भाई के ऑफिस में काम करने वाली लड़की की बहन

antarvasna

मेरा नाम गौरव है मैं उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है। मेरे पिताजी खेती करते हैं और वह काफी समय से खेती बाड़ी का काम कर रहे हैं,  फिर भी उन्होंने हम दोनों भाइयों को बहुत ही अच्छे से पढ़ाया है और मेरे भाई का दाखिला भी उन्होंने एक अच्छे कॉलेज में करवाया था जिससे कि वह वहां से पढ़ने के बाद एक अच्छी जॉब पर लग गया। वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और बेंगलुरु में रहता है। उसे बेंगलुरु में रहते हुए काफी समय हो चुका है और अब मेरी भी पढ़ाई पूरी हो चुकी है तो मैं भी यही सोच रहा हूं कि उसके पास चले जाऊँ, ताकि मैं बेंगलुरु में रहकर कोई काम कर सकूं। मैंने इस बारे में अपने भाई से बात की तो वह कहने लगा कि तुम मेरे पास आ जाओ  और यहीं पर नौकरी कर लेना। मैंने जब अपने पिताजी को इस बारे में बताया तो वह कहने लगे ठीक है तुम अपने भाई संजय के पास चले जाओ और वहीं पर नौकरी कर लेना क्योंकि बेंगलुरु में बहुत अच्छा स्कोप है और मैं एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूं इसलिए यहां पर मैं ज्यादा कुछ कर नहीं सकता इसी वजह से मैं बेंगलुरु चले गया।

जब मैं बेंगलुरु अपने भाई के पास गया तो वह उस समय अपने ऑफिस में ही था। उसने मुझे कहा कि मैं तुम्हें एड्रेस भेज देता हूं, तुम सीधा ही घर चले जाना। मैंने स्टेशन से एक कार बुक कर ली और सीधा घर पर पहुंच गया। उसने घर की चाबी अपने किसी पड़ोसी को दे रखी थी। उसके बाद मैं घर पर ही बैठा रहा। जब मैं अपने भाई के घर पर था तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था क्योंकि बहुत मेहनत करने के बाद ही उसने इतना कुछ हासिल किया है। वह एक बहुत ही बड़ी कंपनी में नौकरी कर रहा है, यह घर भी उसे ऑफिस की तरफ से मिला है। उस दिन मैं घर पर अकेले ही था  और अकेले अकेले बोर हो रहा था, मैं अब टीवी देखने लगा क्योंकि मेरा टाइम पास नहीं हो रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने अपने माता पिता को फोन कर दिया और उन्हें सूचित कर दिया कि मैं बेंगलुरु पहुंच चुका हूं आप लोग बिल्कुल भी चिंता ना करें। मेरे पिताजी बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं और वह हमेशा ही हम लोगों को बहुत अच्छे से सपोर्ट करते हैं, हालांकि वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है उसके बावजूद भी उन्होंने हम दोनों भाइयों को एक अच्छी शिक्षा दी और उन्होंने अपना पूरा जीवन मेहनत में ही गुजार दिया इसीलिए हम लोग चाहते हैं कि वह अब आराम करें और ज्यादा काम ना करें।

