मेहमान बन के आई, देसी चूत दे के गई – Antarvasna Hindi Sex Stories

मेहमान बन के आई, देसी चूत दे के गई

हादसों के शहर दिल्ली में हम लोगो को रहते हुए तब ढाई साल हो चुके थे. दुबई में ही पला बढ़ा था इसलिए मुझे दिल्ली में सेट होने में टाइम लग गया. यहाँ का कल्चर कुछ अजीब लगता था पहले पहले जहाँ पे लड़कियां भी चूत और लंड वाली गाली देती हैं. मैं इजनेरी के लास्ट इयर में था तब यह हादसा हुआ; यानी यह पिछले साल की बात हैं. मेरे डेड के भुवनेश्वर में एक दोस्त हैं, डेड उन्हें गोविंद कहते हैं और हम लोग उन्हें गोविंद चाचा. यह गोविंद चाचा अपनी बीवी और 19 साल की बेटी अंजलि को ले के हमारे घर पे आये. वो लोगो की यूके एम्ब्सी में कुछ काम था इसलिए वो लोग यहाँ हमारे घर पे ही ठहरे थे. वैसे भी हमारा घर काफी बड़ा हैं; डेड डायमंड के बिजनेश में ढेरों बटोरते हैं. अंजलि मेरे से एक साल छोटी थी लेकिन उसकी भारी बोड़ी और चौड़ी छातियाँ होने की वजह से वो मुझ से 2-Three साल बड़ी दिखती थी. गोविंद चाचा का काम तो पहले दिन ही ख़त्म हो गया लेकिन मेरे मम डेड ने उन लोगों को बहुत जिद कर के 2-Three दिन और रोक लिया. अंजलि अब तक मेरे से इतनी घुली नहीं थी.

शाम की सिगरेट

शाम को मोम ने मस्त खाना बनाया. 7:30 बजे तो ठंडी की वजह से अँधेरा हो गया था. मैंने अपने बेड के निचे से सिगरेट निकाली और मैं रोज के कार्यक्रम के मुताबिक़ छत पे फूंकने चला गया. पानी की टंकी के पीछे खड़े हुए सिगरेट पीते हुए मुझे कुछ आवाज आई. मैं कान खड़े किये और महसूस किया की आवाज टंकी की दूसरी साइड से आ रहे हैं. मैं धीरे धीरे टंकी की साइड में गया और आवाज अब और भी क्लियर आ रही थी. वो अंजलि थी जो अपने मोबाइल से बातें कर रही थी. और जब मेरे कान में क्लियर आवाज आई तो मैं चौंक गया. वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ फोन सेक्स कर रही थी.
अंजलि, “आह चाटो मेरी चूत को और जोर से आह. डालो अपनी जबान अंदर तक आह और जोर से. मादरचोद बहुत मजा आ रहा हैं मुझे. आह और जोर से दबा मेरे चुंचे और चाट जा मेरी चूत को.”
यह सुन के मेरे लंड में सलवटें पड़ने लगी. अंजलि इतनी ज्यादा खुबसुरत तो नहीं थी लेकिन उसका बदन जरुर सेक्सी था. बड़े बड़े चुंचे, और भारी गांड…मतलब उसके पास वो दो हथियार थे जिस से मर्द और लड़के खुश होते हैं. मेरा लौड़ा उसकी बातें सुन के टाईट हो रहा था. मैंने दीवाल से सर निकाल के देखा की अंजलि ने अपना हाथ अपनी चूत के ऊपर रखा हुआ था. वो अपनी जांघो के बिच में ऊँगली से मसाज कर रही थी और सेक्सी बातें कर रही थी. वो आगे बोली, “आज चोद दे मुझे. मुझे तेरे लंड का पानी दे दे. चोद मादरचोद मुझे आहा आह आह…!”
मुझे फोन से सामने वाले व्यक्ति की आवाज भी आ रही थी; लेकिन वो जरा भी साफ़ नहीं थी; जैसे की मख्खियाँ गुडगुड कर रही हो बस. लेकिन अंजलि जो बोल रही थी वही मेरे लौड़े को टाईट करने के लिए काफी था. मैं दो कदम और आगे बढ़ा और अंजलि से केवल दो कदम ही दूर था. लेकिन अँधेरे की वजह से शायद मुझे देख नहीं पा रही थी. मैंने अपनी साँसों को स्लो कर दिया ताकि उसके आवाज से अंजलि को भनक ना लग जाएँ. अंजलि अब भी बड़ी बड़ी गालियाँ अपने बॉयफ्रेंड को निकाल रही थी और उसका हाथ अभी भी वही चूत के ऊपर थी था.
और तभी मेरा पांव निचे पड़ी हुई पोलीथिन की बेग के ऊपर आ गया. साला पकड़ा गया मैं तो, या यूँ कहें की अंजलि पकड़ी गई फोन सेक्स करते हुए. मैंने उसकी और देखा और वो मेरी तरफ देखने लगी. उसने फोन में कहा, “आंटी मैं आप को बाद में कोल करती हूँ. कोई आया हैं. ठीक हैं मैं मोम को बोलूंगी आप को फोन करने के लिए.”
इतना कह के उसने फोन कट किया और बोली, “अरे अजित तुम कब आयें. मेरी मासी का फोन था. भुवनेशवर में ही रहती हैं.”
मैं समझ गया की यह लड़की को शायद ऐसा लगा की मैं तभी आया. मैं अपने होंठो में हंसा और उसे कहा, “तो आप की आंटी लेस्बियन हैं क्या? या फिर मर्द बनने का रोल-प्ले कर रही थी. या फिर उसे चूत का सौख हैं”

