा तो वो मुस्कुराने लगीं और मैं भी मुस्कुरा दिया. उनकी कातिल मुस्कराहट जो वो अपने निचले होंठों को रांड की तरह काट कर दिखा रही थी मुझे भी उनकी तरफ खींचने लगी. मैंने अपना पैर उनके पैर पर रखा और अपना एक हाथ उनकी जांघों पर रखा और सहलाने लगा. अब वो और उत्तेजित हो रही थीं.

थोड़ी देर बाद सेक्सी रंडी मौसी ने अपना हाथ मेरी पैन्ट की तरफ किया और ऊपर से ही मेरे काले मोटे मोटे लंड को सहलाने लगीं. मैंने भी उनकी तरफ हाथ बढ़ाया और उनकी चुस्त सलवार में कैद उनकी गुलाबी चूत को सहलाने की कोशिश में अपना हाथ उनकी जांघों पर से हटा कर थोड़ा आगे बढ़ाया तो वो थोड़ा सा खिसक गईं. अब मैं वो धर्मेन्द्र नहीं था जो आज से कुछ साल पहले था. मुंबई में आकर मैंने एहसास किया कि आखिर सुमन मुझसे क्या चाहती थी और इस वक़्त मुझे पता था कि निशा सेक्सी रंडी मौसी क्या चाहती हैं.

अब सेक्सी रंडी मौसी की गुलाबी चूत मेरे हाथ के एकदम करीब थी. मैंने अपना हाथ उनकी गुलाबी चूत पर रखा और मैंने महसूस किया कि अपनी टाइट और रेशमी सलवार के अन्दर उन्होंने कुछ भी नहीं पहना था. सिर्फ उनकी सलवार ही थी, जो उनकी गुलाबी चूत से लिपटी हुई थी. मैंने महसूस किया कि सेक्सी रंडी मौसी की झांटें काफी बड़ी हैं और वो मेरे हाथों में पकड़ी जा सकती थीं.

मैंने सेक्सी रंडी मौसी को धीरे से पूछा- ये क्या है… चुत पर घास उगा रखी है?
उन्होंने अपनी उंगली होंठ पर लगा कर चुप रहने का इशारा किया. अब वो मेरे मोटे लंड को दबा रही थीं और मैं उनकी गुलाबी चूत को मसल रहा था.

सच कहूँ तो टाइट सलवार में उनकी गुलाबी चूत दबाने मजा ही अलग था क्योंकि उसमें हाथ जब फंसता था तो बड़ा मजा आता था. बीच बीच सेक्सी रंडी मौसी दोनों जांघों को शरारत में सिकोड़ देती थीं, जिससे मेरा हाथ उसमें कैद सा हो जाता था. मैं हाथ निकालने के लिए गुलाबी चूत पर चींटी काट लेता था और वो उछल सी पड़ती थीं. सेक्सी रंडी मौसी मेरे मोटे लंड को अन्दर ही अन्दर धीरे धीरे दबाये जा रही थीं और मैं भी चुदास के नशे में आता जा रहा था. रंडी मौसी ने मुझे पटा कर अपनी चूत में मेरा काला मोटा लंड डलवाया randee mausee ne mujhe pata kar apana choot mein mera kaala mota land dalavaaya

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि मेरी पैंट गीली हो चुकी है, मुझे बहुत आनन्द आया. जब मैंने सेक्सी रंडी मौसी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थीं और ऐसा लग रहा था कि वो जीत गईं और मैं हार गया. मेरे बदन में एक हरारत सी होने लगी और ऐसा लगा जैसे मेरी पूरी जान निकल गई हो, लेकिन मैंने सेक्सी रंडी मौसी की गुलाबी चूत सहलाना नहीं छोड़ा.

कुछ देर बाद मेरा हाथ भी गीला हो गया, शायद सेक्सी रंडी मौसी झड़ चुकी थीं और उनका पानी मेरे हाथों में लग गया था. सच कहूँ तो मुंबई में रहने के बाद भी मैंने आज तक किसी लड़की की गुलाबी चूत को नहीं छुआ था लेकिन आज ऐसा लग रहा था कि सच में गुलाबी चूत ही ज़िन्दगी है.