मेरे भाई संजय ने कई बार उन्हें कहा कि आप मेरे पास बेंगलुरु आ जाए लेकिन वह बिल्कुल भी आने को तैयार नहीं है, वह कहते हैं कि गांव में हमारी खेती बाड़ी का काम है यदि हम बेंगलुरु आ जाएंगे तो वह सब कौन संभालेगा इसी वजह से वह लोग नहीं आ पाते। मैं टीवी देखते देखते पता नहीं कब सो गया, मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। जब मैं उठा तो काफी समय हो चुका था और मुझे भूख बहुत तेज लग रही थी इसलिए मैंने सोचा कि मैं खुद ही कुछ बना लेता हूं। मैं जब किचन में गया तो वहां पर सारा सामान था इसलिए मैंने खुद ही खाना बना लिया और खाना खाने के बाद मैं कुछ देर आराम करने लगा। जब मैं लेटा हुआ था तो मैं ना जाने कब सो गया। जब मैं उठा तो उस वक्त शाम हो चुकी थी। मैंने संजय को फोन किया और कहा कि तुम कब तक वापस लौट आओगे, वह कहने लगा कि मैं कुछ देर बाद ऑफिस से निकल रहा हूं, मुझे आने में एक घंटा लग जाएगा। मैंने उसे कहा ठीक है तुम आ जाओ मैं तब तक तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए बना देता हूं। मैं खाना बना रहा था और उस वक्त संजय भी घर लौट आया। जब वह लौटा तो मुझसे मिलकर वह बहुत खुश हुआ। वह कहने लगा कि इतने समय बाद तुमसे मुलाकात हो रही है, मुझे बहुत खुशी हो रही है और वह मिलते ही मुझसे गले मिल गया, मैं भी उसे गले मिल गया। हम दोनों भाइयों के बीच में बहुत अच्छा रिलेशन है लेकिन हम दोनों कभी साथ में नहीं रह पाए। संजय पहले से ही बाहर पढ़ाई करता रहा इसलिए हम दोनों साथ में ज्यादा नहीं रहे लेकिन हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं। मैंने जब संजय से पूछा तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, वह कहने लगा कि मेरा काम तो बहुत अच्छा चल रहा है।

उसने मुझे कहा कि तुमने बहुत अच्छा किया कि तुम बेंगलुरु आ गए, यहां पर तुम किसी अच्छी जगह पर काम कर लोगे तो तुम्हें बहुत फायदा मिलेगा और आगे चलकर तुम्हारे भविष्य के लिए अच्छा भी रहेगा। मैंने उसे कहा यही सोचते हुए मैं बेंगलुरु आया हूं। संजय ने मुझसे कहा कि तुम सुबह से बोर हो गए होंगे, मैंने उसे कहा नहीं मैं बिल्कुल भी बोर नही हुआ, मुझे समय का पता ही नहीं चला और मैं काफी देर तक सोया रहा। हम दोनों भाई खाना खाने के बाद साथ में बैठकर बाते कर रहे थे। वह मुझसे माता पिता के बारे में भी पूछ रहा था, मैंने उसे कहा कि वह लोग अच्छे है। उस दिन तो हम लोग सो गए लेकिन अगले दिन संजय की छुट्टी थी, वह मुझे कहने लगा कि आज मैं तुम्हारा रिज्यूम अपने दोस्तों को दे देता हूं। संजय ने कई जगह बात की हुई थी और उस दिन वह मुझे अपने दोस्तो से मिलाने के लिए ले गया। वह कहने लगा कि मैं तुम्हें आज अपने दोस्तों से मिलाता हूं। उस दिन संजय ने मुझे अपने दोस्तों से मिलाया और उसके ऑफिस के जितने भी दोस्त है वह सब बहुत ही अच्छे थे। मुझे उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई। उसके बाद उसने अपनी एक महिला मित्र से मुझे मिलाया, जिसका नाम संजना है और उसके साथ उसकी बहन भी आई हुई थी, उसकी बहन का नाम कविता है।