चूत देनी पड़ेंगी मुझे

अंजलि के चहरे का रंग उड़ गया; जैसे उसके मुहं में किसी काले ने अपने सांड जैसे लंड को पेल दिया हो. वो कुछ बोलती उसके पहले ही मैं बोला, “मैं Three-Four मिनिट से तुम्हें सुन रहा था और कहने की जरुरत नहीं हैं की तुम क्या कर रही थी. मैंने सुना हैं वो मादरचोद बहनचोद वाली बातों को.”
अंजलि सन्न रह गई. वो 1 मिनिट के लिए तो कुछ बोल ही नहीं पाई, फिर वो गला साफ़ कर के बोली, “वो मेरा बॉयफ्रेंड था अजित. तुम प्लीज़ मेरे डेड को कुछ मत बताना वरना भुवनेश्वर जाने से पहले ही वो मुझे मार देंगे.”
मैंने उसकी आँखों में आँखे डाली और कहा, “चलो ना कहूँ तो मुझे क्या फायदा हैं इसमें.?”
अंजलि समझ गई की मैं क्या चाहता हूँ लेकिन वो नौटंकी करते हुए बोली, “तुम कहो क्या चाहते हो तुम. चलो मैं तुम्हे आइसक्रीम खिलाती हूँ.”
मैंने अपनी आँखे तंग करते हुए कहा, “मादरचोद मुझे बच्चा समझती हैं क्या जो आईसक्रीम केंडी की लालच दे रही हैं. मुझे तुम्हारी चूत से कम कुछ नहीं चाहियें. बोलो मंजूर हैं तो वरना मैं अभी निचे जा के गोविंद अंकल को तुम्हारी फोन सेक्स गाथा सुनाता हूँ.”
अंजलि कुछ बोली नहीं, लेकिन मैं उसके और भी करीब गया और उसे उठा के कमर की तरफ घुमाया. गांड और छाती को मैंने किसी जोहरी की तरह से देखा और फिर उसकी चुंची के उपर अपना हाथ रखा. वो किसी गुलाम औरत की तरह मुझे जो कर रहा था वो चुपचाप करने दे रही थी. मैंने उसकी टी-शर्ट को कमर के पास के पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. अंजलि मेरा सही सपोर्ट कर रही थी. उसने टी-शर्ट आराम से उतर सकें इसलिए अपने हाथ ऊपर उठा लिए…..! अंजलि भी समझ गई थी की उसकी चूत का आज खंडन होना हैं मेरे लौड़े से. मैं भी इस लड़की की चूत लेने के लिए बेताब था; क्यूंकि यह मेरी दिल्ली की पहली चूत को थी…! क्रमश:

मेहमान बन के आई, देसी चूत दे के गई

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