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पल दो पल की खुशी

मेरा नाम आर्यन है, मेरी उम्र 23 वर्ष है, दिल्ली का रहने वाला हूँ, मैं इंजीनियरिंग कर रहा हूँ।

मेरा लंड 6.5 इंच का है और मेरे लंड पर एक तिल है, मैंने बहुत लोगों से सुना था कि जिसके लंड पर तिल होता है उसे बहुत सारी चूतों का सुख प्राप्त होता है पर मुझे इस बात पर भरोसा नहीं होता था क्यूंकि मुझे कभी ऐसा सुख प्राप्त नहीं हुआ था।

मैं पढ़ने में बहुत अच्छा था, सभी मुझे प्यार करते थे और मैंने कभी इन बातों पर ध्यान भी नहीं दिया था।

पर उम्र का तक़ाज़ा अच्छे अच्छे को बदल देता है, मैं अपने लंड को और लड़कियों के आकर्षण को महसूस करने लगा था।

ये सब मेरी ज़िंदगी में ऐसे होगा मैंने कभी सोचा नहीं था।

बात उन दिनों की है जब मैंने इंजिनियरिंग में प्रवेश लिया।

मेरे फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में एक शादीशुदा औरत रहती थी, उसका नाम कल्पना था।

रंग दूध सा गोरा, उम्र होगी 25-26 साल और फिगर तो 36-26-32 रहा होगा, चलती थी तो ऐसा लगता था कि किसी ने मेनका को इंद्र के स्वर्ग से धरती पे भेज दिया हो…

उसे देखते ही मेरे मन को पता नहीं क्या हो जाता था, मचलने लगता था और लंड सलामी देने लगता था।

खैर कुछ दिन ऐसे ही बीत गये उसे दूर से देखते देखते…

मैंने जब भी उसे देखा वो हमेशा मुझे हंसती हुई, खिलखिलाती हुई नज़र आती पर मैंने उसके पति को आज तक नहीं देखा था।

एक दिन मेरे फ्लैट की घंटी बजी, मैंने सोचा कोई होगा, जब देखा तो मेरे होश उड़ गये…

दरवाज़े पर कल्पना खड़ी थी हाथ में प्लेट लेकर !

उसने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी और स्लीवलेस ब्लाउज़… काम की देवी लग रही थी वो!

मैं तो उसे देखता ही रह गया।

अचानक वो बोली- मेरी बहन की शादी थी, उसी की मिठाई है।

मैंने प्लेट ले ली और वो चली गई।

मैं उसके बारे में सोचता रहा और उसके नाम की मुठ मारी।

उस दिन मुझे पता चला कि जिस तरह इंसान खाने के बिना नहीं रह सकता उसी तरह सेक्स भी उतना ही ज़रूरी है।

एक दिन मुझे उसके फ्लैट से रोने की आवाज़ें सुनाई दी।

मैंने सोचा कि पता नहीं क्या हुआ होगा, मैं भागकर पहुँचा और घंटी बजाई।

काफ़ी देर बाद उसने दरवाज़ा खोला…

मैं- मुझे कुछ रोने की आवाज़ें सुनाई दी आपके यहाँ से, क्या हुआ? कोई प्राब्लम?

वो- नहीं नहीं… ऐसा कुछ नहीं है.. आपको शायद कुछ ग़लतफहमी हुई है।

मैं- ओह्ह.. हो सकता है पर मुझे लगा कि शायद वो आपकी आवाज़ थी..

वो- अरे नहीं नहीं.. मैं कभी नहीं रोती..

और कहते कहते वो रोने लगी, आँसू की धार उसके गालों तक आ गई..

मैं- आख़िर बताइए तो बात क्या है, शायद मैं आपकी कुछ मदद कर सकूँ?

वो- आप मेरी कोई मदद नहीं कर सकते, प्लीज़ आप चले जाइए।

मैंने सोचा कि चला जाता हूँ लेकिन फिर मेरी इंसानियत ने मुझे रोका और सोचा कि एक अकेली औरत को ऐसा रोते हुए छोड़ कर जाना ठीक नहीं है।

मैंने कहा- आप कुछ भी कह लें पर मैं तब तक नहीं जाने वाला जब तक आप बताएँगी नहीं।

वो मुझे अंदर लेकर गई और दरवाज़ा बंद करके बोली- आख़िर आप चाहते क्या हैं? एक औरत अकेली रो भी नहीं सकती?

मैं- रो सकती है अगर रोने से समस्या का कोई हल निकल आए तो… आख़िर आप बात तो बताइए कि क्या हुआ है?

वो- यह बात मुझसे और मेरे पति से रिलेटेड है..

मैं- अगर बताने लायक हो तो बता दीजिए, वैसे मैंने तो आपके पति को देखा भी नहीं..

वो- देखा तो एक साल से मैंने भी नहीं है.. वो अमेरिका में रहता है आज उसका फोन आया, कहता है उसे मुझसे तलाक़ चाहिए।

मैंने सोचा कि ऐसी काम की देवी जिसके पास हो और वो छोड़ना चाहता हो उससे बड़ा बेवकूफ़ धरती पर नहीं होगा।

मैंने पूछा- क्यूँ..?

वो बोली- शादी के दो महीने के बाद वो मुझे यहाँ अकेला छोड़ के चला गया, और सुनने में आया है कि वहाँ उसकी एक और बीवी है।

मैं चुप था क्यूँकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोलूँ..

अचानक वो और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूँ… तो मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और वो जी भर कर रोती रही।

कुछ देर बाद वो चुप हो गई पर मेरी बाहों में ही पड़ी रही।

फिर मुझे लगा कि उसकी साँसें जोर ज़ोर से चल रहीं हैं..

मैं उठने लगा तो वो बोली- मुझे छोड़ के मत जाओ, मुझे अपनी बाहों में ही रहने दो।

और उसने मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया और चुम्बन करने लगी..

मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करूँ फ़िर भी मुझे लगा कि इस हालत में यह सब ठीक नहीं है तो मैं उठ कर जाने लगा।

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