हम लोग साथ में ही बैठे हुए थे वह काफी बातें कर रहे थे। मुझे कविता बहुत अच्छी लगी, मैं भी उससे बात कर रहा था। मैंने जब कविता से पूछा कि तुम क्या करती हो तो वह कहने लगी कि मेरा कॉलेज अभी कुछ समय पहले ही खत्म हुआ है और मैं भी जॉब के लिए ट्राई कर रही हूं। मेरे भाई ने कविता से कहा कि तुम भी मुझे अपना रिज्यूम दे देना। उस दिन मेरे भाई ने कविता का रिज्यूम भी ले लिया और उसके बाद हम दोनों घर चले गए। जब हम लोग घर गए तो  मैंने अपने भाई से कहा कि मुझे कविता बहुत अच्छी लगी, वह कहने लगा कि संजना का भी व्यवहार बहुत अच्छा है और वह बहुत अच्छी लड़की है। अब कविता और मैं दोनों साथ में इंटरव्यू देने के लिए गए क्योंकि मेरे भाई ने हम दोनों का रिज्यूम एक साथ ही सबको भेज दिया था। मैं कविता के साथ ही जाता था क्योंकि मुझे ज्यादा रास्तों की जानकारी नहीं थी इसलिए वह मेरी बहुत मदद करती थी। मुझे कविता के साथ जाना अच्छा लगता था और जब हम दोनों साथ में होते तो मुझे उससे बात करना भी अच्छा लगता था। हम दोनों का एक ही कंपनी में सलेक्शन हो गया और हम दोनों अब एक साथ ही जॉब करने लगे। कविता और मेरे बीच में दोस्ती होने लगी थी। मैंने इस बारे में अपने भाई से भी बात की थी। अब कविता और मैं इतने अच्छे दोस्त बन चुके थे कि हम दोनों साथ में घूमने के लिए जाते थे और ज्यादा से ज्यादा साथ मे समय बिताते थे। जिस दिन हमारी छुट्टी होती है, उस दिन कविता मुझसे मिलने के लिए आ जाती थी और इस बात से मेरे भाई को भी कोई आपत्ति नहीं थी और ना ही कविता की बहन संजना को कोई भी आपत्ति थी इसलिए हम दोनों मिल लेते थे। कभी-कभार संजना भी हमारे घर पर आ जाती थी। एक दिन कविता घर पर आ गई और उस दिन मेरा भाई कहीं बाहर गया हुआ था। जब कविता घर पर आई तो मुझे उसे देखकर बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था क्योंकि उस दिन मेरा मन बहुत ज्यादा उस से सेक्स करने का था। जब कविता मेरे पास  आकर बैठी तो मैंने उसके हाथों को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगा। धीरे धीरे उसके शरीर की गर्मी बाहर आने लगी और मैंने उसे लेटाते हुए किस करना शुरू कर दिया। वह मेरे नीचे लेटी हुई थी और मैं उसे बहुत ही अच्छे से किस कर रहा था उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा।

मैंने कविता को नंगा कर दिया मैंने जैसे ही उसकी योनि को चाटा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने अपने लंड को जैसी ही कविता की मुलायम योनि के अंदर डाला तो उसकी योनि से खून निकलने लगा वह बड़ी तेजी से मादक आवाज निकाल रही थी। मैंने जब उसके स्तनों को चूसा तो उसे बहुत अच्छा लगा। मैं उसके निप्पल को चूस रहा था और उसे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने भी उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिया। जब मैं उसे धक्के मारता तो उसका पूरा शरीर गर्म होने लगता और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगती वह अपने पैरों को चौड़ा कर रही थी और मुझे अपनी तरफ आकर्षित करती जाती। मैंने भी उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरु कर दिया और काफी देर तक मैंने उसे चोदा। उसके बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में बनाते हुए जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपना लंड डाला तो मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। उसकी योनि से खून निकल रहा था और मुझे भी उसे धक्के देने में बड़ा मजा आता। उसकी गांड मुझसे टकराती तो मेरे अंदर से अलग ही ऊजा बाहर आती और मैं उसे बड़ी तेज चोदता। मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के मारे की वह मुझे कहने लगी मेरी योनि में दर्द हो रहा है तुम जल्दी से अपना माल मेरी योनि में गिरा दो। उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी और मैंने जैसे ही उसे तेज झटका मारा तो मेरा वीर्य उसके पेट के अंदर तक चला गया। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारा वीर्य बड़ा गरम है। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसे बहुत अच्छा महसूस हुआ और वह बहुत खुश हो गई।