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स्त्रियों के यौनांगों से संबंधित कुछ विशेष बातें - स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी

स्त्री के यौनांग और उसकी कार्य प्रणाली स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी

स्त्रियों के यौनांगों से संबंधित कुछ विशेष बातें - स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी

•    स्त्री के भगांकुर के थोड़ा सा नीचे एक सूक्ष्म छिद्र होता है सेक्स क्रिया के समय में इस छिद्र का कोई संबंध नहीं होता है लेकिन मूत्रछिद्र के नीचे बड़े भगोष्ठ दिखाई पड़ते हैं। इन भगोष्ठों पर उंगली फेरने से स्त्री बहुत जल्दी कामोत्तेजित हो जाती है। जब स्त्री को ऐसा करके कामोत्तेजित कर ले उसके बाद ही लिंग को उनके योनि में प्रवेश करना चाहिए। वैसे मासिकधर्म के समय में भी इसी छिद्र से स्राव होता है।

•    स्त्री के यौनांग और उसकी कार्य प्रणाली स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी 2हम जानते हैं कि योनि एक पाइप की तरह खोखली नली के समान होती है और लघु भगोष्ठों से शुरू होकर गर्भाशय तक पहुंचने का यही एक रास्ता है और प्रजनन के समय नवजात शिशु भी इसी से होकर योनि द्वार से बाहर निकलते हैं।

•    योनिपथ की लम्बाई 8 से 10 सेंटीमीटर होती है। इसके फैलने की क्षमता इतनी अधिक होती है कि इसमें सेक्स क्रिया के समय में 8 से 10 या 15 से 18 सेंटीमीटर लम्बा और 8 से 10 सेंटीमीटर व्यास का लिंग आसानी से अंदर प्रवेश कर सकता है तथा इसमें प्रवेश कराके घर्षण भी आसानी से किया जा सकता है। इससे स्त्री को दर्द भी नहीं होता है बल्कि स्त्री को इससे आनन्द ही मिलता है।

•    योनिमार्ग की यह विशेषता है कि एक ओर तो बच्चे को जन्म देते समय इसी मार्ग से बच्चे को बाहर निकालती हैं तथा यह दूसरी ओर सेक्स क्रिया के समय में पतले से पतले लिंग को भी आसानी से जकड़ लेती है। यह विशेषता योनिमार्ग में नहीं होती तो स्त्री को इसमें लिंग प्रवेश कराने से इतना अधिक आनन्द नहीं मिलता है जितना सेक्स क्रिया के समय में मिलता है। - स्त्रियों के यौनांगों से संबंधित कुछ विशेष बातें - स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी

•    सभी स्त्रियों को एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब वह पहली बार संभोग क्रिया करती है तब पुरुष का लिंग उसके योनि में प्रवेश करता है तो योनिमार्ग में झिल्ली का एक पर्दा लगा होता है वह लिंग के दबाव से फट जाती है और उससे खून बहने लगता है तथा थोड़ा बहुत दर्द भी होता है। ऐसा होना स्वाभाविक है क्योंकि यह पर्दा बहुत नर्म होता है। ऐसा होने पर स्त्री को कभी भी मानसिक तनाव या भावनात्मक भय नहीं रखना चाहिए। कभी-कभी यह झिल्ली किसी अन्य कारण से अपने-आप भी फट जाती है। इसके फटने का सबसे बड़ा कारण यह है कि जब वह पहली बार संभोग क्रिया करती है तो उस समय लिंग के दबाव से यह झिल्ली फट जाती है, जिस कारण कुछ रक्त भी निकलता है। कभी-कभी यह झिल्ली खेल-कूद, दौड़-भाग तथा साइकिल चलाने आदि कारणों से भी फट सकती है। - स्त्रियों के यौनांगों से संबंधित कुछ विशेष बातें - स्त्री जननांग की विस्तृत जानकारी

•    कभी-कभी स्त्रियां यह सोचकर भयभीत रहती हैं कि विवाह के बाद जब मेरा पति मुझसे सेक्स क्रिया करेगा तो मेरी योनि फट जायेगी और मैं मर जाऊंगी। इस कारण से वे डरती रहती हैं। उनकी इस प्रकार की सोच से न केवल सेक्स क्रिया का आनन्द नष्ट होता है बल्कि पूरे जीवन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। कभी भी स्त्रियों को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि योनि की कुमारीछिद्र के फटने से थोड़ा बहुत ही खून निकलता है तथा मामूली सा दर्द होता है।

•    कभी भी पुरुषों को अपने मन में यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि पहली संभोग क्रिया के समय में पत्नी के योनि से खून क्यों नहीं निकला, कही मेरी पत्नी पहले से ही किसी और से संभोग क्रिया तो नहीं करवा चुकी है। बल्कि उसे अपने पत्नी से प्यार से पूछना चाहिए कि इस झिल्ली के फटने का क्या कारण हुआ था? वैसे हम आपको बताना चाहेंगे कि अपनी पत्नी से इसके बारे में न ही पूछे तो अच्छा होगा क्योंकि हो सकता है कि आपकी पत्नी की यह कुमारीछिद्र साईकिल चलाने, व्यायाम करने, उछल-कूद करने या भागदौड़ के कारण से फटा हो।