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New Sex Story – चुदाई का ग्रुप सीक्रेट सेवन भाग – 2 Newest Hindi Sex Reports

अभी तक आपने पढ़ा कि सात लोगों का एक ग्रुप था जोकि पहेलियों और लोगों की मुश्किलों को सुलझाने का काम करते थे. इस ग्रुप का नाम सीक्रेट सेवन था और ग्रुप के सारे मेम्बर खुले विचारों के थे और मस्ती में अपने पार्टनर की चुदाई करते थे… चुदाई का ग्रुप सीक्रेट सेवन भाग – …

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अभी तक आपने पढ़ा कि सात लोगों का एक ग्रुप था जोकि पहेलियों और लोगों की मुश्किलों को सुलझाने का काम करते थे. इस ग्रुप का नाम सीक्रेट सेवन था और ग्रुप के सारे मेम्बर खुले विचारों के थे और मस्ती में अपने पार्टनर की चुदाई करते थे…

चुदाई का ग्रुप सीक्रेट सेवन भाग – 1

अब आगे…

फिर वो दोनों उठे और ग्रुप में आ गए और बातचीत करने लगे. अब शीथल ने सबको बात समझाई और चलने के लिया कहा. सब बड़ी हैरत से उसकी बात सुनते रहे. आज तक किसी ने इतना खासम-खास केस नहीं सुलझाया था!

शीथल की बात सुनने के बाद अभय ने फ़ौरन प्लान बनाया. उसने कहा कि हम लोग गाड़ी से जायेंगे (उन लोगों के पास के बोलेरो की जीप थी). अभय और शीथल आगे बैठेंगे. पीछे की एक तरफ अदिति, एंड्रू और मयंक बैठेंगे जबकि दूसरी तरफ जिज्ञा, मोनिका और गंगा बैठेंगी.

सबके लिए खाने पीने का सामान भी लेना था, जिसकी ज़िम्मेदारी अभय ने जिज्ञा और एंड्रू को दी. गंगा को दवाइयां तथा मोनिका को पेट्रोल के कनस्तर लाने को कहा. मयंक चार्जर, पावर बैंक, जीपीएस जैसी टेक्निकल डिवाइस ला रहा था.

अभय ने अदिति और शीथल को कपड़े लाने को कहा और खुद वह इस ट्रिप के लिए नक़्शे का जुगाड़ करने लगा. अभय गाड़ी को चमोली गाँव के पास से देहरादून ले आया था. इसके बाद सब अपने अपने काम में लग गए और चारों दिशाओं में फैल गए.

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अभय नक्शा लेने अपने गुरु पंकज बंसल के घर चल पड़ा. उसने सुना था कि वो पिछले दिनों यहाँ छुट्टियां मनाने आये हुए थे. पंकज के घर उनकी भतीजी भी रहती थी. उसका नाम स्वाति था.

स्वाति जाति से क्षत्रिय थी और वह भी पहाड़ों की थी. उसकी मौसी पंकज बंसल सर की वाइफ थीं. गर्मी की छुट्टियों में वह स्वाति से मिलने आ जाया करती थीं. हालांकि पंकज सर कुछ ज़्यादा नए ज़माने के नहीं थे पर फिर भी वो दिल्ली में रहते थे और थोड़ा टेक्नोलॉजी जानते थे. जबकि स्वाति का खानदान पूरा राजपूत घराने जैसे था.

वो बरामदे में बैठी थीं कि तभी उसने सामने से एक हट्टे कट्टे, लंबे – चौड़े, गोर – चिट्टे, खूबसूरत और हंसमुख नौजवान को आते देखा. वो और कोई नहीं अभय था. स्वाति उसे नहीं जानती थीं पर जब उसने अभय को घर की तरफ कदम बढ़ाते देखा तो हैरत में पड़ गयी.

इसलिए उसने पंकज को बुलाया और पंकज ने अभय का स्वागत किया. फिर वो उसे अपने छोटे से ऑउट हाउस में ले गए. फिर उन्होंने अभय को जलपान कराया, उससे स्वाति से मिलवाया और फिर पूरी बात सुनी.

स्वाति अभय की पैंट को देख रही थीं. जब बातें कुछ खत्म सी होने लगी तो इसने देखा कि उसकी पैंट से एक मोटा सा जीव उभर सा रहा था. वो अभय का काल नाग था. सात इंच लंबा, छह इंच मोटा, लोहे जैसा फौलादी और बाहर से एकदम काला जबकि अंदर से रसीला गुलाबी.

अब पंकज ने अभय को अलग से बुला कर भी कुछ सुनाया और फिर खुला छोड़ दिया. अभय स्वाति के पास आया, कुछ खुसफुसाया और बाहर की और चला गया. इसके बाद स्वाति वहां छुप – छुप के दौड़ी आयी. अब अभय बोला, “क्यों जान, तुमसे रहा नहीं गया मुझे देखकर?”