तभी सेक्सी रंडी मौसी ने मेरी तरफ नशीली निगाहों से देखा और कहा- चलो कब तक सभी लोग बात करेंगे, अब खाना खा लेते हैं.
यह कह कर सेक्सी रंडी मौसी उठ गईं, मेरा हाथ हट गया. मैंने देखा कि सेक्सी रंडी मौसी खड़ी होकर अपनी ओढ़नी से अपनी गांड को ढक रही हैं और कुछ इठला और बल खाकर चल रही हैं.

मैंने सेक्सी रंडी मौसी को इस तरह से इठला कर देखा, तो मेरे होश उड़ गए. मैंने सेक्सी रंडी मौसी को कभी भी इतनी सेक्सी सलवार में नहीं देखा था, जो मुझ पर बिजली गिरा रही थी. ऊपर से उनके गुलाबी चूतड़ों के दो गोल उभार मेरी जान ले रहे थे.
मुझे पता था कि वो मेरे लिए ऐसा कर रही हैं क्योंकि वो थीं ही अपने आप में एक नशा, सच में सेक्सी रंडी मौसी एक अलग ही तरह की लड़की थीं.

अन्दर आँगन में जाकर उन्होंने सबको खाना खाने के लिया बुलाया. मैं भी उठा और आँगन में जाकर हाथ धोकर आग के पास बैठ गया.. जो ठण्ड से बचने के लिए जलाई गई थी. मैं सेक्सी रंडी मौसी के बगल में बैठ गया और खाना खाने लगा.
सेक्सी रंडी मौसी ने मेरे कान में कहा कि धर्मेन्द्र खूब खा लेना क्योंकि रात में बड़ी मेहनत करनी है.. इसी लिए तो अंडा बनाया है ताकि रात की ठंडी में गर्मी का मजा मिले और ठंडी कम लगे.
मैंने उनकी तरफ देखा और कहा- अच्छा किया जो मेरा मनपसंद खाना बनाया है इसी लिए तो आप मेरी सबसे अच्छी सेक्सी रंडी मौसी हो.
निशा सेक्सी रंडी मौसी ये सुनकर मुस्कुराने लगीं.
मैंने भी एक मुस्कुराहट भरी और लोगों की नज़रों से बचकर आँख मार दिया.. जिस से वो और खुश हो गईं.

मैं अब भले ही जवान हो चुका था, लेकिन निशा सेक्सी रंडी मौसी का इस तरह से मुझ पर लट्टू होना कुछ अच्छा नहीं लगता था क्योंकि मैं अब भी शर्म को अपनी आँखों में कैद कर के रखता था. उधर सेक्सी रंडी मौसी जो कि मुझसे कुछ और चाहती थीं, ये सोच कर कुछ अजीब सा लगता था. वैसे तो निशा सेक्सी रंडी मौसी मुझसे उम्र में बड़ी थीं, लेकिन इतनी भी नहीं कि ये बच्चा उनकी प्यास न बुझा सके. चूँकि छोटा होना बच्चे का अहसास तो करता है लेकिन वो तो केवल नाम का बच्चा होता है, मन में लहर होनी चाहिए.

खाना खाने के बाद ये तय होने लगा कि कौन कहा सोयेगा क्योंकि ठंडी में ये समस्या ज्यादा होती है और उससे बड़ी समस्या होती है बिस्तर की. हमारे पास जगह की कमी नहीं है, सोना चाहें तो छत पर या आँगन में सोया जा सकता है लेकिन ठण्ड में छत पर सोना जान देने के बराबर है.

बिस्तर कम होने की वजह से ये तय हुआ कि मैं और निशा सेक्सी रंडी मौसी एक ही कम्बल में सोयेंगे.
पहले तो लोगों को दिखाने के लिए सेक्सी रंडी मौसी ने कहा कि मैं और धर्मेन्द्र एक कम्बल में कभी नहीं सो सकते हैं.. क्योंकि धर्मेन्द्र के बदन से बदबू आती है.

तब नानी ने कहा- ठीक है बीच में आशा सो जाएगी.. फिर धर्मेन्द्र और फिर बाकी लोग. तब निशा सेक्सी रंडी मौसी ने अचकचा कर कहा- कोई बात नहीं.. मैं और धर्मेन्द्र एक जगह सो जायेंगे, मैं उसे बर्दाश्त कर लूंगी.. क्योंकि मेरा बेटा ही तो है, कोई बात नहीं.

जिनके मन साफ़ होते हैं, उनके लिए रिश्तों के अलग मायने होते हैं. सभी लोग जानते थे कि निशा और धर्मेन