इस पर स्वाति शरमाई और बोली, “तुम जैसा मर्द आज तक मैंने अपनी उम्र में नहीं देखा. पिता जी और दादा जी दूसरी कास्ट वालों को आने नहीं देते और मेरी कास्ट के हिजड़े निकलते हैं. उन मादरचोदों का तो लन्ड भी खड़ा नहीं होता! मुझे क्या चोदेंगे वो!”

दोस्तों, स्वाति वास्तव में एक कामुक लड़की थी. रंग से हल्की सांवली, तिरछी आँखें, खूबसूरत मुंह ऐसा कि उसे देखते ही चोदने का मन करता था.

फिर अभय बोला, “तो जानू देर किस बात की है. चलो शुरू करते हैं” इसके बाद अभय ने उसके होंठों पर अपने होठ लगाए और चूमने लगा. इनके बीच की चूमा – चाटी गले तक चली गयी.

दोनों में कामुकता इतनी भरी हुई थीं की एक – दूसरे को छोड़ ही नहीं रहे थे. ऐसा लग रहा था कि एक – दूसरे को कच्चा ही चबा जायेंगे.

करीब – करीब अठारह मिनट तक ये दोनों कामुक आलिंगन में लिपटे रहे. फिर किसी तरह सांस लेने के लिए एक – दूसरे के मुंह को छोड़ा तो अभय ने उसे फट से उठा कर बिस्तर पर दे मारा.

इसके बाद जंगलियों की तरह उसके कपड़े फाड़े और खुद भी नंगा हो गया. अब उसके शरीर से चिपट कर अभय उससे प्यार करने लगा और अपना प्यार लन्ड के रूप में उसे भी देने लगा.

इधर स्वाति छटपटाती रही और मचलती रही पर अभय उसके ऊपर ऐसे लिपटा हुआ था कि उसे हिलने का मौका ही नहीं दे रहा था. उसके मुंह पर अभय का मुंह, उसके स्तनों पर अभय की छाती, उसकी नाभि पे अभय का पेट, उसकी चूत में अभय का लन्ड, उसकी जाँघों पर अभय की टांगें और स्वाति के हाथों को अभय ने अपने हाथों में जकड़ रखा था.

करीब बीस मिनट तक वो अभय के नीचे पड़ी तड़पती रही. फिर अभय एक बार झड़ गया और उसको भी चरम सीमा का परमानंद दे गया. उसके बाद वो कुछ शांत हुई और अब पसीने और गर्मी और चिपचिपाहट का मज़ा लेने लगी.

अब वो एक बार फिर से अभय को चूमने लगी. कभी वो उसके होंठ चूमती तो कभी उसका चेहरा चाटती. अब अभय ने भी फिर नए सिरे से उसे पेलना शुरू कर दिया.

करीब – करीब आधे घंटे तक वो फिर चिपकते रहे. अभय अब दूसरी बार झड़ गया. दस मिनट तक लेटने के बाद वह उसके ऊपर से हट गया और बगल में आकर सो गया. फिर स्वाति भी अभय की बांह में सर घुसाते हुए सो गयी.

फिर दोनों तड़के ही उठ गए और कपड़े पहन कर नीचे चले गए. अभय तो वहां से निकल भागा, जबकि वो रसोई में खाना बनाने चली गयी. स्वाति सुबह की लाली को देख कर अब भी अभय को याद कर रही थी. आज पहली बार उसे किसी ने चोदा था, वो भी जमकर.

अभय के शरीर की गर्मी, उसके होंटों की लिपलीपाहट, उसके पसीने की चिकनाहट, उसकी गन्दी बदबू वाली सांस जो उसे बड़ी कामुक लगी थी. उसकी कांख की गन्दी बदबू और लन्ड की जान. उस रात स्वाति को तो जैसे जन्नत मिल गई थी.

उधर अदिति और शीथल समलैंगिक सम्बन्ध में गुथते जा रहे थे. गए तो थे कपड़े लेने, पर जब कपड़े खरीदते समय उन्होंने एक – दूसरे के नंगे शरीर को देख लिया, तो वो कामुकता के जाल में फँस गयीं. इसके बाद दोनों नें एक होटल बुक कराया और खूब चूमा – चाटी की. उन्होंने एक – दूसरे की छातियों पर क्रूर प्यार जताया और एक – दूसरे को जमकर चोदा. अब आप लोग सोच रहे होंगे कि दोनों लड़कियों ने एक – दूसरे को कैसे चोदा? अरे भाई, उँगलियाँ और ढिल्लो नाम की चीज़ें भी होती हैं इस दुनिया में.

इधर एंड्रू ने ढिल्लो की मदद से जिज्ञा से गांड मरवाई और साथ में अपने लन्ड से जिज्ञा की गांड भी मारी. जिज्ञा चुदते समय मना करती रह गयी, क्योंकि उसे अभय की रखैल बनना था और अगर अभय ने देख लिया कि उसके माल को किसी और ने चखा है तो उसका गुस्सा आसमान के पार निकल जाएगा पर एंड्रू उसे दबोच कर चोदता रहा.

चुदाई के बाद एंड्रू ने उससे कहा कि तू चिंता मत कर, मैं अभय का लन्ड चूस लूंगा और